नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार और तेज़ होने जा रही है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार बुनियादी ढांचे, रोजगार, निवेश और सार्वजनिक सेवाओं के मोर्चे पर बड़े फैसलों के साथ आगे बढ़ रही है। 2025 के अंत तक कई अहम परियोजनाएं निर्णायक चरण में पहुंच चुकी हैं और 2026 में उनके ज़मीन पर दिखने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह साल प्रदेश के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और नौकरियों के लिहाज़ से “टर्निंग पॉइंट” साबित होगा।
सबसे ज्यादा चर्चा में गंगा एक्सप्रेसवे है। पश्चिमी यूपी से प्रयागराज को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे 2026 में पूरी तरह ऑपरेशनल होने की दिशा में है। इसके चालू होते ही मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, बदायूं, शाहजहांपुर और प्रयागराज जैसे जिलों की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा। सरकार का फोकस सिर्फ तेज़ सड़क पर नहीं, बल्कि इसके आसपास औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और नए शहर विकसित करने पर भी है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
एविएशन सेक्टर में यूपी को वैश्विक पहचान दिलाने वाली परियोजना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी 2026 में आम यात्रियों के लिए बड़े स्तर पर सेवाएं शुरू करने की तैयारी में है। जेवर एयरपोर्ट को एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में गिना जा रहा है। इसके पूरी क्षमता में आने से दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड को सीधा फायदा होगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे पर्यटन, कार्गो, मल्टीनेशनल निवेश और रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति मिलेगी।
रोजगार के मोर्चे पर योगी सरकार का सबसे बड़ा दावा 2026 में डेढ़ लाख से अधिक सरकारी नौकरियों का है। पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और तकनीकी विभागों में भर्ती प्रक्रिया को तेज़ किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि भर्ती में पारदर्शिता और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि युवाओं का भरोसा सिस्टम पर बना रहे। यह कदम ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ शहरी विकास भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। 2026 में कई शहरों में मेट्रो और रैपिड ट्रांजिट परियोजनाओं का विस्तार देखने को मिल सकता है। लखनऊ, कानपुर और मेरठ जैसे शहरों में सार्वजनिक परिवहन को और आधुनिक बनाने की दिशा में काम तेज़ किया गया है। इससे ट्रैफिक दबाव कम होने और शहरी जीवन की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।
ग्रामीण यूपी के लिए भी 2026 खास रहने वाला है। सरकार सिंचाई परियोजनाओं, ग्रामीण सड़कों और पेयजल योजनाओं पर बड़ा निवेश करने की तैयारी में है। जल जीवन मिशन और नहर परियोजनाओं के विस्तार से किसानों को सीधा लाभ मिलने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों के अपग्रेडेशन पर भी जोर दिया जा रहा है।
औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए 2026 में नई औद्योगिक नीतियों और सेक्टर-विशेष इंसेंटिव्स की घोषणा की जा सकती है। डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स पर सरकार का खास फोकस है। अधिकारियों के मुताबिक, 2025 में हुए निवेश समझौतों का वास्तविक कार्यान्वयन 2026 में ज़मीन पर दिखेगा।
डिजिटल गवर्नेंस और ई-सेवाओं के विस्तार को भी सरकार 2026 की बड़ी सौगातों में गिन रही है। भूमि रिकॉर्ड, राजस्व सेवाएं, प्रमाण पत्र और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं को और आसान और तेज़ बनाने की योजना है। इससे आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी।
सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी सरकार नए साल में तकनीक आधारित निगरानी सिस्टम और पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की तैयारी में है। स्मार्ट पुलिसिंग, सीसीटीवी नेटवर्क और आधुनिक कंट्रोल रूम्स के जरिए शहरी और औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने का दावा किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, 2026 को योगी सरकार एक ऐसे साल के रूप में पेश कर रही है, जिसमें बड़े प्रोजेक्ट्स सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में उनका असर दिखेगा। गंगा एक्सप्रेसवे और नोएडा एयरपोर्ट जैसी परियोजनाएं जहां यूपी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देंगी, वहीं सरकारी नौकरियां, शहरी सुविधाएं और ग्रामीण विकास योजनाएं सीधे जनता से जुड़ती नजर आएंगी। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि इन वादों और योजनाओं का क्रियान्वयन 2026 में किस हद तक जमीन पर उतरता है।
