मकर संक्रांति 2026 के अवसर पर आज माघ मेले का दूसरा पवित्र स्नान श्रद्धा और आस्था के अभूतपूर्व संगम में बदल गया। प्रयागराज के संगम तट से लेकर पश्चिम बंगाल के गंगासागर तक, लाखों श्रद्धालु सुबह तड़के ही पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाने पहुंच गए। प्रशासन के अनुसार, इस बार भीड़ पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को छूती नजर आ रही है, जिसे देखते हुए सुरक्षा, ट्रैफिक और स्वास्थ्य सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
संगम पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की कतारें
माघ मेले का दूसरा स्नान मकर संक्रांति के साथ जुड़ा होने के कारण विशेष महत्व रखता है। आज भोर से पहले ही श्रद्धालु त्रिवेणी संगम की ओर बढ़ते दिखे। कड़ाके की ठंड और कोहरे के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन संगम में स्नान करने से जीवन के पाप कटते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों तक को इस कठिन मौसम में भी संगम तट तक खींच लाया।
साधु-संतों और अखाड़ों का स्नान आकर्षण का केंद्र
दूसरे स्नान पर्व पर विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों की उपस्थिति ने मेले की रौनक और बढ़ा दी। नागा साधुओं के पारंपरिक जुलूस, शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच जब वे संगम में उतरे, तो श्रद्धालुओं ने दूर से ही दर्शन किए। अखाड़ों के स्नान का समय प्रशासन द्वारा पूर्व निर्धारित किया गया था, ताकि भीड़ प्रबंधन में कोई अव्यवस्था न हो। अधिकारियों के मुताबिक, स्नान पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
प्रशासनिक इंतजाम: सुरक्षा से लेकर स्वच्छता तक
इस बार माघ मेले के लिए प्रशासन ने तकनीक का भी सहारा लिया है। ड्रोन कैमरों से भीड़ की निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रयागराज मेला क्षेत्र में मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की टीमें चौबीसों घंटे तैनात हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ठंड और भीड़ से जुड़ी आपात स्थितियों को देखते हुए विशेष व्यवस्था की है। वहीं, स्वच्छता को लेकर नगर निगम की टीमें लगातार घाटों और मार्गों की सफाई में जुटी हुई हैं।
गंगासागर में भी श्रद्धालुओं का सैलाब
मकर संक्रांति पर केवल संगम ही नहीं, बल्कि गंगासागर में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। गंगा और समुद्र के संगम पर स्नान को लेकर देशभर से श्रद्धालु पहुंचे। पश्चिम बंगाल प्रशासन के मुताबिक, लाखों की संख्या में लोग गंगासागर मेले में शामिल हुए। यहां भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और समुद्र में स्नान के दौरान लाइफ गार्ड्स को तैनात किया गया, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
ट्रैफिक और परिवहन: चुनौती लेकिन नियंत्रण में
श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण प्रयागराज और गंगासागर दोनों जगह ट्रैफिक एक बड़ी चुनौती रहा। रेलवे ने विशेष मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया, जबकि रोडवेज ने अतिरिक्त बसें लगाईं। प्रशासन ने अपील की कि श्रद्धालु निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें और घाटों पर अनावश्यक भीड़ न लगाएं। अब तक किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है, जिसे प्रशासन अपनी सतर्कता का परिणाम बता रहा है।
श्रद्धालुओं की जुबानी आस्था की कहानी
संगम पर स्नान करने पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे हर साल मकर संक्रांति पर यहां आते हैं। एक बुजुर्ग श्रद्धालु ने कहा, “ठंड बहुत है, लेकिन मन को जो शांति मिलती है, वह किसी और जगह नहीं।” वहीं, गंगासागर पहुंचे एक परिवार ने बताया कि पीढ़ियों से उनके यहां इस दिन स्नान की परंपरा चली आ रही है। ऐसे अनुभव बताते हैं कि मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था और परंपरा का जीवंत रूप है।
माघ मेले का आगे का कार्यक्रम
दूसरे स्नान के बाद भी माघ मेला कई सप्ताह तक चलेगा। आने वाले दिनों में मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी जैसे प्रमुख स्नान पर्व हैं, जिन पर और अधिक भीड़ की संभावना है। प्रशासन ने पहले से ही इन तिथियों को लेकर अतिरिक्त योजना तैयार कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
आस्था, परंपरा और आधुनिक प्रबंधन का संगम
मकर संक्रांति पर माघ मेले का यह दूसरा स्नान एक बार फिर दिखाता है कि भारत में परंपरा और आधुनिक प्रबंधन कैसे साथ-साथ चलते हैं। एक ओर हजारों साल पुरानी आस्था, दूसरी ओर आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक तैयारी—दोनों मिलकर इस विशाल आयोजन को सफल बना रहे हैं। संगम और गंगासागर में आज का दृश्य इसी संतुलन की तस्वीर पेश करता है, जहां श्रद्धा भी है और व्यवस्था भी।
