Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर ब्रह्मोस, आकाश ने दुनिया को दिखाई ताकत… रिपब्लिक डे परेड में सेना के शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन

भारत आज पूरे देश में गर्व और उत्साह के साथ अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राजधानी दिल्ली का कर्तव्य पथ इस ऐतिहासिक अवसर पर देश की एकता, शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों का सजीव प्रतीक बन गया। सुबह से ही देशवासियों की नजरें कर्तव्य पथ पर टिकी रहीं, जहां भव्य परेड के माध्यम से भारत की सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भरता का संदेश पूरी दुनिया को दिया गया।

गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी देने के साथ हुई। इसके बाद कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का शानदार आगाज हुआ। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्य अतिथि और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में डूबा हुआ नजर आया।

परेड में भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने शौर्य और पराक्रम का शानदार प्रदर्शन किया। कर्तव्य पथ पर जब ब्रह्मोस और आकाश जैसी आधुनिक मिसाइल प्रणालियां दिखाई दीं, तो भारत की रक्षा क्षमता की ताकत साफ झलकने लगी। इन मिसाइलों ने यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सक्षम है और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वदेशी रक्षा उपकरणों की मौजूदगी ने ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की सोच को और मजबूत किया।

77वें गणतंत्र दिवस की परेड में भारतीय नौसेना की झांकी भी खास आकर्षण का केंद्र रही। नौसेना की इस झांकी में समुद्री सुरक्षा और भारत की बढ़ती समुद्री ताकत को दर्शाया गया। झांकी का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए और लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के ने किया। इस झांकी के जरिए यह संदेश दिया गया कि भारत न केवल अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

थल सेना के मार्च-पास्ट ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया। कर्तव्य पथ पर सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की 4 भैरों बटालियन ने अनुशासन और जोश के साथ मार्च किया। इस टुकड़ी का नेतृत्व मेजर अंजुम गोरका कर रहे थे। सैनिकों के कदमों की ताल और उनका आत्मविश्वास भारतीय सेना की मजबूती और समर्पण को साफ दिखा रहा था।

इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की झलक भी देखने को मिली। कर्तव्य पथ पर यूरोपीय संघ का सैन्य दल भी परेड में शामिल हुआ। यूरोपीय संघ के इस दल का नेतृत्व कर्नल फ्रेडरिक साइमन स्प्रुइट कर रहे थे। उनकी मौजूदगी भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रक्षा और रणनीतिक संबंधों का संकेत मानी जा रही है।

भारतीय वायु सेना का हेलीकॉप्टर फ्लाई-पास्ट परेड का एक और यादगार हिस्सा रहा। आसमान में उड़ते हेलीकॉप्टरों के जरिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा कर्तव्य पथ के ऊपर लहराता नजर आया। यह दृश्य भारतीय वायु सेना की ताकत और देश की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

गणतंत्र दिवस के मद्देनज़र राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरी दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। करीब 10,000 से ज्यादा जवानों को सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात किया गया, ताकि कार्यक्रम पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

 

कुल मिलाकर, 77वें गणतंत्र दिवस की परेड ने यह साफ कर दिया कि भारत एक मजबूत, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार राष्ट्र है। कर्तव्य पथ से उठी देशभक्ति की भावना ने हर भारतीय के दिल में गर्व और आत्मविश्वास भर दिया। यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि भारत की ताकत, एकता और उज्ज्वल भविष्य का संदेश भी था।

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