जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए सड़क हादसे में बलिदान हुए उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद के गांव भटैल निवासी जवान रिंखिल बालियान की शहादत ने पूरे देश को भावुक कर दिया। शनिवार सुबह जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया। गांव की गलियों में हर आंख नम थी और हर दिल भारी। परिजनों की चीख-पुकार के बीच जब शहीद के अंतिम दर्शन हुए, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू छलक पड़े।
गांव में शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई अपने वीर सपूत को आखिरी सलाम करने पहुंचा। पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद रिंखिल बालियान का अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गई, पूरा गांव “भारत माता की जय” और “जब तक सूरज चांद रहेगा, रिंखिल तेरा नाम रहेगा” के नारों से गूंज उठा। यह दृश्य हर किसी के दिल को झकझोर देने वाला था।
इस शहादत का सबसे भावुक पल तब आया, जब शहीद के मात्र एक साल के बेटे ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। मासूम हाथों से दिया गया यह अंतिम संस्कार का कर्तव्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। उस पल ने यह अहसास करा दिया कि देश की सुरक्षा की कीमत केवल एक सैनिक ही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार चुकाता है। एक पिता, एक पति और एक बेटा, देश के लिए हमेशा के लिए अमर हो गया।
शहीद रिंखिल बालियान की शहादत पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की। विधायक विजयपाल आढ़ती, जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय, पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह और पूर्व विधायक गजराज सिंह ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि शहीद का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता और देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
गांव भटैल में आज भी शोक की लहर है, लेकिन इस दुख के साथ-साथ गर्व की भावना भी उतनी ही मजबूत है। लोगों का कहना है कि रिंखिल बालियान ने देश सेवा को अपना धर्म माना और उसी कर्तव्य का पालन करते हुए उन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और त्याग की प्रेरणा देती रहेगी।
रिंखिल बालियान अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, उनका बलिदान और उनकी देशभक्ति हमेशा जीवित रहेगी। देश उन्हें नमन करता है और उनकी शहादत को शत-शत प्रणाम।
