करीब 18 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार हकीकत बन गया है। दोनों पक्षों ने इस बहुप्रतीक्षित समझौते को औपचारिक मंजूरी दे दी है। वैश्विक व्यापार और कूटनीति के लिहाज से इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसे कई विशेषज्ञ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की संज्ञा दे रहे हैं।
यह समझौता ऐसे समय पर सामने आया है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है और देशों के बीच भरोसेमंद साझेदारी की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। भारत और यूरोपीय यूनियन, दोनों ही दुनिया की प्रमुख लोकतांत्रिक और आर्थिक शक्तियां हैं। ऐसे में यह FTA न केवल व्यापार को नई दिशा देगा, बल्कि रणनीतिक सहयोग को भी मजबूती प्रदान करेगा।
नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित प्रेस मीट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के राष्ट्रपति एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा के साथ संयुक्त रूप से इस समझौते की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने इसे भारत-EU संबंधों में एक निर्णायक मोड़ बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हाल ही में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब पहली बार यूरोपीय यूनियन के शीर्ष नेता भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच गहराते विश्वास और साझेदारी का प्रतीक बताया। पीएम मोदी के अनुसार, आज का दिन भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां अपने संबंधों में एक नया और मजबूत अध्याय जोड़ रही हैं।
FTA के तहत भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को आसान बनाया जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में निवेश और व्यापार के नए अवसर खुलेंगे। ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में इस समझौते से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही, यूरोपीय यूनियन के लिए भारत एक तेजी से उभरता हुआ बड़ा बाजार है, जहां उपभोक्ता मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह डील दोनों पक्षों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति तैयार करती है।
कुल मिलाकर, भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता केवल एक आर्थिक करार नहीं है, बल्कि यह साझा मूल्यों, लोकतंत्र और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक भी है। आने वाले वर्षों में इसके प्रभाव वैश्विक व्यापार संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर साफ तौर पर दिखाई देंगे।
