‘कयामत तक बाबरी नहीं बन पाएगी’, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले- रामद्रोहियों के लिए कोई जगह नहीं बची

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अयोध्या और बाबरी मसले को लेकर स्पष्ट और सख्त रुख सामने रखा है। अपने हालिया संबोधन में उन्होंने कहा कि अब ऐसा समय आ चुका है जब देश में कानून का राज सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की अवैधानिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “कयामत तक बाबरी नहीं बन पाएगी” और जो लोग समाज में भ्रम, वैमनस्य या टकराव का माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, उनके लिए अब कोई जगह नहीं बची है।

मुख्यमंत्री का यह बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उनके शासन के उस दृष्टिकोण को भी दर्शाता है जिसमें कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश अब अराजकता या अव्यवस्था का प्रदेश नहीं रहा, बल्कि विकास, अनुशासन और सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कानून सर्वोपरि: यही है सरकार का मूल मंत्र

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे अधिक जोर कानून के पालन पर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां सभी को अपनी आस्था, विचार और जीवन जीने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता कानून के दायरे में ही संभव है। यदि कोई व्यक्ति या समूह कानून को चुनौती देता है, तो उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो लोग यह सपना देख रहे हैं कि वे किसी भी तरह से पुराने विवादों को फिर से जीवित कर माहौल खराब करेंगे, उन्हें समझ लेना चाहिए कि यह नया भारत है। यहां न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से जो निर्णय हो चुका है, वही अंतिम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कानून का सम्मान करें और समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने में सहयोग दें।

अयोध्या का बदलता स्वरूप

मुख्यमंत्री ने अयोध्या के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या केवल एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बन रही है। यहां भव्य मंदिर का निर्माण कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है और देश-विदेश से लोग इसे देखने और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस करने आ रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों तक जो मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक विवाद का कारण बना रहा, उसका समाधान अब न्यायालय के माध्यम से हो चुका है। इसलिए अब समय है कि अयोध्या को विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के केंद्र के रूप में देखा जाए।

विभाजनकारी सोच पर प्रहार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में यह भी कहा कि कुछ लोग समाज को जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज बंटता है, तो उसकी शक्ति कमजोर होती है। और जब समाज कमजोर होता है, तो देश की मजबूती भी प्रभावित होती है।

उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे ऐसी सोच से दूर रहें जो समाज में दरार पैदा करती है। उन्होंने कहा कि “एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।” यदि हम संगठित रहेंगे, तो कोई भी ताकत हमें नुकसान नहीं पहुंचा सकती।

विकास और सुरक्षा का संतुलन

योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार विकास और सुरक्षा दोनों को समान महत्व देती है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था मजबूत होने से ही निवेश आता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और प्रदेश आगे बढ़ता है। यदि प्रदेश में अराजकता होगी, तो विकास की गति धीमी पड़ जाएगी।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आया है, उद्योग स्थापित हुए हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तेजी आई है। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति मजबूत हुई है।

युवाओं के लिए संदेश

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे सकारात्मक सोच अपनाएं और अपने भविष्य के निर्माण पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार की भड़काऊ बातों या अफवाहों से दूर रहना चाहिए। आज का युवा तकनीक से जुड़ा है, जागरूक है और उसे देश के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में अफवाहें तेजी से फैलती हैं, लेकिन युवाओं को चाहिए कि वे सत्य और असत्य में फर्क करना सीखें। किसी भी खबर पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी सत्यता जांच लें।

न्यायिक फैसलों का सम्मान

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि देश में न्यायपालिका सर्वोच्च है और उसके निर्णयों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि अयोध्या से जुड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया जा चुका है और उसे सभी ने स्वीकार किया है। इसलिए अब इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक बयानबाजी या विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मतभेदों को मनभेद में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया ही समस्याओं का समाधान है।

सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव

योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत हजारों वर्षों की सभ्यता और संस्कृति का धनी देश है। यहां की परंपराएं, मूल्य और आदर्श विश्व के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास ही राष्ट्र को मजबूत बनाता है। जब हम अपनी परंपराओं का सम्मान करते हैं और उन्हें आधुनिकता के साथ जोड़ते हैं, तभी सच्चा विकास संभव होता है।

सामाजिक सद्भाव की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। सरकार अपनी भूमिका निभा रही है, लेकिन नागरिकों का सहयोग भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की उकसावे वाली गतिविधि या बयान से बचना चाहिए।

उन्होंने धार्मिक और सामाजिक नेताओं से भी अपील की कि वे समाज को जोड़ने का काम करें, न कि बांटने का। समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार ही विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

विपक्ष पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी

हालांकि मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर किसी दल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान से यह संकेत मिला कि वे उन राजनीतिक ताकतों पर निशाना साध रहे थे जो अयोध्या या बाबरी मसले को लेकर बार-बार बयान देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति के लिए समाज को बांटना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि जनता अब जागरूक है और वह विकास, सुरक्षा और स्थिरता चाहती है। इसलिए जो लोग पुराने विवादों को हवा देकर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें जनता पहचान चुकी है।

भविष्य की दिशा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान से स्पष्ट है कि उनकी सरकार अयोध्या और बाबरी से जुड़े मुद्दे को पूरी तरह समाप्त मानती है और अब विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का भविष्य उज्ज्वल है और सभी को मिलकर इसे और बेहतर बनाना है।

उन्होंने अंत में कहा कि “हम सबको मिलकर ऐसा भारत बनाना है जो मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध हो।” उनका संदेश स्पष्ट था—कानून का पालन करें, समाज में एकता बनाए रखें और विकास की राह पर आगे बढ़ें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का “कयामत तक बाबरी नहीं बन पाएगी” वाला बयान एक सख्त राजनीतिक संदेश है, लेकिन इसके पीछे उनकी सरकार की नीति और दृष्टिकोण भी झलकता है। वे कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च मानते हैं और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को स्वीकार नहीं करना चाहते।

यह बयान उन लोगों के लिए चेतावनी है जो पुराने विवादों को फिर से उभारने की कोशिश करते हैं, और साथ ही यह संदेश भी है कि उत्तर प्रदेश अब नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। विकास, सांस्कृतिक गौरव और कानून का सम्मान—इन्हीं तीन स्तंभों पर प्रदेश का भविष्य खड़ा किया जा रहा है।

समाज के लिए भी यह समय है कि वह अतीत के विवादों से सीख लेकर आगे बढ़े और एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दे, जहां शांति, एकता और प्रगति का वातावरण हो। मुख्यमंत्री का संदेश यही है कि विभाजन नहीं, बल्कि एकजुटता ही देश की असली ताकत है।

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