CM योगी ने किया बाबा विश्वनाथ और काल भैरव का दर्शन, चौखट छूकर किया प्रणाम; उतारी आरती

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने एक बार फिर अपनी धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं के प्रति गहरी श्रद्धा का परिचय देते हुए Kashi Vishwanath Temple और Kal Bhairav Temple में दर्शन-पूजन किया। यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान को भी मजबूती देने वाला साबित हुआ।

काल भैरव की चौखट पर झुके CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले काल भैरव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने परंपराओं का पालन करते हुए मंदिर की चौखट को स्पर्श कर प्रणाम किया। काशी में यह मान्यता है कि बिना काल भैरव के दर्शन किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन अधूरे माने जाते हैं, क्योंकि काल भैरव को काशी का ‘कोतवाल’ यानी रक्षक माना जाता है।

मंदिर पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित किया और स्वयं आरती उतारी। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

CM योगी का यह अंदाज — चौखट छूकर प्रणाम करना — लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय रहा, क्योंकि यह उनके विनम्र और आस्थावान व्यक्तित्व को दर्शाता है। इससे यह संदेश भी गया कि परंपराओं का सम्मान हर स्तर पर किया जाना चाहिए।

बाबा विश्वनाथ के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना

काल भैरव के दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का अभिषेक और विधिवत पूजा की। उन्होंने जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव की आराधना की।

मंदिर परिसर में इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद थे, जो मुख्यमंत्री की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए।

काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप ने एक बार फिर अपनी दिव्यता का एहसास कराया। आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक आस्था का संगम यहां स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

काशी की धार्मिक परंपरा और महत्व

वाराणसी, जिसे काशी भी कहा जाता है, दुनिया के सबसे प्राचीन और पवित्र शहरों में से एक माना जाता है। यहां स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है।

वहीं काल भैरव मंदिर को काशी का रक्षक माना जाता है। मान्यता है कि काशी में रहने वाले हर व्यक्ति पर काल भैरव की कृपा बनी रहती है और वे यहां के न्यायाधीश के रूप में भी पूजे जाते हैं। यही कारण है कि श्रद्धालु पहले काल भैरव के दर्शन करते हैं और फिर बाबा विश्वनाथ के।

आस्था के साथ प्रशासनिक समीक्षा

मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने काशी में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

विशेष रूप से त्योहारों और विशेष अवसरों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की गई। स्वच्छता, पार्किंग, मार्ग व्यवस्था और डिजिटल सुविधाओं को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

विकास और विरासत का संतुलन

CM योगी आदित्यनाथ लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि काशी जैसे धार्मिक शहरों में विकास और विरासत के बीच संतुलन बना रहे। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जिसने मंदिर परिसर को भव्यता के साथ आधुनिक सुविधाओं से भी जोड़ा है।

इस प्रकार के दौरे यह भी दर्शाते हैं कि सरकार न केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दे रही है, बल्कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और परंपराओं को भी संरक्षित कर रही है।

श्रद्धालुओं में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव

मुख्यमंत्री के इस दौरे से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कई भक्तों ने इसे एक सकारात्मक संकेत माना कि राज्य का नेतृत्व स्वयं धार्मिक परंपराओं का पालन करता है।

सोशल मीडिया पर भी इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जहां लोग CM योगी के इस भावपूर्ण दर्शन को सराह रहे हैं। CM योगी आदित्यनाथ का काशी दौरा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और प्रशासन का एक सुंदर संगम था। काल भैरव की चौखट पर झुककर प्रणाम करना और बाबा विश्वनाथ की आरती उतारना यह दर्शाता है कि भारतीय परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत और प्रभावशाली हैं।

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