राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

वह शुरुआत जिसने भारत को नई दिशा दी

RSS की नींव, विचार और संगठन

वह शुरुआत जिसने भारत को नई दिशा दी

आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक माना जाता है। इसके कार्य और प्रभाव को समझने के लिए उसके मूल विचार, स्थापना की पृष्ठभूमि और संस्थापक दृष्टि को जानना आवश्यक है।

RSS Founders

समय का संकट और संदर्भ

अनुशासित संगठन का अभाव

स्वतंत्रता आंदोलन सक्रिय थे, लेकिन उनमें स्थायी संगठन, अनुशासन और चरित्र निर्माण की स्पष्ट संरचना नहीं थी। राष्ट्रकेंद्रित दृष्टि का अभाव एक बड़ी चुनौती बन चुका था।

उद्भव का विचार

अनुशासित संगठन का अभाव

स्वतंत्रता आंदोलन सक्रिय थे, लेकिन उनमें स्थायी संगठन, अनुशासन और चरित्र निर्माण की स्पष्ट संरचना नहीं थी। राष्ट्रकेंद्रित दृष्टि का अभाव एक बड़ी चुनौती बन चुका था।

समय का संकट और संदर्भ

बीसवीं सदी के प्रारंभ का भारत केवल राजनीतिक गुलामी से नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक और मानसिक संकट से भी जूझ रहा था।

समय का संकट और संदर्भ

बीसवीं सदी के प्रारंभ का भारत केवल राजनीतिक गुलामी से नहीं, बल्कि गहरे सामाजिक और मानसिक संकट से भी जूझ रहा था।

सामाजिक विघटन

जाति, वर्ग, भाषा और पंथ के आधार पर समाज खंडों में बंटता जा रहा था। भारत की सबसे बड़ी शक्ति — सामाजिक एकता — धीरे-धीरे कमजोर हो रही थी।

सामाजिक विघटन

जाति, वर्ग, भाषा और पंथ के आधार पर समाज खंडों में बंटता जा रहा था। भारत की सबसे बड़ी शक्ति — सामाजिक एकता — धीरे-धीरे कमजोर हो रही थी।

Divya Mann
Dr. Keshav Baliram Born Date
Dr. Keshav Baliram Grey

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में हुआ। बचपन से ही उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रभाव, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना स्पष्ट दिखाई देती थी। सीमित संसाधनों में पले-बढ़े होने के बावजूद उनके विचारों की जड़ें भारतीय मूल्यों में गहराई से जुड़ी थीं।

अंग्रेज़ी शासन के दौरान भारतीय समाज के साथ हो रहे अन्याय ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। इस अन्याय के प्रति संवेदनशीलता ने उनके भीतर राष्ट्र के लिए कार्य करने का दृढ़ संकल्प विकसित किया।

चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने यह अनुभव किया कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं है। समाज का संगठन, आत्मविश्वास और चरित्र निर्माण उससे कहीं अधिक आवश्यक हैं।

क्रांतिकारी आंदोलनों से जुड़े अनुभवों ने उन्हें यह समझ दी कि केवल आंदोलन समाज को स्थायी रूप से सशक्त नहीं बना सकते। इसी चिंतन से यह विचार विकसित हुआ कि राष्ट्र निर्माण के लिए संगठित समाज, अनुशासित नागरिक और चरित्र आधारित नेतृत्व अनिवार्य है। यही विचार आगे चलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का आधार बना।

स्थापना की प्रारंभिक दिशा
और संगठन की नींव

विजयादशमी 1925 को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। यह स्थापना किसी राजनीतिक घोषणा या प्रचार अभियान के रूप में नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और समाज संगठन के अनुशासित प्रयास के रूप में प्रारंभ हुई।

एक विचार का आरंभ, जो संगठन और चरित्र निर्माण की दिशा में परिवर्तित हुआ।

शारीरिक एवं बौद्धिक प्रशिक्षण

प्रारंभिक वर्षों में स्वयंसेवकों के लिए शारीरिक प्रशिक्षण, वैचारिक स्पष्टता और सामूहिक अनुशासन को केंद्र में रखा गया। नियमित शाखा व्यवस्था और भगवा ध्वज को प्रेरणा प्रतीक के रूप में स्वीकार करते हुए एक स्पष्ट कार्यपद्धति विकसित की गई।

भगवा ध्वज: प्रेरणा का प्रतीक

संस्कार आधारित प्रशिक्षण, नेतृत्व निर्माण और समाज संपर्क गतिविधियों के माध्यम से स्वयंसेवक निर्माण की संगठित परंपरा स्थापित हुई। यही सिद्धांत आगे चलकर संघ की पहचान और कार्यशैली का आधार बने।

प्रशिक्षण आधारित नेतृत्व निर्माण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म आकस्मिक नहीं था, बल्कि वह समय की ऐतिहासिक और सामाजिक आवश्यकता का स्वाभाविक परिणाम था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष

एक विचार, एक संकल्प और राष्ट्र समर्पण की भावना से प्रारंभ हुई यह यात्रा आज एक विशाल सामाजिक संगठन के रूप में स्थापित हो चुकी है। पिछले सौ वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समाज संगठन, चरित्र निर्माण, सेवा गतिविधियों और राष्ट्र चेतना को मजबूत करने में निरंतर भूमिका निभाई है।

यह केवल एक संगठन की यात्रा नहीं, बल्कि उस विचार की कहानी है जिसने लाखों स्वयंसेवकों को अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र सेवा के मार्ग पर प्रेरित किया। विभिन्न परिस्थितियों, चुनौतियों और परिवर्तनों के बीच संघ ने अपने मूल उद्देश्य — समाज को संगठित और सशक्त बनाने — को निरंतर आगे बढ़ाया है।

इसी विचार से प्रारंभ हुई वह यात्रा, जिसकी झलक आगे प्रस्तुत समयरेखा में दिखाई देती है — वर्तमान से अतीत की ओर बढ़ती हुई संघ की ऐतिहासिक यात्रा।

100 Years RSS

नीचे प्रस्तुत समयरेखा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इसी ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाती है, जो वर्तमान से अतीत की ओर बढ़ते हुए संघ के विकास, विस्तार और योगदान की कहानी को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करती है

2025 - 2021
2020 - 2016
2015 - 2011
2010 - 2006
2005 - 2001
2000 - 1996
1995 - 1991
1990 - 1986
1985 - 1981
1980 - 1976
1975 - 1971
1970 - 1966
1965 - 1961
1960 - 1956
1955 - 1951
1950 - 1946
1945 - 1941
1940 - 1936
1935 - 1931
1930 - 1926
1925 - 1921
1920
2025

शताब्दी की ओर संगठन विस्तार और वैश्विक संपर्क

संगठन विस्तार, सेवा कार्यों की नई दिशा और शताब्दी वर्ष की तैयारियों के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समाज संपर्क और स्वयंसेवक नेटवर्क को व्यापक स्तर पर मजबूत किया।

नेतृत्व और प्रमुख पहल

Mohan Bhagwat

सरसंघचालक - मोहन भागवत

Duttashrey Hosbale

सरसंघचालक - मोहन भागवत

शताब्दी वर्ष तैयारी अभियान | वैश्विक स्वयंसेवक संपर्क विस्तार | समाज आधारित सेवा कार्यक्रम

शताब्दी वर्ष समारोह और वैश्विक स्वयंसेवक नेटवर्क विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित किए। विभिन्न राज्यों और शहरों में संगठन यात्रा, समाज संपर्क कार्यक्रम और सेवा गतिविधियों का आयोजन किया गया। विदेशों में रहने वाले प्रवासी स्वयंसेवकों के साथ संपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तार किया गया।

Year 2024

संगठन की ऐतिहासिक यात्रा को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली।

Year 2023

सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को मजबूत आधार मिला।

सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय एकता कार्यक्रम

देशभर में सांस्कृतिक जागरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वयंसेवक संपर्क अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और समाज संवाद गतिविधियों को विस्तार दिया गया। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में स्वयंसेवकों की भागीदारी रही।

शताब्दी वर्ष तैयारी और समाज संपर्क अभियान

स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने की तैयारी के तहत देशभर में समाज संपर्क अभियान चलाए गए। विभिन्न वर्गों, शिक्षण संस्थानों और संगठनों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। शाखा विस्तार और स्वयंसेवक प्रशिक्षण गतिविधियों को गति देकर संगठनात्मक आधार को मजबूत किया गया।

Year 2022

संगठन विस्तार और समाज सहभागिता को नई दिशा और सुदृढ़ आधार मिला।

Year 2021

राष्ट्रीय संकट के समय सेवा कार्यों में संगठन की भूमिका और सामाजिक विश्वास मजबूत हुआ।

कोविड राहत सेवा और राष्ट्रीय सहयोग अभियान

कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान स्वयंसेवकों ने देशभर में राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। ऑक्सीजन, दवाइयों और भोजन वितरण के साथ सहायता अभियान संचालित किए गए। अस्पतालों और जरूरतमंद परिवारों तक सहयोग पहुंचाकर सेवा कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया।

कोविड-19 सेवा अभियान और राष्ट्रीय राहत कार्य

कोविड-19 महामारी के दौरान स्वयंसेवकों ने देशभर में बड़े स्तर पर सेवा कार्य किए। लॉकडाउन के समय भोजन, मास्क और आवश्यक सामग्री वितरण के अभियान चलाए गए। प्रशासन और अस्पतालों के साथ सहयोग करते हुए जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाई गई।

Year 2020

राष्ट्रीय संकट के समय सेवा कार्यों में संगठन की व्यापक सामाजिक भागीदारी स्थापित हुई।

Year 2019

राष्ट्रीय विषयों पर समाज समन्वय और एकता को सुदृढ़ आधार मिला।

राष्ट्रीय निर्णयों पर समाज जागरूकता और सहभागिता अभियान

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद देशभर में समाज संवाद और जागरूकता अभियान चलाए गए। स्वयंसेवकों ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई।

सामाजिक समरसता और समाज संपर्क अभियान विस्तार

देशभर में सांस्कृतिक जागरण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वयंसेवक संपर्क अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और समाज संवाद गतिविधियों को विस्तार दिया गया। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में स्वयंसेवकों की भागीदारी रही।

Year 2018

सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को मजबूत आधार मिला।

Year 2017

संगठन विस्तार और समाज जुड़ाव को नई दिशा मिली।

समाज संपर्क सुदृढ़ीकरण और संगठन विस्तार अभियान

स्वयंसेवक संपर्क और संगठन विस्तार को गति देने के लिए विभिन्न अभियान चलाए गए। सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से युवाओं और समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाई गई। शाखा गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया।

समरसता व दलित संपर्क अभियान

सामाजिक समरसता को मजबूत करने के उद्देश्य से देशभर में दलित संपर्क अभियान चलाया गया। स्वयंसेवकों ने विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ाने के प्रयास किए।

Year 2016

सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत आधार मिला।

स्थापना के 90 वर्ष और संगठन विस्तार अभियान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 90 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए। संगठन की ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शित करते हुए शाखा विस्तार और जनसंपर्क अभियानों को गति दी गई। युवा स्वयंसेवकों को जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया।

Year 2015

संगठन विस्तार और युवा सहभागिता को नई गति और दिशा मिली।

Year 2014

समाज संपर्क और राष्ट्रीय चेतना को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ आधार मिला।

समाज संवाद और राष्ट्रीय चेतना का विस्तार

केंद्र में नई सरकार बनने के बाद देशभर में समाज संवाद और संपर्क कार्यक्रमों को गति दी गई। विभिन्न सामाजिक वर्गों और संस्थानों के साथ संवाद स्थापित कर राष्ट्रीय विषयों पर जागरूकता बढ़ाई गई। स्वयंसेवकों ने समाज के साथ जुड़ाव को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

उत्तराखंड आपदा राहत और सेवा अभियान

उत्तराखंड में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान स्वयंसेवकों ने राहत और बचाव कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। पुनर्वास कार्यों में भी सहयोग देकर सेवा गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित किया गया।

Year 2013

आपदा के समय सेवा कार्यों में संगठन की विश्वसनीयता और भूमिका मजबूत हुई।

Year 2012

संगठनात्मक संरचना और प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ आधार मिला।

संगठन सुदृढ़ीकरण और प्रशिक्षण विस्तार

संगठन संचालन और सेवा गतिविधियों को स्थिर दिशा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया गया। शाखा विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क अभियानों को गति देकर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया गया।

समाज जागरण और व्यापक जनसहभागिता अभियान

विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से देशभर में समाज जागरण अभियान चलाए गए। विभिन्न समुदायों और वर्गों की भागीदारी से संगठनात्मक संपर्क और संवाद को विस्तार मिला। स्वयंसेवकों ने जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से समाज जुड़ाव को मजबूत किया।

Year 2011

समाज जागरण और जनसहभागिता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

आपदा राहत और पुनर्वास सेवा अभियान

उत्तर कर्नाटक में आई भीषण बाढ़ के दौरान स्वयंसेवकों ने राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन और आवश्यक सहायता पहुंचाई गई। पुनर्वास कार्यों के माध्यम से समाज सेवा गतिविधियों को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया गया।

Year 2010

आपदा के समय सेवा कार्यों में संगठन की सक्रिय भूमिका और विश्वसनीयता मजबूत हुई।

Year 2009

नेतृत्व परिवर्तन के साथ संगठन को नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा प्राप्त हुई।

नेतृत्व परिवर्तन और संगठन विस्तार की नई दिशा

नेतृत्व और प्रमुख पहल
सरसंघचालक - मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में नेतृत्व परिवर्तन के साथ मोहन भागवत ने सरसंघचालक का दायित्व संभाला। संगठन विस्तार, युवा संपर्क और शाखा गतिविधियों को नई दिशा दी गई। संगठन संचालन और प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

वैश्विक संपर्क और प्रवासी स्वयंसेवक नेटवर्क विस्तार

विदेशों में रहने वाले स्वयंसेवकों के साथ संपर्क कार्यक्रमों को विस्तार दिया गया। विभिन्न देशों में सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से संगठन की पहुंच को बढ़ाया गया। प्रवासी भारतीयों के साथ जुड़ाव के प्रयासों को सुदृढ़ किया गया।

Year 2008

वैश्विक स्तर पर संगठन की पहचान और संपर्क मजबूत हुआ।

Year 2007

स्वयंसेवक नेटवर्क और संगठन विस्तार को नई गति मिली।

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क अभियान

देशभर में स्वयंसेवक संपर्क और संगठन विस्तार को गति देने के लिए अभियान चलाए गए। युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने के प्रयास किए गए। शाखा गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया।

संगठन संरचना सुदृढ़ीकरण और प्रशिक्षण विस्तार

संगठन संचालन को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए संरचनात्मक सुधार किए गए। स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विस्तार दिया गया। शाखा गतिविधियों में कार्यपद्धति को सुदृढ़ कर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया गया।

Year 2006

संगठन संचालन और प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ।

सेवा परियोजनाओं का राष्ट्रीय विस्तार और समाज सहायता अभियान

सेवा भारती और सहयोगी संगठनों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सहायता परियोजनाओं का देशभर में विस्तार किया गया। ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में सेवा कार्यों को सुदृढ़ किया गया। स्वयंसेवकों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक सहायता पहुंचाई गई।

Year 2005

सेवा गतिविधियों के माध्यम से समाज सहयोग और संगठन की पहुंच मजबूत हुई।

Year 2004

प्राकृतिक आपदा के समय सेवा कार्यों में संगठन की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई।

सुनामी राहत और तटीय क्षेत्रों में सेवा अभियान

दक्षिण भारत और तटीय क्षेत्रों में आई सुनामी आपदा के दौरान स्वयंसेवकों ने राहत और बचाव कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। प्रभावित परिवारों को भोजन, चिकित्सा सहायता और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। पुनर्वास कार्यों के माध्यम से सेवा गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित किया गया।

सेवा गतिविधियों और समाज संपर्क कार्यक्रमों का विस्तार

शिक्षा सहायता, स्वास्थ्य सेवा और समाज सहयोग कार्यक्रमों को विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार दिया गया। ग्रामीण और वंचित समाज के बीच संपर्क गतिविधियों को सुदृढ़ किया गया। स्वयंसेवक प्रशिक्षण और शाखा विस्तार अभियानों को गति दी गई।

Year 2003

समाज सहायता कार्यक्रमों और स्वयंसेवक नेटवर्क को व्यापक विस्तार मिला।

Year 2002

संगठन विस्तार और सेवा गतिविधियों को नई दिशा और मजबूती मिली।

संगठन सुदृढ़ीकरण और सेवा गतिविधियों का विस्तार

संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने और सेवा गतिविधियों को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए गए। स्वयंसेवक संपर्क और प्रशिक्षण अभियानों को गति देकर संगठनात्मक आधार को सुदृढ़ किया गया। समाज के विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ाव को बढ़ाया गया।

भुज भूकंप राहत और राष्ट्रीय सेवा अभियान

गुजरात के भुज में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान स्वयंसेवकों ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव कार्य किए। प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। पुनर्वास कार्यों में भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया।

Year 2001

राष्ट्रीय आपदा के समय सेवा कार्यों में संगठन की क्षमता और विश्वसनीयता स्थापित हुई।

नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक दिशा का विस्तार

नेतृत्व और प्रमुख पहल
सरसंघचालक - के. एस. सुदर्शन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में नेतृत्व परिवर्तन के साथ के. एस. सुदर्शन ने सरसंघचालक का दायित्व संभाला। संगठन संचालन, वैचारिक मार्गदर्शन और शाखा विस्तार कार्यक्रमों को नई दिशा दी गई। स्वयंसेवक प्रशिक्षण और संगठनात्मक ढांचे को अधिक व्यवस्थित बनाने के प्रयास किए गए।

Year 2000

नेतृत्व परिवर्तन के साथ संगठन को नई रणनीतिक दिशा और स्थिरता प्राप्त हुई।

Year 1999

राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक प्रभाव और समाज संपर्क गतिविधियों को विस्तार मिला।

राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक संवाद और समाज संपर्क विस्तार

देशभर में सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विषयों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और युवाओं के साथ संपर्क अभियानों को गति दी गई। संगठन विस्तार और स्वयंसेवक नेटवर्क को मजबूत करने के प्रयास किए गए।

राष्ट्रीय राजनीति में वैचारिक प्रभाव और समाज सहभागिता

केंद्र में पहली बार भाजपा नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय विषयों पर वैचारिक चर्चा को गति मिली। स्वयंसेवकों ने समाज संपर्क और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय विचारों को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया।

Year 1998

राष्ट्रीय स्तर पर वैचारिक प्रभाव और संगठन की पहचान को नई मजबूती मिली।

Year 1997

स्वयंसेवक नेटवर्क और संगठन विस्तार को नई गति मिली।

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक प्रशिक्षण अभियान

देशभर में शाखा विस्तार और स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया। युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क गतिविधियों को विस्तार दिया गया। संगठनात्मक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किए गए।

संगठन सुदृढ़ीकरण और समाज संपर्क गतिविधियों का विस्तार

संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने और समाज संपर्क कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न प्रयास किए गए। स्वयंसेवक प्रशिक्षण और शाखा गतिविधियों को सुदृढ़ किया गया। विभिन्न सामाजिक वर्गों के साथ जुड़ाव को बढ़ाया गया।

Year 1996

संगठन संचालन और समाज संपर्क गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

नेतृत्व परिवर्तन के बाद संगठन पुनर्संरचना और विस्तार

नेतृत्व और प्रमुख पहल
सरसंघचालक - प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया)
नेतृत्व परिवर्तन के बाद संगठन गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने और विस्तार देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। स्वयंसेवक संपर्क अभियानों को मजबूत किया गया और शाखा विस्तार कार्यक्रमों को योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ाया गया। प्रशिक्षण और संगठन संचालन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने के प्रयास किए गए।

Year 1995

नेतृत्व परिवर्तन के बाद संगठन को नई दिशा और स्थिरता प्राप्त हुई।

Year 1994

नेतृत्व परिवर्तन के साथ संगठन को नई ऊर्जा और स्पष्ट वैचारिक दिशा प्राप्त हुई।

नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक दिशा का पुनर्निर्धारण

नेतृत्व और प्रमुख पहल
सरसंघचालक - प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में नेतृत्व परिवर्तन के साथ राजेंद्र सिंह ने सरसंघचालक का दायित्व संभाला। संगठन की कार्यप्रणाली को नए दृष्टिकोण से देखने और वैचारिक आधार को स्पष्ट करने पर विशेष बल दिया गया। स्वयंसेवकों के मार्गदर्शन और बौद्धिक विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक व्यवस्थित किया गया।

संगठन पुनर्गठन और संपर्क गतिविधियों का सुदृढ़ीकरण

प्रतिबंध की अवधि के बाद संगठन गतिविधियों को पुनः व्यवस्थित किया गया। स्वयंसेवक संपर्क और वैचारिक संवाद कार्यक्रमों को गति दी गई। शाखा विस्तार और संगठनात्मक ढांचे को पुनः सुदृढ़ किया गया।

Year 1993

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बाद संगठन की संरचना और सक्रियता मजबूत हुई।

Year 1992

चुनौतीपूर्ण समय में संगठन की प्रतिबद्धता और संरचना मजबूत बनी रही।

प्रतिबंध और संगठनात्मक चुनौती का सामना

अयोध्या की घटनाओं के बाद संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने वैकल्पिक माध्यमों से समाज संपर्क और वैचारिक गतिविधियों को जारी रखा। कठिन परिस्थितियों में संगठनात्मक एकता और सक्रियता बनाए रखी गई।

छात्र संपर्क और समाज जागरूकता अभियान विस्तार

शिक्षण संस्थानों और छात्र संगठनों के माध्यम से युवाओं से संपर्क कार्यक्रमों को गति दी गई। नेतृत्व विकास और समाज जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से संगठन विस्तार को नई दिशा मिली।

Year 1991

युवा संपर्क और समाज जागरूकता गतिविधियों को व्यापक विस्तार मिला।

राम रथ यात्रा और समाज जागरण अभियान

राम मंदिर आंदोलन के समर्थन में निकाली गई राम रथ यात्रा के दौरान स्वयंसेवकों ने विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। यात्रा मार्गों पर व्यवस्था सहयोग और समाज जागरण कार्यक्रमों को गति दी गई।

Year 1990

सांस्कृतिक विषयों पर समाज सहभागिता और संगठन सक्रियता को व्यापक विस्तार मिला।

Year 1989

राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक विषयों पर व्यापक जनजागरण का वातावरण बना।

राम मंदिर आंदोलन का राष्ट्रीय विमर्श बनना

राम मंदिर निर्माण का विषय राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बना। देशभर में समाज जागरण और जनसंपर्क कार्यक्रम संचालित किए गए। विभिन्न मंचों के माध्यम से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों पर संवाद को विस्तार मिला।

संगठन विस्तार और समाज संपर्क अभियान

देशभर में शाखा विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क अभियान चलाए गए। युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ाव को मजबूत किया गया। सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से संगठनात्मक नेटवर्क को विस्तार मिला।

Year 1988

स्वयंसेवक नेटवर्क और समाज संपर्क गतिविधियों को नई गति मिली।

Year 1987

संगठनात्मक संरचना और प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत हुई।

प्रशिक्षण विस्तार और संगठन सुदृढ़ीकरण

स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया और संगठन संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने के प्रयास किए गए। शाखा गतिविधियों और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को गति दी गई।

सांस्कृतिक जागरण और संगठनात्मक आधार सुदृढ़ीकरण

सांस्कृतिक चेतना और समाज जागरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए गए। स्वयंसेवक संपर्क और शाखा विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ कर संगठनात्मक आधार को मजबूत किया गया।

Year 1986

सांस्कृतिक जागरण और संगठन विस्तार को नई दिशा मिली।

सांस्कृतिक जागरण और समाज संपर्क अभियान विस्तार

देशभर में सांस्कृतिक जागरण और समाज संपर्क को मजबूत करने के लिए विभिन्न अभियान चलाए गए। सामाजिक और धार्मिक मंचों के माध्यम से जनजागरण गतिविधियों को गति दी गई। स्वयंसेवकों ने विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ाव को सुदृढ़ किया।

Year 1985

सांस्कृतिक चेतना और समाज सहभागिता को व्यापक आधार मिला।

Year 1984

सांस्कृतिक विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर जनजागरण को नई दिशा मिली।

राम जन्मभूमि आंदोलन का राष्ट्रीय विस्तार

राम जन्मभूमि से जुड़ा विषय राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उभरने लगा। विभिन्न क्षेत्रों में समाज जागरण और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए। सांस्कृतिक और धार्मिक मंचों के माध्यम से संवाद और सहभागिता को गति मिली।

समाज जागरण और संगठन विस्तार अभियान

देशभर में समाज जागरण और संगठन विस्तार के लिए अभियान चलाए गए। युवाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों से संपर्क बढ़ाने के प्रयास किए गए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से संगठनात्मक नेटवर्क को सुदृढ़ किया गया।

Year 1983

समाज संपर्क और संगठन विस्तार गतिविधियों को व्यापक गति मिली।

Year 1982

सांस्कृतिक चेतना और समाज सहभागिता को सुदृढ़ आधार मिला।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और समाज जुड़ाव विस्तार

विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ाव को मजबूत किया गया। स्वयंसेवकों ने जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से संगठनात्मक विस्तार को आगे बढ़ाया।

संगठन सुदृढ़ीकरण और प्रशिक्षण विस्तार

स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत किया गया और शाखा विस्तार गतिविधियों को गति दी गई। संगठन संचालन और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों के माध्यम से संगठनात्मक ढांचे को सुदृढ़ किया गया।

Year 1981

संगठनात्मक संरचना और स्वयंसेवक प्रशिक्षण को नई मजबूती मिली।

भारतीय जनता पार्टी गठन और वैचारिक राजनीतिक विस्तार

जनता पार्टी के विभाजन के बाद भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ, जिसमें वैचारिक रूप से जुड़े कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। लोकतांत्रिक राजनीति में राष्ट्रीय विचारों को नई दिशा देने के प्रयास किए गए।

Year 1980

वैचारिक राजनीतिक सहभागिता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

Year 1979

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समाज सहभागिता और वैचारिक संवाद को गति मिली।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में स्वयंसेवक सहभागिता विस्तार

आपातकाल के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी के लिए स्वयंसेवकों ने समाज संपर्क और जनसंवाद कार्यक्रम चलाए। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मंचों के माध्यम से जागरूकता अभियान संचालित किए गए।

संगठन पुनर्सक्रियता और समाज संपर्क अभियान

आपातकाल के बाद संगठन गतिविधियों को पुनः सक्रिय किया गया। स्वयंसेवक संपर्क अभियान और शाखा विस्तार कार्यक्रमों को गति दी गई। प्रशिक्षण और संगठन संचालन को सुदृढ़ करने के प्रयास किए गए।

Year 1978

संगठन सक्रियता और समाज संपर्क गतिविधियों को नई ऊर्जा मिली।

Year 1977

लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन सक्रियता को नई दिशा मिली।

लोकतांत्रिक पुनर्स्थापना और संगठन सक्रियता

आपातकाल समाप्त होने के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना हुई। स्वयंसेवकों ने समाज संपर्क और जनजागरण गतिविधियों के माध्यम से संगठन को पुनः सुदृढ़ किया।

आपातकाल के दौरान संगठनात्मक सक्रियता और संघर्ष

देश में आपातकाल के दौरान संगठन पर प्रतिबंध के बावजूद स्वयंसेवकों ने वैकल्पिक माध्यमों से गतिविधियों को जारी रखा। कठिन परिस्थितियों में भी संगठनात्मक एकता और वैचारिक प्रतिबद्धता को बनाए रखा गया।

Year 1976

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संगठन की दृढ़ता और सक्रियता मजबूत बनी रही।

आपातकाल घोषणा और संगठन प्रतिबंध

देश में आपातकाल घोषित होने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया गया। संगठन से जुड़े हजारों स्वयंसेवकों को गिरफ्तार किया गया। प्रतिबंध के बावजूद स्वयंसेवकों ने वैकल्पिक माध्यमों से समाज संपर्क और वैचारिक गतिविधियों को जारी रखा।

Year 1975

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संगठन की प्रतिबद्धता और सक्रियता बनी रही।

Year 1974

संगठन नेटवर्क और स्वयंसेवक प्रशिक्षण को नई मजबूती मिली।

संगठन विस्तार और समाज संपर्क गतिविधियाँ

आपातकाल से पूर्व के समय में संगठन विस्तार और समाज संपर्क अभियानों को गति दी गई। स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रम और शाखा विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ किया गया।

नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक दिशा का विस्तार

नेतृत्व और प्रमुख पहल
सरसंघचालक - बालासाहेब देवरस
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में नेतृत्व परिवर्तन के साथ बालासाहेब देवरस ने सरसंघचालक का दायित्व संभाला। संगठन संचालन, समाज संपर्क और स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नई दिशा दी गई।

Year 1973

नेतृत्व परिवर्तन के साथ संगठन को नई रणनीतिक दिशा और सक्रियता मिली।

Year 1972

स्वयंसेवक नेटवर्क और संगठन विस्तार गतिविधियों को नई गति मिली।

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक प्रशिक्षण अभियान

देशभर में शाखा विस्तार और स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया। युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क गतिविधियों को बढ़ाया गया।

समाज संपर्क और संगठन सुदृढ़ीकरण प्रयास

संगठनात्मक गतिविधियों को सुदृढ़ करने और समाज संपर्क कार्यक्रमों को विस्तार देने के प्रयास किए गए। विभिन्न क्षेत्रों में स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी से संगठनात्मक आधार मजबूत हुआ।

Year 1971

संगठन संरचना और समाज जुड़ाव को सुदृढ़ आधार मिला।

सामाजिक संगठनों में विस्तार और समाज संपर्क अभियान

सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के माध्यम से समाज संपर्क गतिविधियों को व्यापक स्तर पर बढ़ाया गया। विभिन्न क्षेत्रों में स्वयंसेवक नेटवर्क को मजबूत करने और जनजागरण कार्यक्रमों को संचालित किया गया।

Year 1970

संगठन की सामाजिक भागीदारी और संपर्क गतिविधियों को नई गति मिली।

Year 1969

संगठन नेटवर्क और समाज संपर्क गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

समाज संपर्क और संगठन विस्तार गतिविधियों का सुदृढ़ीकरण

देशभर में स्वयंसेवक संपर्क और शाखा विस्तार कार्यक्रमों को गति दी गई। विभिन्न सामाजिक वर्गों के साथ संवाद और सहभागिता को बढ़ाया गया।

शिक्षण संस्थानों में छात्र संपर्क अभियान विस्तार

शिक्षण संस्थानों और छात्र संगठनों के माध्यम से युवाओं के साथ संपर्क कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया। नेतृत्व विकास और वैचारिक संवाद गतिविधियों को विस्तार दिया गया।

Year 1968

युवा संपर्क और छात्र नेतृत्व निर्माण गतिविधियों को नई दिशा मिली।

Year 1967

संगठन संचालन और प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ आधार मिला।

संगठन संरचना सुदृढ़ीकरण और प्रशिक्षण विस्तार

स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत किया गया और संगठन संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने के प्रयास किए गए। शाखा गतिविधियों और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को गति दी गई।

शाखा विस्तार और स्वयंसेवक नेटवर्क सुदृढ़ीकरण

देशभर में शाखाओं की संख्या बढ़ाने और स्वयंसेवक संपर्क कार्यक्रमों को विस्तार देने के प्रयास किए गए। सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत किया गया।

Year 1966

स्वयंसेवक नेटवर्क और संगठन विस्तार गतिविधियों को नई गति मिली।

भारत-पाक युद्ध सहयोग और राष्ट्रीय सेवा अभियान

भारत-पाक युद्ध के दौरान स्वयंसेवकों ने नागरिक सहायता और राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। सीमावर्ती क्षेत्रों में राहत सामग्री, रक्तदान और प्रशासनिक सहयोग गतिविधियों को संचालित किया गया।

Year 1965

राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज सेवा में संगठन की सक्रिय भूमिका मजबूत हुई।

Year 1964

संगठन नेटवर्क और समाज संपर्क गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

समाज संपर्क और संगठन विस्तार गतिविधियों का सुदृढ़ीकरण

देशभर में स्वयंसेवक संपर्क और शाखा विस्तार कार्यक्रमों को गति दी गई। विभिन्न सामाजिक वर्गों के साथ संवाद और सहभागिता को बढ़ाया गया।

गणतंत्र दिवस परेड में स्वयंसेवक सहभागिता

गणतंत्र दिवस परेड में स्वयंसेवकों की सहभागिता ने संगठन की अनुशासन और क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया। इस अवसर ने संगठन की पहचान और प्रशिक्षण प्रणाली को व्यापक पहचान दिलाई।

Year 1963

राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की अनुशासन और क्षमता को व्यापक मान्यता मिली।

Year 1962

राष्ट्रीय संकट के समय सेवा कार्यों में संगठन की भूमिका मजबूत हुई।

भारत-चीन युद्ध और राहत सेवा अभियान

भारत-चीन युद्ध के दौरान स्वयंसेवकों ने नागरिक सहायता, राहत सामग्री वितरण और प्रशासनिक सहयोग में सक्रिय भूमिका निभाई। सैनिक परिवारों के समर्थन और समाज सहायता गतिविधियों को विस्तार दिया गया।

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक प्रशिक्षण अभियान

देशभर में शाखा विस्तार और स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया। समाज संपर्क और नेतृत्व विकास गतिविधियों को गति दी गई।

Year 1961

स्वयंसेवक नेटवर्क और संगठन विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

विवेकानंद रॉक मेमोरियल आंदोलन की शुरुआत

स्वामी विवेकानंद की स्मृति को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने के उद्देश्य से कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल निर्माण आंदोलन की शुरुआत की गई। देशभर में जनसंपर्क और सहयोग अभियान चलाकर समाज की भागीदारी सुनिश्चित की गई।

Year 1960

राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रेरणा और जनसहभागिता को व्यापक समर्थन मिला।

Year 1959

सांस्कृतिक चेतना और समाज सहभागिता को नई गति मिली।

सांस्कृतिक जागरण और समाज संपर्क अभियान विस्तार

देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और समाज जागरण गतिविधियों को विस्तार दिया गया। स्वयंसेवकों ने विभिन्न मंचों के माध्यम से समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाई।

समाज संपर्क और संगठन विस्तार गतिविधियाँ

स्वयंसेवक संपर्क और शाखा विस्तार कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को संतुलित रूप से विस्तार दिया गया।

Year 1958

संगठन नेटवर्क और समाज संपर्क गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

Year 1957

संगठन संचालन और प्रशिक्षण व्यवस्था को नई मजबूती मिली।

प्रशिक्षण कार्यक्रम सुदृढ़ीकरण और संगठन विकास

स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत किया गया और संगठन संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने के प्रयास किए गए। नेतृत्व विकास और शाखा गतिविधियों को गति दी गई।

शाखा विस्तार और स्वयंसेवक नेटवर्क सुदृढ़ीकरण

देशभर में शाखाओं की संख्या बढ़ाने और स्वयंसेवक संपर्क कार्यक्रमों को विस्तार देने के प्रयास किए गए। सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से संगठनात्मक आधार को मजबूत किया गया।

Year 1956

स्वयंसेवक नेटवर्क और संगठन विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

वैचारिक संवाद और समाज संपर्क अभियान विस्तार

देशभर में सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विषयों पर संवाद कार्यक्रमों को विस्तार दिया गया। स्वयंसेवकों ने विभिन्न मंचों के माध्यम से समाज जागरूकता और संपर्क गतिविधियों को सुदृढ़ किया।

Year 1955

वैचारिक संवाद और समाज संपर्क गतिविधियों को व्यापक आधार मिला।

Year 1954

संगठन नेटवर्क और स्वयंसेवक संपर्क गतिविधियों को नई गति मिली।

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क गतिविधियाँ

शाखा विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क कार्यक्रमों को गति दी गई। विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को सुदृढ़ करने के प्रयास किए गए।

समाज जागरण और संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तार

सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज जागरण गतिविधियों को विस्तार दिया गया। स्वयंसेवकों ने विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ाव को सुदृढ़ किया।

Year 1953

समाज जागरण और संगठन विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

Year 1952

वैचारिक राजनीतिक सहभागिता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

लोकतांत्रिक राजनीति में वैचारिक सहभागिता विस्तार

भारतीय जनसंघ के गठन के बाद लोकतांत्रिक राजनीति में वैचारिक सहभागिता को गति मिली। स्वयंसेवकों ने समाज संपर्क और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय विचारों को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया।

भारतीय जनसंघ की स्थापना और वैचारिक राजनीतिक दिशा

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ की स्थापना की गई। इस स्थापना ने लोकतांत्रिक राजनीति में वैचारिक आधार पर राष्ट्रीय विषयों को नई दिशा प्रदान की।

Year 1951

लोकतांत्रिक राजनीतिक क्षेत्र में वैचारिक राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को नई पहचान मिली।

संगठन पुनर्संरचना और संवैधानिक ढांचे का सुदृढ़ीकरण

प्रतिबंध हटने के बाद संगठन गतिविधियों को पुनः व्यवस्थित किया गया। संचालन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए लिखित संविधान अपनाया गया। शाखा विस्तार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को फिर से गति दी गई।

Year 1950

संवैधानिक संरचना अपनाने से संगठन संचालन को सुदृढ़ आधार मिला।

Year 1949

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बाद संगठन की सक्रियता और संरचना मजबूत हुई।

प्रतिबंध हटने के बाद संगठन पुनर्सक्रियता

सरकारी प्रतिबंध हटने के बाद संगठन गतिविधियों को पुनः सक्रिय किया गया। स्वयंसेवक संपर्क और शाखा विस्तार कार्यक्रमों को पुनः गति दी गई।

प्रतिबंध और वैचारिक चुनौती का सामना

महात्मा गांधी की हत्या के बाद संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने वैकल्पिक माध्यमों से समाज संपर्क और वैचारिक गतिविधियों को बनाए रखा।

Year 1948

कठिन परिस्थितियों में संगठन की प्रतिबद्धता और सक्रियता बनी रही।

Year 1947

राष्ट्रीय संकट के समय सेवा कार्यों में संगठन की भूमिका व्यापक रूप से सामने आई।

विभाजन के दौरान राहत और समाज सेवा अभियान

देश विभाजन के समय स्वयंसेवकों ने शरणार्थियों और प्रभावित परिवारों के लिए राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। भोजन, आवास और सुरक्षा सहायता उपलब्ध कराई गई।

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क अभियान

देशभर में शाखा विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया। युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ाव को बढ़ाने के प्रयास किए गए।

Year 1946

संगठन नेटवर्क और समाज संपर्क गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

शाखा विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क अभियान

देश के विभिन्न क्षेत्रों में शाखाओं का विस्तार किया गया और स्वयंसेवक संपर्क कार्यक्रमों को गति दी गई। युवाओं को संगठन से जोड़ने के लिए विशेष अभियान संचालित किए गए।

Year 1945

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक नेटवर्क को व्यापक गति मिली।

Year 1944

समाज संपर्क और संगठनात्मक संरचना को सुदृढ़ आधार मिला।

समाज संपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों का सुदृढ़ीकरण

विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज संपर्क गतिविधियों को विस्तार दिया गया। स्वयंसेवकों ने संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

वैचारिक प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास कार्यक्रम

स्वयंसेवकों के लिए वैचारिक प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया। संगठन संचालन और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया गया।

Year 1943

वैचारिक प्रशिक्षण और नेतृत्व निर्माण गतिविधियों को नई मजबूती मिली।

Year 1942

संगठन संचालन और शाखा गतिविधियों को स्थिर दिशा मिली।

संगठन संरचना सुदृढ़ीकरण और शाखा प्रणाली विकास

शाखा संचालन प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के प्रयास किए गए। संगठनात्मक ढांचे को सुदृढ़ कर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विस्तार दिया गया।

राष्ट्रीय परिस्थितियों में संगठन सक्रियता बनाए रखना

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान राष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच संगठन गतिविधियों को संतुलित रूप से जारी रखा गया। स्वयंसेवकों के माध्यम से समाज संपर्क और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए।

Year 1941

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संगठन की सक्रियता और निरंतरता बनी रही।

नेतृत्व परिवर्तन और संगठन की नई दिशा

नेतृत्व और प्रमुख पहल
सरसंघचालक - माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी)
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के निधन के बाद गुरुजी माधव सदाशिव गोलवलकर ने सरसंघचालक का दायित्व संभाला। संगठन विस्तार, वैचारिक मार्गदर्शन और प्रशिक्षण व्यवस्था को नई दिशा दी गई।

Year 1940

नेतृत्व परिवर्तन के साथ संगठन को स्थिरता और दीर्घकालिक दिशा प्राप्त हुई।

Year 1939

राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण प्रणाली को सुदृढ़ आधार मिला।

प्रशिक्षण प्रणाली का विस्तार और संगठन सुदृढ़ीकरण

Officer Training Camp (OTC) प्रशिक्षण प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया गया। विभिन्न क्षेत्रों से स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया और संगठनात्मक क्षमता को मजबूत किया।

शाखा विस्तार और संगठनात्मक नेटवर्क का विकास

देश के विभिन्न क्षेत्रों में शाखाओं का विस्तार किया गया। स्वयंसेवक संपर्क और समाज जुड़ाव गतिविधियों को गति दी गई।

Year 1938

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक नेटवर्क को नई दिशा मिली।

Year 1937

समाज संपर्क और संगठन विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

समाज संपर्क और संगठन विस्तार अभियान

विभिन्न क्षेत्रों में स्वयंसेवक संपर्क कार्यक्रमों को सुदृढ़ किया गया। युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ जुड़ाव को बढ़ाया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम सुदृढ़ीकरण और संगठन संरचना विकास

स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत किया गया और संगठन संचालन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किए गए। नेतृत्व विकास गतिविधियों को गति दी गई।

Year 1936

संगठन संरचना और प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ।

संगठन विस्तार और राष्ट्रीय प्रसार की दिशा

मध्य भारत से बाहर विभिन्न प्रांतों में शाखाओं का विस्तार किया गया। नए क्षेत्रों में स्वयंसेवक संपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को गति दी गई।

Year 1935

संगठन को क्षेत्रीय स्तर से राष्ट्रीय विस्तार की दिशा मिली।

Year 1934

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक नेटवर्क को नई गति मिली।

नए क्षेत्रों में शाखा विस्तार और संपर्क अभियान

विभिन्न प्रांतों में शाखा विस्तार की शुरुआत की गई। स्वयंसेवकों के माध्यम से समाज संपर्क और संगठन निर्माण गतिविधियों को आगे बढ़ाया गया।

स्वयंसेवक संपर्क और संगठन नेटवर्क सुदृढ़ीकरण

विभिन्न शहरों और क्षेत्रों में स्वयंसेवक संपर्क कार्यक्रमों को विस्तार दिया गया। युवाओं को संगठन से जोड़ने के प्रयास किए गए।

Year 1933

स्वयंसेवक नेटवर्क और संगठन संपर्क गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिला।

Year 1932

संगठन प्रशिक्षण व्यवस्था और संचालन को स्थिर आधार मिला।

संगठनात्मक गतिविधियों का विस्तार और प्रशिक्षण सुदृढ़ीकरण

शाखा गतिविधियों और स्वयंसेवक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को व्यवस्थित किया गया। संगठन संचालन को सुदृढ़ करने के प्रयास किए गए।

प्रशिक्षण और शाखा प्रणाली का विकास

स्वयंसेवक प्रशिक्षण और शाखा संचालन प्रणाली को मजबूत किया गया। नेतृत्व विकास और संगठनात्मक गतिविधियों को सुदृढ़ किया गया।

Year 1931

संगठन संरचना और प्रशिक्षण व्यवस्था को नई मजबूती मिली।

स्वतंत्रता आंदोलन में स्वयंसेवक सहभागिता

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान स्वयंसेवकों ने समाज जागरण और राष्ट्र चेतना को बढ़ावा देने के प्रयास किए। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ किया गया।

Year 1930

राष्ट्र चेतना और समाज जागरण को प्रारंभिक राष्ट्रीय पहचान मिली।

Year 1929

स्वयंसेवक निर्माण और संगठन विस्तार को सुदृढ़ आधार मिला।

संगठन विस्तार और स्वयंसेवक निर्माण गतिविधियाँ

शाखा विस्तार और स्वयंसेवक संपर्क कार्यक्रमों को गति दी गई। संगठनात्मक गतिविधियों को व्यवस्थित करने के प्रयास किए गए।

समाज संपर्क और संगठनात्मक संरचना का विकास

विभिन्न क्षेत्रों में समाज संपर्क गतिविधियों को विस्तार दिया गया। संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए गए।

Year 1928

संगठन संरचना और समाज जुड़ाव को नई दिशा मिली।

Year 1927

शाखा प्रणाली संगठन की मूल संरचना के रूप में स्थापित हुई।

शाखा प्रणाली का औपचारिक विस्तार

नियमित शाखाओं के माध्यम से स्वयंसेवक प्रशिक्षण और अनुशासन व्यवस्था को व्यवस्थित किया गया। युवाओं को संगठन से जोड़ने के लिए शाखा गतिविधियों को प्रमुख आधार बनाया गया।

संगठन निर्माण और प्रारंभिक विस्तार प्रयास

स्थापना के बाद संगठन निर्माण और स्वयंसेवक संपर्क गतिविधियों को गति दी गई। प्रारंभिक शाखा विस्तार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की नींव रखी गई।

Year 1926

संगठनात्मक आधार और स्वयंसेवक निर्माण को प्रारंभिक दिशा मिली।

Year 1925

राष्ट्र आधारित संगठन निर्माण और स्वयंसेवक प्रशिक्षण की ऐतिहासिक शुरुआत हुई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना

नेतृत्व और प्रमुख पहल
सरसंघचालक - डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार
विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। संगठन का उद्देश्य राष्ट्र चेतना, अनुशासन और समाज संगठन के माध्यम से स्वयंसेवक निर्माण करना था।