‘औरंगजेब ने ही तोड़ा था काशी विश्वनाथ मंदिर’, जिस पर शर्म आनी चाहिए थी, वही बात गर्व से इंदिरा गांधी के वक्फ मंत्री ने राज्यसभा में स्वीकार की

हमारे देश का इतिहास गौरवशाली तो है, लेकिन इसमें कुछ ऐसे काले पन्ने भी हैं, जो आज भी लोगों को दुख पहुंचाते हैं। इन्हीं में से एक है काशी विश्वनाथ मंदिर का विध्वंस, जिसे मुगल शासक औरंगजेब ने तोड़ा था। यह घटना लाखों लोगों की आस्था पर चोट करती है।

हाल ही में यह बात संसद की कार्यवाही में सामने आई कि इंदिरा गांधी सरकार में क़ानून और वक़्फ़ मंत्री रहे मोहम्मद यूनुस सलीम ने राज्यसभा में गर्व से कहा था कि “न्यायप्रिय औरंगजेब ने काशी में विश्वनाथ मंदिर को तोड़ा था।” इस बयान से यह साफ होता है कि कांग्रेस ने न सिर्फ इतिहास के इन दुखद अध्यायों को स्वीकार किया, बल्कि उन्हें सही ठहराने की कोशिश भी की।

इतिहास पर गर्व या शर्म?

औरंगजेब का शासनकाल धार्मिक कट्टरता और अत्याचार का प्रतीक माना जाता है। उनके द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ना सिर्फ एक इमारत का विनाश नहीं था, बल्कि यह लाखों हिंदुओं की आस्था पर हमला था। लेकिन कांग्रेस सरकार में मंत्री ने इसे “गर्व” के साथ पेश किया। सवाल यह है कि एक ऐसी घटना, जिसने करोड़ों लोगों को तकलीफ दी, उस पर गर्व करना किस हद तक सही है?

कांग्रेस का यह रवैया दिखाता है कि वे भारत के इतिहास और संस्कृति को समझने और सम्मान देने में विफल रहे हैं। यह उनकी राजनीति का हिस्सा रहा है कि वे वोट बैंक के लिए इतिहास के दर्दनाक पहलुओं को भी सही ठहराने से नहीं चूकते।

कांग्रेस की ऐतिहासिक गलतियां

कांग्रेस ने हमेशा अपने शासनकाल में ऐसे फैसले लिए, जिनसे हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची। चाहे वह आपातकाल हो, शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटना हो, या फिर राम मंदिर निर्माण को सालों तक लटकाना। इसी कड़ी में मोहम्मद यूनुस सलीम का यह बयान भी कांग्रेस की सोच को दर्शाता है।

जब एक मंत्री संसद में यह कहता है कि औरंगजेब का मंदिर तोड़ना न्यायप्रिय था, तो यह न केवल हिंदू समाज का अपमान है, बल्कि यह इतिहास के काले अध्यायों पर गर्व करने जैसा है। कांग्रेस की यह नीति दिखाती है कि उनके लिए वोट बैंक राजनीति ज्यादा मायने रखती है, बजाय इसके कि वे समाज को जोड़ने का काम करें।

इतिहास से सीखने की जरूरत

इतिहास को हमेशा सीखने का माध्यम होना चाहिए, न कि गर्व करने का। जो घटनाएं लोगों को तकलीफ देती हैं, उन पर गर्व करना समाज में विभाजन और नफरत फैलाने का काम करता है। औरंगजेब का काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ना एक गलत काम था, जिसे किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता।

कांग्रेस की गलती यह है कि उन्होंने न केवल इसे सही ठहराने की कोशिश की, बल्कि इसे “गर्व” के रूप में प्रस्तुत किया। यह रवैया दिखाता है कि कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति को प्राथमिकता दी और समाज के एक बड़े हिस्से की भावनाओं को अनदेखा किया।

कांग्रेस ने हमेशा इतिहास के काले पहलुओं को छुपाने या उन्हें सही ठहराने की कोशिश की है। लेकिन यह देश अब समझ चुका है कि ऐसी राजनीति ने हमें केवल बांटने का काम किया है। हमें इतिहास से सबक लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी गलतियां दोबारा न हों।

आज वक्त है कि हम अपने गौरवशाली अतीत को याद करें, लेकिन उन घटनाओं को भी पहचानें, जिन्होंने समाज को तकलीफ पहुंचाई। और सबसे जरूरी बात, ऐसी राजनीति को नकारें जो तुष्टिकरण के लिए इतिहास का दुरुपयोग करती है।

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