भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने 2022 में हारी और जीती सीटों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर एक खास योजना बनाई है। हारी हुई सीटों के लिए 6 और जीती हुई सीटों के लिए 4 हिस्से बनाए गए हैं।
2022 में बीजेपी ने 370 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 255 सीटों पर जीत मिली थी। अब पार्टी मिशन-27 के तहत हारी हुई सीटों पर ध्यान दे रही है, खासकर मैनपुरी, रायबरेली और आजमगढ़ की 20 सीटों पर, जहां सपा-कांग्रेस का असर है।
हारी हुई सीटों में पहला हिस्सा उन सीटों का है जहां 2022 में बीजेपी दूसरे नंबर पर रही। इन पर पन्ना प्रमुखों को सक्रिय करने की योजना है। दूसरा हिस्सा उन सीटों का है जहां बीजेपी तीसरे स्थान पर रही। यहां संभावित प्रत्याशियों की रिपोर्ट बनाई जाएगी और नियमित बैठकें होंगी। तीसरा हिस्सा मैनपुरी, रायबरेली और आजमगढ़ जैसी सीटें हैं, जहां सपा या कांग्रेस का पुराना प्रभाव है। इन पर केंद्रीय पदाधिकारियों को लगातार काम पर रखा जाएगा। चौथा हिस्सा उन सीटों का है जहां 2022 में हार के बाद उपचुनाव में जीत मिली। इनकी जिम्मेदारी उसी टीम को दी जाएगी जिसने उपचुनाव जिताया। पांचवां हिस्सा सहयोगी दलों की हारी हुई सीटें हैं, जहां बीजेपी और सहयोगी मिलकर रणनीति बनाएंगे। छठा हिस्सा मुस्लिम बाहुल्य सीटें हैं जहां बीजेपी हारी थी। इन पर अल्पसंख्यक मोर्चे को सक्रिय कर मुस्लिम वोटों को जोड़ने की कोशिश होगी।
जीती हुई सीटों में पहला हिस्सा उन सीटों का है जहां 2022 में भारी बहुमत से जीत मिली। इन पर पुरानी टीम ही काम करेगी। दूसरा हिस्सा 2017 में हारी, लेकिन 2022 में जीती गई सीटें हैं। यहां बूथवार देखा जाएगा कि 2017 में कमजोर बूथों पर 2022 में सुधार कैसे हुआ। तीसरा हिस्सा उन सीटों का है जहां दूसरे दलों से आए नेताओं ने टिकट पर जीत हासिल की। इनका प्रत्याशी और पार्टी का योगदान तय होगा। चौथा हिस्सा मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों की जीती सीटें हैं, जैसे रामपुर और कुंदरकी। इन पर खास निगरानी और अलग रणनीति होगी।
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, इस योजना का मकसद 2027 तक हर सीट पर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना है। खास ध्यान 2022 में हारी सीटों पर है, ताकि अगले चुनाव में कोई कमी न बचे।