नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के एक संवेदनशील इलाके में मंगलवार को हालात उस वक्त बिगड़ गए, जब मस्जिद के पास बने अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। शुरुआत में सामान्य दिख रही यह प्रक्रिया अचानक तनाव में बदल गई। कुछ ही देर में पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हालात को संभालने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा और इलाके में कड़ी निगरानी शुरू कर दी गई।
कार्रवाई की पृष्ठभूमि
इस इलाके में लंबे समय से यह शिकायत सामने आ रही थी कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण फैलता जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि पहले भी कई बार नोटिस दिए गए थे और लोगों से खुद अतिक्रमण हटाने को कहा गया था। जब तय समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब अदालती निर्देशों के तहत प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
कार्रवाई के दिन नगर निगम की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची। मकसद साफ था—अवैध निर्माण हटाना और कानून व्यवस्था बनाए रखना।
माहौल कैसे बिगड़ा
जैसे ही मशीनें चलनी शुरू हुईं, स्थानीय लोगों के एक हिस्से ने विरोध जताना शुरू कर दिया। पहले बहस हुई, फिर नारेबाजी बढ़ी और धीरे-धीरे हालात हाथ से निकलने लगे। कुछ लोगों ने पुलिस की ओर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए, जिससे मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को पीछे हटना पड़ा।
पुलिस ने भीड़ को शांत करने की कोशिश की, लेकिन जब स्थिति बिगड़ने लगी तो हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसी दौरान कई जगह भगदड़ जैसे हालात बन गए।
आगजनी से बढ़ी दहशत
पत्थरबाजी के बीच आगजनी की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। सड़क किनारे रखे सामान और ठेलों में आग लगा दी गई। धुएं और शोर के बीच लोग इधर-उधर भागते नजर आए। दमकल विभाग को तुरंत बुलाया गया, जिसने आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक कुछ संपत्ति को नुकसान हो चुका था।
पुलिसकर्मी घायल, सुरक्षा सख्त
इस झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालात को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने अतिरिक्त पुलिस बल और दंगा नियंत्रण इकाइयों को मौके पर भेजा। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बढ़ा दी गई।
प्रशासन का साफ रुख
प्रशासन ने दो टूक कहा है कि यह कार्रवाई किसी धर्म या धार्मिक स्थल के खिलाफ नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक मामला केवल अवैध अतिक्रमण का है, जिसे हटाना कानूनन जरूरी था। उनका कहना है कि कानून सभी पर बराबर लागू होता है और अदालत के आदेशों का पालन करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसी दायरे में यह कार्रवाई की गई है।
हिंसा करने वालों पर कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि जो लोग हिंसा में शामिल थे, उनकी पहचान की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और मौके पर मौजूद सबूतों के आधार पर कार्रवाई होगी। प्रशासन ने साफ किया है कि कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
स्थानीय लोगों की बात
वहीं इलाके के कुछ लोगों का कहना है कि कार्रवाई से पहले पर्याप्त बातचीत नहीं हुई, जिससे नाराज़गी बढ़ी। कई लोगों को यह भी चिंता है कि अचानक हुई कार्रवाई से उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी और कामकाज प्रभावित हुआ। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी आवाज उठी कि हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है और शांति बनाए रखना जरूरी है।
बाजार और ट्रैफिक पर असर
घटना के बाद आसपास के बाजारों में दुकानें देर तक बंद रहीं। सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर ट्रैफिक रोका गया या डायवर्ट किया गया। इससे आम लोगों को आने-जाने में दिक्कत हुई। शाम होते-होते हालात कुछ हद तक सामान्य हुए, लेकिन पुलिस की मौजूदगी बनी रही।
प्रशासन अलर्ट, निगरानी जारी
फिलहाल प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हैं। इलाके में लगातार गश्त हो रही है और किसी भी अफवाह पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शांति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
बड़ा सवाल फिर सामने
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि संवेदनशील इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कैसे और किस तरीके से होनी चाहिए। जानकार मानते हैं कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन साथ ही संवाद और समयबद्ध प्रक्रिया तनाव को कम कर सकती है।
मौजूदा हालात
अभी स्थिति नियंत्रण में है। पुलिस बल मौके पर तैनात है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने साफ किया है कि शांति भंग करने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि आम लोगों से सहयोग और संयम बनाए रखने की अपील की गई है।
