KGMU धर्मांतरण केस में बड़ा खुलासा… आरोपी रमीज के PFI कनेक्शन उजागर, मोबाइल डेटा से नेटवर्क बेनकाब

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े धर्मांतरण और शोषण के मामले में जांच अधिकारी एक बड़ा खुलासा कर चुके हैं। मुख्य आरोपी डॉक्टर रमीज़ मलिक के मोबाइल डेटा की पड़ताल में उसके PFI (Popular Front of India) से संलिप्तता के संकेत मिले हैं। इससे केस की गंभीरता और नेटवर्क की विस्तृत रूपरेखा सामने आ रही है।

पुलिस ने जब रमीज़ के पास से मोबाइल फोन बरामद किया, तो उसमें उसकी चैट, कॉल रिकॉर्ड और नेटवर्किंग डेटा से पता चला कि वह फरारी के दौरान कई लोगों से लगातार संपर्क में था, जिनके संबंध PFI से बताए जा रहे हैं। जांच में यह भी पता चला कि रमीज़ ने संभावित रूप से इस संगठन से कानूनी सलाह और सहायता लेने की कोशिश की थी, और उसके फोन में इसके प्रमाण मिल गए हैं।

साथ ही, रमीज़ के पुराने फोन से डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर किया गया है और उसकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। अधिकारी मान रहे हैं कि इससे PFI से जुड़े नेटवर्क और आपसी संबंधों की परतें खुल सकती हैं, और इस मामले में शामिल संभावित रैकेट की व्यापकता का अहसास हो सकेगा।

जांच में यह भी सामने आया है कि रमीज़ के पिता सलीमुद्दीन के PFI से पुराने संबंध रहे हैं। बताया गया है कि संगठन की ओर से उसके पिता को सम्मान और सहायता भी प्राप्त हुई थी, जो अब जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु है।

इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि KGMU परिसर में किसी भी तरह के शोषण या अवैध गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मामले की गहराई से जांच किए जाने की आवश्यकता है और दोषियों को बकायदा कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जाएगी।

पुलिस ने पहले ही डॉक्टर रमीज़ मलिक को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर इनाम भी घोषित किया गया था और वह लगभग 16 दिनों तक फरार रहा था। उसके माता-पिता को भी हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। अब तक की पूछताछ, मोबाइल डेटा और अन्य रिकार्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।

इस मामले की जांच UP स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपने की सिफारिश की गई है, ताकि पूरे नेटवर्क के खिलाफ गहन जांच की जा सके और इसमें संलिप्त अन्य संदिग्धों की पहचान भी हो सके।

यह मामला KGMU की प्रतिष्ठा के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है और जांच को पारदर्शी तथा निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाए जाने पर बल दिया जा रहा है ताकि सभी तथ्य सामने आएँ और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जा सके।

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