महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अजित पवार के निधन के बाद राज्य सरकार और एनसीपी दोनों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। उनके अचानक चले जाने से न केवल पार्टी में नेतृत्व का खालीपन पैदा हुआ है, बल्कि महायुति सरकार के भीतर भी विभागों के बंटवारे को लेकर मंथन तेज हो गया है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हो सकता है।
अजित पवार के पास वित्त, योजना, उत्पाद शुल्क (एक्साइज) जैसे अहम विभाग थे। इसके अलावा खेल एवं युवा कल्याण तथा अल्पसंख्यक विकास का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हीं के पास था। उनके निधन के बाद ये सभी विभाग फिलहाल खाली हैं। एनसीपी के भीतर इस बात पर आम सहमति बनती दिख रही है कि ये प्रमुख विभाग पार्टी के पास ही बने रहने चाहिए। इसी को लेकर महायुति सहयोगी दलों के साथ चर्चा जारी है।
सूत्रों के अनुसार, एनसीपी की इस मांग पर भाजपा और शिवसेना ने फिलहाल कोई आपत्ति नहीं जताई है। पार्टी जब यह तय कर लेगी कि इन विभागों की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए, उसके बाद ही मंत्रिमंडल में औपचारिक बदलाव किया जाएगा। इसी बीच उपमुख्यमंत्री पद को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।
अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। एनसीपी (अजित पवार गुट) के कई नेताओं ने इस मांग का खुलकर समर्थन किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री नरहरि झिरवाल ने कहा है कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाना अजित पवार को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनके अनुसार, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की यही भावना है कि ‘वहिनी’ को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए।
अजित पवार के निधन को महाराष्ट्र की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनके जाने से एनसीपी और महायुति—दोनों के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि एनसीपी नया नेतृत्व किसे सौंपती है और उपमुख्यमंत्री पद तथा अहम विभागों की जिम्मेदारी किसके हाथों में जाती है। आने वाले दिनों में इन सवालों पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
