राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को भी समान सम्मान दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार नया प्रोटोकॉल बनाने की तैयारी में है। सरकार चाहती है कि वंदे मातरम के गायन के समय भी वही गरिमा और अनुशासन अपनाया जाए, जो राष्ट्रगान के दौरान होता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में गृह मंत्रालय की एक उच्च-स्तरीय बैठक में इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई। संविधान में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत—दोनों को समान सम्मान दिया गया है, लेकिन व्यवहार और नियमों के स्तर पर दोनों के बीच अभी बड़ा अंतर है।
वर्तमान में राष्ट्रगान के समय खड़ा होना अनिवार्य है और इसका अपमान करने पर कानून के तहत सज़ा का प्रावधान भी है। इसके विपरीत, वंदे मातरम के लिए न तो खड़े होने की कोई कानूनी बाध्यता है और न ही कोई स्पष्ट लिखित प्रोटोकॉल मौजूद है।
इसी अंतर को खत्म करने के लिए सरकार राष्ट्रीय गीत से जुड़े नियमों पर विचार कर रही है। बैठक में यह सवाल उठे कि क्या वंदे मातरम के गायन के समय, स्थान और तरीके को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं, क्या इसके दौरान खड़ा होना अनिवार्य किया जाए और क्या इसके अपमान पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब सरकार वंदे मातरम से जुड़े साल-भर के कार्यक्रम आयोजित कर रही है। वहीं, बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के चलते राष्ट्रीय गीत के महत्व को कम किया। कांग्रेस इस आरोप को खारिज करते हुए इसे इतिहास से छेड़छाड़ बताती है।
वंदे मातरम को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। बीते वर्षों में अदालतों में कई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनमें मांग की गई कि राष्ट्रीय गीत के लिए भी राष्ट्रगान जैसा ही ढांचा तैयार किया जाए। हालांकि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि अभी तक राष्ट्रीय गीत के लिए किसी तरह का दंडात्मक कानून लागू नहीं किया गया है।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम देशभक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरा था। अब सरकार की कोशिश है कि इस राष्ट्रीय गीत को फिर से वही सम्मान और गौरवपूर्ण स्थान दिलाया जाए।
