लव जिहाद मामला: पहचान छुपाकर नाबालिग छात्रा को फंसाने की साजिश उजागर

लव जिहाद मामला: पहचान छुपाकर नाबालिग छात्रा को फंसाने की साजिश उजागर

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में लव जिहाद का एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने समाज, अभिभावकों और प्रशासन—तीनों को झकझोर कर रख दिया है। आरोप है कि अफजल नामक युवक ने अपनी वास्तविक पहचान छुपाकर स्वयं को “कृष्णा उर्फ राजीव” बताया, हाथ में कलावा बांधा, माथे पर टीका लगाया और धार्मिक आस्था का दिखावा करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर घूमता रहा। इसी छलावे के बीच उसने एक नाबालिग हिंदू छात्रा को अपने जाल में फंसाया।

जानकारी के अनुसार, आरोपी ने पहले छात्रा से दोस्ती बढ़ाई और भरोसा जीतने के लिए स्वयं को हिंदू दर्शाया। वह प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हनुमत धाम पर जाने का दिखावा भी करता रहा, ताकि उसकी पहचान पर कोई संदेह न हो। इस दौरान उसने छात्रा के कुछ फोटो और वीडियो हासिल किए, जिन्हें बाद में कथित तौर पर फर्जी तरीके से एडिट कर लिया गया। इन्हीं संपादित सामग्रियों के आधार पर छात्रा को डराने-धमकाने का सिलसिला शुरू हुआ और उस पर दबाव बनाकर छेड़छाड़ जैसी आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया गया।

मामला तब सामने आया जब आरोपी की हरकतें सीमा लांघने लगीं और छात्रा ने साहस दिखाते हुए अपने परिजनों को पूरी बात बताई। परिजनों की शिकायत के बाद स्थानीय स्तर पर हलचल मच गई। सूचना मिलते ही हिंदूवादी संगठनों ने कड़ा विरोध जताया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। समाज में इस तरह की घटनाओं से पैदा हो रहे भय और असुरक्षा को देखते हुए प्रशासन भी हरकत में आया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी अफजल के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में पहचान छुपाने, नाबालिग को बहकाने, डिजिटल सामग्री के दुरुपयोग और धमकी जैसे आरोपों की पुष्टि होने की बात कही जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक पड़ताल कराई जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और घटना के हर पहलू का खुलासा हो सके।

इस घटना ने एक बार फिर अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के सामने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि नाबालिगों की सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता को लेकर और सख्त कदम उठाने की जरूरत क्यों है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहचान छुपाकर विश्वास जीतने की प्रवृत्ति पर कड़ी निगरानी, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर प्रशिक्षण समय की मांग है।

फिलहाल, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषी को कठोर सजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि कानून के दायरे में रहते हुए मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और समाज में शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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