सभी राज्यों में बढ़ेंगी लोकसभा की 50 फीसदी सीटें, महिलाओं के लिए 272 रिजर्व – कानून मंत्री

केंद्र सरकार लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण (Delimitation) और महिलाओं के लिए बड़े आरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण योजना पर काम कर रही है। कानून मंत्री द्वारा दिए गए हालिया बयान के अनुसार, देशभर में लोकसभा सीटों की संख्या में करीब 50 फीसदी तक बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए 272 सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है, जो भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।

फिलहाल लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं। यदि इनमें 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो यह संख्या लगभग 800 के आसपास पहुंच सकती है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य देश की बढ़ती जनसंख्या और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को बेहतर बनाना है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा सीटें आज की जनसंख्या के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए यह कदम लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।

महिलाओं के लिए 272 सीटों का आरक्षण भी इस योजना का एक अहम हिस्सा है। यह कदम लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण के मुद्दे को सुलझाने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है। अगर यह लागू होता है, तो लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी में भारी वृद्धि देखने को मिलेगी, जिससे नीति-निर्माण में महिलाओं की आवाज और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।

हालांकि, इस प्रस्ताव के लागू होने से पहले परिसीमन प्रक्रिया (Delimitation) जरूरी होगी। यह प्रक्रिया जनगणना के आंकड़ों के आधार पर होती है, जिसमें हर राज्य को उसकी जनसंख्या के अनुसार सीटें दी जाती हैं। वर्तमान में 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण हुआ था, जिसे लंबे समय से अपडेट नहीं किया गया है। अब 2026 के बाद नई जनगणना के आधार पर यह प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कुछ दक्षिणी राज्यों को चिंता है कि नई सीटों के निर्धारण से उनकी राजनीतिक ताकत कम हो सकती है, क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि दर उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में कम रही है। वहीं, उत्तर भारत के कई राज्य इसे अपने लिए फायदेमंद मान रहे हैं।

कानून मंत्री का कहना है कि सरकार इस प्रक्रिया को पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से लागू करेगी, ताकि किसी भी राज्य के साथ भेदभाव न हो। साथ ही, महिलाओं के लिए आरक्षण को भी संतुलित और प्रभावी ढंग से लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

कुल मिलाकर, लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी और महिलाओं के लिए आरक्षण का यह प्रस्ताव भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे न केवल प्रतिनिधित्व बेहतर होगा, बल्कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी भी एक नई ऊंचाई पर पहुंचेगी।

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