टीसीएस नासिक केस: यौन उत्पीड़न, बलात्कार और धर्मांतरण के आरोपों में बड़ा अपडेट
देश की अग्रणी आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (टीसीएस) से जुड़े नासिक मामले में एक अहम मोड़ सामने आया है। इस बहुचर्चित केस में मानव संसाधन (एचआर) अधिकारी निदा खान के फरार होने की खबर ने जांच को और गंभीर बना दिया है। मामले में पहले ही प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जा चुकी है और जांच एजेंसियां सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रही हैं।
अब तक क्या हुआ है?
प्राथमिकी के अनुसार, यह मामला कई वर्षों से चल रहे कथित उत्पीड़न से जुड़ा है। आठ महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2022 से लेकर 2026 की शुरुआत तक उनके साथ लगातार यौन उत्पीड़न, बलात्कार, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की गई। शिकायतों में यह भी कहा गया है कि समय रहते इन मामलों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई।
इस केस में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें आसिफ अंसारी, दानिश शेख, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तार के साथ-साथ यौन उत्पीड़न रोकथाम तंत्र (पोश) से जुड़े संचालन प्रबंधक अश्विन चैनानी भी शामिल हैं। वहीं, एचआर अधिकारी निदा खान फिलहाल फरार बताई जा रही हैं।
पोश और एचआर विभाग पर सवाल
इस पूरे मामले में कंपनी के यौन उत्पीड़न रोकथाम तंत्र (पोश) और मानव संसाधन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कई शिकायतों के बावजूद समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे पीड़ित महिलाओं को लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
फिलहाल इस मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईआईटी) द्वारा की जा रही है, जो सभी आरोपों की विस्तृत जांच कर रहा है।
प्राथमिकी में क्या-क्या सामने आया?
इस मामले में कुल 9 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें अलग-अलग टीमों और समय अवधि के दौरान हुए कथित दुर्व्यवहार का विवरण दिया गया है। शिकायतों के अनुसार:
- कार्यालय परिसर में अनुचित तरीके से छूना और शारीरिक नजदीकी बनाने की कोशिश
- महिलाओं की निजी जिंदगी और वैवाहिक जीवन पर अश्लील टिप्पणियां
- बैठकों के दौरान गलत तरीके से घूरना और अशोभनीय इशारे करना
- बार-बार अनचाही बातचीत या संपर्क बनाने की कोशिश
एक महिला ने आरोप लगाया कि तौसीफ अत्तार ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। बाद में उसे धमकाया गया और कथित रूप से धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला गया।
अन्य शिकायतों में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को अपमानित किया जाता था, उन्हें संतान न होने पर ताने दिए जाते थे और उनकी धार्मिक भावनाओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती थीं।
कंपनी का आधिकारिक बयान
Tata Consultancy Services (टीसीएस) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के दायरे में आए सभी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। कंपनी ने कहा है कि वह कानूनी एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।
कंपनी के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने इन आरोपों को बेहद चिंताजनक और दुखद बताया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कंपनी की नीति और शिकायत प्रक्रिया
कंपनी के अनुसार, कर्मचारियों के लिए एक औपचारिक शिकायत निवारण प्रणाली मौजूद है, जिसके तहत उत्पीड़न और मानवाधिकार से जुड़े मामलों की शिकायत दर्ज की जा सकती है।
- शिकायतों की गोपनीय तरीके से जांच की जाती है
- सही पाए जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है
- शिकायतकर्ता के खिलाफ किसी प्रकार की प्रताड़ना या बदले की कार्रवाई नहीं की जाती
- कंपनी “शून्य सहनशीलता” नीति अपनाती है
कानून क्या कहता है?
भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2013 लागू है। इसके तहत:
- हर कंपनी में एक आंतरिक समिति का गठन अनिवार्य है
- शिकायत मिलने के 90 दिनों के भीतर जांच पूरी होनी चाहिए
- दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है
- पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाती है
हालांकि, इस मामले में आरोप है कि इन प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ।
बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ वर्षों में टीसीएस में यौन उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि देखी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
- 2025 में 125 शिकायतें
- 2024 में 110 शिकायतें
- 2023 में 49 शिकायतें
- 2022 में 36 और 2021 में 27 मामले दर्ज हुए
कंपनी ने इन बढ़ते आंकड़ों का कारण जागरूकता में वृद्धि को बताया है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
आगे क्या?
इस मामले की आंतरिक जांच का नेतृत्व कंपनी की मुख्य परिचालन अधिकारी Aarthi Subramanian कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त और उचित कार्रवाई की जाएगी।
Tata Consultancy Services (टीसीएस) से जुड़ा यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे कॉर्पोरेट ढांचे और कार्यस्थल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और पीड़ितों को कितना न्याय मिल पाता है। यह केस भविष्य में कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख भी बन सकता है कि शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लेना कितना आवश्यक है।
