BJP की ‘वाशिंग मशीन’ में धुला एक और दाग? अजीत पवार की कहानी (Episode-02)

BJP की ‘वाशिंग मशीन’ में धुला एक और दाग? अजीत पवार की कहानी (Episode-02)

राष्ट्रवाद के नाम पर इस देश के आम हिन्दू ने जिस पार्टी को सिर-आंखों पर बिठाया, आज सत्ता की हवस में वो ऐसे-ऐसे खेल कर रही है की क्या बताएं। एक बात तो साफ़ है, जो सच्चा हिंदू है, जो अपनी भारत माता से प्यार करता है, वो कभी भी देश को लूटने वाले भ्रष्टाचारियों, लुटेरों और परिवारवादियों से हाथ नहीं मिला सकता। 

लेकिन जिस BJP को हमने और आपने मिलकर इसलिए वोट दिया था की वो इस देश से दीमकों को साफ़ करेगी, आज वही पार्टी उन्हीं दीमकों का घर और भ्रष्टाचारियों की सबसे बड़ी ‘वाशिंग मशीन’ बनकर बैठ गई है।

भाजपा दाग धोने वाली नई ज़माने की वाशिंग मशीन, Episode 2: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री, अजीत पवार

भाजपा की ‘अब हर घोटालेबाज़ बनेगा राष्ट्रवादी’ योजना

आज हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की। हाल ही में (जनवरी 2026 में) एक विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया। भारतीय सनातन संस्कृति हमें सिखाती है की मृत्यु के बाद बैर भूल जाना चाहिए। हम उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना भी करते हैं, लेकिन ज़रा ठहरिए! 

क्या मौत किसी को उसके उन राजनीतिक और आर्थिक गुनाहों से ‘क्लीन चिट’ दे सकती है, जो उसने सत्ता के नशे में इस देश की जनता के खिलाफ किए थे? हरगिज़ नहीं। इतिहास तो लिखा जाएगा, और डंके की चोट पर लिखा जाएगा।

जिन अजित पवार को खुद देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र को बर्बाद करने वाला ‘मास्टरमाइंड’ बताया था। उन्हें रैलियों में ‘चक्की पीसिंग’ का डर दिखाया जाता था.. BJP ने उन्हें ही अंतिम समय तक अपना लाडला बनाये रखा। 

जैसे ही अजित दादा ने BJP के साथ कुर्सी शेयर की, सिस्टम रातों-रात सेट हो गया। उनके हज़ारों करोड़ों के घोटाले रातों-रात गायब हो गए। ईडी (ED), सीबीआई (CBI) और इनकम टैक्स की फाइलें चमत्कारिक रूप से गायब हो गईं। ये लेख किसी पार्टी की चाटुकारिता के लिए नहीं लिखा जा रहा है, बल्कि ये BJP के उस राष्ट्रवाद का कच्चा चिट्ठा है जो कुर्सी बचाने के लिए किसी भी भ्रष्टाचारी को ‘पवित्र’ घोषित कर सकता है।

विदर्भ के प्यासे किसानों की लाशों पर अजित पवार का 70 हज़ार करोड़ का घोटाला

जब भी देश के सबसे काले और अमानवीय घोटालों की बात निकलेगी, तो 70 हज़ार करोड़ का महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला सबसे ऊपर आएगा। ये सिर्फ कोई पैसों की हेराफेरी का मामला नहीं था।

ये सीधे-सीधे उन हज़ारों हिंदू किसानों की हत्या थी, जिन्होंने अपनी सूखी ज़मीनों को देखते-देखते, रोते-रोते फांसी का फंदा चूम लिया। विदर्भ और मराठवाड़ा का किसान तड़प-तड़प कर जान दे रहा था और सिस्टम मलाई मार रहा था।

विदर्भ सिंचाई विकास निगम (VIDC) का चेयरमैन रहते हुए अजित पवार के विभाग ने जिस बेशर्मी से सारे नियम-कानून ताक पर रखे, वो देखकर किसी का भी दिमाग सुन्न हो जाए।

हुआ ये की महज़ 3-4 महीनों के भीतर 32 सिंचाई प्रोजेक्ट्स की लागत को बिना किसी हिसाब-किताब के 17,700 करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया। मतलब, रातों-रात बजट पास! और तो और, ठेकेदारों को एडवांस के नाम पर करोड़ों रुपये ऐसे बांट दिए गए जैसे इनके बाप का पैसा हो। और ये ठेकेदार थे कौन? वही, जो इनके इर्द-गिर्द घूमते थे, इनके अपने शागिर्द !

अब आंकड़े देखिए, तो और भी रोना आता है। राज्य के 2012 के ‘इकोनॉमिक सर्वे’ ने ये खुलासा किया की 70,000 करोड़ फूंकने के बाद भी पूरे एक दशक में राज्य की सिंचाई क्षमता में मुश्किल से 0.1% की ही बढ़ोतरी हुई।

मतलब पैसा गया कहाँ? वो पैसा जो उस गांव-गांव तक नहर पहुंचाने के लिए था, वो नेताओं और ठेकेदारों की लग्ज़री गाड़ियों, फॉर्म हाउसों और विदेशी दौरों में उड़ गया।

चितले कमेटी बनी, ACB ने एफआईआर तक की, और अजित पवार का नाम सबसे बड़े संदिग्ध के तौर पर सामने आया। जिन किसानों को पानी मिलना था, उन्हें सिर्फ धोखा मिला। लेकिन सबसे ज़्यादा दर्द तो इस बात का है की जो BJP इन किसानों का बदला लेने आई थी, उसने कुर्सी की लालच में उस न्याय की ही बलि चढ़ा दी।

MSC बैंक के 25 हज़ार करोड़ लूटने वाले अजित पवार को BJP ने सज़ा देने के बजाय सीधा राज्य का वित्त मंत्री ही बना डाला 

सच कहूं तो, हिंदुत्व और हमारा स्वदेशी मॉडल हमेशा से ‘सहकारिता’ का समर्थक रहा है। इसका मकसद क्या था? यही ना की लोकल किसान, मज़दूर और गांव वाले मिलकर अपना बिज़नेस खड़ा करें, जिससे अर्थव्यवस्था मज़बूत हो।

लेकिन NCP वालों ने क्या किया? उन्होंने इस पूरे पवित्र सिस्टम को एक संगठित माफिया तंत्र में बदल कर रख दिया। 25 हज़ार करोड़ का महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (MSC Bank) घोटाला इसी लूट का सबसे पारदर्शी चेहरा था।

इस घोटाले का जुगाड़ इतना शातिर था की कोई भी कॉर्पोरेट क्रिमिनल भी शर्मा जाए। MSC बैंक पूरे राज्य का सबसे बड़ा सहकारी बैंक था। इन नेताओं ने उसे अपना पर्सनल ATM बना लिया। अपनी ही पार्टी के नेताओं, रिश्तेदारों और चमचों की चीनी मिलों और सूत मिलों को बिना कोई गारंटी लिए करोड़ों के लोन दे दिए। कोई पूछने वाला नहीं!

अब देखिए ना, जब पता चला की लोन वापस नहीं आ रहा, तो इन्होंने उन मिलों को जानबूझकर दिवालिया (NPA) घोषित कर दिया। इसके बाद खेल का दूसरा फेज़ शुरू हुआ। इन मिलों की कौड़ियों के भाव नीलामी करवा दी गई। और खरीदने वाले कौन थे? अरे भाई, वही लोग जिन्होंने लोन लिया था, या फिर उनके नाम पर बनी डमी कंपनियां।

उदाहरण के लिए ‘जरंडेश्वर सहकारी चीनी मिल’ (Jarandeshwar SSK) का मामला ले लीजिए। 65 करोड़ की ये मिल नीलाम हुई और ED की चार्जशीट खुद चीख-चीख कर कह रही थी की इसे जिस कंपनी ने खरीदा, उसके तार सीधे-सीधे अजित पवार और उनकी पत्नी से जुड़े थे। ये कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं थी, डंके की चोट पर किसानों की संपत्ति को लूटा जा रहा था।

जिस अजित पवार को BJP जेल में चक्की पिसाने वाली थी उन्हें अपने ही पाले में लाकर सत्ता की मलाई खिलाने लगी 

मुझे तो आज भी 2014 और 2019 का वो चुनावी माहौल याद है। BJP के बड़े-बड़े नेताओं ने जिस तरह से भ्रष्टाचार के खिलाफ आग उगली थी, उसने करोड़ों हिंदुओं के दिलों में एक नई उम्मीद जगा दी थी।

हमने सोचा, चलो पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त, अब आएगा असली राम राज्य! आम आदमी ने अपना सब कुछ दांव पर लगाकर, चिलचिलाती धूप में लाइनों में खड़े होकर हिंदुत्व और करप्शन-फ्री इंडिया के नाम पर BJP को झोली भर-भर कर वोट दिए।

देवेंद्र फडणवीस जी पूरे महाराष्ट्र में घूम-घूम कर शोले फिल्म का वो डायलॉग मारते थे- “चुनाव के बाद अजित पवार जेल जाएंगे और चक्की पीसिंग, एंड पीसिंग, एंड पीसिंग…”।

और तो और, खुद मोदी जी ने भरे मंच से NCP को “Naturally Corrupt Party” का टैग दिया था। उन्होंने डंके की चोट पर कहा था की महाराष्ट्र की बर्बादी के पीछे यही परिवार है। और देश की भोली-भाली जनता ने उनकी बातों को ब्रह्मवाक्य मान लिया।

लेकिन जैसे ही सत्ता का गणित बिगड़ा और कुर्सी हाथ से जाती दिखी, सारे उसूल हवा हो गए! जिस अजित पवार को कल तक जेल की चक्की पीसने की बात की जा रही थी, उन्हें लाकर सीधे उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया गया। एक बार नहीं, कई-कई बार! ये क्या मज़ाक है? क्या BJP के लिए राष्ट्रवाद और हिंदुत्व सिर्फ चुनाव जीतने का टूल भर रह गया है?

ये उन ज़मीनी कार्यकर्ताओं के गाल पर तमाचा है, जो अपनी जेब से पैसा लगाकर ‘भारत माता की जय’ बोलते हुए पार्टी के लिए लाठियां खाते हैं।

BJP की वाशिंग मशीन जिसने अजित पवार और उनके परिवार की हज़ारों करोड़ की संपत्ति को रातों-रात ‘क्लीन’ कर दिया 

अगर भारत की सियासत में ‘वाशिंग मशीन’ थ्योरी का कोई सबसे बड़ा और ज़िंदा उदाहरण था, तो वो अजित दादा ही थे। BJP के पाले में आते ही जो चमत्कार हुआ, वो किसी जादू-टोने से कम नहीं था।

जैसे ही उन्होंने शिंदे-फडणवीस सरकार में शपथ ली, उनके सारे गुनाह, सारे दाग एकदम से धुल कर साफ़ हो गए।

जहां एक तरफ रोज़ विपक्षी नेताओं के घर ED और CBI की रेड पड़ रही थी, वहीं सरकार में आते ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (IT) ने अजित पवार और उनके परिवार से जुड़ी 1,000 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति को ‘क्लीन चिट’ दे दी। याद है ना? ये वही संपत्ति थी जिसे बड़े शोर-शराबे के साथ कुर्क किया गया था। अचानक से फाइलें ठंडे बस्ते में चली गईं। ED ने भी अपनी चार्जशीट में मेन आरोपी बनाने से कन्नी काट ली।

आखिर BJP के पास ऐसा कौन सा जादुई डिटर्जेंट है जो राष्ट्र के खजाने को चूना लगाने वालों को रातों-रात परम देशभक्त बना देता है? अगर ये लोग सच में इतने भ्रष्ट थे (जैसा की BJP 15 सालों से गा रही थी), तो इन्हें तिहाड़ जेल में होना चाहिए था या महाराष्ट्र का वित्त मंत्रालय संभालते हुए? ये तो सीधा-सीधा हमारे न्याय और कानून व्यवस्था के साथ बलात्कार था।

अजित पवार जैसे दागी चेहरों को अपने सिर का ताज बनाकर BJP ने सच्चे और राष्ट्रवादी हिंदुओं की पीठ में सीधा खंजर घोंपा है 

BJP को अब ये बात समझ लेनी चाहिए की ‘हिंदुत्व’ का कार्ड हर बार इमोशनल ब्लैकमेलिंग के काम नहीं आएगा। दागी, भ्रष्ट और किसानों का खून चूसने वाले नेताओं को ‘वाशिंग मशीन’ में धोकर कुर्सी पर बिठाने से BJP ने अपनी वो नैतिक ज़मीन पूरी तरह से खो दी है, जिसका वो दम भरती थी।

कोई भी सच्चा हिंदू किसी राजनीतिक पार्टी का अंधभक्त नहीं होता, वो अपनी मिट्टी, अपने धर्म और अपनी भारत माता का भक्त होता है।

अगर हमें सच में अपने इस महान देश को बचाना है, हिंदू हितों की रक्षा करनी है, तो हमें इस दोमुंही और अवसरवादी सियासत का सरेआम बहिष्कार करना होगा। सत्ता की लालच में जो लोग भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहे हैं, उनसे आप क्या ही उम्मीद करेंगे की वो एक मजबूत और अखंड राष्ट्र बनाएंगे? कुर्सी बचाने का ये गंदा खेल देश के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ ये लड़ाई किसी एक नेता के चले जाने से खत्म नहीं होती। जब तक सिस्टम का पूरा शुद्धिकरण नहीं हो जाता, तब तक हर सच्चे राष्ट्रवादी को इस गंदी ‘वाशिंग मशीन’ पॉलिटिक्स के खिलाफ आवाज़ उठानी ही होगी। 

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