शिवलिंग पर भद्दी टिप्पणी और सनातन का मज़ाक, सयानी घोष जैसे 'राक्षसों' के लिए जेल की कालकोठरी ही सबसे सही जगह

शिवलिंग पर भद्दी टिप्पणी और सनातन का मज़ाक, सायोनी घोष जैसे ‘राक्षसों’ के लिए जेल की कालकोठरी ही सबसे सही जगह

पंद्रह साल… पूरे पंद्रह साल तक बंगाल के हिंदुओं ने अपनी ही ज़मीन पर सनातन आस्था को जिहादी राक्षशों की भेंट चढ़ते देखा था । लेकिन आख़िरकार, बंगाल की जनता ने बता ही दिया की हमारे धैर्य की भी एक सीमा होती है!

294 में से 207 सीटों का जो प्रचंड और ऐतिहासिक जनादेश इस बार भारतीय जनता पार्टी को मिला है, ये महज़ एक सत्ता परिवर्तन बिल्कुल नहीं है। ये एक वैचारिक सुनामी है। ये उस बहुसंख्यक हिंदू समाज की दहाड़ है जो रोज़-रोज़ अपनी आँखों के सामने अपने आराध्यों का जिहादियों के हाथों सरेआम चीरहरण होते हुए देखने को मजबूर था।

ममता बनर्जी और उनकी टीएमसी की वो घमंडी, हिंदू-विरोधी और मुस्लिम तुष्टिकरण वाली सरकार अब हमेशा के लिए इतिहास के कूड़ेदान में जा चुकी है। अब जब सूबे में एक पूर्ण बहुमत वाली राष्ट्रवादी और सनातनी सरकार ने कमान संभाल ही ली है, तो वक़्त आ गया है उन तमाम पुराने घावों का हिसाब-किताब बराबर करने का। और इस हिसाब की शुरुआत सबसे पहले उस गहरे घाव से होनी चाहिए जो टीएमसी की बड़बोली नेत्री सायोनी घोष ने करोड़ों शिवभक्तों के सीने पर दिया था।

हमारे आराध्य, हमारे परम-पिता महादेव का सरेआम अपमान करने वाली वो सायोनी घोष आज आज़ाद कैसे घूम सकती है? उसके ख़िलाफ़ तुरंत एक बेहद सख़्त और गैर-ज़मानती एफ़आईआर दर्ज़ होनी चाहिए और उसे कॉलर पकड़कर जेल की सलाखों के पीछे डाला जाना चाहिए। 

ये सिर्फ़ एक घमंडी नेता की गिरफ़्तारी भर नहीं होगी, ये पूरे जिहादी और सनातन-द्रोही इकोसिस्टम के गाल पर वो करारा तमाचा होगा, जिसकी गूंज दशकों तक सुनाई देगी। उन्हें समझ आ जाना चाहिए की बंगाल में अब हिंदुओं को गाली देकर अपनी भद्दी राजनीति चमकाने के दिन हमेशा के लिए लद गए हैं!

शिवरात्रि के पवित्र दिन TMC की राक्षशी सायोनी घोष के हाथों किया गया शिवलिंग का वो अभद्र अपमान

अब ज़रा पीछे चलते हैं और उस घृणित साज़िश की परतें उधेड़ते हैं। बात फ़रवरी 2015 की है। दिन था महाशिवरात्रि का। ये वो दिन है जब कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरा देश अपने शिव की भक्ति में लीन होता है।

ठीक इसी बेहद पवित्र दिन, सायोनी घोष (जो उस वक़्त महज़ एक फ़्लॉप अभिनेत्री थी और बाद में टीएमसी की आँख का तारा बन गई) के ट्विटर (X) हैंडल से एक ऐसा गंदा चित्र पोस्ट किया गया, जिसे देखकर किसी भी सच्चे सनातनी का ख़ून खौल उठे।

उस तस्वीर में एक महिला को हमारे पवित्र शिवलिंग के ठीक ऊपर एक कंडोम पहनाते हुए दिखाया गया था। मतलब नीचता की सारी हद पार कर दी गयी थी। और इस नीचता से भी इनका मन न भरा हो, तो उस भद्दे चित्र के साथ एक कैप्शन भी चिपका दिया गया- “भगवान इससे ज़्यादा उपयोगी नहीं हो सकते थे!”

ज़रा सोचिए इस सड़ी हुई मानसिकता के बारे में! शिवलिंग हमारे लिए आख़िर है क्या? ये कोई रास्ते में पड़ा पत्थर का टुकड़ा नहीं है जिसे तुम जब चाहो अपनी गंदी राजनीति के लिए इस्तेमाल कर लो। 

ये उस अनंत ब्रह्मांडीय ऊर्जा का सर्वोच्च प्रतीक है जिसका न कोई आदि है, न कोई अंत। जिस पवित्र शिवलिंग पर हम हिंदू पूरी श्रद्धा से बेलपत्र, कच्चा दूध और पवित्र गंगाजल चढ़ाते हैं, जिसे हम इस पूरी सृष्टि का आधार मानते हैं, उसे एक यौन रोग से बचाव के साधन के साथ जोड़ देना… क्या ये कोई मज़ाक था? जी नहीं, ये सनातन धर्म के खिलाफ जान बूझ कर की गयी एक साजिश थी।

और आप इनकी धृष्टता देखिए, दिन कौन सा चुना गया? महाशिवरात्रि! मतलब मक़सद शीशे की तरह साफ़ था की हिंदू समाज की भावनाओं को सबसे पवित्र दिन ही लहूलुहान करना है। आप टीएमसी और वामपंथी नेताओं की इस बीमार मानसिकता को समझिए। 

इनके दिलों में हिंदू धर्म को लेकर कितनी नफ़रत और कितना हलाहल ज़हर भरा पड़ा है, ये उस एक ट्वीट ने पूरी दुनिया के सामने नंगा कर दिया। 

इन्हें लगा की हिंदू तो बेचारे सहिष्णु होते हैं, कायर होते हैं, दो-चार दिन ट्विटर पर हो-हल्ला करेंगे और फिर अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उलझ कर सब भूल-भाल जाएंगे। और उस वक़्त सत्ता के नशे में चूर टीएमसी को लगता था की उनका वो ख़ास जिहादी वोट बैंक तो उनके साथ है ही, तो फिर इन दो कौड़ी के हिंदुओं की भावनाओं की परवाह आख़िर किसे है?

सायोनी घोष का अकाउंट हैक होने का वो बेशर्म और सफ़ेद झूठ जिसने करोड़ों हिन्दुओं के घाव पर नमक छिड़का

ख़ैर, साल बीतते गए। वामपंथी इकोसिस्टम ने उस मामले को रफ़ा-दफ़ा कर दिया। 2015 का वो ट्वीट दबा रहा। लेकिन पाप छुपता कहाँ है! 2021 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, जब यही सायोनी घोष टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ने मैदान में चौड़ी होकर उतरी, तो वो पुराना ट्वीट सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गया।

जैसे ही शिवभक्तों का दबा हुआ आक्रोश एक भयंकर ज्वालामुखी बनकर फूटा, मैडम के पसीने छूटने लगे। उन्हें लगा की अब तो राजनीतिक ज़मीन खिसक जाएगी। और फिर शुरू हुआ टीएमसी के उस इकोसिस्टम का सबसे पुराना, सबसे बेशर्म और घिसा-पिटा नाटक- “हाय राम! मेरा अकाउंट तो हैक हो गया था जी!”

बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए सायोनी ने बयान दागा की 2015 में उनका अकाउंट हैक हो गया था और वो आपत्तिजनक ट्वीट उन्होंने नहीं, बल्कि किसी ख़ुफ़िया हैकर ने किया था। साथ ही ये झूठी कहानी भी गढ़ दी की 2017 तक तो उनके पास अकाउंट का कोई एक्सेस ही नहीं था। और जैसे ही उन्हें 2021 में इसके बारे में पता चला, उन्होंने तुरंत ट्वीट डिलीट कर दिया।

अब आप ख़ुद अपने दिमाग़ पर ज़ोर डालिए और बताइए, दुनिया का कोई शातिर इंटरनेशनल साइबर हैकर किसी बंगाली अभिनेत्री का ट्विटर अकाउंट हैक करेगा, तो आख़िर वो करेगा क्या? वो या तो लाखों की फिरौती मांगेगा, या कोई बैंक डिटेल उड़ाएगा, या देश के ख़िलाफ़ कोई बड़ी साज़िश रचेगा।

लेकिन नहीं भाई! सायोनी घोष के केस में उस बेचारे हैकर को ना तो पैसे चाहिए थे, ना बैंक डिटेल। उस हैकर की ज़िंदगी का तो मानो एक ही परम लक्ष्य था- की ठीक महाशिवरात्रि वाले दिन सायोनी का अकाउंट हैक करना है और शिवलिंग पर कंडोम वाला कार्टून पोस्ट करना है! 

और सबसे बड़ी बात, चलिए एक पल के लिए उनके उस सफ़ेद झूठ को सच मान भी लें की 2017 में उन्हें अपना अकाउंट वापस मिल गया था। तो फिर 2017 से लेकर जनवरी 2021 तक (पूरे चार साल) वो घृणित ट्वीट उनकी अपनी टाइमलाइन पर कैसे पड़ा रहा? क्या वो पूरे चार साल तक अपने ही ट्विटर हैंडल को आँख पर पट्टी बांध कर चला रही थीं? 

जिहादी वोटबैंक के लिए TMC की नंगी बेशर्मी- हिन्दुओं को गाली देने वाली सायोनी घोष को ममता का सीधा प्रमोशन

इस पूरी ख़ौफ़नाक घटना का सबसे घिनौना और शर्मनाक पहलू ये है की आख़िर सायोनी घोष की इस नीचता पर टीएमसी के आलाकमान ने क्या एक्शन लिया? आम तौर पर जब किसी भी राजनेता पर इस स्तर का घटिया और धार्मिक उन्माद फ़ैलाने वाला आरोप लगता है, तो कोई भी इज़्ज़तदार पार्टी ख़ुद को बचाने के लिए उस नेता को तुरंत बाहर का रास्ता दिखा देती है।

लेकिन टीएमसी का तो डीएनए ही सड़ा हुआ है! ममता बनर्जी ने सायोनी को सज़ा देने की बजाय उन्हें इस सनातन-विरोधी कृत्य के लिए बाकायदा बड़ा भारी ईनाम दिया!

विवाद एकदम चरम पर था, पूरा हिंदू समाज ग़ुस्से में उबल रहा था, जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे थे, लेकिन टीएमसी ने पूरी बेशर्मी का नंगा नाच करते हुए 2021 के विधानसभा चुनावों में सायोनी घोष को आसनसोल दक्षिण जैसी अति-महत्वपूर्ण वीआईपी सीट से अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार दिया।

ये महज़ एक चुनावी टिकट नहीं था.. ये टीएमसी का अपने उस ख़ास जिहादी और कट्टरपंथी मुसलमान वोट बैंक को दिया गया एक खुला और बेशर्म संदेश था- “देखो! जो हिंदुओं को जितनी भद्दी और गंदी गाली देगा, जो उनके आराध्य भगवानों का जितना गंदा मज़ाक उड़ाएगा, हम तृणमूल वाले उसे उतना ही बड़ा नेता बनाएंगे।”

जब आसनसोल की राष्ट्रभक्त जनता ने उन्हें चुनाव में ज़बरदस्त पटखनी दी और वो बुरी तरह से मुँह के बल हार गईं, तब भी टीएमसी नेतृत्व का दिल नहीं भरा। इसके ठीक बाद उन्हें प्रमोट करके सीधा तृणमूल यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष (TMC Youth Wing President) बना दिया गया! क्या ये सब किसी बहुत बड़ी हिंदू-विरोधी साज़िश से कम है?

टीएमसी ने जानबूझकर सायोनी को एक ‘हीरो’ की तरह प्रमोट किया क्योंकि उनकी नज़र में हिंदुओं का अपमान करना कोई गुनाह है ही नहीं, बल्कि ये तो एक सियासी मेडल है जिसे पहनकर आप टीएमसी के भीतर रातों-रात प्रमोशन पा सकते हैं।

यही तो टीएमसी की उस पूरी जिहादी और हिंदू-विरोधी तुष्टिकरण नीति का असली चेहरा है जिसे बंगाल ने पिछले पंद्रह सालों में खून के आंसू रोते हुए झेला है। याद है ना? मुहर्रम के जुलूस निकालने हैं? तो दुर्गा पूजा के मूर्ति विसर्जन पर तुरंत रोक लगा दो!

अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बसाना है? तो उनके फ़र्ज़ी राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवा दो और पूरे बंगाल की डेमोग्राफी बदलकर उसे मिनी-पाकिस्तान बना दो। चुनाव के बाद हिंसा करनी है? तो चुन-चुन कर उन ग़रीब, दलित और पिछड़े हिंदुओं की बस्तियों में आग लगाओ, उनकी बहू-बेटियों की इज़्ज़त लूटो जिन्होंने बीजेपी को वोट देने की हिम्मत की थी।

सायोनी घोष का वो महापाप वाला ट्वीट और उसके बाद उनका राजनीतिक प्रमोशन, इसी नफ़रत भरी और सनातन-द्रोही विचारधारा का एक बहुत ही सटीक उदाहरण है।

लेकिन 2026 के ताज़ा नतीजों ने बता दिया है की काठ की हांडी आख़िर बार-बार नहीं चढ़ती। बमुश्किल 80-90 सीटों पर सिमट कर धूल चाट रही टीएमसी को अब अच्छे से समझ आ जाना चाहिए की स्वाभिमानी हिंदुओं को हल्के में लेने का अंजाम आख़िर होता क्या है।

पैगंबर के नाम पर दंगे करने वाले जिहादी और वामपंथी इकोसिस्टम सायोनी घोष के इस हिन्दू अपमान पर गूंगे क्यों हैं

यहाँ सबसे ज़्यादा दिमाग़ ख़राब और ख़ून खौलता है उन वामपंथी और ‘लिबरल’ बुद्धिजीवियों को देखकर जो हर छोटी-छोटी बात पर ‘असहिष्णुता’ और ‘डरा हुआ मुसलमान’ का रोना लेकर बैठ जाते हैं।

ज़रा एक पल के लिए अपना दिमाग़ दौड़ाइए। सिर्फ और सिर्फ़ एक पल के लिए कल्पना कीजिए की सायोनी घोष ने शिवलिंग की जगह अगर इस्लाम के किसी पवित्र प्रतीक, उनके अल्लाह या पैगंबर मोहम्मद पर ऐसा ही कोई कार्टून या भद्दी टिप्पणी पोस्ट की होती, तो आज बंगाल का नज़ारा क्या होता?

अरे भाई साहब! मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की पूरे बंगाल को अब तक आग के हवाले कर दिया गया होता! सड़कों पर लाखों की उन्मादी भीड़ नंगी तलवारें लेकर उतर आती। चौराहों पर ‘सर तन से जुदा’ के ख़ौफ़नाक नारे लगने शुरू हो जाते।

और तो और, वो बिकाऊ पुलिस जो तथागत दा की FIR पर सो रही थी, वो ख़ुद भागकर रातों-रात उस नेता को गिरफ़्तार कर लेती ताकि उनके प्यारे वोट बैंक के दंगे न भड़कें।

पूरे देश का वो ‘अवार्ड-वापसी गैंग’, वो जेएनयू वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग विदेशी टीवी स्टूडियोज़ में बैठकर छाती पीट-पीट कर चीख रहे होते की “भारत में अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत हुई हैं! इस्लाम ख़तरे में है!”

आप ज़रा कमलेश तिवारी का केस देख लीजिए। सिर्फ़ एक बयान! उस एक बयान पर उस आदमी की उसके ही घर में घुसकर, दिन दहाड़े गला रेत कर बड़ी ही बेरहमी से हत्या कर दी गई। नूपुर शर्मा का मामला तो सबको याद ही होगा ना? उन्होंने तो टीवी डिबेट में चीख कर कुछ अलग नहीं कहा था, बस वही बोला था जो ख़ुद उनके ही ग्रंथों में लिखा हुआ है।

लेकिन फिर क्या हुआ? पूरे देश को हफ़्तों तक बंधक बना लिया गया, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामिक देशों को भड़का कर भारत को बदनाम करने की गहरी साज़िशें रची गईं, और कई निर्दोष हिंदुओं (जैसे उदयपुर के कन्हैयालाल और अमरावती के उमेश कोल्हे) को सरेआम बाज़ार में सूअरों की तरह काट दिया गया।

लेकिन जैसे ही बात करोड़ों हिंदुओं की परम आस्था की आती है, हमारे महादेव के घोर अपमान की आती है… तो ये सारा का सारा वामपंथी और लिबरल इकोसिस्टम अचानक से गूंगा, बहरा और अंधा हो जाता है। तब इन पाखंडियों को अचानक से ‘फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच’ और आज़ादी याद आने लगती है।

तब ये बड़े-बड़े लेख लिखकर हमें ज्ञान बांटने लगते हैं की “अरे हिंदू भाइयों! भगवान तो सर्वशक्तिमान हैं, उन्हें किसी एक छोटे से कार्टून से क्या फ़र्क पड़ता है? तुम लोग इतने असहिष्णु क्यों हो रहे हो?” इसे कहते हैं असली दोगलापन और वैचारिक वेश्यावृत्ति!

हिन्दुओं की नई सरकार को आख़िरी चेतावनी- सायोनी घोष को बिना वारंट घसीट कर कालकोठरी में डालो

हमारे देश का संविधान सबको अपनी बात कहने का हक़ देता है, जिसे ये ‘अवार्ड वापसी गैंग’ वाले फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच कहते हैं। लेकिन कान खोलकर सुन लो, इस आज़ादी का मतलब ये बिल्कुल नहीं है की तुम सड़क पर खड़े होकर या सोशल मीडिया पर बैठकर करोड़ों हिन्दुओं के आराध्य देवों को सरेआम भद्दी गालियां देना शुरू कर दो! 

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A बहुत ही साफ़ और कड़े शब्दों में कहती है की अगर कोई भी व्यक्ति जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, तो ये एक संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती (Non-bailable) अपराध है। इसमें पुलिस को बिना वारंट के कॉलर पकड़कर अरेस्ट करने का पूरा अधिकार है और इसमें तीन साल तक की जेल पक्की है।

जनवरी 2021 में, जब ये पूरा बवाल मचा था और हिंदू समाज सड़कों पर था, तब बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल श्रद्धेय श्री तथागत रॉय जी ने कोलकाता पुलिस में सायोनी के ख़िलाफ़ बकायदा एक बहुत ही मज़बूत FIR दर्ज़ कराई थी। उन्होंने चीख-चीख कर प्रशासन से कहा था की इस औरत ने हमारी आस्था पर सीधा कुठाराघात किया है, शिवभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं, इसे तुरंत गिरफ़्तार करो। लेकिन आख़िर हुआ क्या?

उस वक़्त बंगाल में ममता बनर्जी की तानाशाही सरकार थी। बंगाल पुलिस तो वैसे ही टीएमसी के एक ख़रीदे हुए कैडर की तरह काम करती थी। ममता के इशारों पर नाचने वाली उस बिकाऊ पुलिस ने तथागत उस गंभीर FIR को उठाकर सीधे रद्दी की टोकरी में डाल दिया। सायोनी घोष से एक साधारण सी पूछताछ करने तक की हिम्मत (या यूं कहें की नीयत) किसी भी वर्दी वाले में नहीं हुई।

लेकिन अब? अब तो पूरी बाज़ी ही पलट चुकी है! 2026 में बंगाल के जाग्रत हिंदुओं ने 207 सीटें देकर बीजेपी को एकतरफ़ा सत्ता सौंप दी है। अब पुलिस भी आज़ाद है और प्रशासन भी टीएमसी के गुंडों के चंगुल से मुक्त है। 

तो फिर अब इंतज़ार किस शुभ मुहूर्त का हो रहा है? हम सूबे की नयी सरकार और गृह मंत्री से सीधी, दो-टूक और सख़्त मांग करते हैं की तथागत रॉय जी द्वारा दर्ज़ की गई उस पुरानी शिकायत की फाइल पर से तुरंत धूल हटाई जाए।

अगर ज़रूरत पड़े तो तमाम नए पुख़्ता सबूतों और गवाहों के साथ IPC 295A, 153A और IT एक्ट की तमाम सख़्त तरीन धाराओं में एक नई और मज़बूत FIR दर्ज़ की जाए।

सायोनी घोष को बिना किसी वीआईपी ट्रीटमेंट के, बिना किसी राजनीतिक शिष्टाचार के तुरंत गिरफ़्तार करके जेल की कालकोठरी में धकेला जाना चाहिए। ऐसा करने से ही बंगाल के उन करोड़ों हिंदुओं के कलेजे को ठंडक मिलेगी जिन्होंने इस नई सरकार पर अपना भरोसा जताया है।

ये सख़्त क़दम पूरे देश में एक नज़ीर बनेगा की अब अगर कोई भी सनातन धर्म पर आँख उठाने की जुर्रत करेगा, तो ये नया भारत और नया क़ानून उसकी आँखें निकाल लेगा।

जो क़ानून इस देश में मुस्लिम समुदाय की भावनाओं की रक्षा के लिए इतनी तेज़ी से काम करता है, वही क़ानून अब बहुसंख्यक हिंदुओं की आस्था की रक्षा के लिए भी पूरी बेरहमी और सख़्ती से लागू होना चाहिए।

हम शांतिप्रिय लोग हैं, हम किसी दूसरे के मज़हब का अपमान नहीं करते, हम ‘सर तन से जुदा’ के फ़तवे नहीं बांटते, लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है की हम अपने ही धर्म का सरेआम चीरहरण भी बर्दाश्त करते रहेंगे।

जय श्री राम! हर हर महादेव!

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