मैं शपथ लेता हूं…सुवेंदु अधिकारी बने पश्चिम बंगाल के नए मुख्‍यमंत्री, PM मोदी की मौजूदगी में कोलकाता में भगवा आंधी-गूंजा जय श्रीराम का नारा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक और बेहद नाटकीय मोड़ उस समय देखने को मिला, जब भाजपा नेता Suvendu Adhikari ने राज्य के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah समेत भाजपा के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे। जैसे ही सुवेंदु अधिकारी ने मंच से “मैं शपथ लेता हूं…” कहा, पूरा मैदान “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा।

राज्य की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बंगाल की राजनीतिक संस्कृति और वैचारिक दिशा में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी राजनीति के प्रभाव में रहे बंगाल में भाजपा का सत्ता तक पहुंचना राष्ट्रीय राजनीति में भी एक बड़ी घटना बन गया है।

कोलकाता में दिखा शक्ति प्रदर्शन

शपथ ग्रहण समारोह को भाजपा ने केवल संवैधानिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक विशाल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया। सुबह से ही कोलकाता की सड़कों पर भाजपा समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। कई जगह भगवा झंडों और पोस्टरों से पूरा शहर रंगा नजर आया। “जय श्रीराम”, “मोदी-मोदी” और “भारत माता की जय” के नारों ने माहौल को पूरी तरह राजनीतिक और भावनात्मक बना दिया।

कार्यक्रम में देशभर से भाजपा के कई मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता पहुंचे। मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मौजूदगी ने इस समारोह को राष्ट्रीय महत्व का बना दिया। भाजपा समर्थकों के बीच जब PM मोदी मंच पर पहुंचे, तो लोगों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया।

सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा

Suvendu Adhikari की राजनीति बंगाल में लंबे समय से प्रभावशाली रही है। वह कभी तृणमूल कांग्रेस के सबसे मजबूत नेताओं में गिने जाते थे और नंदीग्राम आंदोलन से उन्हें राज्यव्यापी पहचान मिली थी। लेकिन बाद में उन्होंने ममता बनर्जी से मतभेद के चलते भाजपा का दामन थाम लिया।

भाजपा में शामिल होने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने खुद को बंगाल में पार्टी के सबसे बड़े चेहरे के रूप में स्थापित किया। उन्होंने लगातार हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और भ्रष्टाचार विरोधी मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में भाजपा के संगठन को मजबूत करने और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने में सुवेंदु अधिकारी की अहम भूमिका रही।

भाजपा की ऐतिहासिक जीत

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस बार अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। लंबे समय तक असंभव मानी जाने वाली जीत को भाजपा ने रणनीतिक तरीके से संभव कर दिखाया। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों, अमित शाह की संगठनात्मक रणनीति और सुवेंदु अधिकारी की आक्रामक शैली ने पार्टी को मजबूत बढ़त दिलाई।

भाजपा ने चुनाव में कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिक राजनीति और विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस पर परिवारवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने के आरोप लगाए गए। भाजपा समर्थकों का दावा है कि बंगाल की जनता बदलाव चाहती थी और इस चुनाव में वही देखने को मिला।

“जय श्रीराम” बना राजनीतिक प्रतीक

इस पूरे राजनीतिक बदलाव में “जय श्रीराम” का नारा एक बड़ा प्रतीक बनकर उभरा। भाजपा समर्थकों ने इसे केवल धार्मिक नारा नहीं बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हजारों समर्थकों ने लगातार “जय श्रीराम” के नारे लगाए।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की राजनीति में यह नारा पिछले कुछ वर्षों में भाजपा की वैचारिक ताकत का केंद्र बन चुका है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक भाजपा ने इसे एक जनभावना से जोड़ने की कोशिश की।

PM मोदी का बड़ा संदेश

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में कहा कि बंगाल अब “विकास, सुशासन और सांस्कृतिक गौरव” के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर बंगाल को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल करेंगे।

PM मोदी ने कहा कि बंगाल केवल राजनीति का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए नई योजनाओं का संकेत भी दिया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र पर काम करेगी।

विपक्ष पर साधा निशाना

भाजपा नेताओं ने समारोह के दौरान विपक्ष पर भी तीखे हमले किए। कई नेताओं ने कहा कि बंगाल में लंबे समय तक हिंसा, भ्रष्टाचार और राजनीतिक डर का माहौल बनाया गया। भाजपा ने दावा किया कि जनता ने इस बार “भय और भ्रष्टाचार” की राजनीति को खत्म कर दिया है।

हालांकि विपक्षी दलों ने भाजपा पर धार्मिक ध्रुवीकरण करने और चुनाव को सांप्रदायिक दिशा देने के आरोप लगाए हैं। तृणमूल कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा ने बंगाल की सामाजिक संरचना को बांटने की कोशिश की है। लेकिन भाजपा इसे पूरी तरह खारिज करती रही है।

सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

शपथ ग्रहण समारोह को देखते हुए कोलकाता में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। हजारों पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई। ड्रोन निगरानी से लेकर हर प्रवेश द्वार पर चेकिंग की व्यवस्था की गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वीवीआईपी नेताओं की मौजूदगी के कारण सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर थीं। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और भारी भीड़ के बावजूद किसी बड़ी अव्यवस्था की खबर सामने नहीं आई।

बंगाल की राजनीति में नए युग की शुरुआत?

सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा बंगाल में अपनी पकड़ लंबे समय तक बनाए रख पाएगी। राज्य में राजनीतिक हिंसा, बेरोजगारी, उद्योगों की कमी और सीमावर्ती सुरक्षा जैसे कई बड़े मुद्दे सरकार के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं।

भाजपा समर्थकों को उम्मीद है कि नई सरकार बंगाल को नई दिशा देगी, जबकि विपक्ष इसे केवल राजनीतिक प्रचार बता रहा है। लेकिन इतना तय है कि बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह बदल चुकी है। जिस राज्य को कभी भाजपा के लिए कठिन माना जाता था, वहां आज भगवा राजनीति सत्ता के केंद्र में पहुंच चुकी है।

कोलकाता में गूंजते “जय श्रीराम” के नारों और प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हुए इस शपथ ग्रहण समारोह ने यह साफ कर दिया कि पश्चिम बंगाल अब राष्ट्रीय राजनीति के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बन चुका है।

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