CM विजय की सत्ता का पहला भीषण प्रहार, तमिलनाडु के मंदिरों और स्कूलों की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले शराब सिंडिकेट को किया चकनाचूर

CM विजय की सत्ता का पहला भीषण प्रहार, तमिलनाडु के मंदिरों और स्कूलों की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले शराब सिंडिकेट को किया चकनाचूर

सच कहूं तो, किसी ने सोचा भी नहीं था की बदलाव इतनी जल्दी और इतनी ज़ोरदार तरीके से आएगा। तमिलनाडु की सियासत में पिछले कुछ दिनों में जो भूचाल आया है न, उसने दिल्ली तक के वामपंथियों और ‘सूट-बूट वाले’ सेकुलरों की नींद हराम कर दी है।

दशकों से जिस दक्षिण भारत को हिंदू-विरोध की लेबोरेटरी मान लिया गया था, उसी ज़मीन पर आज सनातन का ऐसा शंखनाद हुआ है जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है।

शपथ लिए 48 घंटे भी नहीं बीते थे की ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के संस्थापक और नए नवेले मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने एक ऐसा हथौड़ा मारा है की द्रविड़ राजनीति की चूलें हिल गई हैं। फैसला क्या है? फैसला ये है की पूरे तमिलनाडु में 717 TASMAC (तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन) शराब की दुकानों के शटर हमेशा के लिए गिरा दिए जाएंगे।

अब आप कहेंगे की शराबबंदी या ठेके बंद करना कौन सी बड़ी बात है? चुनाव के बाद तो नेता ऐसे नाटक करते ही हैं। लेकिन ज़रा ठहरिए! ये कोई मामूली ठेके नहीं हैं जो बंद हो रहे हैं। ये वो 717 ठेके हैं जिन्हें DMK और AIADMK की पाखंडी सरकारों ने जानबूझकर हमारे पवित्र मंदिरों और बच्चों के स्कूलों के ठीक बाहर खोल रखा था।

इसे सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला मत मानिए। ये उन पवित्र स्थानों की ‘महा-शुद्धि’ है, जिन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत अशुद्ध किया गया था। आज इस एक फैसले ने साबित कर दिया है की जब कुर्सी पर बैठने वाले नेता की रीढ़ की हड्डी सीधी हो और दिल में अपनी संस्कृति के लिए धड़कन हो, तो सिस्टम कैसे काम करता है।

हिन्दू मंदिरों को ‘मदिरालय’ बनाने वाला द्रविड़ पार्टियों का वो 60 साल का नीच खेल

चलिए थोड़ा पीछे चलते हैं और देखते हैं की इन द्रविड़ पार्टियों (DMK, AIADMK) ने हमारे दक्षिण के गौरवशाली इतिहास के साथ क्या खिलवाड़ किया। महर्षि अगस्त्य की ज़मीन, चोल और चेर राजाओं के भव्य मंदिरों की ज़मीन… इस ज़मीन पर पिछले 60 सालों से एक ऐसा इकोसिस्टम पनप रहा था जिसका सिर्फ एक ही एजेंडा था- हिंदू धर्म को कैसे नीचा दिखाया जाए।

इन वामपंथी-समर्थित द्रविड़ सरकारों ने एक अत्यंत नीच और घृणित महा-पाप किया। उन्होंने जानबूझकर मदुरै के मीनाक्षी अम्मान मंदिर, तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर और कांचीपुरम के प्राचीन देवालयों के प्रवेश द्वारों और परिक्रमा मार्गों के पास TASMAC की दुकानें खुलवाईं।

ये कोई प्रशासनिक भूल नहीं थी.. ये दक्षिण भारत की महान हिंदू संस्कृति को नष्ट करने, उसे अपमानित करने और हिंदुओं के मनोबल को तोड़ने का एक वामपंथी षड्यंत्र था।

इन सनातन-द्रोहियों का मकसद साफ था की हिंदू समाज को इतना जलील कर दो, मंदिरों के आसपास का माहौल इतना गंदा कर दो कि घर की महिलाएं, बेटियां और आम श्रद्धालु वहां जाने से कतराने लगें।

जो DMK पार्टी मंच से खड़े होकर सनातन धर्म को ‘डेंगू, मलेरिया और कोरोना’ बताकर उसे जड़ से मिटाने की कसमें खाती हो, उससे आप उम्मीद भी क्या कर सकते हैं?

जो लोग अपने नाम के आगे हिंदू पहचान लगाने में शर्म महसूस करते हों, वो हमारे मंदिरों की पवित्रता का ख़याल रखेंगे? बिल्कुल नहीं! उन्होंने तो राजस्व (Revenue) कमाने के नाम पर हमारी आस्था को ही ठेके पर रख दिया था।

लेकिन अब पिक्चर बदल चुकी है। 12 मई 2026 की उस फाइल पर हुए एक साइन ने इस पूरे नेक्सेस को क्लीन बोल्ड कर दिया है।

CM विजय की अधर्म के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के वो आंकड़े जो द्रविड़ियों की रातों की नींद उड़ा रहे हैं

खैर, अब ज़रा उन आंकड़ों पर गौर करते हैं जो इस सर्जिकल स्ट्राइक की असल कहानी बयां करते हैं। हवा-हवाई बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन जब डेटा सामने आता है, तो अच्छे-अच्छों का पसीना छूट जाता है।

पूरे राज्य में TASMAC की लगभग 4,765 दुकानें चल रही थीं। इनमें से सरकार ने बकायदा चुन-चुनकर उन 717 दुकानों की लिस्ट बनाई जो समाज के लिए नासूर बन चुकी थीं।

और मजे की बात देखिए, इन्हें हटाने के लिए कोई महीनों का टाइम नहीं दिया गया है। सिर्फ 14 दिन! 14 दिन का कड़क अल्टीमेटम दिया गया है की शटर गिराओ और बोरिया-बिस्तर समेट लो।

इसमें सबसे तगड़ा दांव है ‘500 मीटर का बफर जोन’। सरकार ने साफ कर दिया है की किसी भी धार्मिक या शैक्षणिक स्थल के 500 मीटर के दायरे में शराब नहीं बिकेगी। अब ज़रा इन बंद होने वाली दुकानों का ब्रेकअप देखिए:

  • 276 दुकानें उन जगहों से हटाई जा रही हैं जो सीधे तौर पर मंदिरों और पूजा स्थलों से सटी थीं।
  • 186 दुकानें उन स्कूलों और कॉलेजों के पास से हटाई जा रही हैं जहां हमारे छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने जाते हैं।
  • और बाकी 255 दुकानें बस स्टैंड और उन सार्वजनिक जगहों के पास की हैं जहां महिलाओं का रोज़ का आना-जाना होता है।

आप ही बताइए, 276 मंदिरों के पास शराब के ठेके चल रहे थे और किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी? ये आंकड़े गवाही दे रहे हैं की कैसे सत्ता के नशे में चूर इन द्रविड़ नेताओं ने माफियाओं के साथ मिलकर हमारे समाज को खोखला करने का ठेका ले रखा था।

ये 276 ठेके बंद होना सिर्फ शराब की बिक्री रुकना नहीं है। यह उन लाखों हिंदू श्रद्धालुओं की जीत है जो रोज़ घुट-घुट कर अपने ही भगवान के घर जाने को मजबूर थे। आज वो श्रद्धालु खुली सांस ले पा रहे हैं। आज मंदिरों के बाहर शराब की बदबू नहीं, बल्कि कपूर और चंदन की महक वापस लौट रही है।

AIADMK का झूठा हिन्दू प्रेम और मंदिरों के बाहर शराब बेचने का गंदा धंधा

अब बात करते हैं उस दूसरी पार्टी की जो खुद को डीएमके का विकल्प बताती है। कई लोगों को लगता है की AIADMK तो शायद थोड़ी ठीक होगी। अरे भाई, कहां की ठीक? ये तो एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। इनका पाखंड तो और भी खतरनाक है। हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और!

याद कीजिए 2016 का वो चुनाव। जयललिता जी ने मंच से ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर कहा था की सत्ता में आए तो पूर्ण शराबबंदी लागू कर देंगे। लोगों ने भर-भर के वोट दिए। फिर 2017 में पलानीस्वामी (EPS) आए, उन्होंने भी वही कैसेट बजाई। लेकिन हुआ क्या? कुछ नहीं! सत्ता की कुर्सी पर बैठते ही इन लोगों को TASMAC की मलाई का ऐसा चस्का लगा की ये सारे वादे भूल गए।

शराबबंदी तो दूर की बात है, इन्होंने तो शराब को अपनी काली कमाई का सबसे बड़ा धंधा बना लिया। अभी हाल ही में ईडी (ED) ने जो छापे मारे थे, उसमें जो 40,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के घोटाले की बात सामने आई, वो क्या था? वो इसी TASMAC की कमाई थी।

ये लोग बाहर से तो अम्मा-अम्मा करते थे, लेकिन अंदर ही अंदर तमिलनाडु की आत्मा का सौदा कर रहे थे। एक तरफ ये चुनाव के टाइम पर माथे पर बड़ा सा तिलक लगाकर, जनेऊ पहनकर फोटो खिंचवाते थे ताकि हिंदू वोट बैंक खुश रहे, और दूसरी तरफ उसी मंदिर के बाहर अपने चहेते ठेकेदारों को दारू बेचने का लाइसेंस बांट रहे थे।

इस धर्मनिरपेक्षता और पाखंड ने तमिलनाडु को दीमक की तरह चाट लिया था। लेकिन कहते हैं न, पाप का घड़ा एक दिन भरता ही है। और वो घड़ा अब TVK ने बीच चौराहे पर फोड़ दिया है।

ज्ञान के मंदिरों के बाहर दारू बिकवा कर पीढ़ियां बर्बाद करने की खौफनाक साजिश

चलिए, धर्म और संस्कृति की बात से थोड़ा आगे बढ़कर अब उस मुद्दे पर आते हैं जो सीधे हमारे घरों से जुड़ा है- हमारे बच्चे! जो देश अपने युवाओं को सुरक्षित नहीं रख सकता, वो खाक विश्वगुरु बनेगा?

भारतीय संस्कृति में हमेशा से स्कूल को ‘विद्या का मंदिर’ कहा गया है। वहां सरस्वती का वास होता है। बच्चे वहां राष्ट्रगान गाते हैं, देशभक्ति सीखते हैं। लेकिन ज़रा उस नज़ारे की कल्पना कीजिए… एक स्कूल की छुट्टी हुई है।

छोटे-छोटे बच्चे अपनी पानी की बोतल और बैग लटकाए बाहर निकल रहे हैं। और स्कूल के मेन गेट से ठीक 50 मीटर दूर एक शराब का ठेका खुला है। वहां पियक्कड़ों की भीड़ लगी है, गंदी-गंदी गालियां दी जा रही हैं, और वहीं से बच्चे रोज़ गुज़र रहे हैं।

ये कोई फिल्मी सीन नहीं है। ये तमिलनाडु के 186 स्कूलों के बाहर की रोज़ की सच्चाई थी। पिछली द्रविड़ सरकारों ने पैसे कमाने की की आड़ में तमिलनाडु की पूरी की पूरी एक पीढ़ी को नशे की भट्टी में झोंक दिया था।

जो बच्चा बचपन से ही स्कूल के बाहर दारू की बोतलें और शराबियों का तमाशा देखते हुए बड़ा होगा, उसके दिमाग पर क्या असर पड़ेगा? क्या वो एक अनुशासित और राष्ट्रभक्त नागरिक बनेगा? बिल्कुल नहीं! और यही तो ये वामपंथी चाहते थे। इन्हें तो बस एक ऐसा झुंड चाहिए जो नशे में धुत रहे और इनके खोखले नारों पर तालियां पीटता रहे।

मुख्यमंत्री विजय ने इन 186 ठेकों को स्कूलों के पास से उखाड़ फेंक कर जो काम किया है, उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। उन्होंने साफ संदेश दे दिया है की सरकार का खजाना भरने के लिए बच्चों के भविष्य की बलि नहीं चढ़ाई जाएगी।

ये फैसला तमिलनाडु की युवा शक्ति को नशे के चंगुल से निकालकर फिर से एक सही दिशा देने की एक ईमानदार कोशिश है।

अरे दूसरे नेताओं! CM विजय से सीखो की संस्कृति की रक्षा के लिए जिगरा कैसा होना चाहिए

आज के दौर में हमें ऐसे नेताओं की ज़रूरत बिल्कुल नहीं है जो मीठी-मीठी बातें करके हिन्दुओं को बेवकूफ बनाते रहें। हमें चाहिए फायरब्रांड नेता! ऐसे नेता जो कड़े और कड़वे फैसले लेने का माद्दा रखते हों। मुख्यमंत्री विजय ने दिखा दिया है की ‘पॉलिटिकल विल’ यानी राजनीतिक इच्छाशक्ति आखिर चीज़ क्या होती है।

जब कोई नेता सिर्फ वोट बैंक और चुनाव की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सोचता है, तो वो रेवेन्यू के नुकसान का रोना नहीं रोता। वो सीधे एक्शन लेता है।

अर्थशास्त्र का वो नियम किस काम का जो सरकारी खजाना तो भर दे, लेकिन समाज को नैतिक पतन की खाई में धकेल दे? विजय ने ये जो 500 मीटर के बफर जोन वाला डंडा चलाया है, वो भारत के बाकी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए भी एक बहुत बड़ा सबक है।

अरे, बाकी राज्यों की सरकारें भी तो यही खेल खेल रही हैं! चाहे वो बंगाल हो या दिल्ली… जहां देखो वहां मोहल्ले-मोहल्ले, गली-गली ठेके खोले जा रहे हैं। और जब कोई विरोध करता है तो यही रटा-रटाया जवाब मिलता है की “जी, इससे तो सरकार की कमाई होती है, इसी कमाई से तो हम विकास करेंगे।”

धिक्कार है ऐसे विकास पर! जो विकास मंदिरों की पवित्रता भंग करके और बच्चों के हाथों में किताबों की जगह दारू की बोतलें थमाकर आता हो, वो विकास नहीं, विनाश है।

हम तो डंके की चोट पर कहते हैं की भारत के हर राज्य को इस ‘तमिलनाडु मॉडल’ को अपनाना चाहिए। जो राजनीतिक पार्टी हिंदू मान-बिंदुओं की रक्षा के लिए, सनातन के सम्मान के लिए और युवाओं के भविष्य के लिए ऐसे कठोर फैसले लेने की हिम्मत नहीं रखती, उसे सत्ता से खींचकर बाहर कर देना चाहिए। बहुत हो गई ये धर्मनिरपेक्षता की नौटंकी।

CM विजय के एंटी-ड्रग्स और महिला सुरक्षा के लिए दो और ब्रह्मास्त्र

आपको क्या लगा की बात सिर्फ शराब के 717 ठेके गिराने पर खत्म हो गई? जी नहीं! विजय ने CM की कुर्सी पर बैठते ही दो और जरुरी फैसलों पे साइन किया है.. जो एंटी-ड्रग टास्क फोर्स और महिला सुरक्षा फोर्स हैं।

पिछले 60 सालों में इन पाखंडी द्रविड़ पार्टियों ने तमिलनाडु को सिर्फ शराब का ही नहीं, बल्कि गांजे और सिंथेटिक ड्रग्स का भी एक बहुत बड़ा अड्डा बना दिया था।

हमारे यूथ को, खासकर स्कूल-कॉलेज जाने वाले हिन्दू लड़कों को, एक सोची-समझी साजिश के तहत नशे की गर्त में धकेला जा रहा था ताकि वो अपनी संस्कृति, अपना इतिहास भूल जाएं और बस नशे में झूमते रहें।

इन ड्रग कार्टेल के पैसों से ही तो इन पार्टियों के चुनाव फंड होते थे! लेकिन विजय ने अपने चुनाव घोषणापत्र में ही ठोक-बजा के नशा-मुक्त तमिलनाडु का ऐलान कर दिया। और कुर्सी संभालते ही उन्होंने एक बेहद धाकड़ ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ बना डाली है।

ये टास्क फोर्स अब गली-गली, स्कूल-कॉलेज के बाहर उन माफियाओं को चुन-चुन कर उठाएगी जो हमारे बच्चों की रगों में ज़हर घोल रहे हैं। अब ड्रग्स बेचने वाला चाहे किसी भी बड़ी पार्टी का हो, सीधा जेल की चक्की पीसेगा। अंडरवर्ल्ड और नशे के सौदागरों में ऐसा खौफ बैठ गया है की वो चूहों की तरह बिलों में दुबक गए हैं।

और बात सिर्फ नशे की नहीं है। हमारे सनातन धर्म में तो हमेशा से ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ का मंत्र गूंजता रहा है। लेकिन इन लिबरल और द्रविड़ सरकारों के राज में हमारी हिन्दू बहन-बेटियों का घर से बाहर निकलना मुहाल हो गया था। ज़मीन पर हकीकत ये थी की सड़क छाप वामपंथी गुंडे लड़कियों को सरेआम परेशान करते थे।

इस सड़े हुए सिस्टम का पुख्ता इलाज करने के लिए CM विजय ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू कर दी है। महिलाओं के खिलाफ अपराध पर नकेल कसने के लिए उन्होंने एक डेडिकेटेड स्पेशल फोर्स मैदान में उतार दी है- जिसका नाम है ‘रानी वेलु नाचियार फोर्स’। ये नाम ही अपने आप में एक प्रचंड हुंकार है!

रानी वेलु नाचियार हमारे दक्षिण भारत की वो महान वीरांगना थीं जिन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। उन्हीं के नाम पर बनी ये फोर्स अब सादे कपड़ों में मंदिरों, बस स्टैंडों और कॉलेजों के बाहर तैनात कर दी गई है।

कोई मनचला या सड़क छाप गुंडा अगर हमारी किसी बेटी या बहन की तरफ आंख उठाने की जुर्रत भी करता है, तो ये कमांडोज़ उसका ऑन-द-स्पॉट ऐसा इलाज करेंगे की उसकी आने वाली पुश्तें भी किसी महिला की तरफ देखने से पहले सौ बार कांपेंगी।

तमिलनाडु से उठी सनातन की ये आंधी और CM विजय का प्रहार अब रुकने वाला नहीं है

ये जो एंटी-ड्रग, महिला सुरक्षा, और मंदिरों की पवित्रता के लिए एक्शन हुआ है ना, ये तो बस शुरुआत है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और देश के तमाम राष्ट्रवादी विचारक सालों से जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण की बात कर रहे थे, आज उसकी एक छोटी सी झलक दक्षिण भारत में देखने को मिली है।

आज तमिलनाडु ने दिखा दिया है की वो अपने युवाओं, महिलाओं और मंदिरों को खाई में नहीं गिरने देगा। वो द्रविड़ सोच के नाम पर परोसे जा रहे इस ज़हर को और नहीं पिएगा।

ये जो द्रविड़ पार्टियों का 60 साल का गुरूर था, उसे जनता ने एक ही झटके में ज़मीन पर ला पटका है। और ये उन सब के लिए एक बहुत बड़ी वार्निंग भी है जो वामपंथी वाली राजनीति करते हैं।

तमिलनाडु से उठी ये लहर अब रुकने वाली नहीं है। ये तो बस एक शुरुआत है उस महा-शुद्धि अभियान की, जिसकी ज़रूरत पूरे देश को है। सनातन का सूरज जो आज दक्षिण में चमका है, उसकी रोशनी बहुत जल्द पूरे भारतवर्ष के उन सभी अंधेरे कोनों तक पहुंचेगी जहां हिंदू-विरोधियों ने अपना डेरा जमा रखा है।

जो भी हमारी महिलाओं, मंदिरों और विद्यालयों की तरफ आंख उठाएगा, उसका हश्र द्रविड़ पार्टियों से भी बुरा होगा।

जय हिंद! जय सनातन! जय श्रीराम!

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