UPSC और सरकारी नौकरियों में घुसपैठ करते जिहादी, ‘जकात फाउंडेशन’ जैसे संदिग्ध कोचिंग सेंटर का मुसलमानों को सिस्टम में बैठाने का खतरनाक खेल

आज तक हमें और आपको यही लगता था की जिहाद का मतलब सिर्फ सड़कों पर पत्थर फेंकना, बम फोड़ना या हमारी बहन-बेटियों को लव जिहाद के जाल में फंसाना है लेकिन सच कहूं तो हम बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे थे।

इन जिहादियों ने अब गज़वा-ए-हिंद का अपना पूरा का पूरा तरीका ही बदल दिया है। अब ये लोग सड़कों पर उतर कर लाठियां नहीं खा रहे, बल्कि कोट-पैंट पहनकर और टाई लगाकर सीधे हमारे देश के सिस्टम को अंदर से हैक कर रहे हैं।

ज़रा सोचिए, एक आतंकवादी बंदूक लेकर कितने लोगों को मार सकता है? दस, बीस या पचास? लेकिन अगर वही कट्टरपंथी सोच वाला आदमी लाल बत्ती वाली गाड़ी में बैठकर किसी ज़िले का डीएम (DM) या एसपी (SP) बन जाए, तो वो पूरे के पूरे ज़िले के लाखों हिंदुओं की ज़िंदगी नर्क बना सकता है।

इसे कहते हैं- ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ या ‘UPSC जिहाद’। ये लव जिहाद और लैंड जिहाद से भी हज़ार गुना ज़्यादा खतरनाक और खौफनाक टाइम बम है जो हमारे देश में प्लांट कर दिया गया है।

आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अफसर ही इस देश की नीतियां बनाते हैं, यही लोग दंगे के वक्त पुलिस को ऑर्डर देते हैं, यही लोग तय करते हैं की रामनवमी के जुलूस को परमिशन मिलेगी या नहीं।

अब इन जिहादियों को समझ आ गया है की अगर सिस्टम पर कब्ज़ा करना है, तो संसद में जाने से ज़्यादा ज़रूरी है उन कुर्सियों पर बैठना जहाँ से असली पावर चलती है। 

और इसी ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ के तहत आज एक बहुत ही खौफनाक और सुनियोजित साज़िश चल रही है, जिसके ज़रिए चुन-चुन कर मदरसों में पढ़ने वालों और कट्टरपंथियों को भारत की सबसे बड़ी सरकारी नौकरियों में पिछले दरवाज़े से घुसाया जा रहा है। 

अगर आज हम इस सफेदपोश जिहाद को नहीं समझे, तो आने वाले कुछ ही सालों में हमें मारने के लिए किसी आतंकवादी की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि हमारे ही टैक्स के पैसों से सैलरी लेने वाला ये जिहादी बाबू हमें अपनी कलम की ताकत से कुचल कर रख देगा।

जकात फाउंडेशन और विदेशी फंडिंग का डरावना सच, आतंकियों के पैसों से तैयार हो रही जिहादी UPSC अफसरों की फौज

अब ज़रा इस पूरे खौफनाक खेल के सबसे बड़े मोहरे और इसके पीछे की उस फंडिंग को समझिए, जिसे सुनकर किसी भी देशभक्त इंसान के पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी।

भारत में मुसलमानों को UPSC की कोचिंग देने के नाम पर कई संस्थाएं कुकुरमुत्ते की तरह उग आई हैं, लेकिन इनमें से सबसे बड़ा और सबसे विवादित नाम है- ‘जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ (Zakat Foundation)।

ये संगठन कोई गली-मोहल्ले का एनजीओ नहीं है। इसे चलाने वाले सैयद जफर महमूद साहब यूपीए (UPA) सरकार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ओएसडी (OSD) रह चुके हैं। ये वही आदमी हैं जो सच्चर कमेटी में बैठे थे और जिन्होंने देश को ये पट्टी पढ़ाई थी की मुसलमान तो दलितों से भी ज़्यादा पिछड़े हुए हैं। 

खैर, ज़फर महमूद की जकात फाउंडेशन आज क्या कर रही है? ये पूरे देश से चुन-चुन कर मुस्लिम युवाओं को लाती है और उन्हें दिल्ली में रखकर सिविल सर्विस की धुआंधार और फ्री कोचिंग करवाती है।

लेकिन सवाल ये नहीं है की वो कोचिंग क्यों करवा रहे हैं। असली और सबसे खौफनाक सवाल ये है की इस जकात फाउंडेशन के पास इन लड़कों को आईएएस और आईपीएस बनाने के लिए करोड़ों की फंडिंग आ कहां से रही है?

जब खुफिया एजेंसियों और मीडिया के लोगों ने इसके पीछे का कच्चा चिट्ठा खोला, तो जो नंगा सच बाहर आया उसने पूरे देश की रातों की नींद उड़ा दी।

आरोप हैं की जकात फाउंडेशन को जो विदेशी पैसा मिलता है, उसके तार सीधे तौर पर अल-कायदा, जाकिर नाइक और हमास जैसे खूंखार आतंकी संगठनों से जुड़े हुए विदेशी एनजीओ से मिलते हैं।

मिडिल ईस्ट और तुर्की में बैठे वो कट्टरपंथी संगठन, जो भारत में जेहाद फैलाने के लिए पैसे पानी की तरह बहाते हैं, उन्हीं संगठनों से जकात फाउंडेशन के खातों में करोड़ों रुपये आने के खुलासे हुए हैं।

अरे भाई, ज़रा इस खौफनाक साज़िश को दिमाग में बैठाने की कोशिश कीजिए! पैसा आ रहा है उन आतंकवादियों का जो भारत को मिटाना चाहते हैं, और उस पैसे से दिल्ली में बैठकर उन लड़कों को सिविल सर्विस की कोचिंग दी जा रही है जो कल को हमारे देश के कलेक्टर और पुलिस कप्तान बनेंगे।

क्या ये देश की सुरक्षा के साथ अब तक का सबसे बड़ा और सबसे भद्दा खिलवाड़ नहीं है? 

तुम आतंकवादियों के पैसों से भारत के बाबू तैयार कर रहे हो और सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं? जब कोई लड़का जाकिर नाइक या विदेशी कट्टरपंथियों के फंड से पढ़ाई करके आईएएस बनेगा, तो क्या वो देश के संविधान का वफादार होगा या अपने उन जिहादी आकाओं का जिन्होंने उसे कुर्सी तक पहुंचाया है?

ये कोई सोशल वर्क नहीं है, ये देश को अंदर से खोखला करने का ‘स्लीपर सेल’ प्रोजेक्ट है!

सुदर्शन न्यूज़ के UPSC जिहाद का वो पर्दाफाश जिससे हिल गया था पूरा वामपंथी और जिहादी इकोसिस्टम

आपको 2020 का वो ऐतिहासिक बवाल तो याद ही होगा जब पहली बार किसी राष्ट्रवादी चैनल ने इस खौफनाक साज़िश की पूंछ पर पैर रखा था।

सुदर्शन न्यूज़ के सुरेश चव्हाणके ने जब डंके की चोट पर अपने शो में ‘UPSC जिहाद’ का वो नंगा सच टीवी पर दिखाने का ऐलान किया, तो पूरे देश के सेक्युलर और जिहादी इकोसिस्टम में ऐसा भूकंप आया था की लुटियंस दिल्ली की दीवारें हिल गई थीं।

सुरेश चव्हाणके ने सीधा सवाल पूछा था की अचानक से सिविल सर्विस में इन मुसलमानों की गिनती इतनी कैसे बढ़ने लगी है? जकात फाउंडेशन को विदेश से पैसा कौन भेज रहा है?

जैसे ही सुदर्शन न्यूज़ ने जकात फाउंडेशन और विदेशी फंडिंग के वो काले चिट्ठे टीवी पर खोलने शुरू किए, इन वामपंथी पत्रकारों, मानवाधिकार वालों और अर्बन नक्सलियों की पैंट गीली हो गई।

ये लिबरल गैंग तुरंत रोता-बिलखता हुआ सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया। इन्होंने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया की किसी भी तरह से सुदर्शन न्यूज़ के इस शो पर परमानेंट बैन लग जाए।

वामपंथी वकीलों की पूरी की पूरी फौज सुप्रीम कोर्ट में खड़ी हो गई और छाती पीटने लगी की “ये शो मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैला रहा है, इससे देश का भाईचारा टूट जाएगा, इसे टीवी पर मत चलने दो।”

अरे भई, अगर जकात फाउंडेशन इतनी ही पाक-साफ संस्था थी, अगर तुम्हारे पास छुपाने के लिए कुछ नहीं था, तो फिर तुम्हें सुदर्शन न्यूज़ के खुलासों से इतनी भयंकर मिर्ची क्यों लग रही थी?

तुम खुलकर सामने आते और बताते की तुम्हारा पैसा कहां से आ रहा है! लेकिन नहीं, चोर की दाढ़ी में तिनका था। इस पूरे वामपंथी इकोसिस्टम को पता था की अगर जकात फाउंडेशन की विदेशी और आतंकी फंडिंग का सच देश के सामने आ गया, तो इनका वो जो ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ का प्रोजेक्ट चल रहा है, वो हमेशा के लिए मिट्टी में मिल जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में जो नौटंकी हुई और जिस तरह से वामपंथियों ने उस शो को रोकने के लिए अपनी जान लगा दी, वो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है की दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है।

ये अर्बन नक्सल और जेएनयू छाप पत्रकार इस ‘UPSC जिहाद’ के सबसे बड़े ढाल बनकर खड़े हैं। ये चाहते ही नहीं की देश के हिंदू को कभी ये पता चले की उसके टैक्स के पैसों और आतंकियों की फंडिंग का कॉम्बिनेशन बनाकर कैसे इस देश की नौकरशाही को इस्लामिक बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा चुका है।

उर्दू अरबी और इंटरव्यू पैनल का वो खौफनाक नेक्सस, पिछले दरवाज़े से जिहादियों को सिस्टम में घुसाने का षड्यंत्र

अब ज़रा इस यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा के उस अंदरूनी खेल को समझिए जो बंद दरवाज़ों के पीछे खेला जाता है। ये वामपंथी और लिबरल आपको बताएंगे की “अरे, सिविल सर्विस तो देश की सबसे कठिन और पारदर्शी परीक्षा है, यहाँ तो सिर्फ टैलेंट चलता है।”

लेकिन ज़मीनी हकीकत ये है की इस तथाकथित पारदर्शी परीक्षा में भी पिछले दरवाज़े से जिहादियों को घुसाने का एक बहुत ही खौफनाक नेक्सस काम कर रहा है।

ज़रा ऑप्शनल विषयों के खेल पर नज़र डालिए। हमारा वो आम हिंदू लड़का, जो दिन-रात पसीना बहाकर इतिहास, भूगोल, गणित या विज्ञान जैसे मुश्किल विषय लेता है, उसे यूपीएससी की चेकिंग में रुला दिया जाता है।

वो बेचारा नंबरों के लिए घिसटता रहता है। लेकिन दूसरी तरफ? दूसरी तरफ इन लोगों के लिए उर्दू, अरबी और फारसी जैसे विषय मौजूद हैं। 

इन विषयों की आड़ में क्या खेल होता है, ये कोई नहीं बताता। इन मज़हबी भाषाओं के पेपर चेक करने वाले भी ज़्यादातर उसी विशेष समुदाय या वामपंथी इकोसिस्टम के लोग होते हैं।

ये लोग अपने ही समुदाय के लड़कों को इन अरबी-उर्दू के पेपरों में थोक के भाव नंबर बांटते हैं, ताकि उनका टोटल स्कोर रातों-रात उस हिंदू लड़के से ऊपर निकल जाए जो इतिहास या राजनीति विज्ञान में माथा फोड़ रहा था।

और कहानी सिर्फ रिटेन एग्जाम तक खत्म नहीं होती। असली सेक्युलर फ्रॉड तो शुरू होता है इंटरव्यू पैनल में! आप सोच रहे होंगे की यूपीएससी के इंटरव्यू पैनल में बहुत बड़े-बड़े और निष्पक्ष लोग बैठते हैं।

अरे भाई, वहां भी तो इसी लुटियंस दिल्ली और जेएनयू (JNU) छाप इकोसिस्टम के रिटायर्ड वामपंथी बाबू और प्रोफेसर कुंडली मारकर बैठे हैं।

जब कोई मदरसे से पढ़ा हुआ लड़का, दाढ़ी बढ़ाकर या कोई लड़की हिजाब पहनकर इंटरव्यू देने जाती है, तो इन वामपंथी पैनल वालों का ‘सेक्युलर प्रेम’ अचानक से जाग उठता है। इन्हें उस दाढ़ी और हिजाब में टैलेंट नहीं, बल्कि एक ‘मज़लूम अल्पसंख्यक’ नज़र आता है।

ये बाकायदा विक्टिम कार्ड प्ले करवाते हैं। इन पैनलिस्टों को लगता है की “वाह! मदरसे से निकलकर एक बेचारा अल्पसंख्यक बच्चा यहाँ तक आ गया, इसे तो सिस्टम में लेना ही चाहिए।”

फिर क्या होता है? ये वामपंथी पैनलिस्ट उस मदरसा छाप लड़के को इंटरव्यू में इतने छप्पर फाड़ नंबर दे देते हैं की वो मेरिट लिस्ट में सीधा टॉप पर पहुंच जाता है।

वहीं दूसरी तरफ, अगर कोई तिलक लगाने वाला या कलावा बांधने वाला सनातनी लड़का वहां बैठा हो, तो उससे ऐसे-ऐसे टेढ़े सवाल पूछे जाते हैं की वो बेचारा इंटरव्यू में ही डिप्रेशन में चला जाए।

ये टैलेंट का नहीं, ये एजेंडे का सिलेक्शन है! ये एक सोची-समझी साज़िश है ताकि धीरे-धीरे पूरे ब्यूरोक्रेसी के ढांचे को इस्लामिक और वामपंथी सोच से भर दिया जाए।

अगर ये मदरसे छाप बाबू सिस्टम में बैठ गए तो रामनवमी के जुलूसों पर लाठियां और दंगे होने पर हिंदू को ही मारेंगे गोलियां

अब ज़रा आंखें बंद कीजिए और उस खौफनाक भविष्य की कल्पना कीजिए जो हमारे दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है। अगर आप सोच रहे हैं डरावना “अरे यार, जो भी अफसर बनेगा, वो तो संविधान के हिसाब से ही काम करेगा ना”, तो आप दुनिया के सबसे बड़े बेवकूफ हैं।

ज़रा सोचिए, जो लड़का विदेशी आतंकियों की फंडिंग वाली जकात फाउंडेशन में पढ़ा हो, जिसका ब्रेनवाश वामपंथी प्रोफेसरों ने किया हो, और जो मदरसे की वो जेहादी तालीम लेकर बड़ा हुआ हो, वो अगर कल को आपके ज़िले का डीएम (DM) या एसपी (SP) बन गया, तो वो क्या करेगा?

क्या वो भारत के संविधान को मानेगा या अपने उस शरिया और उस इकोसिस्टम के प्रति वफादार होगा जिसने उसे उस लाल बत्ती वाली गाड़ी तक पहुंचाया है?

इसका सीधा सा और खौफनाक ट्रेलर हम देश के कई हिस्सों में देख चुके हैं। जब रामनवमी और हनुमान जयंती का त्योहार आएगा, तो ये जिहादी डीएम सबसे पहले सुरक्षा का बहाना बनाकर आपके जुलूस पर बैन लगाएगा।

वो कहेगा डरावना “डीजे (DJ) नहीं बजेगा, शोभा यात्रा इस मुस्लिम मोहल्ले से नहीं गुज़रेगी, क्योंकि इससे शांति भंग हो सकती है।” लेकिन जब मुहर्रम आएगा या शुक्रवार की नमाज़ होगी, तो यही अफसर पूरे शहर के हाईवे बंद करवा देगा और अपनी पुलिस को आदेश देगा की “इन शांति दूतों को सड़क पर नमाज़ पढ़ने दो, इन्हें कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।”

और सबसे भयानक मंज़र तो दंगों के वक्त होगा भाई! जब बंगाल के संदेशखाली या हरियाणा के मेवात जैसा कोई दंगा भड़केगा, जब रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी गुंडे हमारी बहन-बेटियों पर हाथ डालेंगे और हमारे मंदिरों को तोड़ेंगे, तब ये जेहादी एसपी अपनी पुलिस को क्या ऑर्डर देगा?

वो पुलिस को आदेश देगा की जो हिंदू अपने बचाव में डंडा उठा रहा है, उस पर लाठीचार्ज करो, उस पर गोलियां चलाओ और उसे जेल में ठूंस दो। और जो असली जेहादी पत्थरबाज़ हैं, उन्हें पीछे के दरवाज़े से चुपचाप निकाल दो।

ये अफसर अपनी कुर्सी और अपनी कलम का इस्तेमाल करके हिंदुओं का वो खामोश कत्लेआम करेंगे की आप किसी कोर्ट या किसी नेता के पास रोने भी नहीं जा पाएंगे।

पुलिस उनकी होगी, प्रशासन उनका होगा, और हम हिंदू अपने ही देश में, अपनी ही ज़मीन पर, अपने ही टैक्स से पलने वाले इन गद्दार बाबुओं की जूतियों के नीचे कुचले जा रहे होंगे। क्या आप अपने बच्चों के लिए ऐसा खौफनाक भविष्य छोड़कर जाना चाहते हैं?

इस ब्यूरोक्रेसी जिहाद को कुचलने के लिए देश को चाहिए NIA की सबसे कड़क जांच

अब बहुत हो गई ये सेक्युलरिज्म की नौटंकी और ‘सबका साथ’ वाली मीठी गोलियां! पानी अब सिर के ऊपर से बहने लगा है। आज मई 2026 में हम जिस मुहाने पर खड़े हैं, वहां से अगर हमने इस ब्यूरोक्रेसी जिहाद की गर्दन नहीं मरोड़ी, तो यकीन मानिए भारत का इस्लामीकरण होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक पाएगी।

अब हिंदू समाज को अपने घरों से निकलकर सीधे तौर पर भारत सरकार की कॉलर पकड़कर पूछना होगा की आखिर ये चल क्या रहा है? हम सरकार से डंके की चोट पर मांग करते हैं की ज़कात फाउंडेशन ऑफ इंडिया (ZFI) और ऐसी तमाम संदिग्ध संस्थाओं पर तुरंत एनआईए का सबसे कड़क छापा पड़ना चाहिए।

इनके एक-एक बैंक अकाउंट की फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए की आखिर मिडिल ईस्ट, तुर्की और विदेशी कट्टरपंथी चैरिटी से इनके पास जो करोड़ों रुपये आ रहे हैं, उसका असली सोर्स क्या है?

अगर कोई भी कनेक्शन जाकिर नाइक, हमास या पीएफआई (PFI) जैसे आतंकी संगठनों से मिलता है, तो ज़कात फाउंडेशन के दफ्तरों पर बुलडोज़र चलना चाहिए और इनके आकाओं पर यूएपीए (UAPA) लगाकर उन्हें काल कोठरी में सड़ाना चाहिए।

इसके साथ ही, अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia RCA) और वक्फ बोर्ड के कोचिंग सेंटरों को दी जा रही वो हराम की सरकारी फंडिंग तुरंत बंद होनी चाहिए। हमारे टैक्स के पैसे से तुम हमारे ही खिलाफ जिहादी अफसरों की फौज तैयार कर रहे हो? ये हम हिंदू किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होने वाले हर एक उम्मीदवार का एक ऐसा भयंकर और डीप पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए की अगर उसका कोई दूर का रिश्तेदार या वो खुद कभी भी PFI, सिमी (SIMI) या किसी भी कट्टरपंथी व्हाट्सएप ग्रुप से भी जुड़ा रहा हो, तो उसे हमेशा के लिए सिविल सर्विस से बाहर फेंक दिया जाए।

हमें वो बाबू चाहिए जो भारत माता की जय बोलते हों, जो इस देश के सनातन मूल्यों का सम्मान करते हों। हमें वो जेहादी स्लीपर सेल नहीं चाहिए जो सिस्टम में बैठकर हमारे खिलाफ फतवे जारी करें।

उठो सनातनी, उठो! इस सफेदपोश जिहाद को ज़मीन में गाड़ने का वक्त आ चुका है। जो हमारे सिस्टम में घुसकर हमें मिटाने की साज़िश रचेगा, उसे चुन-चुन कर मिट्टी में मिलाना ही हमारा सबसे पहला धर्म है!

जय श्री राम! भारत माता की जय!

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