जरा 2006 से लेकर 2008 के उस खौफनाक दौर को याद करीए। वो एक ऐसा दौर था जब इस देश की कांग्रेस सरकार पूरी तरह से जिहादियों के आगे घुटने टेक चुकी थीं।
आए दिन मुंबई की लोकल ट्रेनों में, दिल्ली के बाज़ारों में, हैदराबाद में और मालेगांव में बम फट रहे थे। हर कोई जानता था की ये ब्लास्ट कौन कर रहा है- लश्कर-ए-तैयबा (LeT), इंडियन मुजाहिदीन और सिमी (SIMI) जैसे खूंखार जिहादी संगठन!
पुलिस उन्हें पकड़ती भी थी, लेकिन फिर अचानक से दिल्ली में बैठे आकाओं को अपने उस ‘मुस्लिम वोटबैंक’ की चिंता सताने लगती थी।
ज़रा सोचिए, उस वक्त केंद्र में बैठी यूपीए (UPA) की कांग्रेस सरकार ने क्या किया? उन्होंने आतंकवादियों का एनकाउंटर करने के बजाय एक ऐसी खौफनाक, नीच और गद्दार साज़िश रची जिसने पूरे भारत की आत्मा को लहूलुहान कर दिया।
पी. चिदंबरम, सुशील कुमार शिंदे और दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेसी नेताओं ने एक नया शब्द ईजाद किया- ‘भगवा आतंकवाद’ (Saffron Terror)!
अरे भाई, जिस भगवा रंग ने इस देश को त्याग, तपस्या और बलिदान सिखाया, जिस भगवा झंडे के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, इन कांग्रेसी गद्दारों ने उसी पवित्र भगवा रंग को आतंकवाद से जोड़ दिया!
ये दुनिया भर में सनातन धर्म को बदनाम करने की, हिंदुओं को अल-कायदा और लश्कर के खूंखार जिहादियों के बराबर लाकर खड़ा करने की एक बहुत बड़ी कांग्रेस समर्थित इंटरनेशनल साज़िश थी।
ये चाहते थे की दुनिया ये माने की भारत में जो बम फट रहे हैं, वो पाकिस्तानी जिहादी नहीं, बल्कि भारत के साधु-संत और आरएसएस (RSS) के लोग फोड़ रहे हैं। अपने जिहादी वोटबैंक को खुश करने के लिए कांग्रेस ने भारत माता के माथे पर ही आतंकवाद का कलंक पोत दिया था।
मालेगांव-समझौता एक्सप्रेस का असली सच, पाकिस्तानी आतंकियों को भगा कर ‘भगवा’ को आतंकवादी बनाने का कांग्रेसी षड्यंत्र
अब ज़रा इस सेक्युलर फ्रॉड की उस फाइल को खोलते हैं जिसे कांग्रेस ने हमेशा दबा कर रखा। समझौता एक्सप्रेस और मक्का मस्जिद ब्लास्ट का वो खौफनाक सच, जिसे सुनकर आपको इस सिस्टम से नफरत हो जाएगी।
जब समझौता एक्सप्रेस में बम फटा था, तो हमारी खुफिया एजेंसियों से लेकर अमेरिका और यूएन (UN) तक ने डंके की चोट पर साफ कर दिया था की इसके पीछे पाकिस्तानी जिहादी ‘आरिफ कासमानी’ और लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। कासमानी के तार सीधे दाऊद इब्राहिम और अल-कायदा से जुड़े हुए थे।
लेकिन फिर अचानक से क्या होता है? कांग्रेस सरकार के इशारे पर पुलिस की जांच की दिशा को 180 डिग्री घुमा दिया जाता है। जो असली पाकिस्तानी आतंकवादी पकड़े गए थे, उन्हें रातों-रात गुपचुप तरीके से बिना किसी सज़ा के छोड़ दिया जाता है, उन्हें वापस भागने का रास्ता दे दिया जाता है। और सारा का सारा मलबा भारत के साधु-संतों और राष्ट्रवादी संगठनों पर डाल दिया जाता है।
सरकार ने उस वक्त के कुछ भ्रष्ट और बिकाऊ पुलिस अफसरों (खासकर महाराष्ट्र एटीएस) को अपना मोहरा बनाया। इन अफसरों को सीधा आदेश था की चाहे जो हो जाए, चाहे जितने फर्जी सबूत गढ़ने पड़ें, बस किसी तरह इस केस में आरएसएस (RSS) और हिंदू साधुओं का नाम घसीट लाओ। रातों-रात फर्जी गवाह तैयार किए गए। लोगों को डरा-धमका कर उनके झूठे बयान दर्ज़ किए गए।
जो आरडीएक्स (RDX) पाकिस्तानी जिहादी लेकर आए थे, उसे हिंदू संगठनों की साज़िश बता दिया गया।
ये हमारे ही देश की सरकार थी जो पाकिस्तान को दुनिया के सामने ‘क्लीन चिट’ दे रही थी और अपने ही देश के हिंदुओं को आतंकवादी साबित करने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही थी।
बेगुनाह साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर कांग्रेस का खौफनाक टॉर्चर
जब भी मैं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल श्रीकांत पुरोहित के बारे में सोचता हूं, तो मेरी आंखें नम हो जाती हैं और इस कांग्रेस पर थूकने का मन करता है।
एक संन्यासिनी, जिसने अपना पूरा जीवन धर्म और राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, उसके साथ महाराष्ट्र एटीएस और कांग्रेसी सिस्टम ने वो सलूक किया जो कसाब जैसे किसी खूंखार जिहादी के साथ भी नहीं किया जाता।
साध्वी प्रज्ञा को बिना किसी वारंट, बिना किसी सबूत के अवैध रूप से उठा लिया गया। उन्हें महीनों तक गायब रखा गया। पुलिस कस्टडी में उस हिंदू संन्यासिनी का शारीरिक और मानसिक चीरहरण हुआ।
पुलिस वाले उन्हें चमड़े के बेल्टों से मारते थे, गंदी-गंदी गालियां देते थे। उन्हें उलटा लटकाकर पीटा जाता था। उनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई ताकि वो ताउम्र ठीक से खड़ी ना हो सकें।
और ये सब क्यों हो रहा था? सिर्फ इसलिए ताकि वो टूट जाएं और कैमरे के सामने कबूल कर लें की हां, आरएसएस ने बम फोड़े थे। लेकिन उस सनातनी शेरनी ने हार नहीं मानी! टूट गईं, व्हीलचेयर पर आ गईं, लेकिन उन्होंने इन गद्दारों के आगे घुटने नहीं टेके।
और कर्नल श्रीकांत पुरोहित? अरे भाई, वो कोई आम इंसान नहीं थे। वो इंडियन आर्मी के एक बहुत ही जांबाज और देशभक्त खुफिया अफसर (Military Intelligence Officer) थे।
कर्नल पुरोहित का काम ही ये था की वो सिमी (SIMI) और जिहादी संगठनों के अंदर घुसकर उनका नेटवर्क तोड़ें। वो अपना काम बहुत ही ईमानदारी से कर रहे थे और उनके पास इन जिहादियों का पूरा कच्चा चिट्ठा था।
लेकिन इस कांग्रेस सरकार को तो अपना वो मुस्लिम वोटबैंक बचाना था ना! तो इन्होंने क्या किया? इन्होंने अपने ही देश के एक सेवारत आर्मी अफसर को आतंकवादी घोषित करके जेल में ठूंस दिया।
कर्नल पुरोहित को भी वो खौफनाक यातनाएं दी गईं जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। एक फौजी, जिसने तिरंगे की कसम खाई थी, उसे सालों तक काल कोठरी में सड़ाया गया।
26/11 मुंबई हमले, और RSS को फंसाने की कांग्रेस की गंदी साज़िश जो तुकाराम ओंबले ने नाकाम कर दी
अब ज़रा इस ‘भगवा आतंकवाद’ की उस खौफनाक इंटरनेशनल साज़िश पर आते हैं जो अगर कामयाब हो जाती, तो आज दुनिया के हर देश में हिंदू को एक आतंकवादी की नज़र से देखा जाता।
बात 26 नवंबर 2008 (26/11 मुंबई हमले) की है। लश्कर-ए-तैयबा के 10 खूंखार पाकिस्तानी जिहादी मुंबई में घुसते हैं और 160 से ज्यादा बेगुनाह लोगों को गोलियों से भून देते हैं।
लेकिन ज़रा उन जिहादियों की तैयारी देखिए। उन आतंकवादियों के हाथ में कलावा (हिंदू रक्षासूत्र) बंधा हुआ था। उनकी जेबों में जो आई-कार्ड (ID Cards) मिले, वो फर्जी थे और उन पर हिंदू नाम लिखे हुए थे।
कसाब की जेब से ‘समीर चौधरी’ नाम का आई-कार्ड मिला था! ये कोई इत्तेफाक नहीं था भाई। ये आईएसआई (ISI), पाकिस्तान और भारत में बैठे उनके कुछ गद्दार आकाओं का मास्टरप्लान था।
इनका खौफनाक प्लान ये था की मुंबई पुलिस इन सभी 10 आतंकवादियों को मार गिराएगी। जब इनकी लाशें मिलेंगी, तो उनके हाथों में कलावा होगा और जेब में समीर चौधरी जैसे हिंदू नाम के आईडी कार्ड होंगे।
फिर ये भारत का वामपंथी मीडिया और कांग्रेस सरकार दुनिया भर में चिल्लाएगी कि “देखो, ये हमला पाकिस्तान ने नहीं किया, ये हमला आरएसएस (RSS) और हिंदू चरमपंथियों ने किया है!”
अगर आपको मेरी बातों पर शक है, तो ज़रा उस कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह की उस बेशर्मी को याद कर लीजिए। जब मुंबई हमले में खून के धब्बे सूखे भी नहीं थे, तब दिग्विजय सिंह ने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एक किताब का विमोचन किया था।
उस किताब का नाम था- ’26/11 RSS की साज़िश’ (26/11 RSS ki Saazish)! मतलब, पाकिस्तान के आतंकवादियों को क्लीन चिट देने और भारत के हिंदुओं को आतंकवादी साबित करने के लिए ये गद्दार इकोसिस्टम पूरी तरह से तैयार बैठा था।
लेकिन भगवान को कुछ और ही मंज़ूर था। इस देश की माटी के एक सच्चे सपूत, एक वीर पुलिसवाले तुकाराम ओंबले ने इन जिहादियों की पूरी की पूरी स्क्रिप्ट पर पानी फेर दिया।
वीर तुकाराम ओंबले ने अपनी छाती पर एके-47 (AK-47) की दर्जनों गोलियां खाईं, वो शहीद हो गए, लेकिन उन्होंने मरते दम तक उस जिहादी सूअर अजमल कसाब को ज़िंदा पकड़ कर रखा।
अगर उस रात कसाब ज़िंदा नहीं पकड़ा जाता, अगर वो भी मारा जाता, तो आज इस देश का इतिहास कुछ और ही होता। कसाब के ज़िंदा पकड़े जाते ही पाकिस्तान का नंगा सच दुनिया के सामने आ गया।
उसने खुद कबूल कर लिया की वो फरीदकोट का पाकिस्तानी मुसलमान है। तुकाराम ओंबले ने सिर्फ कसाब को नहीं पकड़ा था भाई, उन्होंने पूरे सनातन धर्म को उस ‘भगवा आतंकवाद’ के कलंक से बचा लिया था जिसे ये सेक्युलर गद्दार हमारे माथे पर थोपने की तैयारी कर चुके थे।
तुकाराम ओंबले का वो बलिदान इतिहास का वो सबसे बड़ा पन्ना है जिसने करोड़ों हिंदुओं को दुनिया भर में जलील होने से बचा लिया।
राहुल गांधी का विकीलीक्स खुलासा और हिंदू विरोधी इकोसिस्टम का ‘Saffron Terror’ प्रोपेगेंडा
अब ज़रा इस गद्दारी के उस पन्ने को पलटते हैं जिसने पूरी दुनिया के सामने भारत माता का सिर शर्म से झुका दिया था। 26/11 का खौफनाक आतंकी हमला हो चुका था, कसाब ज़िंदा पकड़ा जा चुका था और पूरी दुनिया को पता चल गया था की इस हमले के पीछे पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) का हाथ है।
लेकिन इस देश की सत्ता पर काबिज़ कांग्रेस पार्टी के राजकुमार के दिमाग में तो हिंदुओं के खिलाफ कुछ और ही ज़हर उबल रहा था।
साल 2010 में ‘विकीलीक्स’ (WikiLeaks) नाम की एक इंटरनेशनल वेबसाइट ने एक ऐसा धमाका किया जिसने कांग्रेस के इस जिहादी प्रेम को पूरी तरह से नंगा कर दिया। विकीलीक्स ने एक सीक्रेट केबल (Secret Cable) लीक किया।
इस केबल में अमेरिका के तत्कालीन राजदूत टिमोथी रोमर (Timothy Roemer) की वाशिंगटन भेजी गई एक रिपोर्ट थी। रोमर ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था की उनकी राहुल गांधी से मुलाकात हुई थी। और जानते हैं उस मुलाकात में राहुल गांधी ने क्या कहा था?
राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत के सामने बड़ी बेशर्मी से कहा था की “भारत को लश्कर-ए-तैयबा जैसे इस्लामिक आतंकी संगठनों से उतना खतरा नहीं है, जितना खतरा देश के बहुसंख्यक हिंदू चरमपंथियों से है!”
एक तरफ पाकिस्तान के जिहादी हमारे देश में घुसकर सैकड़ों बेगुनाहों को गोलियों से भून रहे थे, और दूसरी तरफ देश पर राज करने वाली पार्टी का सबसे बड़ा नेता विदेशी ताकतों के सामने अपने ही देश के शांतिप्रिय हिंदुओं को दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी बता रहा था।
ये उस ‘भगवा आतंकवाद’ की इंटरनेशनल स्क्रिप्ट थी जिसे कांग्रेस ने बहुत ही चालाकी से तैयार किया था। ये चाहते थे की अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र (UN) भारत के बहुसंख्यक हिंदुओं पर उसी तरह की पाबंदियां लगाएं जैसी वो अल-कायदा पर लगाते हैं।
और इस नीच साज़िश में आग में घी डालने का काम किया इस देश के उस सड़े हुए रविश कुमार जैसे वामपंथी मीडिया ने! इन लोगों ने दिन-रात अपने प्राइम टाइम शो में ‘सफ्रन टेरर’ (Saffron Terror) का झूठा प्रोपेगेंडा चलाया।
इन्होंने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित का पहले ही मीडिया ट्रायल कर दिया। बिना कोर्ट के फैसले के इन्होंने देश के साधु-संतों को ‘आतंकी मास्टरमाइंड’ घोषित कर दिया था।
साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित की रिहाई ने ढहाया कांग्रेस का जिहादी महल
लेकिन कहते हैं ना कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। भगवान के घर देर है अंधेर नहीं। कांग्रेस और उनके वामपंथी पालतू कुत्तों ने झूठ का जो ये विशाल जिहादी महल खड़ा किया था, वो जब अदालतों के सामने पहुंचा, तो ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर गिर गया।
मक्का मस्जिद ब्लास्ट और समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में कांग्रेस सरकार ने साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को आरोपी बनाकर जेल में ठूंस दिया था। उन्हें महीनों तक टार्चर किया गया और दबाव डाला गया की वो बम फोड़ने का जुर्म कबूल कर लें।
लेकिन जब सालों बाद मामला एनआईए (NIA – National Investigation Agency) की विशेष अदालतों में चला, तो जजों के भी होश उड़ गए। कोर्ट ने डंके की चोट पर एटीएस (ATS) और जांच एजेंसियों की चार्जशीट की धज्जियां उड़ा दीं।
एनआईए की जांच में साफ हो गया की महाराष्ट्र ATS के कुछ बिकाऊ और भ्रष्ट अफसरों ने कांग्रेस के इशारे पर बाकायदा इस केस में फर्जी सबूत प्लांट किए थे।
जांच में साबित हुआ की जिस RDX का हल्ला मचाकर कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा को फंसाया गया था, वो तो उन पुलिस वालों ने खुद ही वहां रखा था ताकि एक बेगुनाह फौजी और एक हिंदू संन्यासिनी को आतंकवादी साबित किया जा सके।
मई 2016 में एनआईए ने अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और पांच अन्य लोगों को साफ तौर पर क्लीन चिट दे दी। एनआईए ने डंके की चोट पर अदालत में कहा कि साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कोई सबूत है ही नहीं।
2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को ज़मानत दे दी और वो 9 साल के भयंकर शारीरिक और मानसिक टॉर्चर के बाद खुली हवा में सांस ले सकीं।
और कर्नल श्रीकांत पुरोहित? उस जांबाज मिलिट्री इंटेलिजेंस अफसर के साथ जो गद्दारी हुई, उसका इंसाफ तो सुप्रीम कोर्ट ने खुद किया। अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल पुरोहित को ज़मानत देते हुए साफ कहा की उनके खिलाफ जो भी आरोप थे, वो सब ‘विरोधाभासी’ थे।
कोर्ट में ये सच सामने आ गया की कर्नल पुरोहित असल में आर्मी के खुफिया मिशन पर थे और सिमी (SIMI) जैसे जिहादी संगठनों की जड़ों में घुसकर उनके नेटवर्क को तोड़ रहे थे।
भगवा को आतंकवाद कहने वाली कांग्रेस को अब हिंदू कभी माफ नहीं करेगा
जिस भगवा रंग को देखकर सूरज उगता है, जो भगवा रंग अग्नि की पवित्रता का प्रतीक है, जो भगवा रंग हमारे ऋषियों, मुनियों और वीर शिवाजी की पहचान है… उस भगवा को आतंकवाद से जोड़ना इस दुनिया का सबसे बड़ा पाप था।
हिंदू समाज को ये बात अपनी आने वाली पीढ़ियों के दिमाग में ठोक-ठोक कर भर देनी चाहिए की अगर ये कांग्रेस कल को गलती से भी दोबारा सत्ता में आ गयी, तो ये फिर से वही खेल खेलेगी।
ये तुम्हारे मंदिरों पर ताले लगवाएंगे, तुम्हारे संतों को जेलों में ठूंसेंगे और जिहादियों को बिरयानी खिलाकर तुम्हें ही मुजरिम साबित कर देंगे।
अब वक्त आ गया है की कांग्रेस के इस जिहादी इकोसिस्टम का सच हर हिंदू के घर-घर तक पहुंचाया जाए। जब तक ये गद्दार नेता समाज के कूड़ेदान में हमेशा-हमेशा के लिए दफन नहीं हो जाते, तब तक हमें चैन से नहीं बैठना है।
जय श्री राम!
