शांतिदूतों से ज्यादा हिन्दुओं को घर में बैठे ‘जयचंदों’ से खतरा, रामलला के 200 करोड़ के दान पर डाका डालने वाले इन गद्दारों को बीच चौराहे पर उल्टा लटकाने का आ गया वक्त

हम सनातनियों ने 500 सालों तक क्या कुछ नहीं सहा! हमारे हज़ारों पूर्वजों ने अपने खून से सरयू नदी को लाल कर दिया। कोठारी बंधुओं जैसे हमारे निहत्थे कारसेवकों ने अपने नंगे सीनों पर गोलियां खाईं।

हमारे आराध्य, हमारे रामलला दशकों तक एक फटे हुए तिरपाल के नीचे टेंट में बैठे रहे। पीढ़ियां गुज़र गईं, आंखें तरस गईं, तब जाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया और अयोध्या में वो भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हुआ।

जब रामलला अपने भव्य महल में विराजमान हुए, तो इस देश के कोने-कोने से, गांव-देहात से हिंदू ने रामलला के चरणों में दान दिया। किसी बूढ़ी मां ने अपनी पेंशन के पैसे दान पेटी में डाल दिए, किसी गरीब मज़दूर ने अपनी दिहाड़ी के पैसे रामलला को अर्पण कर दिए।

क्यों? क्योंकि वो पैसा नहीं था भाई, वो करोड़ों हिंदुओं की आत्मा थी, उनकी वो अटूट आस्था थी जो 500 सालों के इंतज़ार के बाद आंसुओं के रूप में बह रही थी।

लेकिन हमारे उसी पवित्र खज़ाने के साथ क्या हुआ? हमारे उसी खून-पसीने की कमाई पर राम मंदिर के अंदर बैठे कुछ गद्दार कर्मचारियों ने ऐसा खौफनाक डाका डाला है, जिसे सुनकर किसी भी रामभक्त का कलेजा फट जाएगा।

जो पैसा रामलला के भव्य निर्माण और सनातन धर्म के कार्यों के लिए था, उस पैसे को दान पेटी में गिनने वाले इन नीच जयचंदों ने अपनी जेबों में ठूंसना शुरू कर दिया।

ये घोटाला कोई 10-20 लाख का नहीं है मेरे भाई, मीडिया रिपोर्ट्स चीख कर कह रही हैं की ये डकैती 200 करोड़ रुपये के पार जा सकती है!

200 करोड़ रुपये! बाहरी दुश्मनों और उन ‘शांतिदूतों’ से तो हम हमेशा से लड़ते आए हैं, उनकी साज़िशों का हम पलटवार कर सकते हैं, लेकिन इन आस्तीन के सांपों का हम क्या करें जिन्हें हमने खुद भगवान के खज़ाने पर बैठाया था?

इन गद्दारों ने साबित कर दिया है की एक सनातनी की आस्था से ज़्यादा सस्ती चीज़ इनके लिए कुछ नहीं है।

ऑटो चलाने वाले टिन्नू यादव से लेकर मैकेनिक लवकुश तक, गद्दारों ने रामलला का पैसा लूटकर खड़ी कर ली फॉर्च्यूनर और करोड़ों की संपत्ति

अगर आपको लग रहा है की ये कोई छोटी-मोटी चोरी थी, तो ज़रा इन पापियों की वो लिस्ट और उनका वो काला चिठ्ठा देख लीजिए, जिसे सुनकर आपका दिमाग सुन्न पड़ जाएगा। ये वो लोग हैं जिनकी अपनी औकात दो कौड़ी की नहीं थी, लेकिन रामलला का पैसा लूटकर ये रातों-रात अरबपति बन बैठे।

सबसे पहले बात करते हैं इस पूरे खौफनाक गैंग के मास्टरमाइंड रामशंकर यादव की, जिसे लोग ‘टिन्नू’ कहते हैं। ये टिन्नू यादव कौन है? आज से कुछ साल पहले तक ये आदमी अयोध्या की सड़कों पर ऑटो चलाकर सवारियां ढोता था।

किसी तरह जुगाड़ लगाकर इसे राम मंदिर में दान गिनने की 15-20 हज़ार रुपये की नौकरी मिल गई। और फिर क्या था? इस नीच आदमी ने रामलला के खज़ाने को अपने बाप की जागीर समझ लिया।

जो आदमी कल तक ऑटो की किश्तें नहीं भर पाता था, आज उस टिन्नू यादव ने अयोध्या के एयरपोर्ट के पास 70 कमरों का एक आलीशान हॉस्टल खड़ा कर लिया है! इसके पास तीन-तीन महंगे रेस्टोरेंट हैं।

कल तक फटे जूते पहनने वाला ये आदमी आज चमचमाती फॉर्च्यूनर (Fortuner) गाड़ी में घूमता है। पुलिस की जांच बता रही है की इस अकेले गद्दार ने रामलला का पैसा डकार कर 50 करोड़ से ज़्यादा की बेनामी संपत्ति खड़ी कर ली है।

अरे भाई, क्या इसके घर में कोई कुबेर का खज़ाना गड़ा था? नहीं! ये वो पैसा था जो आपने और हमने अपनी मेहनत की कमाई से भगवान के दानपात्र में डाला था।

और ये लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती। एक और गद्दार है केडी तिवारी। इसका काम था रामलला को चढ़ाए गए सोने-चांदी के जेवरों को तौलना और उनका हिसाब रखना।

इस पापी ने भगवान के गहनों और दान पर ऐसा डाका डाला की आज इसके पास अयोध्या में करोड़ों की ज़मीनें हैं। लवकुश मिश्रा नाम का एक और आदमी है, जो कल तक दूसरों की गाड़ियां सुधारने वाला एक मामूली मैकेनिक था।

आज वो करोड़ों के मकान का मालिक है। टिन्नू के एक भतीजे मनीष यादव के पास से तो पुलिस ने बाकायदा 36 लाख रुपये का सीधा कैश बरामद किया है।

ज़रा सोचिए इस नीचता की हद को! ये लोग धर्म की आड़ में, राम मंदिर के पवित्र प्रांगण में बैठकर अपनी सात पुश्तों का इंतज़ाम कर रहे थे।

कैमरों को बंद करके दिया गया डकैती को अंजाम, 8 महीने का CCTV डिलीट करने वाले इन आस्तीन के सांपों की खौफनाक साज़िश

इस पूरे खौफनाक फ्रॉड का सबसे भयानक हिस्सा वो है जब आपको पता चलेगा की ये डकैती आखिर की कैसे गई। ये कोई एक-दो दिन की चोरी नहीं थी, ये एक बहुत ही सुनियोजित और वेल-प्लांड साज़िश थी।

दान पेटियों से पैसा निकालने से लेकर, उसकी गिनती करने और उसे स्ट्रॉन्ग रूम (Strong Room) तक ले जाने की पूरी चेन में इन गद्दारों ने अपना नेक्सस बना रखा था। बैंक के अधिकारियों से लेकर गिनती करने वाले लगभग 50 कर्मचारी इस महा-लूट में शामिल बताए जा रहे हैं।

लेकिन जब इंसान पाप करता है, तो उसके अंदर एक खौफ भी होता है। जब इन टिन्नू और लवकुश जैसों ने करोड़ों की ज़मीनें खरीदनी शुरू कीं, तो अयोध्या के लोगों को शक होने लगा की आखिर 15 हज़ार की नौकरी करने वाले इन बाबुओं के पास रातों-रात इतना पैसा कहां से आ रहा है।

जब इन्हें लगा की इनका पाप का घड़ा भर चुका है और भंडाफोड़ होने वाला है, तो जानते हैं इन आस्तीन के सांपों ने क्या किया?

इन गद्दारों ने राम मंदिर के उस हाई-सिक्योरिटी वाले सीसीटीवी (CCTV) सिस्टम से ही छेड़छाड़ कर दी! इन्होंने सबूत मिटाने के लिए पिछले 7 से 8 महीने का पूरा का पूरा सीसीटीवी फुटेज ही डिलीट मार दिया!

ज़रा इनकी बेशर्मी की पराकाष्ठा देखिए भाई! इन्हें लगा की रामलला तो मूर्ति हैं, वो क्या बोलेंगे? कैमरे बंद कर दो, रिकॉर्डिंग डिलीट कर दो, और फिर जो मर्ज़ी आए लूटते रहो।

ये पापी भगवान के घर में बैठकर खुद भगवान को ही लूट रहे थे और सोच रहे थे की इन्हें कोई देखने वाला नहीं है। लेकिन इन्हें ये नहीं पता था की तुम इंसानों की आंखों में धूल झोंक सकते हो, कैमरों की आंखें फोड़ सकते हो, लेकिन रामलला के दरबार में देर है अंधेर नहीं।

इन गद्दारों को लगा की ये कानून से बड़े हो गए हैं, ये सबूत मिटाकर साफ बच निकलेंगे। लेकिन सीसीटीवी का तार भले ही कट गया हो, इनके पापों की फाइल अब सीधा बाबा के दरबार में खुल चुकी है।

शांतिदूतों से ज्यादा खतरनाक हैं हमारे अपने घर में बैठे ये जयचंद, करोड़ों रामभक्तों की पीठ में खंजर घोंपने वाले गद्दार

आज इस देश का आम हिंदू ये सवाल पूछ रहा है की आखिर हमें सबसे ज़्यादा खतरा किससे है? हमें दिन-रात उन ‘शांतिदूतों’ से डराया जाता है। बिल्कुल सही बात है, वो हमारे दुश्मन हैं और उनका एजेंडा सबको पता है।

लेकिन भाई, जो दुश्मन सामने से वार करता है, जिसके हाथ में पत्थर है, उसका तो हम सीना तानकर पलटवार कर सकते हैं।

लेकिन इन रामशंकर यादव, लवकुश मिश्रा और केडी तिवारी जैसे हिंदू गद्दारों का हम क्या करें? इन्हें हम कैसे पहचानें? ये वो लोग हैं जो माथे पर बड़ा सा लाल तिलक लगाते हैं, गले में भगवा गमछा डालते हैं, मुंह से “जय श्री राम” का उद्घोष करते हैं और फिर मौका मिलते ही हमारी ही पीठ में खंजर घोंप देते हैं।

ये शांतिदूतों से हज़ार गुना ज़्यादा खतरनाक हैं, क्योंकि ये हमारे घर के अंदर बैठे वो जयचंद हैं जो आस्था का चोला ओढ़कर हमारी ही तिजोरी काट रहे हैं।

इतिहास गवाह है मेरे भाई! भारत कभी बाहरी ताकतों से नहीं हारा। पृथ्वीराज चौहान हों, महाराणा प्रताप हों या छत्रपति शिवाजी महाराज, हमारे वीर कभी सामने से लड़ने वाले दुश्मनों से नहीं डरे। लेकिन जब-जब हमारी हार हुई, तब-तब उसके पीछे किसी जयचंद या किसी मीर जाफर का हाथ था।

हमने हमेशा अपनों की गद्दारी की कीमत चुकाई है। राम मंदिर के अंदर बैठकर चोरी करने वाले ये गद्दार कर्मचारी उसी सड़े हुए और नीच DNA की ताज़ा उपज हैं।

इन्होंने वामपंथियों और जिहादियों को घर बैठे एक ऐसा मौका दे दिया है की वो अब हिंदू धर्म और राम मंदिर पर उंगली उठा रहे हैं। जो लोग कल तक राम मंदिर बनने का विरोध कर रहे थे, आज वो इन जयचंदों की करतूतों पर तालियां पीट रहे हैं और हमारा मज़ाक उड़ा रहे हैं।

इन चंद पैसों के लालची भेड़ियों ने पूरे सनातन समाज का सिर शर्म से झुका दिया है। अगर ऐसे गद्दारों का परमानेंट और खौफनाक इलाज नहीं किया गया, तो फिर इस देश में कभी कोई हिंदू किसी मंदिर में एक रुपया भी दान करने से पहले सौ बार सोचेगा।

बुलडोज़र से नेस्तनाबूद हो इन पापियों की संपत्ति, बीच चौराहे पर उल्टा लटकाकर हो इन गद्दारों का परमानेंट इलाज

क्या इन नीच गद्दारों को सिर्फ नौकरी से निकाल देना या पुलिस थाने में बंद करके दो-चार साल की सज़ा दिलवा देना काफी है? बिल्कुल नहीं! अगर कोई किसी के घर से पैसा चुराता है, तो वो सिर्फ एक क्राइम है। लेकिन जब कोई रामलला के खज़ाने पर डाका डालता है, तो वो ‘रामद्रोह’ है।

इन आस्तीन के सांपों के लिए सबसे पहले बाबा का वो बुलडोज़र अयोध्या की सड़कों पर गरजना चाहिए। टिन्नू यादव ने रामलला के पैसों से वो जो एयरपोर्ट के पास 70 कमरों का आलीशान हॉस्टल बनाया है ना, उस हॉस्टल की ईंट से ईंट बजाकर उसे मलबे में तब्दील कर देना चाहिए।

और बात सिर्फ बुलडोज़र तक नहीं रुकनी चाहिए। इन टिन्नू यादव, केडी तिवारी और लवकुश जैसे पापियों को अयोध्या के बीच चौराहे पर उल्टा लटकाया जाना चाहिए। पुलिस इन्हें सरेआम डंडों और बेल्टों से ऐसा पीटे की इनकी चमड़ी लाल हो जाये और पूरा देश देखे!

जब तक इनके दिलों में ये खौफ नहीं बैठेगा की भगवान का पैसा चुराने पर मौत से भी बदतर सज़ा मिलती है, तब तक ये जयचंद हमारे मंदिरों को ऐसे ही दीमक की तरह खोखला करते रहेंगे।

जय श्री राम!

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