आजकल हर जगह बस एक ही डंका पीटा जा रहा है- ‘डिजिटल इंडिया, डिजिटल इंडिया!’ हमने गली-नुक्कड़ की चाय की टपरी से लेकर बड़े-बड़े मॉल्स तक हर जगह UPI जैसे ‘कैशलेस पेमेंट’ का सिस्टम बिछा दिया है।
ये बहुत अच्छी बात है, हमें गर्व है अपनी तकनीक पर। लेकिन भाई, इस डिजिटल चमक-दमक के पीछे का जो खौफनाक अंधेरा है, वो भी जान लेना बहुत जरुरी है।
हमने पेमेंट का सिस्टम तो डिजिटल कर दिया, लेकिन हमारी ‘डिजिटल सुरक्षा’ आज भी भगवान भरोसे ही चल रही है।
आज देश के जामताड़ा, मेवात और जाने कौन-कौन से कोनों में बैठे कुछ अनपढ़ और शातिर ठग पूरे के पूरे सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं।
ये कोई मामूली पॉकेटमार या चोर नहीं हैं.. ये आज के दौर के खूंखार ‘हैकर्स’ और ‘डिजिटल आतंकी’ हैं जो बिना गोली चलाए, हमारे देश की अर्थव्यवस्था को अंदर ही अंदर दीमक की तरह चाट रहे हैं।
आम आदमी जो सुबह से शाम तक गधे की तरह पसीना बहाता है, पाई-पाई जोड़कर अपने बच्चों की पढ़ाई और अपनी बुढ़ापे की पेंशन इकट्ठा करता है, ये डिजिटल पिशाच एक झटके में उसका पूरा बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं।
और हमारा सिस्टम क्या कर रहा है? हमारे थानेदार और साइबर सेल वाले बस एफआईआर (FIR) का कागज़ लेकर खानापूर्ति करते रहते हैं।
हमारा जो ये आईटी एक्ट (IT Act) है ना, ये इतना सड़ा हुआ, इतना लाचार और इतना घटिया है की ये साइबर आतंकी खुलेआम इसका फायदा उठाते हैं।
पहले तो ये हैकर्स सिर्फ आम जनता को अपना शिकार बनाते थे, लेकिन अब इनके हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं की इन्होंने सीधे देश की सत्ता के पावर कॉरिडोर में बैठे VIP लोगों की गर्दन पर हाथ डालना शुरू कर दिया है।
हैकर्स का खुल्ला दुस्साहस, सीधे सत्ता के गलियारों में सेंधमारी कर संबित पात्रा का WhatsApp किया हैक, और मांगी फिरौती
अगर आपको लगता है की आपका डेटा सुरक्षित है और आपके साथ ऐसा कुछ नहीं हो सकता, तो अब जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ, उसे सुनकर आपके पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील और बड़े नेता अश्विनी उपाध्याय के साथ हाल ही में जो घटना घटी है, उसने पूरे सुरक्षा तंत्र की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।
हुआ कुछ यूं की अश्विनी उपाध्याय को उनके मोबाइल पर WhatsApp पर एक मैसेज आया। मैसेज भेजने वाले का नाम देखकर कोई भी इंसान एक पल के लिए चौंक जाए।
वो मैसेज किसी और का नहीं, बल्कि सीधे पुरी से सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के नंबर से आया था।
मैसेज में बहुत ही हड़बड़ाहट वाली भाषा में लिखा था- “मेरा यूपीआई (UPI) काम नहीं कर रहा है। मैं अभी बहुत बड़ी परेशानी में फंसा हुआ हूँ। मुझे अर्जेंट पेमेंट करनी है, पैसों की सख्त जरूरत है, तुरंत पैसे भेज दो।”
ज़रा सोचिए! देश की सत्ताधारी पार्टी का इतना बड़ा चेहरा, जो हमेशा जेड-प्लस जैसी सिक्योरिटी और वीआईपी घेरे में रहता है, उसके नंबर से सीधे पैसे मांगने का मैसेज आ रहा है।
अश्विनी उपाध्याय तुरंत समझ गए की दाल में कुछ काला है। उन्हें भनक लग गई की संबित पात्रा का व्हाट्सएप अकाउंट किसी ने हैक कर लिया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
इन हैकर्स का दुस्साहस और बेशर्मी तो देखिए! थोड़ी ही देर बाद, जब अश्विनी उपाध्याय ने कोई जवाब नहीं दिया, तो उस हैकर ने बाकायदा एक QR Code भेज दिया ताकि पेमेंट सीधे उसके खाते में जाए।
जब अश्विनी जी ने उस QR कोड को अपने स्कैनर में डालकर चेक किया, तो जो नाम स्क्रीन पर आया, उसने सारा खेल साफ कर दिया। वो बैंक अकाउंट संबित पात्रा का था ही नहीं! वो किसी अनजान ठग के नाम पर खुला हुआ फर्जी अकाउंट था।
आप इस बात की गहराई को समझिए भाई। एक हैकर देश के इतने बड़े सांसद का मोबाइल और उसका व्हाट्सएप हैक करता है, उसके सारे कॉन्टैक्ट्स खंगालता है, और फिर उसी के दोस्तों और जानकारों को मैसेज करके खुलेआम फिरौती और वसूली मांगता है।
ये कोई मामूली घटना नहीं है, ये देश की डिजिटल सुरक्षा के मुंह पर एक करारा तमाचा है!
देश के सांसद का ये हाल, तो आम जनता का क्या, जो रोज अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई इन डिजिटल आतंकियों के हाथों लुटा रही
अश्विनी उपाध्याय के साथ हुई ये घटना कोई पहला या इकलौता मामला नहीं है। उन्होंने खुद इस बात का खुलासा किया है की पिछले कुछ समय में उनके पास देश के कई बड़े और रसूखदार लोगों के नंबर से ऐसे ही ठगी के मैसेज आ चुके हैं।
कभी देश के जाने-माने पत्रकारों के नंबर से, कभी बड़े न्यूज़ चैनलों के मुख्य संपादकों के नंबर से, तो कभी-कभी तो सीधे देश चलाने वाले बड़े आईएएस (IAS) अफसरों के नंबर से भी ऐसे ही पैसे मांगने वाले मैसेज उनके पास धड़ल्ले से आते रहे हैं।
अब यहाँ सबसे बड़ा और डरावना सवाल खड़ा होता है। भाई, जब देश के सांसद सुरक्षित नहीं हैं, जब कानून बनाने वाले विधायक और मंत्री सुरक्षित नहीं हैं, जब पूरे जिले को अपनी उंगलियों पर चलाने वाले कलेक्टर और पुलिस कप्तान (SP) तक इन हैकर्स के शिकार हो रहे हैं… तो इस देश के उस बेचारे आम आदमी की क्या बिसात है?
वो मिडिल क्लास इंसान जो सुबह धक्के खाकर लोकल ट्रेन या बस में ऑफिस जाता है, वो छोटा व्यापारी जो दिन भर अपनी दुकान पर बैठकर चार पैसे कमाता है, वो कैसे इन शातिर डिजिटल आतंकियों से बचेगा?
इन साइबर ठगों के अंदर से पुलिस, सिस्टम और कानून का रत्ती भर भी खौफ खत्म हो चुका है। इन्हें अच्छे से पता है की ये किसी का भी व्हाट्सएप हैक कर लें, किसी का भी बैंक अकाउंट साफ कर दें, ये सड़ा हुआ आईटी एक्ट (IT Act) इनका कुछ नहीं उखाड़ सकता।
ये हैकर्स किसी को हैक करने में ना तो टाइम लगाते हैं और ना ही कोई भेदभाव करते हैं। इनके लिए देश का आम नागरिक और देश का सांसद दोनों बराबर हैं।
क्योंकि इन्हें पता है की भारत का साइबर कानून बिना दांत और बिना नाखून वाला एक ऐसा बूढ़ा शेर है, जो सिर्फ दहाड़ सकता है लेकिन शिकार नहीं कर सकता।
देश की आधी से ज्यादा आबादी आज इसी खौफ में जी रही है की कहीं अगला मैसेज, अगला ओटीपी (OTP) या अगली फर्जी कॉल उनका पूरा घर ना नीलाम करवा दे।
तुर्की के कानून से सीखे भारत सरकार, जहां व्हाट्सएप हैक करने वाले को मिली 340 साल की सजा और उसके बाद साइबर फ्रॉड हो गया जीरो
अगर सरकार और कानून बनाने वाले हमारे सांसदों को सच में सीखना है की इन डिजिटल आतंकियों का इलाज कैसे होता है, तो उन्हें तुर्की (Turkey) की तरफ देखना चाहिए।
जो घटना अश्विनी उपाध्याय और संबित पात्रा के साथ हुई, बिल्कुल वैसी ही घटना एक बार तुर्की में भी हुई थी।
तुर्की में ओनुर कोपकाक (Onur Kopcak) नाम के एक 26 साल के हैकर ने बैंकों की फर्जी वेबसाइट बनाकर और सिस्टम हैक करके वहां के लोगों को लूटना शुरू किया।
जैसे ही तुर्की की पुलिस और एजेंसियों को इसकी भनक लगी, उन्होंने उस हैकर को धर दबोचा। हमारे देश में होता तो उसे दो दिन में ज़मानत मिल जाती, लेकिन तुर्की की कोर्ट ने जो किया, उसने पूरी दुनिया के हैकर्स को बेहद आक्रामक संदेश दिया।
तुर्की की अदालत ने उस 26 साल के लड़के को कोई दस-बीस साल की नहीं, बल्कि 334 साल की भयानक सज़ा सुनाई! जी हाँ, 334 साल!
और उसके बाद जब कुछ और मामले खुले, तो सज़ा बढ़ाकर लगभग 340 साल कर दी गई। तुर्की के जजों ने साफ मैसेज दे दिया की अगर तुमने आम जनता के पैसे पर डाका डाला, तो तुम जेल की काल कोठरी में ही सड़ोगे और तुम्हारी हड्डियां भी बाहर नहीं आएंगी।
इस सज़ा का असर जानते हैं क्या हुआ? वहां के पूरे हैकर नेटवर्क ने रातों-रात अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया।
आज तुर्की में साइबर फ्रॉड नाम की कोई चीज़ नहीं बची है, वहां ये अपराध एकदम जीरो हो गया है।
सड़े हुए IT कानून और पुलिस की लाचारी ने बना दिया भारत को साइबर ठगों का स्वर्ग
अगर आपको लगता है की ये साइबर ठगी बस दो-चार हज़ार रुपये का कोई छोटा-मोटा क्राइम है, तो ज़रा मेरी बात को सुन लीजिये।
हाल ही में गृह मंत्रालय की संस्था I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) और ताज़ा रिपोर्ट्स का जो खौफनाक डेटा सामने आया है, वो किसी भी इंसान के होश उड़ाने के लिए काफी है।
साल 2024-2025 के आंकड़ों के मुताबिक, इन साइबर ठगों ने आम हिंदुस्तानियों की जेब से 22,812 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की रकम लूट ली है!
ज़रा सोचिए भाई, 22 हज़ार करोड़ रुपये! इतने पैसों में तो देश के कई बड़े हाइवे, अस्पताल और पुल बन जाते।
अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है की आखिर इन जामताड़ा और मेवात के अनपढ़ ठगों की इतनी हिम्मत कैसे हो गई की ये 22 हज़ार करोड़ रुपये लूट लें और संबित पात्रा जैसे रसूखदार सांसद का व्हाट्सएप हैक कर लें?
इसका सीधा और कड़वा जवाब है- हमारा सड़ा हुआ, अपाहिज और बिना दांत का आईटी एक्ट (IT Act)।
हमारे देश में साइबर क्राइम से निपटने के लिए जो Information Technology (IT) Act बना है, वो साल 2000 का है।
मतलब जिस ज़माने में लोग Nokia के डब्बे वाले फोन पर सांप वाला गेम खेला करते थे, उस ज़माने का कानून आज के इन हाई-टेक और खूंखार हैकर्स पर लागू किया जा रहा है। ये कोई कानून है या देश की जनता के साथ भद्दा मज़ाक?
आज के ये डिजिटल आतंकी इस घटिया कानून को अपने जूतों की नोक पर रखते हैं। अगर बाई चांस, भूल-चूक से पुलिस किसी साइबर ठग को पकड़ भी ले ना, तो उसे कोई खौफ नहीं होता।
क्यों? क्योंकि हमारे महान आईटी एक्ट में साइबर फ्रॉड के ज़्यादातर मामले ज़मानती (Bailable) होते हैं। पुलिस बड़ी मुश्किल से इन ठगों को उठाती है, और कोर्ट उन्हें चंद दिनों के अंदर बेल देकर वापस जनता को लूटने के लिए आज़ाद कर देता है।
और हमारी जांच एजेंसियों की लाचारी का तो क्या ही कहना। अगर फ्रॉड दिल्ली में हुआ है, तो पैसा बिहार या बंगाल के किसी ‘खच्चर खाते’ (Mule Account) में ट्रांसफर होता है और निकालने वाला झारखंड में बैठा होता है।
पुलिस वाले बस ज्यूरिस्डिक्शन (Jurisdiction) यानी ‘ये हमारा इलाका नहीं है’ का रोना रोते रहते हैं। देश में धड़ल्ले से फर्जी सिम कार्ड बिक रहे हैं, किराए पर बैंक अकाउंट खोले जा रहे हैं, लेकिन सिस्टम के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
अब वक्त आ गया है की इस बर्दाश्त की हद को यहीं पार किया जाए। संबित पात्रा खुद सत्ताधारी पार्टी के इतने बड़े नेता हैं और खुद इस डिजिटल आतंकवाद का शिकार हुए हैं।
इसलिए अब ये उनकी और देश के बाकी सभी 543 सांसदों की निजी ज़िम्मेदारी बनती है की वो अपनी इस गहरी नींद से जागें।
देश को अब एक ऐसा खूंखार और बेरहम साइबर कानून चाहिए, जिसमें साइबर ठगी करने वालों के लिए सीधे उम्रकैद और उनकी पुश्तैनी संपत्ति तक ज़ब्त करने का कड़ा प्रावधान हो।
