दोस्तों कुछ साल पहले तक जब भी इंटरनेट की खतरनाक ‘काली दुनिया’ की बात होती थी, तो सबकी जुबान पर बस ‘डार्क वेब’ (Dark Web) का नाम आता था।
हमें लगता था की ये कोई ऐसी रहस्यमयी जगह है जहां जाने के लिए दुनिया भर के हैकर्स और क्रिमिनल्स को कोई बहुत तगड़ा सॉफ्टवेयर चाहिए होता होगा।
वहां हथियार बिकते हैं, ड्रग्स की मंडी लगती है और खून-खराबे की प्लानिंग होती है। लेकिन आज इन क्रिमिनल्स और देश के गद्दारों को किसी डार्क वेब पर जाने की कोई ज़रूरत ही नहीं है।
वो सारा का सारा कचरा, वो पूरी की पूरी काली दुनिया आज हमारे स्मार्टफोन में सिर्फ एक App के अंदर आ गया है… और उस ऐप का नाम है ‘टेलीग्राम’ (Telegram)!
शुरुआत में तो ये ऐप ऐसा सीधा-साधा बनकर आया था की लोग इसका इस्तेमाल सिर्फ नई फिल्में और वेब सीरीज़ डाउनलोड करने के लिए करते थे।
लेकिन देखते ही देखते इस विदेशी ऐप ने ‘प्राइवेसी’ और ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ का ऐसा चोगा पहन लिया की आज ये पूरी दुनिया के अपराधियों, आतंकवादियों और साइबर ठगों का नेशनल हेडक्वार्टर बन चुका है।
प्राइवेसी के झूठे ढोंग के पीछे चल रहा मौत और बर्बादी का नंगा नाच, नया डार्क वेब बन चुका ‘टेलीग्राम’
ज़रा सोचिए की क्रिमिनल्स को टेलीग्राम इतना पसंद क्यों है? असल में इस ऐप ने ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ (End-to-End Encryption) और ‘सीक्रेट चैट’ के नाम पर एक ऐसा किला खड़ा कर दिया है, जिसकी दीवारों के आर-पार पुलिस, आईबी (IB) और दुनिया की कोई भी खुफिया एजेंसी आसानी से झांक ही नहीं सकती।
आप व्हाट्सऐप पर कोई खुराफात करें, तो पुलिस ट्रेस कर लेगी। आप फेसबुक पर कुछ उल्टा-सीधा लिखें, तो आपका IP Address पुलिस के पास पहुँच जाएगा।
लेकिन टेलीग्राम? भाईसाहब ये तो इन अपराधियों के लिए किसी सेफ हाउस से कम नहीं है!
टेलीग्राम पर कोई भी गुमनाम इंसान फर्जी सिम से अकाउंट बना सकता है। अपना नंबर दुनिया से छुपा सकता है। हज़ारों-लाखों लोगों का ऐसा प्राइवेट चैनल बना सकता है जिसे आम पब्लिक सर्च ही ना कर पाए।
क्रिमिनल्स को पता है की वो इस ऐप पर बैठकर देश को उड़ाने की प्लानिंग भी कर लें, तो टेलीग्राम का मालिक उनका डेटा किसी पुलिस को देने वाला नहीं है।
इसी घमंड और इसी ‘प्राइवेसी’ के मुखौटे का फायदा उठाकर आज इस ऐप पर वो सब कुछ खुलेआम बिक रहा है, वो सब कुछ प्लान हो रहा है, जो सीधे तौर पर हमारे देश के लिए बेहद खतरनाक है।
प्राइवेसी के नाम पर जिस तरह का नंगा नाच यहां चल रहा है, वो किसी भी सभ्य समाज के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं!
जिहादी स्लीपर सेल का सबसे सुरक्षित अड्डा और भारत के युवाओं का ब्रेनवाश करने का खौफनाक टूलकिट
अब बात करते हैं देश की सुरक्षा की। आपको क्या लगता है की जो कश्मीर, बंगाल या केरल में अचानक से पढ़े-लिखे युवा जिहादी बन जाते हैं, वो मस्जिदों में जाकर ही बनते हैं? नहीं!
आज ये कट्टरपंथ और आतंकवाद डिजिटल हो चुका है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और खुफिया विभागों की रिपोर्ट्स बता रही हैं की ISIS (इस्लामिक स्टेट) और अल-कायदा (Al-Qaeda) जैसे खूंखार आतंकी संगठनों ने अब ग्राउंड पर काम करना लगभग बंद कर दिया है।
इनका पूरा का पूरा रिक्रूटमेंट और ब्रेनवाश का धंधा टेलीग्राम पर शिफ्ट हो चुका है।
होता क्या है की ये आतंकवादी टेलीग्राम पर एकदम सीक्रेट और प्राइवेट ग्रुप्स बनाते हैं। फिर सोशल मीडिया के ज़रिए भारत के मुस्लिम युवाओं को टारगेट करते हैं और उन्हें इन ग्रुप्स में ऐड कर लेते हैं।
एक बार कोई युवा उस ग्रुप में घुसा, तो फिर शुरू होता है ब्रेनवाश का खौफनाक खेल। वहां दिन-रात सीरिया, फिलिस्तीन और कश्मीर के फर्जी और भड़काऊ वीडियो डाले जाते हैं।
तकरीरें पिलाई जाती हैं की कैसे इस्लाम खतरे में है और तुम्हें इसके लिए जान देनी है।
धीरे-धीरे एक आम सा लड़का ‘स्लीपर सेल’ (Sleeper Cell) में तब्दील हो जाता है, और उसके घर वालों को भनक तक नहीं लगती की उनका बेटा बंद कमरे में बैठकर टेलीग्राम पर आतंकियों से बात कर रहा है!
और सबसे डरावनी बात तो ये है भाई की इन जिहादी ग्रुप्स में सिर्फ तकरीरें नहीं दी जा रहीं। वहां बाकायदा पीडीएफ (PDF) ट्यूटोरियल्स और वीडियो शेयर किए जाते हैं की कुकर बम कैसे बनाना है! घर में पड़े केमिकल और यूरिया से IED कैसे तैयार करना है!
चाकू से किसी की गर्दन कैसे काटनी है (‘लोन वुल्फ’ अटैक)! ये सब कुछ धड़ल्ले से चल रहा है। जब तक एजेंसियां किसी एक ग्रुप को ट्रैक करके उसे ब्लॉक करवाती हैं, तब तक ये आतंकी रातों-रात 10 नए ग्रुप बना लेते हैं।
ना कोई चैट हिस्ट्री बचती है और ना कोई डिजिटल फुटप्रिंट। ये ऐप आतंकियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है और हमारे सिस्टम के लिए किसी टाइम बम जैसा है।
पार्ट टाइम जॉब और क्रिप्टो के नाम पर चीन और दुबई बैठे ठग कैसे लूट रहे हिंदुस्तानियों की गाढ़ी कमाई
चलिए मान लेते हैं की आप आतंकवाद से बचे हुए हैं, लेकिन आपके बैंक अकाउंट में जो आपकी ज़िंदगी भर की खून-पसीने की कमाई पड़ी है ना, उस पर चीन और दुबई में बैठे हैकर्स की गिद्ध वाली नज़र है।
और उनका सबसे बड़ा हथियार भी यही टेलीग्राम है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के डेटा को अगर आप खंगालेंगे, तो पता चलेगा की आज भारत में होने वाले 70 से 80 प्रतिशत साइबर फ्रॉड इसी ऐप के ज़रिए अंजाम दिए जा रहे हैं।
आजकल लोगों के पास अचानक से व्हाट्सऐप पर एक मैसेज आता है- “हम एक इंटरनेशनल कंपनी से हैं, आपको सिर्फ यूट्यूब के वीडियो लाइक करने हैं और हम आपको दिन का 5000 रुपये देंगे।”
भोले-भाले लोग, खासकर स्टूडेंट्स और हाउसवाइफ, इस लालच में आ जाते हैं। फिर ठग उन्हें एक टेलीग्राम लिंक भेजते हैं और वहां से खेल शुरू होता है।
टास्क के नाम पर उन्हें एक टेलीग्राम ग्रुप में ऐड किया जाता है जहां 50-60 फर्जी लोग (जो असल में बॉट्स या उनके ही साथी होते हैं) झूठे स्क्रीनशॉट डालते रहते हैं की “वाह! मुझे आज 10 हज़ार का प्रॉफिट हुआ!”
इसे देखकर आम आदमी लालच में अंधा हो जाता है और धीरे-धीरे ठगों के बताए फर्जी अकाउंट्स में लाखों रुपये इन्वेस्ट कर देता है।
जब इंसान लुट जाता है, तो रातों-रात वो टेलीग्राम ग्रुप गायब! ना नंबर मिला, ना नाम मिला… ठन ठन गोपाल!
यही नहीं, क्रिप्टो स्कैम (Crypto Scam) का तो ये गढ़ है। हर दिन टेलीग्राम पर नए-नए ‘क्रिप्टो सिग्नल’ और ‘स्टॉक मार्केट टिप्स’ के नाम से VIP ग्रुप्स बनते हैं।
फर्जी क्रिप्टो कॉइन लॉन्च किए जाते हैं। लोगों को सपने दिखाए जाते हैं की एक दिन में पैसा डबल हो जाएगा।
हज़ारों हिंदुस्तानियों ने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई, अपनी ज़मीनें बेचकर इन टेलीग्राम ग्रुप्स के चक्कर में लुटा दी है।
सारा पैसा क्रिप्टो के रास्ते उड़कर सीधा चीन, कंबोडिया और दुबई में बैठे सिंडिकेट्स की जेब में जा रहा है।
खुलेआम बिक रहे हैं ड्रग्स और हथियार, अब क्राइम करने के लिए किसी अंडरवर्ल्ड की नहीं बल्कि सिर्फ इस ऐप की है जरूरत
बात सिर्फ जिहाद या ठगी तक ही खत्म नहीं होती दोस्त। हमारे देश की जवानी को जिस तरह नशे की आग में झोंका जा रहा है, उसका सबसे बड़ा सप्लायर भी आज यही टेलीग्राम बन बैठा है।
पहले के ज़माने में क्या होता था? अगर किसी को ड्रग्स चाहिए होते थे, तो उसे किसी तस्कर के पास छुपते-छुपाते जाना पड़ता था।
गली के नुक्कड़ या किसी अँधेरे कोने में पुड़िया मिलती थी। लेकिन आज? आज कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को घर बैठे कोकीन, एमडीएमए (MDMA) और सिंथेटिक ड्रग्स की होम डिलीवरी मिल रही है!
टेलीग्राम पर बाकायदा ड्रग कार्टेल चल रहे हैं। ये लोग इतने शातिर हैं की ये इंसानों से बात ही नहीं करते। इन्होंने टेलीग्राम पर ‘बॉट्स’ (Bots) सेट कर रखे हैं।
आप उस ग्रुप में जाइए, एक मेन्यू कार्ड खुलेगा जैसे किसी रेस्टोरेंट का हो! आप अपना नशा सेलेक्ट करिए और पेमेंट कर दीजिए।
और मज़े की बात देखिए, ये पेमेंट भी बैंक खाते या यूपीआई (UPI) से नहीं लेते, क्योंकि वहां पुलिस ट्रेल पकड़ लेगी। ये सीधा क्रिप्टो (Crypto) में पेमेंट मांगते हैं ताकि कोई डिजिटल सुबूत ही ना बचे।
और हथियारों का भी यही हाल है। यूपी, बिहार, पंजाब और हरियाणा के गैंगस्टर्स ने टेलीग्राम पर अपने-अपने गैंग के नाम से ग्रुप बना रखे हैं।
वहां खुलेआम कट्टों से लेकर विदेशी पिस्टल और एके-47 तक की नुमाइश होती है। “भाई को हथियार चाहिए? इतने पैसे क्रिप्टो में डालो और फलां जगह से डिलीवरी उठा लो।”
पुलिस बेचारी ज़मीन पर मुखबिर दौड़ा रही है, और असली अंडरवर्ल्ड तो आज इन गैंगस्टर्स की जेब में पड़े स्मार्टफोन के टेलीग्राम ऐप में चल रहा है।
नीट पेपर लीक से लेकर एजुकेशन माफिया तक, देश का भविष्य तबाह करने वाले हर गैंग का बाप है ये विदेशी ऐप
अरे भाई, जब पूरे देश का सिस्टम ही इस ऐप पर बिकने लगे, तो फिर बचा ही क्या? आप अपने घर के बच्चों को देख लीजिए।
एक आम बाप अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई, अपने खेत-ज़मीन गिरवी रखकर बच्चे को कोटा भेजता है ताकि वो डॉक्टर बन सके।
बच्चा दिन-रात एक करके पढ़ाई करता है। लेकिन होता क्या है? परीक्षा से ठीक एक रात पहले टेलीग्राम पर पेपर वायरल हो जाता है!
अभी जो हाल ही में नीट (NEET-UG) पेपर लीक का इतना भयंकर तांडव हुआ था, उसका पूरा का पूरा नेक्सस इसी ऐप से जुड़ा हुआ था।
एजुकेशन माफिया और सॉल्वर गैंग टेलीग्राम पर प्राइवेट और सीक्रेट चैनल बनाते हैं। वहां बाकायदा रेट कार्ड छपता है की “फलां पेपर 10 लाख में, फलां 20 लाख में।” जैसे ही डील पक्की होती है, पेपर की पीडीएफ (PDF) वहां डाल दी जाती है।
चंद रुपयों के लालच में देश के होनहार और सच्चे छात्रों का भविष्य रातों-रात रौंद दिया जाता है। सालों की मेहनत मिट्टी में मिल जाती है!
इन सॉल्वर गैंग्स को पता है की अगर वो व्हाट्सऐप या नॉर्मल वेबसाइट पर पेपर लीक करेंगे, तो साइबर सेल उन्हें धर दबोचेगी।
लेकिन टेलीग्राम की ‘सीक्रेट चैट’ के घमंड में ये माफिया सिस्टम को सरेआम ठेंगा दिखा रहे हैं। जब देश का भविष्य, हमारी आने वाली पीढ़ी ही इस कदर तबाह हो रही हो, तो फिर ऐसी ‘प्राइवेसी’ का हम अचार डालेंगे क्या?
फ्रांस ने तो इसके CEO को जेल में डाल दिया, फिर भारत सरकार अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर इसे क्यों दे रही ढील
अब आते हैं सबसे तीखे सवाल पर। पूरी दुनिया में इस ऐप को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। यूरोप वाले जो दिन-रात पूरी दुनिया को ‘मानवाधिकार’ और ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ का ज्ञान बांटते रहते हैं, जब उनके अपने घर में आग लगी तो उन्होंने क्या किया?
अगस्त 2024 में फ्रांस की सरकार ने देखा की टेलीग्राम पर ड्रग्स और आतंकवाद बेकाबू हो चुका है और ये कंपनी क्रिमिनल्स का डेटा नहीं दे रही है।
तो जानते हैं उन्होंने क्या किया? उन्होंने सीधे टेलीग्राम के मालिक और सीईओ पावेल डुरोव (Pavel Durov) को पेरिस एयरपोर्ट पर कॉलर से दबोच लिया और सीधा जेल की हवा खिला दी!
रूस ने भी इस पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप मढ़ दिए हैं।
जब दुनिया के ‘लिबरल’ देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक विदेशी अरबपति को जेल में ठूंस सकते हैं, तो हमारी भारत सरकार को किस बात का डर है?
हम क्यों इतनी नरमी बरत रहे हैं? हां, ये बात सही है की सरकार ने आईटी एक्ट (IT Act) के तहत 3100 से ज़्यादा पायरेटेड चैनल डिलीट करवाए हैं और इसे पेपर लीक के बाद थोड़े दिनों के लिए बैन भी किया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने भी साफ कह दिया है की ये ऐप साइबर क्रिमिनल्स का टूल बन गया है। लेकिन यार, सिर्फ धमकियों से काम थोड़े ना चलेगा!
देश को बचाना है तो लानी ही होगी सख्त निगरानी पॉलिसी, वरना बहुत जल्द हो सकती कोई बड़ी अनहोनी
अब पानी सच में सिर के ऊपर से बहने लगा है। सरकार को अब अपना रौद्र रूप दिखाना ही होगा। अगर टेलीग्राम को भारत के 140 करोड़ लोगों के बाज़ार से अरबों रुपये कमाने हैं, तो उसे भारत के कानून के हिसाब से ही चलना पड़ेगा।
सरकार को तुरंत एक ऐसा ‘सख्त निगरानी कानून’ पास करना चाहिए जिसके तहत अगर एनआईए (NIA), आईबी (IB) या सीबीआई (CBI) देश की सुरक्षा के लिए किसी क्रिमिनल का डेटा मांगे, तो टेलीग्राम को वो डेटा हर हाल में देना ही पड़ेगा।
‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ का बहाना अब और नहीं चलेगा! अगर ये कंपनी डेटा देने से आनाकानी करती है, तो सरकार को तुरंत इनका ‘इंटरमीडियरी स्टेटस’ छीन लेना चाहिए।
मतलब, अगर ऐप पर कोई क्राइम होता है, तो सीधे तौर पर टेलीग्राम कंपनी को ही मुजरिम माना जाए!
अगर तब भी ये नहीं सुधरते, तो इस ऐप पर ऐसी डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक होनी चाहिए की इसे हमेशा-हमेशा के लिए भारत में बैन कर दिया जाए।
हमें किसी ऐसे विदेशी प्लैटफॉर्म की कोई ज़रूरत नहीं है जो हमारी प्राइवेसी बचाने का ढोंग रचकर असल में हमारी पीठ में खंजर घोंप रहा हो।
सच कहूं तो आज ये मुद्दा सिर्फ एक ऐप का नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का है। अगर आज हमने फ्रीडम ऑफ स्पीच, प्राइवेसी और लिबरलिज़्म के नाम पर इस ऐप को ऐसे ही खुली छूट दे दी, तो वो दिन दूर नहीं जब 26/11 या पुलवामा जैसा कोई बहुत बड़ा आतंकी हमला इसी ऐप के किसी सीक्रेट ग्रुप में प्लान होगा…
सिस्टम को जागना होगा, और वो भी आज और अभी! देश की सुरक्षा से बड़ा कोई कानून नहीं होता, कोई प्राइवेसी नहीं होती!
वन्दे मातरम!
