दोस्तों एक वो भी दौर था जब उत्तर प्रदेश में बहन-बेटियां सूरज ढलने के बाद घर से निकलने में कांपती थीं।
चौराहों पर मनचलों और गुंडों का ऐसा भौकाल हुआ करता था की अगर कोई लड़की शिकायत कर भी दे, तो पुलिस उल्टे उसी के परिवार को समझाकर घर भेज देती थी।
और ऐसा होता भी क्यों ना? जब सूबे के सबसे बड़े नेता ही सरेआम मंच से दरिंदों को बचाते हुए ये कहते हों की, “लड़के हैं, लड़कों से गलती हो जाती है… क्या इसके लिए उन्हें फांसी दे दोगे?”
लेकिन आज का उत्तर प्रदेश बदल चुका है! आज यूपी में ‘लड़कों से गलती’ नहीं होती, बल्कि अगर कोई मनचला किसी बेटी की तरफ गंदी नज़र उठा ले, तो सीधा उसका यमराज से अपॉइंटमेंट फिक्स कर दिया जाता है।
बाबा योगी आदित्यनाथ का वो डायलॉग तो आपको याद ही होगा- “अगर किसी को यमराज से टिकट कटवाना हो, तो किसी राह चलती बेटी के साथ छेड़खानी करके दिखाए।”
सच कहूं तो ये कोई फिल्मी डायलॉग नहीं है भाई। ये आज के नए यूपी का वो ‘संविधान’ है, जिसे यूपी पुलिस ने अपनी बंदूकों की गोलियों से लिखा है।
आज कोर्ट-कचहरी और तारीखों का इंतज़ार नहीं होता। दरिंदों का फैसला अब ऑन द स्पॉट होता है!
लड़कों से गलती नहीं होती अब सीधा यमराज का टिकट कटता है! योगी बाबा के एक डायलॉग ने कैसे बदल दिया यूपी का माहौल
ज़रा सोचिए, एक अपराधी की सबसे बड़ी ताकत क्या होती है? उसका रसूख, उसके पीछे खड़े सफेदपोश नेता और ये विश्वास की “अरे, पुलिस मेरा क्या उखाड़ लेगी, दो दिन में बेल पर बाहर आ जाऊंगा।”
दशकों तक यूपी के मनचलों और दरिंदों ने इसी सिस्टम का फायदा उठाया। बेटियों की इज़्ज़त लुटती थी और मुजरिम पुलिस की जीप में बैठकर मुस्कुराते हुए जाते थे।
लेकिन योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में आते ही इस पूरी क्रिमिनल साइकोलॉजी को जड़ से उखाड़ फेंका।
उन्होंने पुलिस को सीधा और साफ मैसेज दे दिया की अगर किसी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ, तो पुलिस बाद में जवाब देगी, पहले मुजरिम का इलाज करेगी।
जब सीएम योगी ने भरे मंच से दहाड़ते हुए कहा की बेटियों को छेड़ने वालों का इंतज़ार अगले चौराहे पर यमराज कर रहे हैं, तो गुंडों को लगा की ये बस एक भाषण है,
लेकिन जब UP पुलिस ने इस भाषण को ज़मीन पर उतारना शुरू किया, तो बड़े-बड़े हिस्ट्रीशीटरों की रूह कांप गई।
आज हालात ये हैं की अगर कोई किसी राह चलती लड़की पर फब्तियां भी कस दे, तो उसे रात को नींद नहीं आती की कहीं सुबह उठते ही दरवाज़े पर UP पुलिस की बंदूकें या बाबा का बुलडोज़र ना खड़ा मिल जाए।
बुलंदशहर में मासूम बच्ची से दरिंदगी करने वाले पापी को UP पुलिस ने किया छलनी, 50 हज़ार का इनामी ऑन द स्पॉट ढेर
अगर आपको लगता है की UP पुलिस सिर्फ डराती है, तो अगस्त 2026 के इस ताज़ा और दिल दहला देने वाले बुलंदशहर एनकाउंटर की फाइल खोलकर देख लीजिए।
बुलंदशहर में एक हैवान था- ‘मोनू’। इस दरिंदे ने इंसानियत की सारी हदें पार करते हुए एक नाबालिग मासूम बच्ची के साथ पहले बेरहमी से दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या कर दी।
इस खूंखार दरिंदे पर 7 से ज़्यादा भयंकर क्रिमिनल केस दर्ज थे और पुलिस ने इसके सिर पर 50 हज़ार रुपये का इनाम रखा हुआ था।
ये सोच रहा था की पहले की तरह ये भी छिपता फिरेगा और मामला ठंडा होने पर बेल ले लेगा।
लेकिन ये भूल गया था की अब यूपी में राज किसका है! 9 अगस्त 2026 की सुबह गुलावठी रोड पर यूपी पुलिस की चेकिंग चल रही थी।
पुलिस को देखते ही इस दरिंदे ने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर सीधा फायरिंग झोंक दी, जिसमें दो पुलिसवाले घायल भी हो गए।
अब ऐसे में यूपी पुलिस कोई सरेंडर की भीख थोड़ी ना मांगती है भाई! पुलिस ने वहीं अपनी पोज़ीशन ली और जवाबी फायरिंग में इस 50 हज़ार के इनामी रेपिस्ट को सीधा गोलियों से छलनी कर दिया।
कोई कोर्ट नहीं, कोई वकील नहीं, कोई तारीख नहीं… पुलिस ने मोनू को सीधा यमराज के पास भेजकर पूरे यूपी के गुंडों को बता दिया की अगर किसी मासूम बच्ची को हाथ लगाया, तो तुम्हारी लाश उठाने वाला भी कोई नहीं बचेगा।
अंबेडकर नगर में बेटी को छेड़कर जान लेने वाले मनचले जिहादियों को पुलिस ने सरेआम किया था लंगड़ा और दिया सीधा मैसेज
अगर एनकाउंटर में मारे नहीं गए, तो ज़िंदगी भर के लिए अपने पैरों पर खड़े होने लायक नहीं बचोगे- ये मैसेज पुलिस ने अंबेडकर नगर वाले कांड में बहुत सलीके से दे दिया था।
घटना याद है आपको? स्कूल से एक मासूम हिन्दू बेटी (श्रेया) अपनी साइकिल पर घर लौट रही थी। तभी पीछे से एक मोटरसाइकिल पर तीन मनचले आते हैं- शाहबाज़, अरबाज़ और फैसल।
इन तीनों ने उस राह चलती बेटी पर फब्तियां कसीं और चलती साइकिल पर उसका दुपट्टा खींच लिया।
बैलेंस बिगड़ने से वो मासूम बच्ची सड़क पर गिर गई और पीछे से आ रही एक बस के पहियों के नीचे आकर उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
इस घटना का वीडियो जिसने भी देखा, उसकी आँखों में खून उतर आया था। पुलिस ने 24 घंटे के अंदर इन तीनों हैवानों को धर दबोचा।
और फिर वही हुआ जो यूपी पुलिस का नया ‘ट्रेडमार्क’ बन चुका है। जब ये तीनों भागने की कोशिश कर रहे थे, तो पुलिस ने ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ चालू कर दिया।
सड़क पर सरेआम इन तीनों मनचलों के पैरों में ऐसी सटीक गोलियां उतारी गईं की इनके घमंड की वहीं धज्जियां उड़ गईं।
जो कल तक लड़कियों का दुपट्टा खींचकर दांत फाड़ रहे थे, वो पुलिस की गोली खाने के बाद ज़मीन पर पड़े जानवरों की तरह चीख रहे थे। ये तीनों सरेआम लंगड़ाते हुए और रोते हुए जेल गए।
अयोध्या में 12 साल की बच्ची से दरिंदगी करने वाले रसूखदार नेता का पूरा साम्राज्य बाबा के बुलडोज़र ने मिट्टी में मिला दिया
अरे भाई, पहले के राज में होता क्या था? अगर अपराधी किसी खास पार्टी का नेता हो या किसी खास समुदाय से आता हो, तो पुलिस उसे गिरफ्तार करने के बजाय उसे ‘दामाद’ बनाकर थाने में चाय पिलाती थी।
लेकिन जब बात बेटियों की इज़्ज़त की हो, तो योगी राज में रसूख और राजनीति सब बुलडोज़र के टायरों के नीचे कुचल दिए जाते हैं।
अगस्त 2024 में अयोध्या (फैज़ाबाद) का वो दिल दहला देने वाला कांड आपको याद ही होगा। विपक्षी पार्टी का एक रसूखदार नेता था- मोईद खान।
इस हैवान ने अपने एक नौकर राजू खान के साथ मिलकर एक 12 साल की गरीब निषाद (पिछड़ी जाति) बच्ची के साथ महीनों तक दरिंदगी की।
उसका वीडियो बनाया और उसे ब्लैकमेल करता रहा। वो मासूम बच्ची जब गर्भवती हो गई, तब जाकर इस खौफनाक जुर्म का पर्दाफाश हुआ।
ज़रा सोचिए, लुटियंस दिल्ली का वो ‘सेक्युलर और लिबरल मीडिया’ जो हाथरस और उन्नाव पर आसमान सिर पर उठा लेता है, इस मोईद खान के कांड पर बिल्कुल मुँह में दही जमाकर बैठ गया! क्यों?
क्योंकि मुजरिम उनके अपने ईकोसिस्टम और वोटबैंक का था। हद तो तब हो गई जब विपक्ष के बड़े-बड़े नेता इस दरिंदे को बचाने के लिए उसका ‘डीएनए टेस्ट’ मांगने लगे।
लेकिन योगी जी ने किसी कोर्ट या डीएनए रिपोर्ट का इंतज़ार नहीं किया। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को सीधा इशारा किया।
और फिर मोईद खान की करोड़ों रुपये की अवैध बेकरी और उसके शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर बाबा का ऐसा भयंकर बुलडोज़र गरजा की कुछ ही घंटों में उसका पूरा रसूख और साम्राज्य मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गया।
पुलिस ने उसे घसीटकर जेल में डाला और बता दिया की अगर यूपी में बेटी को छुआ, तो ना तुम्हारी पार्टी तुम्हें बचा पाएगी और ना ही तुम्हारा पैसा!
अब FIR और मुकदमों का इंतज़ार नहीं, थाने ले जाने के बजाय रास्ते में ही घुटनों में गोलियां उतारती UP पुलिस
यार, आजकल यूपी के अपराधियों में एक बहुत ही अजीब सी बीमारी फैल गई है! आप इसे इत्तेफाक कहिए या पुलिस का खौफ..
लेकिन जैसे ही यूपी पुलिस किसी रेपिस्ट या मनचले को गिरफ्तार करके थाने ला रही होती है, तो रास्ते में मुजरिम को अचानक ‘सुपरमैन’ बनने का दौरा पड़ जाता है।
वो जीप में बैठे-बैठे पुलिसवाले की बंदूक छीनकर भागने की कोशिश करता है! और फिर हमारी यूपी पुलिस क्या करती है? वो मुजरिम को दौड़ाकर सीधा उसके घुटनों में गोली उतार देती है।
इसे ही यूपी की सड़कों पर ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ कहा जाता है। अब ज़रा गाजियाबाद के जुलाई 2026 के सिराज वाले कांड को ही ले लीजिए।
गाजियाबाद में सिराज नाम के एक दरिंदे ने जब एक मासूम के साथ दुष्कर्म की खौफनाक वारदात को अंजाम दिया, तो उसे लगा की वो पुलिस की आँखों में धूल झोंककर बच निकलेगा। लेकिन यूपी पुलिस तो अब ऐसे हैवानों का हंटिंग डॉग बन चुकी है।
पुलिस ने जब सिराज को अरेस्ट किया और उसे लेकर जा रही थी, तो उसने भी वही पुरानी गलती कर दी। उसने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर हमला कर दिया।
बस फिर क्या था! पुलिस ने कोई वार्निंग फायर नहीं किया, सीधा ट्रिगर दबाया और सिराज के पैर में ऐसी सटीक गोली मारी की वो वहीं सड़क पर चारों खाने चित गिर पड़ा।
दर्द से चीखते हुए इस दरिंदे को पुलिस ने स्ट्रेचर पर लादकर सीधा अस्पताल पहुंचाया।
मतलब आज सिस्टम बिल्कुल पलट गया है भाई! पहले अपराधी सीधे कोर्ट में जाता था और जज साहब के सामने खड़ा होकर ज़मानत मांगता था।
अब एफआईआर और मुकदमों की फाइल जज साहब के पास बाद में जाती है, अपराधी स्ट्रेचर पर पड़ा हुआ अस्पताल पहले जाता है।
मुरादाबाद हो, जौनपुर हो, मेरठ हो या गाजियाबाद… आज यूपी के सैकड़ों हैवान बैसाखियों के सहारे घिसट-घिसट कर चल रहे हैं।
ये बैसाखियां पूरे समाज के लिए एक जीता-जागता मैसेज हैं की योगी बाबा के इस नए UP में बेटियों की तरफ उठी हुई नज़रों का इलाज गोलियों से ही होता है।
