अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर CM योगी के खिलाफ जहर उगलने वाली नेहा बोरा पर UP पुलिस की कार्रवाई में देरी क्यों, अगर खाकी रही खामोश तो लोगसभा की लीगल टीम खुद लड़ेगी कानूनी जंग

गोरखपुर वो शहर है जहाँ के चप्पे-चप्पे में बाबा गोरखनाथ का आशीर्वाद बसता है। ये कोई मामूली ज़िला नहीं है, ये यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि है, गोरक्षपीठ का सबसे बड़ा गढ़ है।

पिछले कुछ सालों में जिस गोरखपुर ने पूरे देश को माफिया-फ्री और भयमुक्त सुशासन का मॉडल दिया है, उसी गोरखपुर की शांति को भंग करने के लिए अब यहाँ वामपंथी इकोसिस्टम ने सीधी एंट्री मार दी है।

अभी हाल ही में गोरखपुर में वामपंथी छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने जो अपने अंदर का ज़हर सरेआम योगी जी के लिए उगला है, उसे हमें लिखने में भी शर्म आ रही है।

इन लोगों ने छात्रों के हक और एजुकेशन की बात करने के नाम पर सीधे-सीधे सीएम के खिलाफ बदज़ुबानी की है।

अब सबसे बड़ा सवाल ये है की इतना बड़ा बवाल हो गया, वीडियो पूरे सोशल मीडिया पर आग लगा रहा है, पब्लिक गुस्से से खौल रही है.. और पुलिस अभी तक सो रही है!

लेकिन एक बात बिल्कुल साफ कर दूं.. ‘लोगसभा’ (Logsabha) सिर्फ बैठकर तमाशा देखने वालों में से नहीं है। हम सिर्फ खबरें लिखकर पन्ने नहीं भरते, हम एक्शन लेने में यकीन रखते हैं।

अगर यूपी पुलिस इस मामले में हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, तो ‘लोगसभा’ की लीगल टीम खुद इस वामपंथी गैंग को कॉलर से पकड़कर सलाखों के पीछे घसीटेगी।

जो लोग आज़ादी के नाम पर सरेआम ज़हर उगल रहे हैं, उन्हें कानून की भाषा में सबक सिखाना बेहद जरुरी है।

चलिए सबसे पहले आपको ग्राउंड जीरो से बताते हैं की आखिर गोरखपुर में 14 सितंबर 2026 को इस इकोसिस्टम ने क्या घटिया खेल खेला है।

बाबा गोरखनाथ की धरती पर वामपंथी ज़हर की एंट्री, सनातन सहिष्णुता का फायदा उठा रहे अर्बन नक्सल

ज़रा सोचिए, जो वामपंथी और अर्बन नक्सल दिन-रात ‘लोकतंत्र खतरे में है’ का रोना रोते हैं, वो अचानक गोरखपुर क्यों पहुँच गए? जवाब बहुत सीधा है।

यूपी में सनातन और राष्ट्रवाद की जो बयार बह रही है, वो इस गैंग को पच नहीं रही।

सनातन समाज स्वभाव से ही बहुत सहिष्णु है, और ये वामपंथी इसी सहिष्णुता का सबसे गलत इस्तेमाल करते हैं।

इन्हें पता है की अगर ये किसी और मज़हब या उसके नेता के खिलाफ एक शब्द भी बोल दें, तो सर तन से जुदा वाले नारे लगने शुरू हो जाएंगे और सड़कों पर आगजनी हो जाएगी।

लेकिन गोरखपुर की शांत पब्लिक ने इन्हें कुछ नहीं कहा, तो ये अपनी हैसियत भूल गए।

बाबा गोरखनाथ की उस पवित्र धरती पर खड़े होकर इन लोगों ने जिस तरह का ज़हर उगला है, वो सिर्फ एक नेता का अपमान नहीं है, बल्कि वो करोड़ों यूपी वालों के जनादेश का सरेआम अपमान है।

Gen-Z महाजुटान के नाम पर 2027 चुनावों का ज़हरीला टूलकिट और सीएम योगी के खिलाफ इस नेहा बोरा की भयंकर बदज़ुबानी

अब आते हैं सीधे 14 सितंबर 2026 की उस घटना पर, जिसने पूरे सोशल मीडिया पर आग लगा रखी है। गोरखपुर का गोकुल अतिथि भवन… वहाँ वामपंथी छात्र संगठन AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) के बैनर तले एक प्रोग्राम रखा जाता है।

इस प्रोग्राम का नाम बड़ा ही फैंसी रखा गया था- ‘Gen-Z महाजुटान’।

नाम सुनकर ऐसा लगेगा जैसे ये आजकल के युवाओं और कॉलेज जाने वाले बच्चों के करियर, पढ़ाई या भविष्य पर कोई चर्चा करने आए हैं। लेकिन अंदर जो हो रहा था, वो किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार कर दे।

मंच पर माइक थामकर AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा (Neha Bora) जो भाषा बोल रही थी, वो किसी छात्र नेता की भाषा तो कतई नहीं हो सकती।

बिल्कुल सीना तानकर और पूरे घमंड में नेहा बोरा ने मंच से यूपी के मुख्यमंत्री के लिए खुलेआम कहा- “वो गुंडा, वो दंगाई, वो लंपट जो खुद को योगी कहता है, वह क्या देगा शिक्षा उत्तर प्रदेश को?”

आप सुन रहे हैं ना? एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री को, जिसे यूपी की 25 करोड़ जनता ने भारी बहुमत से जिताकर गद्दी पर बिठाया है, उसे ये बाहरी वामपंथी लड़की सरेआम ‘गुंडा, लंपट और दंगाई’ कह रही है!

और बात यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद उसने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव का सीधा ज़िक्र करते हुए चुनौती दी की “हम योगी को गद्दी से उखाड़ फेंकेंगे।”

अब आप ही बताइए यार, ये किस एंगल से आपको ‘छात्रों’ का प्रोग्राम लगता है? प्रयागराज (इलाहाबाद) से लेकर गोरखपुर तक ये जो भी ड्रामा चल रहा है, यह सीधे-सीधे 2027 के चुनावों के लिए सेट किया गया एक ज़हरीला टूलकिट है।

गोरखपुर को इन्होंने जानबूझकर चुना क्योंकि इन्हें पता था की योगी आदित्यनाथ को उनके ही गढ़ में गाली देने से सबसे ज्यादा TRP मिलेगी, न्यूज़ चैनलों की हेडलाइंस बनेंगी और इनके विदेशी आकाओं से इन्हें अच्छी-खासी फंडिंग मिल जाएगी।

ये सस्ती पब्लिसिटी का सबसे घटिया पैंतरा है, जिसमें एजुकेशन या छात्रों के मुद्दों से इनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

कौन है ये नेहा बोरा और JNU वाले AISA गैंग का असली एजेंडा क्या है जो छात्रों की आड़ में सेक रहे अपनी रोटियां

ये जो नेहा बोरा नाम की लड़की अचानक से रातों-रात सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, इसे कोई भटकी हुई, बेचारी या मासूम छात्रा समझने की भूल बिल्कुल मत कीजिएगा।

यह कोई स्टूडेंट नहीं है, बल्कि इस पूरे ज़हरीले वामपंथी इकोसिस्टम की एक बहुत ही सधी हुई मोहरी और पोस्टर-गर्ल है।

नेहा बोरा वामपंथी छात्र संगठन AISA (All India Students’ Association) की राष्ट्रीय अध्यक्ष है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) के बहाने हुए ड्रामे हों या जेएनयू (JNU) के धरने-प्रदर्शन, यह मैडम हर जगह इस इकोसिस्टम का झंडा उठाए मिल जाएंगी।

अब समझिए की ये AISA क्या बला है! ये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन [CPI-ML] का आधिकारिक छात्र संगठन है।

जी हां, वही कट्टरपंथी वामपंथी पार्टी, जिसका इतिहास ही खून-खराबे, नक्सली सोच और देश-विरोधी विचारधारा से जुड़ा रहा है।

यह वही वामपंथी गैंग है जो यूनिवर्सिटी कैंपस को पढ़ाई का नहीं, बल्कि गंदी राजनीति का अड्डा बनाने और देश-विरोधी नारों (टुकड़े-टुकड़े गैंग) के लिए हमेशा विवादों में रहता है।

इन दिनों नेहा बोरा और इनका AISA गैंग पूरे उत्तर प्रदेश में ‘Gen-Z Rising’ (जेन-ज़ेड राइजिंग) नाम की एक यात्रा निकाल रहा है। बाहर से देखने पर मासूम पब्लिक को लगता है की ये लोग पेपर लीक, बेरोजगारी, या यूनिवर्सिटी की फीस जैसे छात्रों के मुद्दों पर बात कर रहे हैं। लेकिन असली खेल इस नकाब के पीछे चल रहा है!

इनका टारगेट होते हैं ‘Gen-Z’ यानी वो 18-19 साल के युवा लड़के-लड़कियां, जो अभी-अभी स्कूल से निकलकर फर्स्ट ईयर में यूनिवर्सिटी आते हैं।

ये वामपंथी भेड़िये मासूम छात्रों को अपना शिकार बनाते हैं। ये सेमिनार और महाजुटान के नाम पर उनका ऐसा ब्रेनवॉश करते हैं की वो अपनी ही संस्कृति, अपने ही देश के सिस्टम, सनातन धर्म और राष्ट्रवाद से नफरत करने लगें।

ये उन्हें पढ़ाते हैं की सनातन धर्म खराब है, देश की सरकार ‘फासीवादी’ (Fascist) है, राम मंदिर बनना बेकार है, और असली आज़ादी वामपंथ (Communism) में है।

पहले इन्होंने यही ज़हर JNU, जामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी में घोला। फिर ये लोग बिहार गए (जहां पटना में अभी हाल ही में इन्होंने बवाल काटा), और अब ये प्रयागराज और गोरखपुर जैसी पवित्र जगहों पर आकर दंगे भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।

नेहा बोरा जैसे लोगों का काम ही यही है- कॉलेज के बच्चों को भड़काओ, उन्हें सिस्टम के खिलाफ सड़क पर उतारो, मंच से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को गंदी-गंदी गालियां दो, और अगर पब्लिक पलट कर जवाब दे दे, तो कैमरे के सामने विक्टिम (Victim) बनकर मानवाधिकार और ‘लोकतंत्र खतरे में है’ का रोना रोने लगो।

लेकिन ये भूल गए की ये 2026 का नया यूपी है और इनका सामना ‘लोगसभा’ की पैनी नज़र से हो रहा है। यहाँ अगर शिक्षा के नाम पर ‘अर्बन-नक्सल’ वाली आग लगाने की कोशिश करोगे, तो कानून के ऐसे डंडे पड़ेंगे की सारी वामपंथी क्रांति दिमाग से उतर जाएगी।

मुख्यमंत्री को सरेआम गाली देना ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ और पब्लिक जवाब दे तो तुरंत बाहर आ जाता इनका ‘फेमिनिस्ट’ कार्ड

अब ज़रा इन वामपंथियों के सबसे बड़े दोगलेपन को समझिए। दिन-रात इनका एक ही रोना रहता है की “हाय-हाय, देश में लोकतंत्र खत्म हो गया… मोदी-योगी राज में किसी को बोलने की आज़ादी नहीं है… फासीवाद आ गया है।”

अरे भाईसाहब! अगर देश में सच में तानाशाही होती, तो क्या कोई 2 कौड़ी की वामपंथी नेता गोरखपुर जाकर एक चुने हुए मुख्यमंत्री को सरेआम ‘गुंडा, लंपट और दंगाई’ बोलकर ज़िंदा और सुरक्षित वापस लौट सकती थी?

यही इनकी आज़ादी का सबसे नंगा सच है। ये लोग लोकतंत्र का सिर्फ फायदा उठाना जानते हैं। जब तक ये सनातन को गाली दें, सरकार को गाली दें, तब तक देश में ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ (Free Speech) ज़िंदा रहता है।

लेकिन सोचिए, अगर इसी भाषा का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा भी किसी राष्ट्रवादी व्यक्ति ने इस नेहा बोरा के लिए बोल दिया होता, तो क्या होता?

अब तक आसमान सिर पर उठा लिया गया होता! पूरा कॉकरोच गैंग, रवीश कुमार जैसे पत्रकार, और विदेशी फंडिंग पर पलने वाले NGO रातों-रात रोना-धोना शुरू कर देते।

फिर डिबेट होती ‘महिला सुरक्षा’ पर। फिर रोना रोया जाता की “देखिए, पितृसत्ता (Patriarchy) कैसे एक आज़ाद खयालों वाली औरत को दबा रही है।”

तुरंत जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट शुरू हो जाते और ये लड़की कैमरे के सामने विक्टिम (Victim) बनकर इंटरव्यू दे रही होती।

मतलब तुम्हारा कुत्ता टॉमी, और हमारा कुत्ता कुत्ता? तुम अगर किसी संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री को गालियां दो, तो वो ‘क्रांति’ है।

और अगर पब्लिक तुम्हारे इस ज़हर का विरोध करे, तो तुम तुरंत अपनी जेब से ‘Woman Card’ निकालकर विक्टिम बन जाओगी? ये दोगलापन अब इस देश में बर्दाश्त नहीं होगा।

गालियां देने से पहले अगर अपना जेंडर नहीं सोचा, तो सज़ा भुगतते वक्त भी औरत होने का रोना मत रोना।

यूपी पुलिस और गोरखपुर प्रशासन की इस खामोशी पर उठते सवाल, आख़िर क्यों नहीं दर्ज हुई Zero FIR

वामपंथियों का तो काम ही ज़हर फैलाना है, लेकिन इस पूरे बवाल में सबसे ज़्यादा खून खौलाने वाली बात है- यूपी पुलिस और गोरखपुर प्रशासन की खामोशी।

ये समझ से बिल्कुल परे है की 14 सितंबर को गोकुल अतिथि भवन में सरेआम इतना बड़ा भड़काऊ भाषण दे दिया गया, वीडियो पूरे देश के मोबाइलों में घूम रहा है, और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है!

हम यूपी पुलिस से सीधा सवाल पूछना चाहते हैं की आख़िर गोरखपुर पुलिस का खुफिया तंत्र (Local Intelligence) कर क्या रहा था? जब AISA जैसे विवादित संगठन का ‘Gen-Z महाजुटान’ कार्यक्रम हो रहा था, तो वहाँ पुलिस या एलआईयू (LIU) की टीमें क्यों नहीं थीं?

योगी राज में जहाँ अपराधियों की एक धमकी पर अगले दिन उनके घरों पर बुलडोजर गरजने लगता है, वहाँ एक वामपंथी नेता खुलेआम सीएम को गालियां देकर कैसे निकल गई?

पुलिस ने अब तक भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर ‘ज़ीरो एफआईआर’ (Zero FIR) दर्ज क्यों नहीं की?

ये चुप्पी अपराधियों और दंगा भड़काने वालों के हौसले बढ़ा रही है। प्रशासन की इस सुस्ती ने पूरे सिस्टम की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

पुलिस सोती रहे पर हम नहीं छोड़ेंगे, लोगसभा की लीगल टीम खुद घसीटेगी नेहा बोरा को कोर्ट और सिखाएगी कानून का असली सबक

पुलिस भले ही कुंभकरण की नींद सोती रहे, लेकिन ‘लोगसभा’ (Logsabha) अब मूकदर्शक बनकर तमाशा नहीं देखेगी।

हम केवल ख़बरें छापकर पन्ने काले करने वालों में से नहीं हैं। लोकतंत्र के नाम पर यूपी की ज़मीन पर जो यह गुंडागर्दी और भद्दी बयानबाज़ी की गई है, उसका हिसाब अब कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा।

हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं की ‘लोगसभा’ की लीगल टीम इस मामले में पूरी तरह से एक्शन मोड में आ चुकी है। नेहा बोरा के उस विवादित भाषण की सारी वीडियो फुटेज, तारीख, जगह के प्रमाण और गवाहों के बयान हमारी लीगल डेस्क पर तैयार रखे हैं।

अगर पुलिस ने इस वामपंथी नेता के ख़िलाफ़ दंगा भड़काने, समाज में नफ़रत फैलाने, और एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की मानहानि करने के जुर्म में एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की और इसे गिरफ़्तार नहीं किया… तो लोगसभा की लीगल टीम खुद सीधे केस करेगी और FIR भी लिखवाएगी ।

हम खुद गोरखपुर में नेहा बोरा और इस पूरे कार्यक्रम के आयोजकों के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) और शांति भंग (Breach of Peace) करने के तहत केस फाइल करेंगे।

जो लोग आज़ादी के नाम पर सरेआम ज़हर उगल रहे हैं, उन्हें अब कोर्ट के कटघरे में खड़ा करके जवाब देना होगा की आख़िर एक चुनी हुई सरकार को असंवैधानिक तरीके से “गद्दी से उखाड़ फेंकने” की धमकी देने के पीछे उनकी क्या साज़िश है?

इस देश का कानून अंधा हो सकता है, लेकिन सोया हुआ नहीं है। कानून का डंडा जब पड़ता है ना, तो बड़े-बड़ों की सारी क्रांति हवा हो जाती है, और नेहा बोरा की यह तथाकथित ‘क्रांति’ भी अब बहुत जल्द पुलिस स्टेशन की चौखट पर दम तोड़ती नज़र आएगी।

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