अक्सर सोशल मीडिया पर एक मज़ाक चलता है की भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जीतने के लिए बहुत ज़्यादा पसीना बहाने की या रैलियां करने की कोई खास ज़रूरत नहीं है..
जब तक राहुल गांधी मैदान में हैं, बीजेपी एकदम रिलैक्स होकर चाय-समोसे खा सकता है।
भई, जब सामने वाली टीम का कप्तान खुद ही दनादन ‘सेल्फ-गोल’ दाग रहा हो, तो फिर आपको मेहनत करने की क्या ज़रूरत?
जब-जब लगता है की कांग्रेस अब थोड़ा सीरियस पॉलिटिक्स करने लगी है, तभी राहुल गांधी कोई ऐसा नया शिगूफा छोड़ देते हैं की पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी को बैकफुट में वापस चले जाना पड़ता है।
उनकी इसी कंसिस्टेंसी को देखकर तो अब पक्का यकीन होने लगा है की वो कांग्रेस के नेता कम और बीजेपी के सबसे बड़े ‘स्टार प्रचारक’ (Star Campaigner) ज़्यादा हैं।
अभी 19 सितंबर 2026 की ही ताज़ा घटना ले लीजिए। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक बहुत ही हाई-प्रोफाइल इवेंट रखा गया था।
उम्मीद थी की वहां देश के युवाओं की बात होगी, शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर चर्चा होगी। लेकिन वहां जो तमाशा हुआ, उसने ना सिर्फ राजनीति के गिरते स्तर को दिखाया, बल्कि ये भी साबित कर दिया की कांग्रेस आलाकमान के पास राजनीतिक परिपक्वता (Political Maturity) नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं है।
जिस मंच से एक सीरियस पॉलिटिकल मैसेज जाना चाहिए था, उसे देखते ही देखते एक अभद्र लाफ्टर क्लब में तब्दील कर दिया गया। और इस पूरी भद्दी कॉमेडी का लुत्फ़ खुद राहुल गांधी सबसे आगे बैठकर उठा रहे थे।
‘छात्रों की गूंज’ के मंच पर गूंजे अभद्र ठहाके, कैसे इंदौर के ‘युवा संवाद’ को राहुल बाबा ने बना दिया सस्ता ‘कॉमेडी सर्कस’

चलिए अब ज़रा 19 सितंबर 2026 के उस दिन पर बात करते हैं। जगह थी मध्य प्रदेश का शहर इंदौर।
कांग्रेस पार्टी ने यहां युवाओं को जोड़ने के लिए एक बहुत ही शानदार नाम वाला कार्यक्रम आयोजित किया था- ‘छात्रों की गूंज’
नाम सुनकर ऐसा लगता है ना की जैसे कोई बहुत बड़ी वैचारिक क्रांति होने वाली है? इस कार्यक्रम का मेन एजेंडा था देश भर में हो रहे पेपर लीक, छात्रों के तनाव, ठप्प पड़ी शिक्षा प्रणाली और बढ़ती बेरोज़गारी जैसे बेहद गंभीर और ज्वलंत मुद्दों पर बात करना।
ज़ाहिर सी बात है, जब देश का इतना बड़ा विपक्षी नेता छात्रों से सीधा संवाद करने आ रहा हो, तो उम्मीदें भी आसमान पर होती हैं।
इंदौर और आस-पास के हज़ारों युवा, कॉलेज के छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लड़के-लड़कियां अपना सारा काम-धाम छोड़कर वहां पहुंचे थे।
उन बेचारों की आँखों में एक उम्मीद थी की आज राहुल गांधी मंच से उनके फेवर में कोई बहुत बड़ी बात कहेंगे। वो सरकार से कड़े सवाल पूछेंगे की आखिर युवाओं का भविष्य कब तक यूं ही पेपर लीक की भेंट चढ़ता रहेगा।
उन्हें लगा था की आज उन्हें एक परिपक्व और गंभीर नेता सुनने को मिलेगा जो उनके दर्द को समझेगा।
शुरुआत में सब कुछ ठीक-ठाक लग रहा था। मंच सजा हुआ था, लाइटें जगमगा रही थीं और सामने हज़ारों युवाओं की भीड़ अपनी ‘गूंज’ सुनाने के लिए बेताब थी।
लेकिन फिर अचानक इस सीरियस पॉलिटिकल इवेंट की स्क्रिप्ट ही बदल गई। ऐसा लगा जैसे किसी ने गलती से न्यूज़ चैनल हटाकर कोई सस्ता कॉमेडी चैनल लगा दिया हो।
छात्रों की समस्याओं पर बात करने के बजाय, अचानक मंच पर ‘पुलकित मणि’ नाम के एक स्टैंड-अप कॉमेडियन की एंट्री हो जाती है।
अब आप खुद सोचिए, एक तरफ देश का युवा बेरोज़गारी और पेपर लीक की टेंशन में अपनी रातें काली कर रहा है, और दूसरी तरफ देश का मुख्य विपक्षी नेता उन्हें हंसाने के लिए एक कॉमेडियन को मंच पर ले आया है!
क्या ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम इसीलिए रखा गया था की वहां आकर बेतुके चुटकुले सुने जाएं? जो मंच देश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए डिज़ाइन किया गया था, उसे महज़ चंद मिनटों में एक घटिया कॉमेडी सर्कस बना दिया गया।
छात्र बेचारे मुंह ताक रहे थे की यार हम यहाँ अपने करियर की बात करने आए थे, या फिर कपिल शर्मा का शो देखने? पुलकित मणि ने माइक पकड़ा और वहीं राहुल गांधी के ठीक बगल में खड़े होकर अपना ‘लाफ्टर चैलेंज’ शुरू कर दिया।
अगर यह कॉमेडी छात्रों की ज़िंदगी, सिस्टम की नाकामी या महंगाई पर होती, तो शायद समझ में आता की चलो, व्यंग्य (Satire) के ज़रिए सरकार पर निशाना साधा जा रहा है। लेकिन नहीं, वहां तो जो कुछ हुआ, उसने पूरी की पूरी राजनीति को ही शर्मसार करके रख दिया।
मुद्दों को छोड़कर उस कॉमेडियन ने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल लाइफ, उनके हाव-भाव और सबसे घिनौने तरीके से उनकी स्वर्गीय मां पर घटिया जोक्स क्रैक करने शुरू कर दिए।
PM मोदी की मिमिक्री से लेकर उनकी स्वर्गीय मां के मज़ाक तक, राहुल गांधी के वो ठहाके जो कांग्रेस को भारी पड़ने वाले हैं
You can’t win Gen Z and Indian youth support by doing these shit, you are giving platform to a internet troll and together making fun of Narendra Modi deceased mother 🤦🏻
If Rahul Gandhi has 1% shame left, he will apologise for this act after his program…SHAMEFUL!! pic.twitter.com/piK9SqEoMD
— कट्टर INDIA समर्थक 🦁🇮🇳 ™ (@KKRWeRule) September 19, 2026
चलिए अब ज़रा उस स्क्रिप्ट की बात कर लेते हैं जिसने इस छात्र संवाद को विवादों के एक गहरे दलदल में धकेल दिया।
पुलकित मणि नाम के उस कॉमेडियन ने माइक पकड़ा और फुल फॉर्म में आ गया। शुरुआत में उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों और वहां के नेताओं से गले मिलने वाले अंदाज़ की मिमिक्री (नकल) करनी शुरू की।
वो मंच पर “My friend, my friend” बोलकर मोदी जी के हाव-भाव की नकल उतार रहा था।
यहां तक बात फिर भी समझ में आती है। राजनीति में मिमिक्री और व्यंग्य का एक पुराना इतिहास रहा है। अटल जी से लेकर मनमोहन सिंह तक, हर प्रधानमंत्री का कार्टून बना है, उनकी नकल उतारी गई है, और इसे एक स्वस्थ लोकतंत्र (Healthy Democracy) का हिस्सा मानकर बर्दाश्त भी कर लिया जाता है।
लेकिन फिर इस कॉमेडियन ने सस्ती तालियां बटोरने के चक्कर में वो ‘लक्ष्मण रेखा’ पार कर दी, जिसे भारतीय समाज में कभी भी पार करने की इज़ाज़त नहीं दी जाती।
विदेशी नेताओं के मज़ाक से खिसकते हुए वो सीधे पीएम मोदी की निजी ज़िंदगी और उनकी स्वर्गीय मां हीराबेन पर आ गया।
आपको याद होगा, कुछ समय पहले पीएम मोदी का अपनी मां के साथ एक बेहद भावुक वीडियो सामने आया था, जिसमें वो अपनी मां को देखकर बड़े ही स्नेह से कहते हैं- “मां को कुर्सी दो, मां।” एक बेटे और मां के बीच का यह एक बेहद निजी, संवेदनशील और पवित्र पल था।
उस कॉमेडियन ने मंच से बिल्कुल इसी पल की भद्दे तरीके से नकल उतारी और एक स्वर्गीय बुजुर्ग मां को अपनी घटिया ‘कॉमेडी’ का मसाला बना दिया।
अब मंच पर उस 2 कौड़ी के कॉमेडियन के साथ खड़े राहुल गाँधी को देखिये। एक कॉमेडियन देश के प्रधानमंत्री की स्वर्गीय मां का सरेआम मज़ाक उड़ा रहा है, और उसके ठीक बगल में बैठे हैं देश के मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी, जो खुद को प्रधानमंत्री पद का सबसे योग्य दावेदार मानते हैं।
एक परिपक्व (Mature) और समझदार नेता होने के नाते राहुल गांधी का रिएक्शन क्या होना चाहिए था? उन्हें तुरंत उस कॉमेडियन को टोकना चाहिए था की “भाई, आप पीएम की नीतियों का मज़ाक उड़ाइए, लेकिन किसी की स्वर्गीय मां को बीच में मत लाइए।”
लेकिन राहुल गांधी ने क्या किया? वो उस भद्दे मज़ाक को रोकने के बजाय ज़ोर-ज़ोर से तालियां पीट रहे थे। उनके ठहाके पूरे हॉल में गूंज रहे थे।
उनका उत्साह इतना बढ़ गया की उन्होंने उस कॉमेडियन को बाकायदा गले लगाया और मज़े लेते हुए उसी से पूछने लगे- “मोदी जी, आप कैसे हैं?”
मतलब, जो छात्र वहां अपने बेरोज़गार होने का दर्द लेकर आए थे, वो सामने अपने नेता को एक स्वर्गीय मां के मज़ाक पर लोटपोट होते हुए देख रहे थे।
क्या यही वो ‘मैच्योरिटी’ है जिसके दम पर ये 140 करोड़ की आबादी वाले देश का नेतृत्व करने का ख्वाब देख रहे हैं?
एक ऐसा नेता जो किसी के दुख, किसी के निजी रिश्ते और एक मां के सम्मान पर हंस सकता है, वो युवाओं का क्या ही दर्द समझेगा?
राहुल गांधी के इन ठहाकों ने साबित कर दिया की राजनीतिक विरोध के नाम पर वो और उनकी पार्टी किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं।
“डरा हुआ कॉमेडियन” और बचाव में उतरी कांग्रेस, जनता के गुस्से ने कैसे बंद करा दिए इस वाहियात कॉमेडियन के सारे शोज़
अब आप सोच रहे होंगे की उस कॉमेडियन ‘पुलकित मणि’ का क्या हुआ जिसने राहुल गांधी को खुश करने के लिए ये सारी स्क्रिप्ट पढ़ी थी?
भाई, पब्लिक का गुस्सा जब सोशल मीडिया से निकलकर ज़मीन पर आता है ना, तो अच्छे-अच्छों का पसीना छूट जाता है। राहुल गांधी तो मज़े लेकर, तालियां बजाकर वापस दिल्ली के अपने AC बंगले में जाकर बैठ गए, लेकिन असली ‘बलि का बकरा’ बन गया वो कॉमेडियन!
जब जनता को समझ में आया की इस आदमी ने सरेआम देश के प्रधानमंत्री की स्वर्गीय मां का अपमान किया है, तो लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
इस भयंकर बवाल के बाद उस कॉमेडियन की हालत खराब हो गई है। डर के मारे पुलकित मणि को नोएडा, लखनऊ और कानपुर में होने वाले अपने आगामी सारे स्टैंड-अप शोज़ रातों-रात रद्द (Cancel) करने पड़ गए।
सोशल मीडिया पर अब वो सफाई देता घूम रहा है की उसे धमकियां मिल रही हैं और उसकी जान को खतरा है।
ये होता है जब आप राजनीति की गंदी आग में अपनी रोटियां सेंकने की कोशिश करते हैं। राहुल जी ने तो मंच पर उसे गले लगाकर अपनी PR कर ली, लेकिन अब जब पब्लिक उस कॉमेडियन का हिसाब कर रही है, तो राहुल जी कहीं नज़र नहीं आ रहे।
और इतना भयंकर बवाल कटने के बाद, किसी की मां का अपमान होने के बाद, बजाय इसके की कांग्रेस आगे आकर माफ़ी मांगती या उस कॉमेडियन की हरकत से पल्ला झाड़ती… वो अभी भी इस घटिया हरकत को डिफेंड कर रहे हैं।
कांग्रेस के प्रवक्ता टीवी पर बैठकर इसे ‘कला’ और ‘मिमिक्री की आज़ादी’ बता रहे हैं। मतलब अगर आप किसी की दिवंगत मां का मज़ाक उड़ाएं तो वो ‘कला’ है? ये कैसी कला है भाई जो सिर्फ कांग्रेस के ईकोसिस्टम को ही समझ में आती है?
“असंस्कारी फूफा” और “जोकरों की पार्टी”, बीजेपी के दिग्गजों ने राहुल के इस कॉमेडी शो की कैसे निकाली हवा
“Rahul Gandhi has lost mental balance due to continuous defeats; insulting mother is shameful and against Indian culture.”
– BJP MP Tarun Chugh on PM Modi’s mimicry act at Rahul’s event pic.twitter.com/Jv32X0CYFt
— News Arena India (@NewsArenaIndia) September 20, 2026
जब कोई इतनी बड़ी राजनीतिक बेवकूफी सरेआम मंच पर करेगा, तो ज़ाहिर सी बात है कि सामने वाली पार्टी इसे खाली तो जाने नहीं देगी।
बीजेपी को तो बैठे-बिठाए कांग्रेस को घेरने का एक ऐसा फुलटॉस मिल गया, जिस पर उन्होंने स्टेडियम के बाहर ही छक्का जड़ दिया।
जैसे ही इंदौर के इस ‘छात्र संवाद’ वाले लाफ्टर शो का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे देश की राजनीति में भूचाल आ गया।
बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने लाइन लगाकर राहुल गांधी और कांग्रेस की जो हवा निकाली है, उसे कांग्रेस के नेता लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने तो राहुल गांधी की इस हरकत पर ऐसा तंज कसा की सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई।
गोयल ने राहुल को ‘असंस्कारी नाराज़ फूफा’ (Uncultured angry uncle) कह डाला। आपने देखा होगा ना शादियों में एक फूफा होते हैं, जिन्हें चाहे जितना भी सम्मान दे दो, वो हमेशा मुंह फुलाए रहते हैं और दूसरों का मज़ाक उड़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ते? राहुल गांधी का बर्ताव भी बिल्कुल वैसा ही था।
वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केसवन (CR Kesavan) ने इस पूरी घटना को “तीसरे दर्जे की भद्दी और असभ्य हरकत” (Third-rate, foul-mouthed antics) करार दिया।
केसवन ने एकदम सही नस पकड़ी की एक स्वर्गीय मां को मज़ाक का विषय बनाना राहुल गांधी की उस बौखलाई हुई मानसिकता को दिखाता है जो अब चुनावों में लगातार हारने के बाद अपना मानसिक संतुलन खो चुकी है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे कांग्रेस के ‘नैतिक दिवालियेपन’ की निशानी बताया। जब आपके पास सरकार को घेरने के लिए कोई विज़न, कोई पॉलिसी या कोई ठोस मुद्दा नहीं बचता, तब आप इस स्तर पर उतर आते हैं।
और सबसे करारा प्रहार किया किरेन रिजिजू ने, जिन्होंने साफ शब्दों में कह दिया की कांग्रेस अब एक सीरियस राजनीतिक दल नहीं रही, बल्कि यह “कॉमेडियन और जोकरों की पार्टी” बन चुकी है।
राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस बदसलूकी पर जमकर अपना गुस्सा ज़ाहिर किया। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव (जिनके राज्य में ये तमाशा हुआ) और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया की राजनीति में मतभेद ज़रूर हो सकते हैं, वैचारिक लड़ाई हो सकती है, लेकिन किसी की स्वर्गीय मां का मज़ाक उड़ाना किसी भी सभ्य समाज में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन नेताओं के बयानों ने साफ कर दिया की राहुल गांधी ने अपनी ‘कॉमेडी’ के चक्कर में बीजेपी को एक ऐसा भावनात्मक और तगड़ा मुद्दा दे दिया है जो सीधे देश की आम जनता के दिलों पर जाकर वार कर रहा है।
पेपर लीक और शिक्षा की उम्मीद में आए युवाओं के हाथ लगी निराशा, और राहुल गांधी ने फिर रिन्यू कर लिया अपना ‘BJP स्टार प्रचारक’ का टैग
इस पूरे तमाशे, कॉमेडी और सियासत के बीच में, क्या आपने सोचा की उन बेचारों का क्या हुआ जो उस ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होने आए थे?
जो युवा अपना किराया खर्च करके, अपना समय निकालकर राहुल गांधी के उस इवेंट में बैठे थे, वो बेचारे खाली हाथ, निराश और ठगे हुए महसूस कर अपने घर लौट गए।
उन्हें ना तो पेपर लीक का कोई समाधान मिला, ना शिक्षा प्रणाली को सुधारने का कोई रोडमैप मिला, और ना ही बेरोज़गारी दूर करने का कोई भरोसा।
उन्हें बस ये देखने को मिला की उनका सबसे बड़ा विपक्षी नेता उनकी समस्याओं को लेकर कितना गंभीर है। एक छात्र के लिए इससे बड़ी निराशा क्या होगी की वो अपने नेता से अपने भविष्य की बात करने जाए और नेता वहां किसी स्टैंड-अप कॉमेडियन के चुटकुलों पर दांत दिखा रहा हो।
राहुल गांधी ने युवाओं के उस सीरियस प्लेटफॉर्म का मज़ाक बनाकर उस पूरे यूथ वोटर को निराश किया है जो शायद कांग्रेस की तरफ थोड़ी बहुत उम्मीद से देख रहा था।
भारत का जो आम वोटर है, वो बहुत ही भावुक और संस्कारी होता है। आप उसे महंगाई पर भड़का सकते हैं, आप उसे बेरोज़गारी पर अपने साथ जोड़ सकते हैं, लेकिन जब आप उसकी सांस्कृतिक जड़ों और ‘मां’ जैसे पवित्र शब्द पर मज़ाक करते हैं, तो वो वोटर आपको कभी माफ नहीं करता।
अपनी इस ‘अभद्र कॉमेडी’ से राहुल गांधी ने अपने बचे-खुचे समर्थकों को भी शर्मिंदा किया है और बीजेपी के वोटरों को पूरी तरह से चार्ज कर दिया है।
बीजेपी को अब 2029 के लोकसभा चुनाव या आने वाले किसी भी विधानसभा चुनाव की कोई खास टेंशन लेने की ज़रूरत ही नहीं है।
राहुल गांधी ने इंदौर के मंच से अपने उस ‘स्टार प्रचारक’ वाले टैग को फिर से रिन्यू (Renew) कर लिया है।
उन्होंने देश को एक बार फिर याद दिला दिया है की जब तक कांग्रेस की कमान उनके हाथों में है, और जब तक वो सियासत को ऐसे ही कॉमेडी सर्कस समझते रहेंगे, तब तक बीजेपी को हराने का ख्वाब देखना बिल्कुल नामुमकिन है।
विपक्ष की सबसे बड़ी लुटिया अगर कोई डुबो रहा है, तो वो कोई और नहीं, खुद राहुल गांधी हैं।
