सियासत में हिप्पोक्रेसी की कोई हद नहीं होती, लेकिन जब बात देश के गौरव की हो, तो कम से कम वहां तो इंसान को अपनी गंदी राजनीति साइड में रख देनी चाहिए।
आजकल बाज़ार में एक ‘मोहब्बत की दुकान’ बहुत मशहूर है। इस दुकान के मालिक दुनिया भर के मामलों पर, खास तौर पर जब बात गाज़ा या फिलिस्तीन की हो, तो रात-रात भर जागकर ट्विटर (X) पर आंसू बहाते हैं।
लेकिन जब हिंदुस्तान के एक असली हीरो की बात आती है, जिसने अपनी जान पर खेलकर Flydubai की फ्लाइट में 174 लोगों की ज़िंदगी बचाई और पूरी दुनिया में भारत का डंका बजा दिया, तो इस दुकान का शटर अचानक से गिर जाता है।
अजीब बात है ना? एक तरफ देश के नामी मुस्लिम चेहरे- चाहे वो शाहरुख़ खान हों, सलमान खान हों, या फिर अक्सर तीखे बयान देने वाले असदुद्दीन ओवैसी-सबने अपनी राजनीति और विचारधारा को किनारे रखकर एक भारतीय पायलट की दिलेरी को सलाम किया।
लेकिन राहुल गाँधी और उनकी INDI टोली? उनके मुंह में तो जैसे फेवीकोल जम गया है। उनके मुँह से स्मित मच्छार के लिए एक शब्द नहीं निकल रहा है!
फिर जब देश की जनता इनके इस सिलेक्टिव (Selective) सन्नाटे और पाखंड को देखकर चुनाव में इन्हें दरकिनार कर देती है और इनकी जमानतें ज़ब्त करवाती है, तो ये बेचारे अपनी नाकामी छुपाने के लिए EVM के हैक होने का रोना रोने लगते हैं।

17000 फ़ीट नीचे गिरते विमान में मौत से टकराने वाले कैप्टन स्मित की वो रोंगटे खड़े कर देने वाली दिलेरी
इस पूरे वाक्ये की शुरुवात 30 सितंबर 2026 को हुई। फ्लाइट थी फ्लाईदुबई FZ1073 जो दुबई से उड़ान भरकर इजरायल के तेल अवीव जा रही थी। विमान हवा के बीचों-बीच था और अंदर 174 यात्री बैठे थे।
विमान की कमान कैप्टन स्मित मच्छार के हाथों में थी। लेकिन तभी कॉकपिट के अंदर वो हुआ, जो सीधे तौर पर 9/11 के आतंकी हमले की याद दिलाता है।
स्मित के साथ बैठा ओमान मूल का को-पायलट दरअसल एक कट्टरपंथी और जिहादी मानसिकता का शिकार था। उसका खौफनाक प्लान विमान को हाइजैक करके क्रैश करने का था ताकि वो 174 बेगुनाह इजरायलियों को मौत के घाट उतार सके।
उसने मौका देखकर अचानक पीछे से कैप्टन स्मित पर विमान में रखी ‘क्रैश एक्स’ (कुल्हाड़ी) से जानलेवा हमला कर दिया।
हमलावर को-पायलट ने विमान के कंट्रोल्स को नीचे की तरफ धकेल दिया। लेकिन स्मित ने हार नहीं मानी।
स्मित को पता था कि अगर वो उस पल बेहोश हो गए, तो 174 लोग ज़िंदा नहीं बचेंगे। उन्होंने अपनी आख़िरी ताकत बटोरी, खुद को ज़मीन पर घसीटा और कॉकपिट का वो लॉक दरवाज़ा अंदर से खोल दिया।
दरवाज़ा खुलते ही बाहर बैठे कुछ इजरायली यात्री और ऑफ-ड्यूटी पायलट अंदर टूट पड़े। उन्होंने उस जिहादी को-पायलट को दबोचा, उसे बुरी तरह पीटा और बांध दिया।
ये किसी हॉलीवुड फिल्म का सस्पेंस सीन नहीं था भाई, ये हमारे देश के एक शेर की असल दिलेरी थी!
नेतन्याहू से लेकर ट्रंप तक हुए मुरीद और सलमान शाहरुख़ से लेकर ओवैसी तक ने निभाया पक्के हिंदुस्तानी होने का फर्ज़
Captain Smit Machchhar, you stood strong when it mattered the most!! It’s not easy to stare adversity in the face and put one’s safety on the line… but you did just that to protect those onboard and showed us what being a Captain entails. A true display of courage and duty.…
— Shah Rukh Khan (@iamsrk) October 3, 2026
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू तो स्मित के इस कदर मुरीद हो गए की उन्होंने खुलेआम ऐलान कर दिया की इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने का सबसे बड़ा सम्मान कैप्टन स्मित मच्छार को ही दिया जाएगा।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर यूएई (UAE) के टॉप लीडर्स तक ने इस भारतीय पायलट को सदी का “असली हीरो” करार दिया।
लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे खूबसूरत और करारा पहलू हमारे अपने देश में देखने को मिला। देश के अंदर बैठे वो नामी मुस्लिम चेहरे, जिन्हें अक्सर वामपंथी लोग अपने वोटबैंक का हिस्सा मानते हैं, उन्होंने इस बार साबित कर दिया की जब बात देश के गौरव की आती है, तो एक पक्का हिंदुस्तानी कभी पीछे नहीं हटता।
शाहरुख़ खान ने खुलकर सोशल मीडिया पर कैप्टन स्मित की शान में कसीदे पढ़े। सलमान खान का ट्वीट तो एकदम उनके दबंग अंदाज़ में था। उन्होंने लिखा- “वेल डन ब्रो, आपके साथ उड़ान भरना मेरे लिए बहुत गर्व की बात होगी।”
और तो और, असदुद्दीन ओवैसी, जो हर बात में नुक्स निकालते हैं और केंद्र सरकार के धुर विरोधी माने जाते हैं, उन्होंने भी बिना किसी लाग-लपेट के कैप्टन स्मित मच्छार की जमकर तारीफ की और उन्हें देश का असली हीरो बताया।
ये बहुत बड़ी बात है! इसने एक तगड़ा मेसेज दिया की बहादुरी और देशभक्ति का कोई मज़हब नहीं होता। जब कोई भारतीय दुनिया में झंडा गाड़ता है, तो हर हिंदुस्तानी का सीना चौड़ा हो जाता है, चाहे वो किसी भी धर्म का क्यों न हो।
मगर… यहाँ एक बहुत बड़ा ‘मगर’ है। एक तरफ जहां दुनिया भर के नेता और देश के मुस्लिम स्टार्स तक इस असली हीरो की तारीफों के पुल बांध रहे थे, वहीं हमारे लुटियंस दिल्ली में एक ऐसा तबका भी बैठा है जिसने इस पूरे वाकये पर अपने होंठ ऐसे सिल लिए जैसे उन्हें सांप सूंघ गया हो।
फिलिस्तीन पर रोना-धोना करने वाले राहुल गाँधी की दुकान में पसरा है सन्नाटा क्योंकि वोटबैंक खिसकने का सता रहा है डर
अब आते हैं उस इकोसिस्टम पर जिसका ज़िक्र किए बिना ये कहानी अधूरी है। राहुल गाँधी और उनका पूरा INDI गठबंधन, जो दिन भर ‘संविधान’ और ‘देशभक्ति’ का झंडा लेकर घूमते हैं, कैप्टन स्मित के मामले में ऐसे मौन व्रत पर चले गए हैं जैसे इनके मुंह पर किसी ने ताला जड़ दिया हो।
सोचिए, एक तरफ बीजेपी के संबित पात्रा और सुधांशु त्रिवेदी जैसे नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और ट्विटर (X) पर सवाल पूछ रहे हैं कि भाई, राहुल जी ने इस असली भारतीय हीरो के लिए एक शब्द क्यों नहीं लिखा? लेकिन वहां से जवाब में सिर्फ और सिर्फ सन्नाटा आ रहा है।
आखिर दिक्कत क्या है भाई? दिक्कत है इनकी वो पुरानी और ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ (Appeasement Politics)। जो राहुल गाँधी फिलिस्तीन के नाम पर दिन-रात छाती पीटते हैं, दुनिया भर के मानवाधिकारों की चिंता में दुबले हुए जाते हैं, उन्हें अपने ही देश के एक जांबाज पायलट की तारीफ करने में पसीने छूट रहे हैं।
क्यों? क्योंकि कैप्टन स्मित ने जिस को-पायलट को धूल चटाई, वो एक खास मानसिकता और कट्टरपंथी मज़हब से जुड़ा था, और वो विमान इजरायल जा रहा था।
इन नेताओं को अंदर ही अंदर ये खौफ सता रहा है की अगर इन्होंने एक जिहादी को कूटने वाले हिन्दू पायलट की तारीफ कर दी, तो कहीं इनका इंटरनेशनल और घरेलू ‘खास’ वोटबैंक नाराज़ ना हो जाए।
अरे भाई, तुम किस वोटबैंक से डर रहे हो? ज़रा आंखें खोलकर देखो! जब असदुद्दीन ओवैसी और सलमान-शाहरुख़ जैसे लोग खुद सीना तान के इस कैप्टन की तारीफ कर रहे हैं, तो तुम किस बिल में छुपे बैठे हो?
यह दिखाता है की इन कांग्रेसी नेताओं की मानसिकता कितनी छोटी और डरी हुई है। ये लोग आज भी मुस्लिम समाज को सिर्फ ‘कट्टरपंथ’ के चश्मे से देखते हैं और सोचते हैं की एक आतंकी का विरोध करने से उनके वोटर छिटक जाएंगे।
जबकि सच ये है की देश का आम मुसलमान भी इस कट्टरपंथ के खिलाफ कैप्टन स्मित के साथ खड़ा है। लेकिन इनकी ‘मोहब्बत की दुकान’ में तो सिर्फ उसी के लिए जगह है, जिससे इन्हें अपने मन-मुताबिक वोट मिलने की गारंटी हो।
जनता का दिल जीतने की हिम्मत नहीं और जब चुनाव में लुटिया डूबती है तो सारा ठीकरा EVM पर फोड़ देते हैं
ये जो सिलेक्टिव सन्नाटा (Selective Silence) है ना, यही इनकी सबसे बड़ी बीमारी है और यही इनके पतन का असली कारण है। आप खुद सोचिए, देश की जनता क्या अंधी है?
आज का वोटर बहुत स्मार्ट है यार। वो देखता है की जब सर्जिकल स्ट्राइक होती है, तो ये लोग देश की सेना से सबूत मांगते हैं। जब देश का कोई साइंटिस्ट या खिलाड़ी झंडा गाड़ता है, तो ये उसमें जाति और धर्म ढूंढने लगते हैं।
और अब जब एक निहत्थे पायलट ने अपनी जान पर खेलकर 174 लोगों को बचाया, तो ये सिर्फ इसलिए मुंह फेर कर खड़े हैं क्योंकि सामने वाला आतंकी इनके वोटबैंक के सांचे में फिट बैठता है।
जब आप दिन-रात सिर्फ एक खास समुदाय को खुश करने के लिए राजनीति करोगे, देश के नेशनल प्राइड को इग्नोर करोगे, तो आम जनता आपको वोट क्यों देगी भाई?
आप बहुसंख्यक समाज और राष्ट्रवादी लोगों की भावनाओं को ऐसे कुचलकर उम्मीद करते हो की वो आपको सत्ता की चाबी सौंप देंगे?
फिर होता क्या है? जब चुनाव आते हैं, तो यही साइलेंट मेजॉरिटी (शांत बहुमत) चुपचाप पोलिंग बूथ पर जाती है और EVM का बटन दबाकर इनकी इस ‘चुप्पी’ और ‘दोगलेपन’ का तगड़ा बदला लेती है।
चुनाव के नतीजे आते हैं, इनकी लुटिया डूब जाती है, जमानतें जब्त हो जाती हैं। और फिर शुरू होता है इनका सबसे पुराना और घिसा-पिटा ड्रामा- “ईवीएम हैक हो गई है जी! लोकतंत्र खतरे में है! मोदी जी ने मशीनें सेट कर ली हैं!”
अरे भाईसाहब! खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली कहावत सुनी है? बिल्कुल वही हाल है इनका। मशीनें खराब नहीं हैं, खराब आपकी वो सोच है जो देश के एक हीरो का सम्मान करने से पहले उसका धर्म और अपना वोटबैंक देखती है।
जिस दिन आप देश को जातियों और मज़हबों में बांटना छोड़कर सच्चे हिंदुस्तानी की तरह सोचना शुरू कर दोगे, उस दिन आपको ईवीएम में कोई गड़बड़ी नज़र नहीं आएगी।
जनता जनार्दन है, वो आपको बहुत अच्छे से समझ चुकी है। कैप्टन स्मित मच्छार जैसे शेर सदियों में एक बार पैदा होते हैं, और जो सिस्टम या राजनेता ऐसे वीरों का सम्मान नहीं कर सकता, उसे इस देश की सत्ता पर बैठने का कोई हक़ नहीं है।
ईवीएम तो बस एक मशीन है, असली फैसला तो इस देश का वो राष्ट्रवादी नागरिक करता है जो अपने देश के वीरों के अपमान और इस तुष्टिकरण की राजनीति को कभी भूलता नहीं है!
