हमारे देश की राजनीति में कब कौन किसका यार बन जाए और कब कौन किसका जानी दुश्मन, इसका अंदाज़ा लगाना मौसम की भविष्यवाणी करने से भी ज़्यादा मुश्किल है।
गिरगिट भी अगर भारत की राजनीति देख ले ना, तो शायद वो भी रंग बदलने की ट्यूशन यहीं से लेना शुरू कर दे!
अब तक तो हम यही देखते आए थे की सत्ता पाने के लिए नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। मोदी से राजनीतिक लड़ाई लड़ना, सरकार की नीतियों का विरोध करना… ये सब लोकतंत्र का हिस्सा है, समझ आता है।
लेकिन मोदी विरोध में एक राष्ट्रीय पार्टी ‘भारत विरोध’ और ‘भारतीय उद्योगपतियों के विरोध’ तक कैसे गिर सकती है, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
ज़रा सोचिए, एक विदेशी अरबपति Elon Musk, जो भारत में अपना बिज़नेस चमकाना चाहता है, वो रातों-रात राहुल गांधी का फेवरेट कैसे बन जाता है?
सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने अपनी बौखलाहट में भारत के जाने-माने कारोबारी मुकेश अंबानी पर तंज कस दिया था!
खैर, इस पूरे खेल को समझने के लिए आपको थोड़ा पीछे जाना होगा और समझना होगा की आखिर ये पूरा बवाल शुरू कहाँ से हुआ।
Welcome to India, Elon.
Wait till you discover the other guy. https://t.co/70uSPGHRW5
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 8, 2026
भारत में ‘Starlink’ लाने के लिए बौखलाया Elon Musk, स्पेक्ट्रम की वो लड़ाई जिसमें अंबानी और अडानी को बना दिया विलेन
दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क अपनी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी ‘स्टारलिंक’ (Starlink) को भारत में लाना चाहते हैं।
बहुत अच्छी बात है, भारत भी चाहता है की दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी हमारे देश में आए। लेकिन हर देश के अपने कुछ नियम-कानून होते हैं यार, कोई किसी के घर का राज थोड़ी है की जो चाहे वो नियम बनवा ले!
असली पेंच फंसा है ‘स्पेक्ट्रम’ (Spectrum) के बंटवारे पर। भारत की जो अपनी स्वदेशी टेलीकॉम कंपनियां हैं, जैसे रिलायंस जियो (Jio) और एयरटेल, उनका सीधा सा तर्क है की सरकार को स्पेक्ट्रम की बाकायदा ‘नीलामी’ (Auction) करनी चाहिए।
नीलामी होगी तो जो ज़्यादा बोली लगाएगा, उसे स्पेक्ट्रम मिलेगा। इससे सीधा फायदा भारत सरकार को होगा, टैक्सपेयर्स के पैसे बचेंगे और एक ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ (बराबरी का मौका) तैयार होगा।
लेकिन हमारे मस्क भाई साहब अलग ही ज़िद पर अड़े हैं। मस्क चाहते हैं की बिना किसी नीलामी के, बस एक फिक्स लाइसेंस फीस लेकर उन्हें स्पेक्ट्रम दे दिया जाए (इसे एडमिनिस्ट्रेटिव अलोकेशन कहते हैं)।
अब जब भारत सरकार ने साफ कर दिया की भाई आपको देश की सुरक्षा (Security clearance) के नियम मानने पड़ेंगे और स्पेक्ट्रम के नियमों से समझौता नहीं होगा, तो मस्क बौखला गए। उनका ईगो हर्ट हो गया।
इसी झल्लाहट में मस्क ने ‘Twitter’ (X) पर एक ट्वीट दाग दिया- “क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”
मस्क का ये रोना था की भारत के कुछ बड़े ‘पूंजीपति’ अपनी मोनोपॉली (एकाधिकार) बचाने के लिए उनकी एंट्री रोक रहे हैं। मतलब आप नियम न मानें तो ठीक, और सरकार अगर देश के कानून के हिसाब से चले तो देश का उद्योगपति ‘विलेन’ बन गया?

“वेलकम टू इंडिया एलन भाई”, राहुल गाँधी का वो ट्वीट जिसने दिखा दी देश के स्वदेशी उद्योगों को हराने की नीयत
जैसे ही मस्क ने अंबानी का नाम लिया, हमारी देश की सबसे पुरानी पार्टी के युवराज को लगा की भाई लॉटरी लग गई!
राहुल गांधी जो हमेशा मौके की ताक में रहते हैं की कैसे भारत के बड़े उद्योगपतियों को निशाना बनाया जाए, वो तुरंत इस विवाद में कूद पड़े।
उन्होंने आव देखा न ताव और झट से मस्क के ट्वीट को कोट करते हुए लिख दिया- “Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.” (भारत में आपका स्वागत है एलन। रुको, जब तक आपको दूसरे आदमी के बारे में पता चलेगा)।
यहां वो ‘दूसरा आदमी’ कौन था, ये बच्चा-बच्चा जानता है- उनका सीधा इशारा गौतम अडानी की तरफ था। इसके जवाब में मस्क ने भी खुश होकर लिख दिया, “Thank you Rahul. This is indeed troubling.”
अब आप ही बताइए, ये क्या मज़ाक चल रहा है? क्या देश की सबसे पुरानी पार्टी के नेता को अपनी सियासत चमकाने के लिए अब एक विदेशी अरबपति के ‘सर्टिफिकेट’ की ज़रूरत पड़ गई है?
ये कितनी शर्मनाक बात है की एक भारतीय राजनेता भारत के ही उन उद्योगपतियों का मज़ाक उड़ाने के लिए एक विदेशी का साथ दे रहा है, जो कंपनियां इस देश में लाखों युवाओं को रोज़गार देती हैं, जो देश के जीडीपी (GDP) का पहिया घुमाती हैं!
मतलब आप सिर्फ मोदी को नीचा दिखाने के लिए मस्क के कंधे पर बंदूक रखकर भारत की स्वदेशी कंपनियों को हराने पर तुल गए हैं।
कल का राष्ट्रीय खतरा आज बन गया जिगरी यार, कांग्रेस के दोहरे चेहरे की वो टाइमलाइन जो सिर चकरा दे
अब बात करते हैं उस सबसे बड़े पाखंड की, जिसे देखकर अच्छे-अच्छों का सिर चकरा जाए।
आज राहुल गांधी जिस स्टारलिंक और एलन मस्क का खुले हाथों से स्वागत कर रहे हैं, ज़रा इतिहास के पन्ने पलटकर देखिए की पिछले साल कांग्रेस का इन्हीं के बारे में क्या स्टैंड था!
गूगल पर सर्च मारिए और देखिए जयराम रमेश और कांग्रेस के बाकी बड़े नेताओं के पुराने ट्वीट्स। जब कुछ समय पहले स्टारलिंक के भारत आने की आहट हुई थी, तब इसी कांग्रेस पार्टी ने आसमान सिर पर उठा लिया था।
तब इनके बयान क्या थे? “एक विदेशी सैटेलाइट कंपनी को भारत का इंटरनेट सौंपने से देश का सारा डेटा चोरी हो जाएगा!” “इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को भयंकर खतरा है!”
“ये मोदी सरकार का कोई बड़ा घोटाला है!”
मतलब सोचिए ज़रा! जो स्टारलिंक कल तक इनके लिए ‘राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा’ थी, जो कंपनी कल तक भारत का डेटा चुराने वाली विदेशी ताक़त थी… आज वो अचानक से राहुल गांधी की जिगरी यार कैसे बन गई? ऐसा क्या बदल गया इन चंद महीनों में?
बदला कुछ नहीं है, बस नीयत का खोट सामने आ गया है। कांग्रेस को ना तब राष्ट्रीय सुरक्षा की फिक्र थी और ना आज है। उनका तो बस एक ही टूलकिट है- अगर मोदी सरकार कोई नियम बनाए तो उसका विरोध करो, और अगर कोई विदेशी आदमी आकर मोदी या भारत के उद्योगपतियों को गाली दे, तो उसे गले लगा लो।
ये दोगलापन नहीं तो और क्या है? कल तक आप जिसे देश के लिए खतरा बता रहे थे, आज उसी के एजेंट बनकर खड़े हो गए!
घरेलू दुश्मनी में विदेशियों को न्योता देना ये कोई नई बात नहीं, बस जयचंद और टीपू सुल्तान वाला इतिहास खुद को दोहरा रहा है
इतिहास गवाह है भाईसाहब, इस देश ने सैकड़ों साल की गुलामी इसलिए नहीं झेली की बाहर वाले कोई बहुत बड़े तीसमारखां थे।
भारत पर विदेशी इसलिए राज कर पाए क्योंकि हमारे ही घर के कुछ लोगों ने अपनी आपसी रंजिश निकालने के लिए बाहर वालों के पैर पकड़े थे।
जब भी किसी को अपने ही भाई या पड़ोसी से बदला लेना होता था, वो सीधे किसी विदेशी ताकत के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच जाता था।
ज़रा याद कीजिए इतिहास के पन्ने। टीपू सुल्तान ने 1790 के दशक में मराठों और निज़ाम को पछाड़ने के लिए क्या किया था?
उसने अफ़ग़ानिस्तान के ज़मान शाह को बाकायदा खत लिखकर न्योता भेजा था की “हुज़ूर, आप भारत पर हमला कीजिए, हम आपके साथ खड़े हैं!”
जयचंद की कहानी तो इस देश के बच्चे-बच्चे की ज़बान पर है, जिसने पृथ्वीराज चौहान से बदला लेने के लिए मोहम्मद गौरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था।
आज 21वीं सदी में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बिल्कुल उसी पुराने रास्ते पर चलते नज़र आ रहे हैं। फ़र्क सिर्फ इतना है की उस ज़माने में तलवारें और तोपें मंगवाई जाती थीं, और आज के दौर में विदेशी कॉरपोरेट्स और उनकी टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है।
खेल वही पुराना है- “मुझे अपने घरेलू राजनीतिक दुश्मन (मोदी) और अपने देश के उद्योगपतियों (अंबानी-अडानी) को नीचा दिखाना है, इसलिए एलन मस्क भाई साहब, आप आइए! आप हमारे देश के कानूनों पर सवाल उठाइए और हम आपके पीछे ताली बजाएंगे!”
अरे भाई, ज़रा ठंडे दिमाग से सोचिए। मुकेश अंबानी या अडानी जो भी कारोबार करते हैं, वो इसी देश की ज़मीन पर करते हैं।
वे लाखों भारतीयों को नौकरियां देते हैं, हज़ारों करोड़ का टैक्स भारत सरकार के खजाने में जमा करते हैं, और कल को कोई संकट आएगा तो यहीं खड़े मिलेंगे।
एलन मस्क अगर भारत आएंगे तो मुनाफा कमाकर अपनी जेबें भरेंगे और पैसा सीधा कैलिफोर्निया पहुंचेगा।
लेकिन मोदी विरोध की पट्टी आंखों पर ऐसी बंधी है की अपने देश का कारोबारी दुश्मन लगने लगा और सात समंदर पार बैठा एक अमेरिकी रईस सगा भाई नज़र आने लगा!
1999 कारगिल युद्ध में अमेरिका का धोखा हमें भूलना नहीं चाहिए, अब ‘Starlink’ के बहाने भारत पर कंट्रोल करना चाहता है Elon Musk
अब जरा इतिहास के उस पन्ने को पलटते हैं जिसे हमें कभी नहीं भूलना चाहिए- 1999 का कारगिल युद्ध। उस वक्त पाकिस्तानी घुसपैठिए हमारी चोटियों पर छिपकर बैठे थे।
हमारे फौजी भाई नीचे से लड़ रहे थे। तब भारत ने अमेरिका से GPS (नेविगेशन) का डेटा मांगा था ताकि दुश्मनों को सटीक निशाना बनाया जा सके।
लेकिन अमेरिका ने ऐन मौके पर हमें धोखा दिया और डेटा देने से साफ मना कर दिया। उस विदेशी गद्दारी की वजह से हमारे कई जवान शहीद हुए।
आज उसी अमेरिका की एक प्राइवेट कंपनी को हम अपने देश का पूरा कम्युनिकेशन सिस्टम कैसे सौंप दें? क्या हम कारगिल भूल गए?
अब आते हैं सबसे खतरनाक बात पर- ‘किल स्विच’ (Kill Switch)। अगर कल को मस्क की ‘स्टारलिंक’ को हमने अपने देश का इंटरनेट सौंप दिया, तो इसका रिमोट कंट्रोल अमेरिका में मस्क के हाथ में होगा।
अगर कभी भारत और अमेरिका के बीच कोई विवाद हुआ, तो वो एक बटन दबाएगा और पूरे भारत का इंटरनेट ठप्प! रूस-यूक्रेन युद्ध में मस्क ये कर चुका है।
उसने अपनी मर्जी से यूक्रेन का इंटरनेट काट दिया था, जिससे उनके ड्रोन बेकार हो गए। क्या हम भारत की सुरक्षा किसी विदेशी के मूड पर छोड़ सकते हैं? बिल्कुल नहीं!
आजकल लोग टाटा, अंबानी या अडानी को गालियां देने में बड़ा मज़ा लेते हैं। लेकिन असली सच ये है की ये हमारे अपने देश के लोग हैं।
जब Jio कोई टावर लगाता है या अडानी कोई पोर्ट बनाता है, तो उसका ठेका हमारी देसी कंपनियों को मिलता है। हमारे मज़दूरों को काम मिलता है, इंजीनियरों को नौकरी मिलती है। पैसा हमारे ही देश में घूमता है।
लेकिन अगर मस्क जैसी विदेशी कंपनी भारत आई, तो वो सीधा आसमान से इंटरनेट देगी। ना भारत में कोई इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगी, ना कोई बड़ा रोज़गार देगी। वो सिर्फ हमारा पैसा डॉलर में बदलेगी और अमेरिका ले जाएगी।
हम कोई बनाना रिपब्लिक नहीं जो विदेशियों के दबाव में झुक जाएं, मस्क और राहुल के दांव पर सरकार का करारा प्रहार
भारत के टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पूरे ड्रामे पर जो जवाब दिया, उसने मस्क और उनके देशी पैरोकारों की सारी गलतफहमी एक झटके में दूर कर दी।
सरकार ने साफ कर दिया की “भारत कोई बनाना रिपब्लिक (Banana Republic) नहीं है!” कोई भी विदेशी अरबपति चाहे दुनिया का सबसे अमीर आदमी ही क्यों न हो, वो सोशल मीडिया पर रोना रोकर भारत के नियमों को डिक्टेट नहीं कर सकता।
सिंधिया ने दो टूक शब्दों में बता दिया की चाहे रिलायंस जियो हो, एयरटेल हो या एलन मस्क की स्टारलिंक… जब तक 140 करोड़ भारतीयों के डेटा की सुरक्षा और नेशनल सिक्योरिटी की एक-एक शर्त पूरी नहीं होगी, तब तक किसी को भी कमर्शियल सर्विस शुरू करने की हरी झंडी नहीं मिलेगी।
स्पेक्ट्रम देश की संप्रभु संपत्ति है, कोई खैरात नहीं जो किसी के एक ट्वीट पर थाली में सजाकर दे दी जाए।
एक तरफ भारत सरकार अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी करके एक ग्लोबल सुपरपावर की तरह बात कर रही है, अपने देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर अड़ी हुई है…
और दूसरी तरफ देश का मुख्य विपक्ष एक विदेशी रईस के सामने घुटने टेके बैठा है, उसकी झल्लाहट को अपनी राजनीति का हथियार बना रहा है।
मोदी का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन कम से कम उस देश के सम्मान का तो सौदा मत कीजिए जिसकी संसद में बैठकर आप शपथ लेते हैं!
