जंतर-मंतर पर झूठे छेड़छाड़ केस से दिल्ली पुलिस के ACP को बदनाम करने चला था CJP इकोसिस्टम, अब पलटवार में अफसर ने पूरे कॉकरोच गैंग पर SC/ST Act का हथौड़ा मारकर निकाल दी सारी हेकड़ी

अक्सर हमारे बड़े-बुज़ुर्ग कह गए हैं की जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, एक दिन वो खुद उसी गड्ढे में औंधे मुँह गिरता है। लेकिन कॉकरोचों के इकोसिस्टम ने शायद यह कहावत कभी सुनी नहीं थी।

इन्हें लगता था की इनके हाथ में एक स्मार्टफोन, एक माइक और एक ट्विटर (X) अकाउंट आ गया है, तो ये पूरी दिल्ली पुलिस और सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचा लेंगे।

इन लोगों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक ईमानदार और कड़क पुलिस अधिकारी को छेड़छाड़ के झूठे केस में फंसाने का पूरा चक्रव्यूह रचा।

पूरी स्क्रिप्ट तैयार थी की कैसे पुलिस को बैकफुट पर धकेलना है। लेकिन इस ‘कॉकरोच गिरोह’ को ये अंदाज़ा ही नहीं था की जिस अफसर से ये पंगा ले रहे हैं, वो डिफेंसिव होकर माफ़ी मांगने वालों में से नहीं है।

उस अफसर ने ‘SC/ST एक्ट’ और नए कानूनों का ऐसा हथौड़ा मारा है की कल तक लोकतंत्र को बचाने का नाटक करने वाले ये लोग वकीलों के केबिन में छिपने की जगह ढूंढ रहे हैं।

चलिए आपको इस पूरी गंदी साज़िश और उसके भयंकर अंजाम की कहानी बताते हैं।

कॉकरोचों का जंतर-मंतर पर वो ड्रामा और विक्टिम कार्ड की आड़ में रची गई एक ईमानदार अफसर के चरित्र हनन की स्क्रिप्ट

इस पूरी नौटंकी की शुरुआत होती है 3 अक्टूबर 2026 को। जगह थी दिल्ली का जंतर-मंतर, जिसे वैसे तो लोकतंत्र में आवाज़ उठाने की जगह माना जाता है, लेकिन आजकल ये कॉकरोचों का परमानेंट अड्डा बन चुका है।

वहां मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP (Cockroach Janta Party) का एक विरोध प्रदर्शन चल रहा था।

जाहिर सी बात है, दिल्ली के दिल में प्रदर्शन होगा तो लॉ एंड ऑर्डर संभालने के लिए पुलिस तो वहां मौजूद होगी ही। इसी ड्यूटी पर तैनात थे दिल्ली पुलिस के बेहद तेज़-तर्रार अफसर, ACP विवेक भगत।

अब इस इकोसिस्टम की पुरानी आदत है की इन्हें पुलिस से हमेशा खुन्नस रहती है। इन्होंने देखा की ड्यूटी पर एक कड़क अफसर खड़ा है जो इन्हें कानून तोड़ने नहीं दे रहा, तो इन्होंने वहीं के वहीं उसे फंसाने का प्लान बना लिया।

प्लान बिल्कुल इनकी पुरानी ‘क्लासिक प्लेबुक’ से निकला था। प्रदर्शन के बीच अचानक से एक ‘कथित’ महिला पत्रकार (जिसका नाम रोजी बताया जा रहा है) सामने आती है और मीडिया के कैमरों के सामने भारी रोना-धोना शुरू कर देती है।

वो आरोप लगाती है की ACP विवेक भगत ने उसे जानबूझकर गलत तरीके से छुआ है, उसके साथ छेड़छाड़ की है।

इन्होंने सोचा की महिला का रोता हुआ चेहरा देखकर पब्लिक इमोशनल हो जाएगी और अफसर डर के मारे सस्पेंड होने से बचने के लिए इनसे गिड़गिड़ाने लगेगा।

10वीं फेल पत्रकार और डीपफेक AI वीडियो का वो खेल जिसने खोल दी इस पूरे सिंडिकेट की पोल

जब सिर्फ रोने-धोने वाले आरोपों से बात नहीं बनी और दिल्ली पुलिस ने इनकी नौटंकी को सीरियसली नहीं लिया, तो इस सिंडिकेट ने अपनी साजिश को ‘डिजिटल’ लेवल पर अपग्रेड कर दिया।

इन्होंने तकनीक का वो गंदा इस्तेमाल किया जिसे देखकर किसी का भी दिमाग सुन्न पड़ जाए।

इस इकोसिस्टम ने AI (Artificial Intelligence) का सहारा लिया। इंटरनेट पर अचानक से एक वीडियो वायरल किया गया, जिसमें किसी और पुलिसवाले के चेहरे पर डीपफेक (Deepfake) तकनीक के जरिए ACP विवेक भगत का चेहरा मॉर्फ (Morph) करके चिपका दिया गया।

वीडियो को ऐसे एडिट किया गया ताकि देखने वालों को लगे की हां, सच में ACP साहब किसी महिला के साथ बदसलूकी कर रहे हैं।

लेकिन ये भूल गए की आज की पुलिस 1990 वाली पुलिस नहीं है जो सिर्फ डंडे चलाना जानती हो। दिल्ली पुलिस की ‘साइबर सेल’ ने जब इस वीडियो की चीरफाड़ की, तो कुछ ही घंटों में दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।

साबित हो गया की वीडियो 100% फेक है और इसे जानबूझकर एक अफसर की इमेज खराब करने के लिए बनाया गया है।

पुलिस ने तुरंत वीडियो के डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा किया और 5 अक्टूबर को हरियाणा के मेवात-पलवल इलाके में दबिश दे दी।

वहां से पुलिस ने जिस ‘मास्टरमाइंड’ को दबोचा, उसकी असलियत सुनकर आपको हंसी भी आएगी और इस इकोसिस्टम के लेवल पर तरस भी। दिल्ली पुलिस ने 24 साल के एक लड़के को गिरफ्तार किया, जिसका नाम है नदीम अहमद अमीन।

ये भाई साहब सोशल मीडिया पर खुद को ‘स्वतंत्र पत्रकार’ बताते थे और ‘न्यूज़ आईना टुडे’ (News Aina Today) नाम का कोई पोर्टल चलाते थे।

लेकिन जब पुलिस ने इसकी कुंडली खंगाली, तो पता चला की ये खुद को पत्रकार कहने वाला लड़का असल में 10वीं फेल है!

आप क्रोनोलॉजी समझिए… एक 10वीं फेल लड़के को एक बड़ा वामपंथी गिरोह इस्तेमाल कर रहा था ताकि एक UPSC क्लियर करके आए हुए सीनियर पुलिस अफसर की ज़िंदगी और करियर को डीपफेक के ज़रिए बर्बाद किया जा सके।

इस 10वीं फेल पत्रकार की गिरफ्तारी ने इस पूरे नेक्सस की परतें उधेड़ कर रख दीं। अब दिल्ली पुलिस के हाथ वो धागा लग चुका था, जिसे खींचने पर इस पूरे कॉकरोच गिरोह की असलियत बाहर आने वाली थी।

जब शिकार ने ही कर दिया शिकार, ACP विवेक भगत ने उल्टा कॉकरोचों पर ही ठोक दिया SC/ST Act

इस इकोसिस्टम की सबसे बड़ी गलतफहमी यही थीकीकि उन्होंने पुलिस को एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ समझ लिया था। इन्हें लगा था की जैसे ही महिला पत्रकार कैमरे के सामने आंसू बहाएगी और इंटरनेट पर डीपफेक वीडियो वायरल होगा, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच जाएगा।

इन्हें पूरी उम्मीद थी की आला अफसर दबाव में आकर ACP विवेक भगत को सस्पेंड कर देंगे या खुद ACP साहब अपना करियर बचाने के लिए इनके आगे हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने आ जाएंगे।

इन्हें शायद इस बात का अंदाज़ा ही नहीं था की ACP विवेक भगत ‘मेघवाल’ समाज (SC कम्युनिटी) से आते हैं। जब एक ईमानदार और अपनी मेहनत से UPSC जैसी परीक्षा निकालकर आए अफसर ने देखा की चंद टूलकिट वाले मिलकर उसकी साफ़-सुथरी छवि और वर्दी को मिट्टी में मिलाने पर तुले हैं, तो उन्होंने डिफेंसिव होने के बजाय सीधा और सटीक पलटवार किया।

14 अक्टूबर 2026 की वो तारीख इस पूरे गिरोह को अब शायद ही कभी भूलेगी। ACP विवेक भगत की तरफ से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में एक FIR दर्ज कराई गई।

अपनी शिकायत में ACP ने बहुत साफ शब्दों में बताया की कैसे जंतर-मंतर पर ड्यूटी के दौरान इस गैंग ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें घेरा।

जब वो कानूनी तौर पर अपना काम कर रहे थे, तो इन लोगों ने सरेआम उन्हें जातिसूचक गालियां दीं, उन्हें अपमानित किया और एक दलित अफसर के पद और उसकी गरिमा पर भद्दे तंज कसे।

जैसे ही ये FIR दर्ज़ हुई, इस ‘कॉकरोच गिरोह’ को समझ में आ गया की अब खेल उनके हाथ से निकल चुका है।

क्योंकि इस बार मामला सिर्फ पुलिस महकमे का नहीं था, इसमें नए कानून यानी ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) और सबसे खतरनाक SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की एंट्री हो चुकी थी।

पुलिस ने इन पर BNS की धारा 221 लगाई है, यानी एक पब्लिक सर्वेंट (लोक सेवक) के सरकारी काम में जानबूझकर बाधा डालना।

इसके बाद धारा 356(2) ठोक दी गई, जिसका सीधा मतलब है मानहानि (Defamation) और किसी की इज्जत को साजिशन उछालना।

और सबसे तगड़ा पेंच फंसा है BNS की धारा 3(5) में, जो यह बताती है की यह किसी एक इंसान की गलती नहीं थी, बल्कि एक से ज्यादा लोगों ने ‘कॉमन इंटेंशन’ (साझी साजिश) रचकर इस पूरे अपराध को अंजाम दिया है।

अभिजीत दीपके से लेकर सौरभ दास तक, खाकी के बिछाए कानूनी जाल में लपेटे गए CJP इकोसिस्टम के बड़े मोहरे

अब ज़रा बात कर लेते हैं उन चेहरों की, जो कल तक सोशल मीडिया पर खुद को ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ और सच्चाई का मसीहा बता रहे थे।

जब दिल्ली पुलिस ने अपनी टेबल पर इस पूरे नेक्सस का चार्ट बनाया, तो उसमें सिर्फ वो महिला पत्रकार (रोजी) या 10वीं फेल नदीम ही नहीं फंसा, बल्कि इकोसिस्टम के कई ‘महारथियों’ के नाम भी पुलिस की फाइलों में एक संगठित गिरोह की तरह दर्ज हो गए।

इस FIR में उन तमाम लोगों को नामज़द किया गया है जिन्होंने इस पूरे ड्रामे की पटकथा लिखी थी।

इसमें गजेन्द्र सिंह का नाम है। इसमें CJP के वो तमाम जाने-माने चेहरे शामिल हैं जो दिन-रात Twitter पर ज्ञान बांटते रहते हैं- अभिजीत दीपके, सौरभ दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह।

अब ये सारे बड़े-बड़े नाम पुलिस के रडार पर हैं और दिल्ली पुलिस बाकायदा एक-एक की कुंडली खंगाल रही है।

सुप्रीम कोर्ट में जाकर राहत का रोना और दिल्ली पुलिस की साइबर सेल के रडार पर टूलकिट की पूरी फंडिंग

जब इस गिरोह को लगा की अब तो सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी, तो इनकी पुरानी आदत फिर सामने आ गई- सुप्रीम कोर्ट के चक्कर काटना।

आज, यानी 15 अक्टूबर की सबसे ताज़ा अपडेट यही है की इस गैंग के महंगे वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर जमकर रोना-धोना मचाया। जिसके बाद उस कथित महिला पत्रकार को फौरी तौर पर ‘अंतरिम राहत’ (Interim Protection) मिल गई है।

अब इकोसिस्टम वाले इस अंतरिम राहत को अपनी ‘जीत’ बताने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन भाई, अंतरिम राहत का मतलब केस ख़त्म होना नहीं होता, यह तो बस एक टेंपरेरी बैंड-एड (Band-aid) है।

सच तो ये है की FIR अभी भी पूरी तरह से ज़िंदा है, धाराएं अभी भी वही हैं और केस पूरी स्पीड से आगे बढ़ रहा है।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल अब इस मामले की उस गहराई तक पहुंच रही है, जहां जाने से इस पूरे सिंडिकेट को डर लगता है- ‘फंडिंग’।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है की आखिर उस 10वीं फेल नदीम को वो हाई-टेक AI वीडियो बनाने के पैसे किसने दिए?

जंतर-मंतर पर ये जो पूरा टूलकिट एक्टिवेट किया गया था, इसके पीछे का असली मास्टरमाइंड कौन है और पैसा किस अकाउंट से आ रहा था?

अब बस उस दिन का इंतज़ार है, जब अदालत में इन टूलकिट वालों के चेहरों से नकाब हमेशा के लिए नोच लिया जाएगा।

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