मुगलों की सत्ता को चुनौती देने वाले जाट योद्धा महाराजा सूरजमल की वीरता की कहानी
जाट चेतना का उदय और महाराजा सूरजमल का प्रारंभिक जीवन भारतीय इतिहास में 18वीं शताब्दी वह दौर था जब मुगल साम्राज्य ऊपर से विशाल लेकिन भीतर से खोखला हो चुका था। दिल्ली की सत्ता कमजोर थी, सूबेदार निरंकुश हो चुके थे और हिंदू समाज—विशेषकर ग्रामीण भारत—लगातार अत्याचार, भारी कर और धार्मिक अपमान झेल रहा था। […]
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