Blog

अकबर की पचास हज़ार की सेना पर भारी पड़ी इस हिन्दू शेरनी की मुट्ठी भर टुकड़ी, 16 सालों तक मुग़लों को लोहे के चने चबवाने वाली गोंडवाना की महारानी ‘दुर्गावती’ को 502वीं जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि

आज 5 अक्टूबर है। वही पावन दिन जब 502 साल पहले इस धरती पर एक ऐसी हिन्दू शेरनी ने जन्म लिया था, जिसने अपनी आज़ादी और अपने स्वाभिमान के लिए मुगलों की पचास हज़ार की तोपखाना लिए खड़ी फौज के दाँत खट्टे कर दिए थे। हम बात कर रहे हैं गोंडवाना की अजेय महारानी, वीरांगना […]

अकबर की पचास हज़ार की सेना पर भारी पड़ी इस हिन्दू शेरनी की मुट्ठी भर टुकड़ी, 16 सालों तक मुग़लों को लोहे के चने चबवाने वाली गोंडवाना की महारानी ‘दुर्गावती’ को 502वीं जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि Read More »

पूर्ण बहुमत के बावजूद सरदार पटेल से छीन ली गई थी सत्ता की चाबी और ‘जीरो’ समर्थन वाले नेहरू बने प्रधानमंत्री, आज दूसरों को ‘वोट चोर’ कहने वाली कांग्रेस के इतिहास में दर्ज सत्ता हथियाने का सबसे बड़ा खेल

आजकल टीवी खोलो या सोशल मीडिया देखो, तो आपको एक बहुत ही सेट पैटर्न नज़र आएगा। जैसे ही कहीं चुनाव के नतीजे आते हैं और एक खास पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ता है, तो झट से एक रटा-रटाया टूलकिट एक्टिव हो जाता है। पत्रकारों को बुलाकर कैमरे के सामने चिल्लाया जाता है की

पूर्ण बहुमत के बावजूद सरदार पटेल से छीन ली गई थी सत्ता की चाबी और ‘जीरो’ समर्थन वाले नेहरू बने प्रधानमंत्री, आज दूसरों को ‘वोट चोर’ कहने वाली कांग्रेस के इतिहास में दर्ज सत्ता हथियाने का सबसे बड़ा खेल Read More »

पूरी दुनिया कर रही आसमान में जिहादी साज़िश नाकाम करने वाले ‘कैप्टन स्मित’ की तारीफ, लेकिन यहूदियों को बचाने की वजह से कांग्रेस ने फेर ली आंखें, क्या विपक्ष के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण ही ‘असली राष्ट्रनीति’

हमारे देश की राजनीति का भी ना एक अलग ही मिज़ाज है। अगर गाज़ा या फीलस्तीन में किसी को एक खरोच भी आ जाये, तो हमारे देश की विपक्षी राजनीतिक पार्टियां आसमान सर पे उठा लेती हैं, ट्वीट्स पे ट्वीट्स (Tweets) छपने शुरू हो जाते हैं.. दिन रात हैशटैग ट्रेंड होने शुरू हो जाते हैं।

पूरी दुनिया कर रही आसमान में जिहादी साज़िश नाकाम करने वाले ‘कैप्टन स्मित’ की तारीफ, लेकिन यहूदियों को बचाने की वजह से कांग्रेस ने फेर ली आंखें, क्या विपक्ष के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण ही ‘असली राष्ट्रनीति’ Read More »

2 अक्टूबर 1994 की वो काली रात जब उत्तराखंड निर्माण के लिए राजघाट पर जुटने वाले थे हजारों आंदोलनकारी, लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही मुलायम सिंह ने उन निहत्थे मासूमों पर चलवा दीं अंधाधुंध गोलियां

कल 2 अक्टूबर था। देश भर में बापू के भजन चल रहे थे और हर तरफ ‘अहिंसा परमो धर्म:’ के नारे गूंज रहे थे। लेकिन ज़रा एक पल के लिए रुकिए और उत्तराखंड के किसी भी पहाड़ी इंसान की आंखों में झांक कर देखिए। आपको वहां 2 अक्टूबर के दिन कोई जश्न नहीं, बल्कि एक

2 अक्टूबर 1994 की वो काली रात जब उत्तराखंड निर्माण के लिए राजघाट पर जुटने वाले थे हजारों आंदोलनकारी, लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही मुलायम सिंह ने उन निहत्थे मासूमों पर चलवा दीं अंधाधुंध गोलियां Read More »

जब मौलवी ने करी डिंपल यादव के कपड़ों पर अभद्र टिपण्णी, तो अपनी पत्नी के लिए आवाज़ उठाने के बजाये चुप रहे अखिलेश, जो घर की इज़्ज़त न बचा सका वो UP की बेटियों की कैसे करेगा हिफाज़त

उत्तर प्रदेश की राजनीति भी बड़ी अजीब है! रैलियों के मंच पर जब नेताजी चढ़ते हैं, तो माइक हाथ में लेकर ऐसी दहाड़ मारते हैं की लगता है जैसे इनसे बड़ा कोई बाहुबली है ही नहीं। खुद को ‘पीडीए’ (PDA) का सबसे बड़ा रक्षक बताना, महिला सुरक्षा की बड़ी-बड़ी कसमें खाना और चुनाव आते ही

जब मौलवी ने करी डिंपल यादव के कपड़ों पर अभद्र टिपण्णी, तो अपनी पत्नी के लिए आवाज़ उठाने के बजाये चुप रहे अखिलेश, जो घर की इज़्ज़त न बचा सका वो UP की बेटियों की कैसे करेगा हिफाज़त Read More »

देश विभाजन और हिन्दुओं के कत्ल पर खामोशी बनी गोडसे के सीने की आग, लेकिन एक वध के बदले 5000 ब्राह्मणों का हुआ भीषण नरसंहार, शांति का उपदेश देने वालों ने दफना दिया अपना ये खूनी पाप

आज 2 अक्टूबर है। सुबह से ही आपके टीवी पर बापू का चश्मा, सूत की माला और चरखे की तस्वीरें घूम रही होंगी। राजघाट पर वीआईपी गाड़ियों का काफिला पहुंचा होगा, सफेद खादी पहने नेताओं ने फूल चढ़ाए होंगे और बड़ी-बड़ी डिबेट्स में शांति के सफेद कबूतर उड़ाए जा रहे होंगे। हर साल की तरह

देश विभाजन और हिन्दुओं के कत्ल पर खामोशी बनी गोडसे के सीने की आग, लेकिन एक वध के बदले 5000 ब्राह्मणों का हुआ भीषण नरसंहार, शांति का उपदेश देने वालों ने दफना दिया अपना ये खूनी पाप Read More »

जिनके एक इशारे पर पूरे हिंदुस्तान ने छोड़ दिया था एक वक़्त का खाना, श्वेत और हरित क्रांति से देश की तकदीर बदलने वाले पूर्व प्रधानमंत्री ‘लाल बहादुर शास्त्री’ जी को 122वीं जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि

आज 2 अक्टूबर है… और आज मिट्टी के उस लाल की 122वीं जयंती है, जिसके एहसानों का कर्ज़ ये देश शायद सात जन्मों तक नहीं चुका सकता। हम बात कर रहे हैं हमारे पूर्व प्रधानमंत्री ‘लाल बहादुर शास्त्री’ जी की। एक ऐसा इंसान जो दिल्ली के एलीट (Elite) घराने से निकलकर पीएम की कुर्सी पर

जिनके एक इशारे पर पूरे हिंदुस्तान ने छोड़ दिया था एक वक़्त का खाना, श्वेत और हरित क्रांति से देश की तकदीर बदलने वाले पूर्व प्रधानमंत्री ‘लाल बहादुर शास्त्री’ जी को 122वीं जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि Read More »

अगर मुसलमानों को हिन्दुओं के गरबा में इतनी ही दिलचस्पी, तो अकेले नहीं अपनी बहन-बेटियों को भी लाएं साथ, BJP MLA रामेश्वर शर्मा की वो ‘गुगली’ जिससे चारो खाने चित हुए ओवैसी और सनातन विरोधी दल

सच कहूं तो आजकल सेक्युलरिज्म के नाम पर हमारे सनातन धर्म के पवित्र त्योहारों का जो मज़ाक बनाया जा रहा है, उसे देखकर किसी भी सच्चे हिन्दू का खून खौलना लाज़मी है। नवरात्रि कोई साधारण त्योहार नहीं है। नौ दिनों तक उपवास रखना, नंगे पैर रहना, ज़मीन पर सोना और पूरी श्रद्धा के साथ माँ

अगर मुसलमानों को हिन्दुओं के गरबा में इतनी ही दिलचस्पी, तो अकेले नहीं अपनी बहन-बेटियों को भी लाएं साथ, BJP MLA रामेश्वर शर्मा की वो ‘गुगली’ जिससे चारो खाने चित हुए ओवैसी और सनातन विरोधी दल Read More »

शादी के बाद भी ताउम्र ब्रह्मचर्य निभाते रहे, आपातकाल की तानाशाही के खिलाफ आवाज़ उठाकर लोकतंत्र बचाया, लेकिन अनजाने में जातिवादी नेताओं की फौज खड़ी कर जाने वाले लोकनायक ‘जयप्रकाश नारायण’

इतिहास में कुछ नेताओं की कहानी बड़ी अजीब होती है। वो जो सोचते हैं, जो सपना देखते हैं, हकीकत में उसका बिल्कुल उल्टा हो जाता है। जयप्रकाश नारायण यानी ‘जेपी’ भी एक ऐसे ही फक्कड़ टाइप इंसान थे। जेपी भारतीय राजनीति के वो संत थे जिन्हें ना तो कभी कुर्सी की भूख रही और ना

शादी के बाद भी ताउम्र ब्रह्मचर्य निभाते रहे, आपातकाल की तानाशाही के खिलाफ आवाज़ उठाकर लोकतंत्र बचाया, लेकिन अनजाने में जातिवादी नेताओं की फौज खड़ी कर जाने वाले लोकनायक ‘जयप्रकाश नारायण’ Read More »

जिसकी राष्ट्रभक्ति से काँपकर अंग्रेजों ने दे दिया उन्हें ‘देश-निकाला’, ईसाई धर्मांतरण पर रोक लगाकर ‘ओम जय जगदीश हरे’ रचने वाले सनातन रक्षक और स्वतंत्रता सेनानी ‘श्रद्धाराम शर्मा’ जी को जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि

सुबह-सुबह जब आप उठते हैं, तो आस-पास के किसी मंदिर से या शायद आपके अपने ही घर से एक बहुत ही जानी-पहचानी सी आवाज़ आपके कानों में जरूर पड़ती होगी… “ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे..” बचपन से लेकर आज तक, दिवाली की पूजा हो, सत्यनारायण भगवान की कथा हो, या कोई भी

जिसकी राष्ट्रभक्ति से काँपकर अंग्रेजों ने दे दिया उन्हें ‘देश-निकाला’, ईसाई धर्मांतरण पर रोक लगाकर ‘ओम जय जगदीश हरे’ रचने वाले सनातन रक्षक और स्वतंत्रता सेनानी ‘श्रद्धाराम शर्मा’ जी को जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि Read More »

Scroll to Top