5 जनवरी: क्रांतिकारी बारीन्द्र कुमार घोष — यातनाओं से नहीं टूटा साहस, अंडमान की जेल में भी गूंजा ‘वंदे मातरम्’
भारत की आज़ादी की कहानी जितनी गौरवशाली है, उतनी ही अधूरी भी। अधूरी इसलिए, क्योंकि आज़ादी के संघर्ष में जिन असली क्रांतिकारियों ने अपना पूरा जीवन, सुख-चैन और भविष्य दांव पर लगा दिया, वे इतिहास के हाशिए पर चले गए। 5 जनवरी ऐसी ही एक तारीख़ है, जो हमें बारीन्द्र कुमार घोष की याद दिलाती […]









