दशकों तक राष्ट्रवादियों और संघ के निस्वार्थ कार्यकर्ताओं ने अपना खून-पसीना एक किया, लाठियां खाईं, सिर्फ इसलिए ताकि इस देश को कांग्रेस और उसके भ्रष्ट सहयोगियों की लूट-खसोट से मुक्ति दिलाई जा सके।
हमने और आपने 2014 और 2019 में दिन-रात एक करके, अपनी जेब से चंदा देकर भाजपा सरकार को सिर्फ इसलिए तो वोट नहीं दिया था की एक दिन हमारी ही चुनी हुई पार्टी उन भ्रष्टाचारियों और दाऊद इब्राहिम के गुर्गों से डील करने वालों के आगे नतमस्तक हो जाएगी।
जी हाँ, आज हम बात कर रहे हैं दाऊद इब्राहिम के करीबी, और देश के सबसे बड़े घोटालेबाज़ों में से एक – प्रफुल्ल मनोहरभाई पटेल की।
भाजपा दाग धोने वाली नई ज़माने की वाशिंग मशीन, Episode 3: प्रफुल्ल मनोहरभाई पटेल (राज्य सभा मंत्री)
भाजपा की ‘अब हर घोटालेबाज़ बनेगा राष्ट्रवादी’ योजना
राजनीति में वादे टूटते ही हैं, ये हम भी समझते हैं। लेकिन जिस बेशर्मी से यूपीए (UPA) काल के सबसे बड़े खिलाड़ी- प्रफुल्ल मनोहरभाई पटेल- को BJP ने अपनी जादुई ‘वाशिंग मशीन’ में डालकर रातों-रात एक ‘राष्ट्रवादी संत’ बना दिया गया, वो हम जैसे करोड़ों राष्ट्रवादियों के मुंह पर सीधा तमाचा है। ये वो छलावा है जिसे बर्दाश्त करना अपने ही ज़मीर को मारने जैसा है।
जिस प्रफुल्ल पटेल ने एयर इंडिया को नोच खाया, उसी को भाजपा ने सिर पे बिठाया
अब बात करते हैं उस एयर इंडिया की, जिसे कभी इस देश का गौरव माना जाता था, जिसका ‘महाराजा’ लोगो पूरी दुनिया में हमारी पहचान था। ज़रा 2004 से 2011 का वो यूपीए वाला अंधकारमय दौर याद कीजिए।
प्रफुल्ल पटेल उस वक्त नागरिक उड्डयन मंत्री हुआ करते थे। और भाई साहब, उनके राज में राष्ट्रीय संपत्ति की लूट का ऐसा नंगा नाच हुआ की अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाएं। इन्होंने बिना किसी विज़न के, या यूं कहें की एक सोची-समझी साज़िश के तहत, मुनाफे में चल रही एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का मर्जर कर डाला।
दो अलग-अलग वर्क कल्चर वाली कंपनियों को जबरन मिलाने का ये फैसला एक ऐसा जहर साबित हुआ जिसने एक ही झटके में पूरी एविएशन इंडस्ट्री का कबाड़ा कर दिया।
हद तो तब हो गई जब इनके मंत्रालय ने बिना किसी ज़रूरत के 111 नए विमान (Airbus और Boeing) खरीदने का 70,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम ऑर्डर दे दिया। अरे भाई! जिस कंपनी की कमाई चवन्नी भर नहीं है, उस पर 70 हज़ार करोड़ का कर्ज़ लादने का क्या तुक था?
लेकिन इनका पेट इतने से कहां भरने वाला था। 2006 में धड़ाधड़ विदेशी विमानों को 5-5 साल के पट्टे (लीज) पर लिया जाने लगा। जब जुलाई 2007 से सरकार के अपने खुद के खरीदे हुए नए जहाज आने ही वाले थे, तो इन महंगे विदेशी विमानों को इतने भारी-भरकम किराये पर क्यों लिया गया? वो भी तब, जब एयर इंडिया के पास इन जहाजों को उड़ाने के लिए पायलट तक नहीं थे!
नतीजा क्या हुआ? ये महंगे-महंगे जहाज सालों-साल ज़मीन पर खड़े-खड़े बस धूल फांकते रहे। कैग (CAG) की रिपोर्ट तो आज भी चीख-चीख कर कह रही है की 2007 से 2009 के बीच इस ‘दिमागी खेल’ के चलते सरकारी खजाने को पूरे 840 करोड़ रुपये का सीधा-सीधा चूना लगा।
ये पैसा प्रफुल्ल पटेल या कांग्रेस के खजाने का नहीं था; ये उस आम करदाता की गाढ़ी कमाई थी, जो टूटी सड़कों और महंगाई से रोज़ जूझता है।
विदेशी एयरलाइंस से घूस खाने वाले प्रफुल्ल पटेल को भाजपा का बेशर्म संरक्षण
असल खेल तो विदेशी एयरलाइंस के साथ चल रहा था। एयर इंडिया के जो सबसे मुनाफे वाले इंटरनेशनल रूट्स थे, उन्हें विदेशी कंपनियों (जैसे एमिरेट्स, एयर अरबिया और कतर एयरवेज) को एकदम थाली में सजाकर दे दिया गया।
मतलब, अपनी कंपनी को घाटे में धकेलो और विदेशियों की जेब भरो! क्यों दे दिया गया भाई? दाल में कुछ तो काला था। बाद में जब जांच हुई तो पता चला की दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी की पूरी दाल ही काली है!
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2019 में खुद कोर्ट में खड़े होकर ये भयंकर सच उगला था की विदेशी एयरलाइंस से किकबैक (यानी मोटी घूस) लेकर ये सारी सेटिंग करवाने वाला वो कॉर्पोरेट दलाल ‘दीपक तलवार’ कोई और नहीं, बल्कि तत्कालीन मंत्री प्रफुल्ल पटेल का “पक्का यार” था।
दीपक तलवार को बाद में दुबई से डिपोर्ट करके भारत लाया गया था। सोचिए, इधर देश का खजाना लुट रहा था, और उधर सत्ता के बंद कमरों में दलालों के साथ मिलकर जश्न मन रहा था।
दाऊद के गुर्गे इकबाल मिर्ची से प्रफुल्ल पटेल की करोड़ों की डील
चलिए, एक पल के लिए मान लेते हैं की राजनीति में पैसे की हेराफेरी आम बात है। हम हिंदुस्तानियों को तो इसकी आदत सी पड़ गई है। लेकिन जो इंसान दाऊद इब्राहिम के करीबियों के साथ धंधा करे, उसे आप क्या कहेंगे? एक सच्चा राष्ट्रवादी तो उसे गद्दार ही मानेगा न!
प्रफुल्ल पटेल और उनके परिवार की एक कंपनी है- ‘मिलेनियम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड’। 2006-07 के आसपास इस कंपनी ने मुंबई के सबसे पॉश वर्ली इलाके में ‘सीजे हाउस’ नाम की एक आलीशान कमर्शियल बिल्डिंग तान दी।
अब ज़रा दिल थाम कर सुनिए। ED की जांच में जो खौफनाक सच सामने आया, वो किसी के भी होश उड़ा दे। इस पॉश बिल्डिंग की तीसरी और चौथी मंजिल- जो की लगभग 14,000 स्क्वायर फीट की प्राइम प्रॉपर्टी है- उसका मालिकाना हक बाकायदा रजिस्टर्ड डीड के ज़रिए सीधे इकबाल मिर्ची की पत्नी, हजरा मेमन के नाम ट्रांसफर किया गया!
कौन था ये इकबाल मिर्ची? ये वही इकबाल मिर्ची था, जो 1993 के मुंबई बम धमाकों के मास्टरमाइंड, ग्लोबल आतंकी दाऊद इब्राहिम का दायां हाथ और उसका सबसे खास ड्रग लॉर्ड था।
ड्रग्स, वसूली, हत्या- ऐसा कौन सा जुर्म था जो इस सिंडिकेट ने नहीं किया? जांच एजेंसियों ने कोर्ट में साफ-साफ कहा की जिस जमीन पर ये सीजे हाउस खड़ा किया गया, वो दरअसल इकबाल मिर्ची की ही थी और इसे ड्रग्स और वसूली के काले पैसों से खरीदा गया था।
जुलाई 2023: सत्ता की मलाई के लिए भाजपा ने प्रफुल्ल पटेल जैसे नेताओं को अपनी वाशिंग मशीन में धो डाला
लेकिन सबसे बड़ा और बेशर्म खेल तो जुलाई 2023 में हुआ। जिस भाजपा ने 2014 के चुनावों से पहले अपने “आरोप पत्र” में प्रफुल्ल पटेल के इसी एविएशन घोटाले को सबसे ऊपर रखकर वोट बटोरे थे, जिस भाजपा के नेता टीवी चैनलों पर चीख-चीख कर इन्हें जेल भेजने की कसमें खाते थे, उसी पार्टी ने महाराष्ट्र में सत्ता की मलाई चाटने के लिए शरद पवार की एनसीपी को तोड़ा और अजित पवार व प्रफुल्ल पटेल के गुट को खुशी-खुशी गले लगा लिया।
गजब की ‘ऑटोमैटिक वाशिंग मशीन’ है भाई! कल तक जो नेता हर टीवी डिबेट में ‘भ्रष्टाचारी नंबर वन’ कहलाता था, वो एनडीए में आते ही रातों-रात एकदम ‘पवित्र’ हो गया। क्या इसी दिन के लिए हमने वोट की लाइन में धक्के खाए थे? क्या हमारे कार्यकर्ताओं ने कांग्रेसियों की लाठियां इसीलिए खाई थीं की एक दिन उन्हीं भ्रष्ट कांग्रेसियों-एनसीपी वालों को हम अपने सिर का ताज बना लेंगे?
पार्टी जॉइन करते ही ऐसा लगा जैसे ईडी और सीबीआई वालों ने पटेल साहब की फाइलें उठाकर किसी गहरे कुएं में फेंक दी हों। जांच-वांच सब किनारे लग गई। विपक्ष वाले आज छाती पीट-पीट कर हमारी ही ‘राष्ट्रवादी’ पार्टी को ‘वाशिंग मशीन’ कहकर चिढ़ा रहे हैं और हम जैसे आम हिन्दू मुंह छुपाते फिर रहे हैं।
सच कहूं तो आज स्थिति ये है की हम चाह कर भी अपनी पार्टी का बचाव नहीं कर सकते, क्योंकि विपक्ष का ये तंज 100 टका सच साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर वामपंथी और लिबरल हमारा मज़ाक उड़ा रहे हैं, और हमारे पास जवाब देने के लिए एक शब्द नहीं है।
मार्च 2024: भाजपा में कदम रखते ही प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ सबूतों का रहस्यमयी ढंग से गायब होना
रही-सही कसर मार्च 2024 में पूरी कर दी गई। एनडीए (NDA) में आए हुए इन्हें अभी 8 महीने ही बीते थे की 19 मार्च 2024 को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने नई दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट (विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार की अदालत) में प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ एक आधिकारिक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी।
मामला वही 2017 वाली एयर इंडिया विमान पट्टे की एफआईआर (FIR) का था, जिस पर सालों से बवाल मच रहा था। सीबीआई ने कोर्ट में बड़े ही बेशर्मी से कह दिया की भाई, भ्रष्टाचार साबित करने के लिए तो हमारे पास ‘कोई सबूत ही नहीं मिला’।
अरे! सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2017 में जो केस दर्ज हुआ, सालों तक जिस केस के नाम पर रैलियों में कांग्रेस और एनसीपी को जी-भर के गालियां दी जाती थीं, उसके सारे सबूत क्या रातों-रात छूमंतर हो गए? या फिर भाजपा कार्यालय का एसी (AC) हवा ही ऐसी देता है की सारे गुनाह अपने आप भाप बनकर उड़ जाते हैं? ये कोई मामूली बात नहीं है।
ये सिर्फ एक क्लोजर रिपोर्ट नहीं है, ये देश की न्याय व्यवस्था, सीबीआई जैसी एजेंसियों की निष्पक्षता और हम करोड़ों राष्ट्रवादियों के भरोसे के मुंह पर कालिख है। जो सिस्टम कल तक पटेल के खिलाफ पन्ने दर पन्ने सबूत उछाल रहा था, वो अचानक अंधा कैसे हो गया?
क्या हिंदू सिर्फ ये प्रफुल्ल पटेल जैसों के पाप ढोने के लिए पैदा हुए हैं?
वैसे, अब जो है सो है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो आज हर एक सच्चे हिंदू और राष्ट्रवादी के मन में उठ रहा है- वो ये है की क्या हमें अब उम्र भर यही कचरा ढोने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?
जब कोई राजनीतिक पार्टी सिर्फ सत्ता में चिपके रहने के लिए अपनी ही विचारधारा की सरेआम हत्या कर दे, तो आम ज़मीनी कार्यकर्ता का मनोबल टूट कर बिखर जाता है। हम तो ‘राष्ट्र-प्रथम’ का नारा लगाने वाले लोग हैं न? जब देश का सिस्टम चलाने वाले ही खुद भ्रष्टाचारियों के सबसे बड़े संरक्षक बन जाएं, तो भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का सपना बस एक खोखला चुनावी झुनझुना ही लगेगा।
अगर आपको अपने ही गठबंधन का पेट भरने के लिए ऐसे लोगों की ज़रूरत पड़ रही है, तो फिर आप में और कांग्रेस में फर्क ही क्या रह गया? एक तरफ आप राम मंदिर बनवाते हैं, धारा 370 हटाते हैं, और दूसरी तरफ आप दाऊद के गुर्गे की बीवी के साथ प्रॉपर्टी डील करने वालों को अपने बगल में बिठाते हैं! ये कैसा दोगलापन है?
अगर ये सत्ता-लोलुप राजनेता यूं ही ‘लूट-खसोट’ करने वालों को गले लगाते रहे और हिंदुत्व के नाम पर आम जनता की आंखों में धूल झोंकते रहे, तो वो दिन दूर नहीं जब यही राष्ट्रवादी हिंदू इनका वो हश्र करेगा कि इन्हें 2014 से पहले वाला बुरा दौर याद आ जाएगा।
