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लोकमान्य तिलक: स्वराज का संकल्पधारी, हिंदू धर्म का रक्षक और गर्म दल क्रांतिकारियों का प्रेरणास्रोत

23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में जन्मे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे योद्धा थे, जिन्होंने राजनीति, धर्म, और क्रांति के क्षेत्र में अनुपम योगदान दिया। उन्हें “लोकमान्य” की उपाधि इसलिए मिली, क्योंकि वे जनता के मन में बसे थे और उनके हृदय की आवाज को स्वर दिया। तिलक ने […]

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सम्राट ललितादित्य: जिसने तिब्बत से अफगान तक हिंदू साम्राज्य फैलाया, पर वामपंथी इतिहासकारों ने उनके शौर्य को दबा दिया

हिंदू इतिहास में कई वीर योद्धाओं ने अपनी वीरता से दुनिया को चकित किया, लेकिन उनके योगदान को जानबूझकर भुलाने की साजिश भी चली। सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड ऐसे ही एक महान हिंदू शासक थे, जिन्होंने 8वीं सदी में कश्मीर से तिब्बत और अफगानिस्तान तक हिंदू साम्राज्य का विस्तार किया। उनकी सेनाओं ने दूर-दूर तक विजय

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कन्नप्पा नयनार: वह भक्त जिसने शिवलिंग पर अपनी आँखें अर्पित कीं

हिंदू धर्म में भक्ति की कई कहानियाँ हैं, लेकिन कन्नप्पा नयनार की गाथा अपने आप में अनोखी है। वे एक शिकारी से संत बने भक्त थे, जिन्होंने भगवान शिव के प्रति अपने समर्पण को साबित करने के लिए अपनी आँखें तक अर्पित कर दीं। 6वीं-7वीं सदी के इस महान शिवभक्त की कहानी न केवल आस्था

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बप्पा रावल: प्रजा के बप्पा, भीलों के रावल, अरबों को ईरान तक खदेड़ने वाले हिन्दू सम्राट

अगर आपने बप्पा रावल का नाम नहीं सुना, तो इसमें आपका दोष नहीं, बल्कि उस शिक्षा व्यवस्था का है जिसने हमारी वीर गाथाओं को दबा दिया। बप्पा रावल, जिन्हें प्रजा के बप्पा और भीलों के रावल के रूप में पूजा जाता है, 8वीं सदी के महान हिंदू सम्राट थे। उन्होंने अरब आक्रमणकारियों को न केवल

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काशी मंदिर का पुनर्निर्माण, राजा मानसिंह की आस्था और सनातन अस्मिता की अमिट पहचान

वह पावन कालखंड जब काशी के मंदिरों ने सनातन अस्मिता की नई कहानी लिखी। राजा मानसिंह, जिन्हें इतिहास में एक महान सेनापति और प्रशासक के रूप में जाना जाता है, ने अपनी गहरी आस्था और दूरदर्शिता से काशी (वाराणसी) के मंदिरों, विशेष रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को संभव बनाया। यह प्रयास न

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18 जुलाई: गोलियां खत्म हुईं, पर हौसला नहीं – संगीन से दुश्मनों को ढेर कर अमर हुए परमवीर पीरू सिंह

18 जुलाई: गोलियां खत्म हुईं, पर हौसला नहीं – संगीन से दुश्मनों को ढेर कर अमर हुए ‘परमवीर पीरू सिंह’

18 जुलाई, वह अमर तारीख जब वीरता ने इतिहास में स्वर्णिम छाप छोड़ी। यह वह दिन है जब राजस्थान के झुंझनू जिले के बेरी गांव के सपूत, हवलदार मेजर पीरू सिंह, ने 1948 में टिथवाल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की। रणबांकुरों की धरती शेखावाटी, खासकर झुंझनू, पूरे देश में

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मथुरा पर मुग़ल वार: जब कृष्ण जन्मभूमि बनी जिहादी क्रूरता का निशाना और हिन्दू आस्था लहूलुहान हुई

मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है जहाँ सनातन धर्म की जड़ें गहरी हैं और जिहादी राजाओं ने नुकसान पहुँचाया। यहाँ की मिट्टी में योगेश्वर वासुदेव की लीला और गोपियों के प्रेम की गाथाएँ बसती हैं। लेकिन इस पवित्र धरती पर मुग़ल आक्रांताओं ने जिहादी क्रूरता का ऐसा कहर बरपाया कि हिंदू आस्था लहूलुहान हो गई।

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1966 का गौ आंदोलन: जब करपात्री महाराज के नेतृत्व में साधुओं ने संसद को घेरा और इंदिरा सरकार की नींव हिला दी

हिंदू संस्कृति में गाय को “गौ माता” के रूप में पूजा जाता है, जो 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास मानी जाती है। प्राचीन काल से गौ रक्षा हिंदुत्व का अभिन्न अंग रही है, जैसा कि छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके पुत्र संभाजी राजे ने मुगल शासकों के खिलाफ गाय की रक्षा के लिए लड़ा था।

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सन्यासी से शासक: उत्तराखंड की धरती से निकला वो ज्वाला, जिसने यूपी को दिया हिंदुत्व का प्रहरी 'योगी आदित्यनाथ'

सन्यासी से शासक: उत्तराखंड की धरती से निकला वो ज्वाला, जिसने यूपी को दिया हिंदुत्व का प्रहरी ‘योगी आदित्यनाथ’

भारत की पवित्र धरती पर जन्मे वीरों और संतों की गाथाएँ अनंत हैं, और इनमें योगी आदित्यनाथ का नाम आज एक प्रकाशस्तंभ की तरह चमकता है। उत्तराखंड की तपस्वी भूमि से निकला यह सन्यासी, जो गोरखनाथ मठ की परंपरा का वाहक बना, ने न केवल हिंदुत्व की अलख जगाई, बल्कि उत्तर प्रदेश को एक नई

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उत्तराखंड का वो वीर योद्धा जिसने अकेले 300 चीनी सैनिकों को कर दिया ढेर, शहीद के बाद भी मिला प्रमोशन… जानें जसवंत सिंह रावत की कहानी

भारत की धरती वीरों की जननी है और इन वीरों में राइफलमैन जसवंत सिंह रावत का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा है। उत्तराखंड के इस सपूत ने 1962 के भारत-चीन युद्ध में ऐसा साहस दिखाया, जो इतिहास में अमर हो गया। अकेले 300 चीनी सैनिकों को ढेर करने और गोलियाँ लगने के बावजूद लड़ते रहने

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