केरल की राजनीति में लंबे इंतजार और सियासी चर्चाओं के बाद आखिरकार कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता वी. डी. सतीशन को राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है। कांग्रेस नेतृत्व ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर उनके नाम का ऐलान किया। इसके साथ ही पिछले 10 दिनों से चल रहा मुख्यमंत्री पद का सस्पेंस समाप्त हो गया।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करते हुए 140 में से 102 सीटों पर कब्जा जमाया था। इस जीत के बाद यह तय माना जा रहा था कि कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनेगा, लेकिन पार्टी के भीतर कई बड़े नेताओं के बीच चली रस्साकशी के कारण फैसला लगातार टलता रहा।
आखिर कौन हैं वी. डी. सतीशन?
वी. डी. सतीशन केरल कांग्रेस के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने विपक्ष में रहते हुए पार्टी को मजबूती दी। वे एर्नाकुलम जिले की परावुर सीट से कई बार विधायक चुने जा चुके हैं। सतीशन लंबे समय तक विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे और उन्होंने वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाई।
उनकी छवि एक जमीनी और संगठन को साथ लेकर चलने वाले नेता की रही है। कांग्रेस के भीतर युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति में भी सतीशन की अहम भूमिका रही। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनकी लोकप्रियता और लगातार सक्रियता ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार बनाया।
कांग्रेस हाईकमान ने कैसे लिया फैसला?
मुख्यमंत्री के नाम को लेकर दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर चला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कई दौर की चर्चा की। पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों और केरल कांग्रेस नेताओं से राय लेने के बाद आखिरकार सतीशन के नाम पर सहमति बनी।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला भी शामिल थे। हालांकि अंत में हाईकमान ने सतीशन को जिम्मेदारी देने का फैसला किया।
केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल रहे केसी वेणुगोपाल ने पार्टी के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वे हाईकमान के निर्णय के साथ हैं और नई सरकार को पूरा समर्थन देंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि वी. डी. सतीशन के नेतृत्व में नई सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करेगी।
उनके इस बयान के बाद कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में किसी तरह का मतभेद नहीं है और सभी नेता मिलकर सरकार चलाएंगे।
10 दिन तक क्यों फंसा रहा फैसला?
विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अन्य राज्यों में सरकार गठन तेजी से हो गया था, लेकिन केरल में कांग्रेस मुख्यमंत्री तय नहीं कर पा रही थी। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय थे और कई नेताओं के समर्थक खुलकर अपने-अपने दावेदारों के पक्ष में माहौल बना रहे थे।
इसी बीच कुछ स्थानों पर विरोध पोस्टर भी लगाए गए थे। राजनीतिक दबाव इतना बढ़ गया था कि विपक्षी दल भाजपा और वाम मोर्चा भी कांग्रेस पर निशाना साधने लगे थे।
कांग्रेस नेतृत्व पर यह दबाव भी था कि लंबा विलंब पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। आखिरकार लगातार बैठकों और सलाह-मशविरों के बाद हाईकमान ने सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी।
सतीशन के सामने क्या होंगी बड़ी चुनौतियां?
मुख्यमंत्री बनने के बाद वी. डी. सतीशन के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। सबसे पहले उन्हें पार्टी के भीतर सभी गुटों को साथ लेकर चलना होगा। इसके अलावा राज्य की आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, बुनियादी ढांचे और निवेश जैसे मुद्दों पर तेजी से काम करना होगा।
केरल में लंबे समय तक वाम मोर्चे की सरकार रही है, इसलिए कांग्रेस सरकार से जनता की अपेक्षाएं भी काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में नई सरकार पर प्रदर्शन का दबाव रहेगा।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वी. डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस की नई रणनीति का हिस्सा है। पार्टी अब अनुभवी लेकिन अपेक्षाकृत युवा और आक्रामक नेताओं को आगे बढ़ाना चाहती है। केरल में मिली जीत को कांग्रेस 2029 लोकसभा चुनाव से पहले बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में भी देख रही है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सतीशन अपनी नई भूमिका में कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं और क्या वे कांग्रेस की उम्मीदों पर खरे उतर पाएंगे।
