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इजराइल का संघर्षमयी इतिहास: 1948 से आज तक की पूरी कहानी

इजराइल की भूमि में 1948 से संघर्ष का इतिहास

1948 में इजराइल राज्य की स्थापना के साथ ही मध्य पूर्व में एक नया अध्याय शुरू हुआ। इस क्षेत्र ने तब से निरंतर संघर्ष और युद्ध का सामना किया है। इजराइल और उसके पड़ोसी अरब देशों के बीच के यह संघर्ष केवल भू-राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से भी प्रेरित रहा है। इस लेख में हम 1948 से लेकर वर्तमान तक के संघर्षों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।

इजराइल की स्थापना (1948):

14 मई 1948 को, डेविड बेन-गुरियन ने इजराइल राज्य की स्थापना की घोषणा की। यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा के 1947 के विभाजन योजना के अनुसार थी, जिसमें फिलिस्तीन को दो राज्यों – एक यहूदी और एक अरब – में विभाजित किया गया था। अरब राष्ट्रों ने इस योजना को अस्वीकार कर दिया और इसके तुरंत बाद, इजराइल और उसके पड़ोसी अरब देशों – मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और इराक – के बीच पहला अरब-इजराइल युद्ध छिड़ गया।

पहला अरब-इजराइल युद्ध (1948-1949):

इजराइल ने इस युद्ध में विजय प्राप्त की और अपने क्षेत्र का विस्तार किया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप, लगभग 750,000 फिलिस्तीनी शरणार्थी बन गए। युद्ध विराम के बाद, संघर्ष रेखाएँ खींची गईं जिन्हें ग्रीन लाइन के नाम से जाना जाता है।

छह दिवसीय युद्ध (1967):

5 जून 1967 को, इजराइल ने मिस्र, जॉर्डन और सीरिया पर अचानक हमला कर दिया। इस युद्ध में, जिसे छह दिवसीय युद्ध के नाम से जाना जाता है, इजराइल ने सिनाई प्रायद्वीप, गाजा पट्टी, पश्चिमी तट और गोलन हाइट्स पर कब्जा कर लिया। इस युद्ध ने मध्य पूर्व में राजनीतिक मानचित्र को बदल दिया और इजराइल को महत्वपूर्ण क्षेत्रीय लाभ प्राप्त हुआ।

यॉम किपुर युद्ध (1973):

6 अक्टूबर 1973 को, मिस्र और सीरिया ने यॉम किपुर (यहूदी धर्म का पवित्र दिन) के दिन इजराइल पर अचानक हमला किया। इस युद्ध में, प्रारंभिक झटकों के बावजूद, इजराइल ने अपने क्षेत्रों को बनाए रखा और युद्धविराम के बाद सीमाएँ यथावत रहीं।

कैम्प डेविड समझौता (1978):

कैम्प डेविड समझौते के माध्यम से, मिस्र और इजराइल के बीच 1979 में शांति संधि पर हस्ताक्षर हुए। इस संधि के तहत, इजराइल ने सिनाई प्रायद्वीप को मिस्र को लौटा दिया और मिस्र ने इजराइल के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया।

पहला इंटिफादा (1987-1993):

1987 में, फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजराइली कब्जे के खिलाफ एक जन आंदोलन शुरू हुआ, जिसे पहला इंटिफादा कहा जाता है। यह संघर्ष 1993 तक चला और इसके परिणामस्वरूप ओस्लो समझौते हुए, जिसके तहत फिलिस्तीनी प्राधिकरण की स्थापना हुई।

ओस्लो समझौते (1993):

ओस्लो समझौते के तहत, इजराइल और फिलिस्तीनी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) ने आपसी मान्यता प्रदान की और फिलिस्तीनी स्वायत्तता के लिए एक रूपरेखा तैयार की। हालांकि, इस समझौते के बावजूद, स्थायी शांति स्थापित नहीं हो सकी।

दूसरा इंटिफादा (2000-2005):

2000 में, यासर अराफात और एरियल शेरोन की उपस्थिति में दूसरे इंटिफादा का आरंभ हुआ। यह संघर्ष 2005 तक चला और इस दौरान हजारों लोग मारे गए और घायल हुए।

हाल की घटनाएँ और संघर्ष:

2006 में, इजराइल और हिजबुल्लाह (लेबनान) के बीच 34 दिनों का युद्ध हुआ। 2008-2009, 2012, 2014 और 2021 में गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच कई युद्ध हुए। इन युद्धों में हजारों लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए।

इजरायल और हमास युद्ध

इजरायल और हमास के बीच युद्ध 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ है, जब हमास के आतंकियों ने तड़के इसरायल पर अचानक सैकड़ों रॉकेट्स से हमला बोल दिया। युद्ध की शुरुआत से अब तक फलस्तीन के 5,087 नागरिक मारे जा चुके हैं, जबकि 15, 270 लोग घायल हो गए हैं। वहीं, इजरायल में हमास के हमले में 1400 से अधिक लोग मारे गए हैं। इसके अलावा हमास के आतंकियों ने इजरायल में घुसपैठ के दौरान 222 लोगों को बंधक बना लिया है।

पहले भी हो चुके हैं इजरायल-फलस्तीन के बीच युद्ध

इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में रोजाना नए-नए अपडेट्स आ रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इजरायल के लिए यह युद्ध कोई नया नहीं है। इससे पहले इजरायल दस बड़े युद्ध लड़ चुका है। इन्हीं में से एक लड़ाई है 1948 का अरब-इजरायल युद्ध है। इस युद्ध ने दुनिया के नक्शे को हमेशा के लिए बदल दिया।

निष्कर्ष:

1948 से लेकर आज तक, इजराइल की भूमि में संघर्ष और युद्ध ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। यह क्षेत्र आज भी एक शांतिपूर्ण समाधान की तलाश में है। हालांकि विभिन्न शांति प्रयास और समझौते हुए हैं, स्थायी शांति अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। इजराइल और उसके पड़ोसी देशों के बीच स्थायी शांति और स्थिरता की प्राप्ति के लिए निरंतर संवाद और समझौता आवश्यक है।

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