विदेशी फंडिंग पर पलने वाले Dhruv Rathee और 'Alt न्यूज़' जैसे फर्जी फैक्ट चेकर्स का खौफनाक जाल, भारत और हिन्दुओं को दुनिया में बदनाम करने का ज़हरीला प्लान

विदेशी फंडिंग पर पलने वाले Dhruv Rathee और ‘Alt न्यूज़’ जैसे फर्जी फैक्ट चेकर्स का खौफनाक जाल, भारत और हिन्दुओं को दुनिया में बदनाम करने का ज़हरीला प्लान

वो ज़माना गया जब इस देश के गद्दार और जिहादी खुल्ले में हिन्दुओं पर हमला करते थे। आज की तारीख में गज़वा-ए-हिंद और भारत को तोड़ने का ये जो खौफनाक प्रोजेक्ट चल रहा है, उसने हथियार के तौर पर बंदूकें नहीं, बल्कि यूट्यूब (YouTube) और ट्विटर (X) को चुन लिया है।

आज ये जिहादी और अर्बन नक्सल हाई-क्वालिटी कैमरों के सामने कोट-पैंट पहनकर इस देश की जड़ों में तेज़ाब डाल रहे हैं।

ज़रा सोचिए, एक आतंकवादी सड़क पर बम फोड़कर कितने लोगों को मार सकता है? कुछ दर्जनों को! लेकिन ये जो ‘फैक्ट चेकर’ (Fact Checker) और ‘यूट्यूबर’ का चोला ओढ़े बैठे डिजिटल गद्दार हैं ना, ये एक ही वीडियो से करोड़ों हिंदू युवाओं के दिमाग में ज़हर भर देते हैं।

ये हमारी आने वाली पीढ़ियों की वो ‘ब्रेन हैकिंग’ कर रहे हैं जिसका कोई इलाज किसी पुलिस या फौज के पास नहीं है।

इन्होंने बड़ी चालाकी से अपने आप को सब कुछ जानने वाला ‘फैक्ट चेकर’ घोषित कर लिया है। लेकिन भाई, इस फैक्ट चेकिंग के मीठे ज़हर का सच क्या है? असल में ये कोई सच्चाई सामने लाने वाली मशीनरी नहीं है। ये उन जिहादियों और वामपंथियों के खून से सने हाथों को धोने की एक डिजिटल लॉन्ड्री है। 

जब भी कोई जिहादी इस देश में कोई कांड करता है, तो ये ‘फैक्ट चेकर’ तुरंत मैदान में उतर आते हैं ताकि उस जिहादी को बचाया जा सके और सारा का सारा इल्जाम घुमा-फिराकर सनातनी हिंदुओं के माथे पर मढ़ दिया जाए। 

अगर हमने आज इन डिजिटल गिद्धों का फन नहीं कुचला, तो ये हमारी पीढ़ियों को मानसिक रूप से इतना बड़ा विदेशी और वामपंथी गुलाम बना देंगे की हम हम देशभक्तों को अपने ही देश में छुपकर जीना पड़ेगा।

जिहादी मोहम्मद जुबैर और Alt News का वो खौफनाक सच, पाकिस्तान और सीरिया से आने वाली फंडिंग का पर्दाफाश

अब ज़रा इस पूरे खौफनाक नेक्सस के सबसे बड़े और ज़हरीले मोहरे की बात करते हैं- ऑल्ट न्यूज़ (Alt News) और उसका सरगना मोहम्मद जुबैर! इन लोगों ने ‘प्रवदा मीडिया फाउंडेशन’ (Pravda Media Foundation) नाम की एक संस्था बनाकर फैक्ट चेकिंग का वो धंधा शुरू किया, जिसने इस देश की छाती पर सबसे गहरे घाव दिए हैं।

आपको याद होगा जब दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद जुबैर को गिरफ्तार किया था और कोर्ट में जो सबूत पेश किए थे, उन्हें सुनकर पूरे देश के रोंगटे खड़े हो गए थे।

पुलिस की जांच में ये खुल्ला सच सामने आया की ये ऑल्ट न्यूज़ वाले जो खुद को ‘क्राउड फंडिंग’ (Crowd Funding) पर चलने वाला बेचारा बताते हैं, असल में इनके पास रेज़रपे (Razorpay) के ज़रिए विदेशों से लाखों-करोड़ों रुपये की फंडिंग आ रही थी। और ये पैसा कहां से आ रहा था? ये पैसा आ रहा था पाकिस्तान, सीरिया, यूएई (UAE) और सिंगापुर जैसे देशों से!

अरे भाई! ज़रा दिमाग पर ज़ोर डालिए। सीरिया और पाकिस्तान जैसे देशों में बैठे कट्टरपंथियों को भारत के एक ‘फैक्ट चेकर’ से इतना क्या प्यार हो गया की वो उसे डॉलरों में फंडिंग भेज रहे थे? सीरिया तो खुद आईएसआईएस (ISIS) और जिहादी आतंकवादियों का गढ़ है!

असल में ये कोई डोनेशन नहीं था, ये भारत के खिलाफ चलाए जा रहे ‘इकोसिस्टम’ को ज़िंदा रखने की मज़हबी फंडिंग थी। इन्होंने FCRA (विदेशी चंदा नियमन कानून) की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं।

और इस विदेशी फंडिंग का इन्होंने क्या किया? ज़रा नूपुर शर्मा वाला वो खौफनाक मामला याद कीजिए। नूपुर शर्मा ने टीवी डिबेट में जो कहा था, वो उसी इस्लामिक किताब (हदीस) में लिखा हुआ है।

लेकिन इस मोहम्मद जुबैर ने बड़ी चालाकी से उस वीडियो को काटा-छांटा, उसे एडिट किया और अपने ट्विटर हैंडल से पूरी दुनिया के जिहादियों को टैग करके आग लगा दी। इस एक आदमी के उस एडिटेड वीडियो ने पूरे भारत में वो जिहादी आग भड़काई की जगह-जगह ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगने लगे।

उदयपुर में कन्हैया लाल जी की सरेआम गला रेत कर हत्या कर दी गई, अमरावती में उमेश कोल्हे को मौत के घाट उतार दिया गया। इन सब हत्याओं के पीछे अगर किसी ने सबसे बड़ी चिंगारी लगाई थी, तो वो यही ऑल्ट न्यूज़ का मोहम्मद जुबैर था!

विदेशी फंडिंग लेकर भारत के अंदर दंगे भड़काना और हिंदुओं को मरवाना- यही है इन तथाकथित फैक्ट चेकर्स का असली और खौफनाक जिहादी एजेंडा।

जर्मनी में बैठकर भारत को गालियां देने वाला ध्रुव राठी, सनातन संस्कृति और हिन्दू संतों पर कीचड़ उछालने की विदेशी साज़िश

इस जिहादी और वामपंथी इकोसिस्टम का एक और बहुत बड़ा मोहरा है, जो आज करोड़ों भारतीय युवाओं का ‘ब्रेनवाश’ कर रहा है- ध्रुव राठी! ये वो इंसान है जो खुद जर्मनी में बैठा है, जिसने एक विदेशी लड़की से शादी की है, जो यूरोप के ऐश-ओ-आराम में जी रहा है, लेकिन इसे दिन-रात भारत के लोकतंत्र और हमारी संस्कृति पर ज्ञान बांटने की बीमारी है।

ध्रुव राठी का असली चेहरा अगर देखना है, तो उसके पुराने वीडियो उठाकर देख लीजिए। ये बहुत ही चालाकी से, मीठी-मीठी बातों और बढ़िया ग्राफिक्स के ज़रिए हमारे युवाओं के दिमाग में सनातन धर्म के खिलाफ ज़हर घोलता है।

कभी ये रामायण और महाभारत को सिर्फ एक ‘माइथोलॉजी’ (Mythology – काल्पनिक कहानी) बताकर उनका मज़ाक उड़ाता है, तो कभी हमारे पूजनीय हिंदू संतों और आयुर्वेद पर भद्दे कमेंट्स करता है।

लेकिन ज़रा इस दोगले इंसान का सेक्युलर फ्रॉड देखिए! जब भी हिंदू त्योहार आते हैं, तो ध्रुव राठी को अचानक से पर्यावरण और प्रदूषण की याद आ जाती है। ये दीवाली के पटाखों पर 20 मिनट का लंबा-चौड़ा ज्ञान पेलता है की “पटाखों से धरती खत्म हो जाएगी।”

लेकिन जब बकरीद पर लाखों बेज़ुबान जानवरों का खून सड़कों पर बहता है, या जब मोहर्रम में तलवारें लहराई जाती हैं, तब ये जर्मन बाबू एकदम गूंगा और बहरा हो जाता है। तब इसके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता!

क्यों? क्योंकि इसे पैसे सिर्फ भारत और हिंदू धर्म को नीचा दिखाने के लिए मिलते हैं। ये कोई निष्पक्ष यूट्यूबर नहीं है भाई, ये एक इंटरनेशनल वामपंथी टूलकिट (Toolkit) का सबसे अहम हिस्सा है।

जब भी इस देश में कोई राष्ट्रहित का काम होता है- चाहे वो राम मंदिर का निर्माण हो, धारा 370 का हटना हो या सीएए (CAA) लागू होना हो- ये तुरंत जर्मनी से अपना कैमरा ऑन करता है और भारत सरकार को तानाशाह (Dictator) बताने लगता है। 

इसे भारत से नहीं, बल्कि भारत को तोड़ने वाली उन विदेशी ताकतों से प्यार है जो इसके बैंक अकाउंट डॉलरों से भर रही हैं। और हमारे देश के कुछ नासमझ युवा इस गद्दार को अपना हीरो मान बैठे हैं।

फैक्ट चेकिंग का वो सेक्युलर फ्रॉड जो जिहादियों के खून के दाग धोता है और हिन्दुओं को बनाता है विलेन

अब ज़रा इस फैक्ट चेकिंग इंडस्ट्री के उस सबसे खौफनाक दोगलेपन को समझिए, जो खून खौला देने वाला है। इन ऑल्ट न्यूज़ वालों और ‘The Wire’ जैसे फैक्ट चेकर्स ने एक फिक्स पैटर्न बना लिया है। इनका काम सिर्फ और सिर्फ जिहादियों के अपराधों पर पर्दा डालना और हिंदुओं का सरेआम चरित्र हनन करना है।

ज़रा याद कीजिए, देश भर में जब ‘लव जिहाद’ के खौफनाक मामले सामने आते हैं। जब कोई कट्टरपंथी हाथ में कलावा बांधकर, हिंदू नाम रखकर हमारी किसी मासूम बेटी को अपने जाल में फंसाता है और बाद में उसकी हत्या करके उसे सूटकेस या फ्रिज में भर देता है… तब ये फैक्ट चेकर क्या करते हैं?

ये तुरंत उस जिहादी को बचाने के लिए मैदान में उतर जाते हैं। ये दिन-रात एक कर देते हैं ये साबित करने के लिए की “अरे नहीं, ये कोई लव जिहाद नहीं है, ये तो बस एक नॉर्मल मर्डर है, ये तो आपसी विवाद था।”

ये उस जिहादी एंगल को पूरी तरह से धो-पोंछ कर साफ कर देते हैं ताकि देश के हिंदुओं को कभी असली खतरे का एहसास ही ना हो।

लेकिन भाई, अगर इसके ठीक उलट किसी हिंदू से ज़रा सी भी गलती हो जाए, या कोई सनातनी अपने बचाव में किसी गुंडे पर हाथ उठा दे, तो ये फैक्ट चेकर क्या करते हैं? ये रातों-रात उस वीडियो को ज़ूम कर-करके, लाल गोले बना-बनाकर ट्विटर पर वायरल कर देते हैं।

ये लुटियंस दिल्ली के पत्रकारों (रवीश कुमार, आरफा खानम शेरवानी जैसों) और अंतरराष्ट्रीय वामपंथी नेताओं को टैग करते हैं। इनका मकसद उस एक घटना के ज़रिए पूरे के पूरे सनातन समाज, आरएसएस (RSS) और बजरंग दल को ‘आतंकवादी’ घोषित करना होता है।

ये एक बहुत बड़ा और खौफनाक नेक्सस है। ये लोग खुद ही झूठ फैलाते हैं, फिर खुद ही उसका ‘फैक्ट चेक’ करते हैं, और फिर खुद ही एक-दूसरे की पीठ थपथपाकर विदेशी अखबारों (जैसे वाशिंगटन पोस्ट, न्यूयॉर्क टाइम्स) में आर्टिकल छपवा देते हैं की “भारत में मुसलमान खतरे में हैं।” ये देशद्रोह का वो डिजिटल धंधा है जो सीधे तौर पर भारत माता की पीठ में रोज़ खंजर घोंप रहा है।

टूलकिट गैंग और करोड़ों की फंडिंग का काला धंधा, देश को बदनाम करके अपनी जेबें भरने वाले इन डिजिटल गिद्धों का खेल

अब ज़रा इस डिजिटल आतंकवाद के उस काले धंधे को समझिए, जो सीधे तौर पर इन वामपंथियों और गद्दारों के बैंक अकाउंट भर रहा है। आज की तारीख में भारत को गाली देना, मोदी सरकार को तानाशाह बताना और हिंदू धर्म का मज़ाक उड़ाना दुनिया का सबसे मुनाफे वाला धंधा बन चुका है।

तुम भारत के जितने खिलाफ बोलोगे, विदेशी एनजीओ (NGOs), पाकिस्तान के आईएसआई (ISI) हैंडलर और ये इंटरनेशनल टूलकिट गैंग तुम्हें उतने ही ज़्यादा डॉलर भेजेगा।

ध्रुव राठी जैसे लोग जो खुद को बहुत बड़ा ‘ईमानदार और निष्पक्ष’ यूट्यूबर बताते हैं, उनकी असलियत क्या है? ये लोग यूट्यूब की कमाई से नहीं पल रहे भाई!

इनका असली खज़ाना तो ‘पैट्रियन’ (Patreon) जैसी विदेशी क्राउड-फंडिंग साइट्स से आता है, जहाँ गुमनाम अकाउंट्स से इन्हें हर महीने लाखों डॉलर्स की फंडिंग की जाती है। और जब इतने से भी इन डिजिटल गिद्धों का पेट नहीं भरता, तो ये हमारे ही देश के भोले-भाले युवाओं को लूटने का एक नया स्कैम शुरू कर देते हैं।

ज़रा ध्रुव राठी के उस ताज़ा फ्रॉड को देखिए। जो ‘चैट जीपीटी’ (ChatGPT) और एआई (AI) इंटरनेट पर पूरी तरह से फ्री है, जिसे कोई भी 10 साल का बच्चा यूट्यूब से फ्री में सीख सकता है, उसी एआई के नाम पर इस जर्मन बाबू ने 4000-4000 रुपये के फर्जी कोर्स बेचने शुरू कर दिए! इसने मास्टरमाइंड बनकर भारत के युवाओं को ऐसा लूटा की रातों-रात करोड़ों रुपये डकार गया।

एक तरफ ये इंसानियत और गरीबों की बात करता है, और दूसरी तरफ ये अपने ही सब्सक्राइबर्स को ‘कस्टमर’ समझकर उनकी जेबें काट रहा है।

और दूसरी तरफ मोहम्मद जुबैर और ‘ऑल्ट न्यूज़’ के उस नेक्सस को देखिए। जब जुबैर को दिल्ली पुलिस ने 2022 में गिरफ्तार किया था, तो क्या हुआ था?

अचानक से देश के वो बड़े-बड़े वकील, जो एक सुनवाई के 50-50 लाख रुपये फीस लेते हैं (जैसे कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण), वो सब के सब बिना पैसे लिए जुबैर को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में खड़े हो गए!

अरे भाई, ज़रा दिमाग लगाइए। एक मामूली से ‘फैक्ट चेकर’ के लिए इतने बड़े वकील रातों-रात अपनी नींद खराब करके सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंच गए? क्योंकि जुबैर कोई आम आदमी नहीं है, वो इस पूरे जिहादी और वामपंथी इकोसिस्टम का वो लाडला मोहरा है, जिसके पास इनके सारे काले राज़ दफन हैं।

इन गद्दारों को डर था की अगर जुबैर पुलिस रिमांड में टूट गया, तो वो उस पूरी विदेशी टूलकिट का भंडाफोड़ कर देगा जहाँ से भारत में दंगे भड़काने की फंडिंग आती है। ये पूरा का पूरा एक इंटरनेशनल सिंडिकेट है जो भारत माता की पीठ में खंजर घोंपकर अपनी तिजोरियां भर रहा है।

हिन्दू युवाओं का ब्रेनवॉश, हमारी अपनी ही पीढ़ियों को सनातन के खिलाफ खड़ा करने का ये मनोवैज्ञानिक युद्ध

इन डिजिटल गिद्धों की फंडिंग और इनके स्कैम से भी ज़्यादा खौफनाक चीज़ वो है जो ये हमारे बच्चों के दिमाग के साथ कर रहे हैं। इनका सीधा टारगेट 15 से 25 साल के वो नौजवान हैं, जो अभी स्कूल या कॉलेज में पढ़ रहे हैं।

वो नौजवान जिन्हें भारत का असली इतिहास नहीं पता, जिन्होंने कभी मुगलों और जिहादियों का वो बर्बर अत्याचार नहीं देखा, और जो बहुत आसानी से इन हाई-क्वालिटी ग्राफिक्स और अंग्रेज़ी वाले वीडियो के जाल में फंस जाते हैं।

ये ध्रुव राठी और इसके जैसे बाकी वामपंथी यूट्यूबर क्या करते हैं? ये बहुत ही चालाकी से वीडियो बनाते हैं। स्क्रीन पर बढ़िया से चार्ट्स और एनिमेशन चलेंगे, और पीछे से एक बहुत ही कॉन्फिडेंट आवाज़ में सफेद झूठ बोला जाएगा।

ये 18 साल के उस बच्चे के दिमाग में ये सॉफ्टवेयर डाल रहे हैं की तुम्हारा जो हिंदू धर्म है, जो तुम्हारे माता-पिता सुबह-शाम पूजा करते हैं, वो सब अंधविश्वास है, वो सब ‘पिछड़ापन’ है। और ये जो वामपंथी और जिहादियों का समर्थन करने वाली सोच है, यही सबसे ‘कूल’ और ‘प्रोग्रेसिव’ है।

नतीजा क्या हो रहा है? आज हमारे ही घरों में पल रहे हमारे बच्चे हमसे बहस करने लगे हैं। वो डाइनिंग टेबल पर बैठकर अपने ही बाप को ज्ञान देते हैं की “पापा, आप तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी वाले हो, असली ज्ञान तो ध्रुव राठी देता है।”

वो बच्चा दीवाली पर पटाखे फोड़ने को ‘क्राइम’ समझने लगता है। वो कश्मीर में मारे गए पंडितों को भूल जाता है, लेकिन फिलिस्तीन और गाज़ा के जिहादियों के लिए अपने इंस्टाग्राम र स्टेटस लगाता है।

ये एक खौफनाक मनोवैज्ञानिक युद्ध है जिसका मकसद हिंदू समाज को अंदर से खोखला करना है। ये वामपंथी इकोसिस्टम जानता है की अगर आने वाली हिंदू पीढ़ी को अपनी ही संस्कृति से नफरत हो गई, तो कल को गज़वा-ए-हिंद लागू करने के लिए किसी पाकिस्तान की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

हमारे ही ये ब्रेनवॉश किए हुए बच्चे सड़कों पर उतरकर अपने ही देश के टुकड़े करने वाले जिहादियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नज़र आएंगे। अगर आज हिंदू मां-बाप नहीं जागे, तो कल उनके बुढ़ापे में उनके बच्चे उन्हें ‘फासीवादी’ बोलकर घर से निकाल देंगे।

इन सरफिरे विदेशी एजेंटों के खिलाफ NIA जांच और डिजिटल धर्मयुद्ध की हुंकार

अब हिंदू समाज को सरकार से डंके की चोट पर ये मांग करनी होगी की ध्रुव राठी, ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद जुबैर और इस पूरे वामपंथी सिंडिकेट पर तुरंत NIA की सबसे कड़क जांच बैठाई जाए।

इनके और इनके रिश्तेदारों के सभी बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए की आखिर ये विदेशी पैसा किस-किस एनजीओ और किन-किन रास्तों से भारत आ रहा है।

अगर इनके तार किसी भी जिहादी या राष्ट्र-विरोधी संगठन से जुड़े मिलते हैं, तो इन गद्दारों पर तुरंत यूएपीए (UAPA) और रासुका (NSA) लगाकर इन्हें काल कोठरी में सड़ाना चाहिए। 

और ध्रुव राठी जैसे लोग जो विदेशों में छुपकर बैठे हैं, सरकार को उनका पासपोर्ट और ओसीआई (OCI) कार्ड तुरंत रद्द कर देना चाहिए। भारत सरकार को यूट्यूब और गूगल (Google) को सीधा अल्टीमेटम देना चाहिए की इन एंटी-इंडिया और एंटी-हिंदू चैनलों को भारत में हमेशा के लिए ब्लॉक करो। 

भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ करने की छूट किसी विदेशी कंपनी को भी नहीं दी जा सकती।

और सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी आज के इस हिंदू युवा की है। हमें अब इस ‘डिजिटल धर्मयुद्ध’ में अपना हथियार उठाना ही पड़ेगा। अगर वो एक झूठ का वीडियो बनाते हैं, तो हमें उस झूठ की धज्जियां उड़ाने वाले दस वीडियो बनाने होंगे।

हर एक सनातनी को आज एक ‘डिजिटल सैनिक’ बनना होगा। इन गद्दारों के वीडियो को रिपोर्ट करो, इनका बायकॉट करो, और इनके कमेंट सेक्शन में घुसकर इनके सफेद झूठ को सरेआम एक्सपोज़ करो।

ये लड़ाई सिर्फ कुछ यूट्यूबर्स या फैक्ट-चेकर्स के खिलाफ नहीं है, ये हमारे धर्म, हमारी संस्कृति और हमारे भारतवर्ष को बचाने का महासंग्राम है। अपनी पीढ़ियों को बचाओ, अपने बच्चों को इन डिजिटल सूअरों से दूर रखो।

जय श्री राम! वंदे मातरम!

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