आज 5 जून 2026 का दिन है। सच कहूं तो आज का दिन पूरे भारतवर्ष के सनातनियों के लिए किसी दीवाली या विजय दशमी से कम नहीं है।
आज इस देश के उस इकलौते और सबसे खूंखार ‘हिंदू शेर’ का 54वां जन्मदिन है, जिसने उत्तर प्रदेश की उस खून से सनी हुई ज़मीन को सही मायनों में रामराज्य में बदल कर रख दिया।
अजय सिंह बिष्ट के रूप में जन्म लेने वाले उस साधारण से नौजवान से लेकर गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर और फिर 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश के सबसे धाकड़ मुख्यमंत्री बनने तक का ये सफर कोई मामूली राजनीतिक सफर नहीं है। ये तो साक्षात धर्मरक्षा का एक खौफनाक महायज्ञ है।
ज़रा अपनी आंखें बंद कीजिए और 2017 से पहले के उस उत्तर प्रदेश को याद कीजिए। वो समाजवादी और बहुजन सरकारों का वो सड़ा हुआ और खौफनाक दौर!
क्या होता था उस वक्त? आज़म खान, अतीक अहमद, और मुख्तार अंसारी जैसे खूंखार जिहादी और माफिया खुली जीपों में AK-47 लहराते हुए घूमते थे। थानों में पुलिस वाले इन गुंडों को ‘नेताजी’ और ‘माफिया डॉन’ कहकर सलाम ठोकते थे।
और अगर कोई हिंदू अपनी बहन-बेटी की इज़्ज़त बचाने के लिए आवाज़ उठाता था, तो उसे सरेआम गोलियों से भून दिया जाता था। पूरा का पूरा यूपी इन जिहादी गुंडों की जागीर बन चुका था।
लेकिन फिर 2017 में तख्त पर एक सन्यासी बैठा। एक ऐसा सन्यासी जिसे ना तो अपना घर बसाना था, ना स्विस बैंक में खाते खोलने थे और ना ही उसे किसी ‘सेक्युलर वोटबैंक’ के सामने अपने घुटने टेकने थे। सत्ता में आते ही योगी महाराज ने जो डंडा चलाया, उसने इस पूरे के पूरे गद्दार और जिहादी इकोसिस्टम की नींव हिला कर रख दी।
आज यूपी में गुंडे थाने नहीं चलाते, बल्कि गुंडे गले में तख्ती लटकाकर अपनी जान की भीख मांगते हुए थाने पहुंचते हैं। ये उस भगवाधारी सन्यासी का खौफनाक राज है जिसने मुल्लों और माफियाओं के सीने पर पैर रखकर सनातन का परचम लहरा दिया है।
पंचूर गांव के अजय सिंह बिष्ट से लेकर जिहादियों का काल बनने तक, संन्यासी से सत्ता के सिंहासन का वो भगवा इतिहास
ज़रा इतिहास के पन्नों को पलटकर उस रोंगटे खड़े कर देने वाले सफर पर नज़र डालिए जिसने इस देश की राजनीति का पूरा का पूरा इतिहास ही पलट कर रख दिया। 5 जून 1972 का वो दिन… उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल का एक छोटा सा गांव, पंचूर।
वहां एक बहुत ही साधारण से राजपूत परिवार में एक बच्चे ने जन्म लिया, जिसका नाम रखा गया- अजय सिंह बिष्ट। कौन जानता था की पहाड़ों की उन शांत वादियों में जन्मा ये लड़का एक दिन पूरे देश के जिहादियों, पत्थरबाज़ों और सेक्युलर माफियाओं के लिए मौत का सबसे बड़ा खौफ बन जाएगा।
अजय सिंह बिष्ट कोई अनपढ़ नेता नहीं थे। उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से बाकायदा गणित में BSc की डिग्री हासिल की थी। अगर वो नौजवान चाहता, तो कोई भी बड़ी सरकारी या प्राइवेट नौकरी कर सकता था, अपना घर-परिवार बसा सकता था और एक आम इंसान की तरह अपनी ज़िंदगी मज़े में काट सकता था।
लेकिन भाई, जिसके खून में सनातन की रक्षा का उबाल हो, वो AC कमरों में बैठकर नौकरी कैसे कर सकता था?
90 के दशक की शुरुआत में जब देश में अयोध्या के राम मंदिर का आंदोलन अपने चरम पर था, जब मुलायम सिंह की पुलिस कारसेवकों का खून बहा रही थी, तब इस नौजवान के भीतर का सोया हुआ ‘परशुराम’ जाग उठा।
लगभग 1993-94 के आस-पास उस 21-22 साल के नौजवान ने अपने परिवार, अपना घर और अपनी सारी सांसारिक मोह-माया को हमेशा-हमेशा के लिए लात मार दी। वो सीधा पहुंचा गोरखपुर की उस ऐतिहासिक और वीर ‘गोरक्षपीठ’ में।
वहां महंत अवैद्यनाथ जी के चरणों में बैठकर उसने संन्यास की कठोर दीक्षा ली। सिर मुंडवा लिया, भगवा चोला पहन लिया और कान छिदवा कर नाथ संप्रदाय का वो जीवन अपना लिया जहाँ सिर्फ और सिर्फ धर्म के लिए जीना और मरना होता है।
उसी दिन ‘अजय सिंह बिष्ट’ की सांसारिक मृत्यु हो गई और जन्म हुआ उस खौफनाक और प्रखर भगवाधारी शेर का, जिसे आज पूरी दुनिया ‘योगी आदित्यनाथ’ के नाम से जानती है।
महंत अवैद्यनाथ जी को अपने इस शिष्य में वो आग दिख गई थी जो पूरे उत्तर प्रदेश के सेक्युलर सिस्टम को जलाकर राख करने वाली थी।
1998 में जब योगी जी मात्र 26 साल के थे, तो उन्होंने गोरखपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और इतिहास रचते हुए 12वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद (Youngest MP) बन गए। लेकिन योगी जी का असली इतिहास सिर्फ दिल्ली की संसद में जाकर भाषण देने का नहीं था।
उस वक्त पूर्वांचल में वामपंथी गुंडों और जिहादी माफियाओं का नंगा नाच चलता था। पुलिस इनके आगे कांपती थी। तब इस संन्यासी ने कहा की ‘धर्म की रक्षा सिर्फ शंख बजाकर नहीं, बल्कि शस्त्र उठाकर भी की जाती है।’
साल 2002 में रामनवमी के दिन योगी जी ने ‘हिंदू युवा वाहिनी’ नाम की वो खौफनाक फौज खड़ी की, जिसने जिहादियों को उन्हीं की भाषा में, उन्हीं की सड़कों पर घुसकर ऐसा जवाब दिया की पूरे पूर्वांचल से इन माफियाओं का बोरिया-बिस्तर गोल हो गया।
और फिर मार्च 2017 का वो ऐतिहासिक दिन आया, जब उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता ने इस भगवाधारी शेर को सीधा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया।
भाई साहब, एक गांव के लड़के से लेकर यूपी के सिंहासन तक का ये सफर भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सनातन चमत्कार है!
अतीक और मुख्तार जैसे जिहादी दरिंदों को सीधा जहन्नुम का टिकट, योगी बाबा का एनकाउंटर मॉडल
अगर किसी को लगता है की सत्ता में बैठकर माफियाओं को सिर्फ कागज़ों पर डराया जा सकता है, तो उसे यूपी विधानसभा का वो खौफनाक और ऐतिहासिक मंज़र बार-बार देखना चाहिए।
योगी जी ने सदन में दहाड़ते हुए कहा था- “माफियाओं को मिट्टी में मिला दूंगा!” और भाई साहब, वो कोई खोखली राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं थी। वो एक सन्यासी का खौफनाक फरमान था जिसे ज़मीन पर उतारा गया।
ज़रा अतीक अहमद का हश्र देखिए। वो अतीक अहमद जिसके नाम से प्रयागराज का बच्चा-बच्चा कांपता था। जिसने राजूपाल और उमेश पाल जैसे बेगुनाहों को बीच सड़क पर गोलियों से भून दिया था।
उस अतीक अहमद को ज़मीन पर घसीट-घसीट कर साबरमती जेल से यूपी लाया गया। वो खूंखार डॉन, जो कभी मूंछों पर ताव देता था, वो पुलिस वैन में बैठा हुआ ऐसे रो रहा था जैसे कोई चूहा बिल में फंसा हो।
और फिर जो हुआ, वो पूरे देश ने लाइव टीवी पर देखा। अतीक और उसका भाई अशरफ हमेशा-हमेशा के लिए मिट्टी में मिल गए और उसका कातिल बेटा असद पुलिस के एनकाउंटर में सीधा जहन्नुम पहुंच गया।
और वो मुख्तार अंसारी? गाज़ीपुर और मऊ का वो खूंखार दरिंदा जिसने कृष्णानंद राय जैसे लोकप्रिय हिंदू नेता को 500 गोलियां मरवाकर छलनी कर दिया था। वो मुख्तार बांदा की जेल में अपनी जान की भीख मांगते-मांगते व्हीलचेयर पर आ गया और वहीं घुट-घुट कर मर गया।
योगी जी का पुलिस को सिर्फ एक ही खौफनाक और साफ आदेश है- “जो भी अपराधी पुलिस पर गोली चलाए, उसे वापस जेल मत लाओ, उसे सीधा ऊपर का टिकट काट कर दो।”
पत्थरबाज़ों का इलाज करने वाला बाबा का खूंखार बुलडोज़र, दंगाईयों के घरों को मलबे में बदलकर वसूला जा रहा पाई पाई का हिसाब
अगर एनकाउंटर ने गुंडों के अंदर मौत का खौफ पैदा किया, तो योगी जी के उस ‘पीले बुलडोज़र’ ने इन जिहादियों और दंगाईयों के पूरे खानदान की कमर तोड़ कर रख दी। आज की तारीख में वो पीला बुलडोज़र इस देश में सनातनियों के लिए ‘न्याय का भगवान’ बन चुका है।
ज़रा याद कीजिए रामनवमी, हनुमान जयंती और मुहर्रम के वो दिन। जब हिंदू शोभा यात्राओं पर छतों से पत्थर बरसाए जाते थे। पुलिस मूक दर्शक बनी रहती थी और हिंदू खून से लथपथ होकर भागने पर मजबूर हो जाते थे।
लेकिन अब क्या होता है? अब रामनवमी का जुलूस निकलता है, तो इन जिहादियों की हिम्मत नहीं होती की ये सड़क पर पड़ा कोई कंकड़ भी उठा लें।
क्यों? क्योंकि इन्हें बहुत अच्छे से पता है की अगर एक भी पत्थर रामभक्तों की यात्रा पर गिरा, तो शाम तक वो पीला बुलडोज़र दहाड़ता हुआ इनके घर के दरवाज़े पर आकर खड़ा हो जाएगा।
योगी जी ने कानून बना दिया की जो भी कट्टरपंथी दंगा करेगा, सरकारी या प्राइवेट संपत्ति जलाएगा, सबसे पहले उसके घर पर बुलडोज़र चलेगा।
और सज़ा यहीं खत्म नहीं होती! दंगे में जितने भी करोड़ का नुकसान हुआ है, उसकी पाई-पाई उस दंगाई के बाप-दादाओं की ज़मीनें नीलाम करके वसूली जाएगी।
सनातन की बहन बेटियों और धर्म को बचाने वाला योगी जी का ऐतिहासिक रामराज्य
और सबसे बड़ा प्रहार जो योगी जी ने किया, वो था- ‘लव जिहाद’ का खात्मा। हाथ में कलावा बांधकर, समीर को ‘समीर शर्मा’ बताकर हमारी मासूम हिंदू बेटियों को फंसाने का जो खौफनाक और विदेशी फंडेड सिंडिकेट यूपी में चल रहा था, योगी जी ने उसे जड़ से उखाड़ फेंका।
योगी सरकार देश का वो सबसे कड़क ‘धर्मांतरण विरोधी कानून’ लेकर आई, जिसने इन जिहादी भेड़ियों की रूह कंपा दी।
अब अगर कोई कट्टरपंथी अपनी पहचान छुपाकर किसी हिंदू बेटी को फंसाता है या ज़बरदस्ती उसका धर्म बदलवाता है, तो उसे सीधा 10 साल की काल कोठरी की सज़ा मिलेगी और उस पर लाखों का जुर्माना ठोका जाएगा।
अगर शादी के बाद किसी हिंदू लड़की के साथ ज़बरदस्ती हुई, तो उस जिहादी के पूरे खानदान को जेल की हवा खानी पड़ेगी।
आज महाराज योगी आदित्यनाथ जी के 54वें जन्मदिन पर पूरे देश के करोड़ों हिंदुओं का ये अटल संकल्प है की हमें योगी जी के हाथों को इतना मजबूत करना है की ये योगी मॉडल सिर्फ UP तक सीमित ना रहे। इस भगवा लहर को पूरे भारत के चप्पे-चप्पे तक पहुंचाना है।
जीयो महाराज! तुम जियो हज़ारों साल, क्योंकि जब तक तुम उस गद्दी पर बैठे हो, इस देश का हिंदू शेर की तरह दहाड़ कर जी सकता है!
जय श्री राम!
