सनातन को मिटाने के लिए सेना के घरों तक पहुँचा जिहादी कैंसर, आम हिन्दुओं के बाद अब वायुसेना अधिकारियों की पत्नियों को निशाना बनाते शांतिदूत दरिंदे

सनातन को मिटाने के लिए सेना के घरों तक पहुँचा जिहादी कैंसर, आम हिन्दुओं के बाद अब वायुसेना अधिकारियों की पत्नियों को निशाना बनाते शांतिदूत दरिंदे

एक हिन्दू अपने दिल में कोई मैल नहीं रखता। वो स्कूल और कॉलेज में साथ पढ़ने वाले किसी ‘अब्दुल’ या ‘अयाज़’ को अपना बचपन का दोस्त समझ लेता है।

वो सोचता है की हम सब एक हैं। लेकिन उसे नहीं पता की जिस दोस्त के साथ वो बैठ कर खाना खा रहा है, उस दोस्त का दिमाग उन जिहादी तालीमों और मदरसे की उन सोच से भरा हुआ है, जहाँ एक ‘काफिर’ (हिन्दू) औरत को सिर्फ और सिर्फ एक शिकार या मज़हबी दासी समझा जाता है।

अभी चंद दिनों पहले महाराष्ट्र के नागपुर से जो खौफनाक मामला सामने आया है, उसने पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। शिकार कौन हुआ? कोई आम लड़की नहीं, बल्कि देश की रक्षा करने वाले इंडियन एयर फोर्स (IAF) के एक अफसर की 24 साल की पत्नी!

ज़रा सोचिए! हमारा एक फौजी भाई घर-परिवार छोड़कर सरहदों पर, दूसरे शहरों में देश की सुरक्षा के लिए तैनात है, और उसी के देश के अंदर, उसी के शहर में पल रहे ये जिहादी भेड़िए उसकी ही पत्नी को ‘लव ट्रैप’ और धर्मांतरण के उस खौफनाक नर्क में धकेल रहे हैं!

जब सरहदों के रक्षकों के परिवार ही इस देश में सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर एक आम हिन्दू बाप अपनी बेटियों को लेकर कहां जाए? ये उस ‘धर्मांतरण माफिया’ का नंगा सच है जो हमारे घरों की दहलीज पार करके हमारी बहू-बेटियों की इज़्ज़त और धर्म दोनों को निगलने के लिए आ चुका है।

नशीला जूस और ब्लैकमेलिंग, दोस्ती के नकाब में छुपे जिहादी भेड़िये अयाज़ की वायु-सेना अफसर की पत्नी के साथ दरिंदगी

ये मुस्लिम दरिंदे बहुत ठंडे दिमाग से साज़िश रचते हैं। नागपुर की इस 24 साल की हिन्दू बेटी का मुख्य गुनहगार है अयाज़ ताज मदारे (26 साल)। ये अयाज़ कोई अजनबी नहीं था, ये उस महिला का बचपन का क्लासमेट था।

महिला नागपुर में रहकर रियल एस्टेट यानी प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती थी। अयाज़ ने इसी बचपन की पहचान और दोस्ती का वो खौफनाक फायदा उठाया जो हर हिन्दू परिवार के लिए एक बहुत बड़ा सबक है।

फरवरी 2025 का वो मनहूस दिन! अयाज़ ने ‘प्रॉपर्टी डील’ कराने का झांसा देकर अपनी ही क्लासमेट को वर्धा रोड पर स्थित एक होटल में बुलाया। एक आम कामकाजी महिला ने अपने स्कूल के दोस्त पर भरोसा किया और वहां चली गई।

लेकिन वहां उस मज़हबी दरिंदे ने क्या किया? उसने धोखे से उस हिन्दू बेटी को नशीला जूस पिला दिया। जब वो बेबस महिला बेहोश हो गई, तो उस हैवान ने अपनी हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए उसके साथ दुष्कर्म किया।

और बात सिर्फ दुष्कर्म तक खत्म नहीं हुई। इन जिहादियों का एक सेट पैटर्न होता है। अयाज़ ने उस बेहोशी की हालत में उस महिला का अश्लील वीडियो और गंदी तस्वीरें बना लीं।

इसके बाद शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का वो अंतहीन और खौफनाक दौर, जिसने उस औरत की ज़िंदगी को एक जीते-जागते नर्क में तब्दील कर दिया।

ज़रा एक 24 साल की भारतीय शादीशुदा औरत की साइकोलॉजी को समझिए। उसके पति एयर फोर्स में हैं, समाज में उसकी एक इज़्ज़त है। अयाज़ ने उसी लोक-लाज, परिवार टूटने के डर और समाज के खौफ का फायदा उठाया।

उसने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बार-बार उस महिला का शारीरिक शोषण किया। वो दरिंदा यहीं नहीं रुका, उसने उस बेबस औरत को डरा-धमका कर उससे करीब 3 लाख से 4 लाख रुपये तक ऐंठ लिए!

अरे भाई, ये कोई साधारण क्रिमिनल दिमाग नहीं है। ये औरतों के जिस्म, उनके डर और उनकी मजबूरी का वो गंदा मज़हबी धंधा है जिसे ये जिहादी धड़ल्ले से पूरे देश में चला रहे हैं।

दोस्ती का नकाब ओढ़कर ये हमारे घरों में घुसते हैं, हमारी बेटियों का वीडियो बनाते हैं, पैसे लूटते हैं और फिर उनका धर्म भ्रष्ट करने की आखिरी साज़िश रचते हैं।

डरावना काला जादू और इस्लामिक मंत्र पढ़ कर किया जबरन धर्मान्तरण

पैसे ऐंठने और दुष्कर्म करने के बाद जब अयाज़ को वो सुकून नहीं मिला, तो उसने अपने असली मज़हबी एजेंडे पर काम करना शुरू किया- ‘धर्मांतरण’।

सोशल मीडिया पर इस घटना का जो खौफनाक वीडियो वायरल हो रहा है, उसे अगर कोई भी सच्चा सनातनी देख ले, तो उसकी रातों की नींद उड़ जाएगी और खून इस कदर खौलेगा की वो कातिलों को बीच सड़क पर नोच खाए।

वीडियो का वो मंज़र ऐसा है जैसे आप किसी डरावनी फिल्म का सीन देख रहे हों। 24 साल की वो बेबस हिन्दू बेटी ज़मीन पर तड़प रही है। उसकी आंखों में मौत का खौफ है। वो दर्द से कराहते हुए चीख रही है, “मुझे छोड़ दो… मुझे घर जाने दो!” वो खुद को छुड़ाने के लिए फड़फड़ा रही है।

लेकिन वो दरिंदा अयाज़ उसके दोनों हाथ ज़बरदस्ती बहुत कसकर पकड़े हुए है। वो लड़की को हिलने तक नहीं दे रहा और उसी खौफनाक हालत में अयाज़ कुछ ‘मज़हबी आयतें’ पढ़ रहा है और बार-बार उस हिन्दू बेटी के चेहरे पर फूंक मार रहा है!

ये वीडियो कोई होटल का नहीं था। ये मई महीने की वो खौफनाक रात थी जब अयाज़ उस महिला को डरा-धमका कर नागपुर के कलमेश्वर इलाके के एक सुनसान और डरावने इलाके में ले गया था। वहां पहले से अमीन शेख और एक ‘हज़रत मौलाना’ मौजूद थे।

उस सुनसान जगह पर, एक बेबस और रोती हुई हिन्दू औरत को घेरकर ये मज़हबी भेड़िए इस्लामिक और तांत्रिक रस्में कर रहे थे। रस्मों के बाद इन दरिंदों ने बड़ी बेशर्मी से दावा कर दिया की “अब तेरा धर्म परिवर्तन हो चुका है और अयाज़ के साथ तेरा निकाह हो गया है।”

इन जिहादियों की नज़र में एक औरत की, खासकर एक हिन्दू औरत की कोई मर्ज़ी नहीं होती। उसके आंसू, उसका रोना, उसके पति और परिवार का वजूद- इनके लिए किसी चीज़ के कोई मायने नहीं हैं।

इनके लिए वो औरत सिर्फ एक ‘वस्तु’ है, जिस पर उन्हें कब्ज़ा करना है। ये उसे अपनी मज़हबी दासी बनाकर अपनी झूठी श्रेष्ठता साबित करना चाहते हैं।

हज़रत मौलाना और इस्लामिक काले जादू का खौफनाक मकड़जाल, हिन्दू बेटियों को फंसाने के लिए देश भर में फैला धर्मांतरण सिंडिकेट

अगर आपको लग रहा है की 26 साल का एक मामूली लड़का अयाज़ अकेले ही ये सब कर रहा था, तो आप इस बहुत बड़े और इंटरनेशनल लेवल पर फैले ‘धर्मांतरण सिंडिकेट’ को समझने में धोखा खा रहे हैं।

कोई भी एक अकेला लड़का बिना किसी बड़े मज़हबी नेटवर्क, मौलवियों की मदद और फंडिंग के बिना इतनी बड़ी ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण की साज़िश को अंजाम नहीं दे सकता।

नागपुर पुलिस ने जो एफआईआर (FIR) दर्ज की है, उसमें अयाज़ और अमीन शेख के अलावा एक तीसरा और सबसे खौफनाक नाम सामने आया है- ‘हज़रत मौलाना’।

ये मौलवी कोई नागपुर का नहीं था, बल्कि ये मध्य प्रदेश के तामिया इलाके से इस पूरे धर्मांतरण और काले जादू वाले रैकेट को ऑपरेट कर रहा था।

ज़रा सोचिए, एक राज्य से दूसरे राज्य तक इन दरिंदों का कैसा तगड़ा नेटवर्क फैला हुआ है। जब अयाज़ को धर्मांतरण कराना था, तो उसने सीधे मध्य प्रदेश के इस मौलाना को नागपुर के सुनसान इलाके में बुला लिया।

पुलिस ने इस मामले में रेप और एक्सटॉर्शन के साथ-साथ ‘महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय, बुरी और अघोरी प्रथाओं और काले जादू की रोकथाम अधिनियम’ के तहत केस दर्ज किया है।

ये धाराएं साफ-साफ बता रही हैं की ये लोग हमारी बेटियों का सिर्फ शारीरिक शिकार नहीं करते, बल्कि उन पर इस्लामिक तांत्रिक विद्याओं, ताबीज़ों और मज़हबी आयतों के नाम पर एक भयंकर मनोवैज्ञानिक युद्ध भी थोपते हैं।

ये हज़रत मौलाना जैसे लोग इस पूरे सिंडिकेट के असली मास्टरमाइंड होते हैं। ये लोग ब्रेनवाश करने के एक्सपर्ट होते हैं। ये डराते हैं, खौफ पैदा करते हैं और लड़की के दिमाग को इस कदर सुन्न कर देते हैं की वो समाज या पुलिस के पास जाने से भी कांपने लगती है।

ये एक पूरी की पूरी संस्थागत साज़िश है। इस सिंडिकेट को चलाने के लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग होती है। वकीलों की फौज तैयार रखी जाती है।

अगर आज इस हज़रत मौलाना और अयाज़ जैसे दरिंदों के पीछे की फंडिंग का पता लगाया जाए, तो ऐसे दर्जनों खौफनाक मज़हबी नेटवर्कों का पर्दाफाश होगा जो देश के हर शहर में हमारी मासूम बच्चियों और महिलाओं को फंसाने के लिए एक मकड़जाल की तरह फैले हुए हैं।

वायुसेना के उस पति का धैर्य और पुलिस का एक्शन, जिहादियों से लड़ने के लिए हर एक हिन्दू परिवार के लिए सबक

इस खौफनाक अंधेरे में अगर कोई सबसे बड़ी उम्मीद की किरण है, तो वो है उस हिन्दू बेटी के पति का धैर्य और उसका अपनी पत्नी के साथ एक पहाड़ की तरह खड़े होना।

अक्सर जब ऐसे लव ट्रैप या ब्लैकमेलिंग के मामले सामने आते हैं, तो समाज और परिवार के डर से कई औरतें घुट-घुट कर सुसाइड कर लेती हैं। उन्हें लगता है की उनका पति या परिवार उन्हें अपनाएगा नहीं। अयाज़ जैसे दरिंदे इसी लोक-लाज और सामाजिक डर का फायदा उठाते हैं।

लेकिन उस वायुसेना (IAF) अफसर पति की हिम्मत और उसकी समझदारी की दाद देनी होगी। जब वो तीन दिन पहले अपनी ड्यूटी से वापस नागपुर घर लौटा, तो उसकी पत्नी ने हिम्मत जुटाई और अपनी आपबीती, अपने साथ हुए उस दुष्कर्म और धर्मांतरण की पूरी सच्चाई अपने पति को बता दी।

उस फौजी पति ने अपनी पत्नी को ताने नहीं मारे, उसे घर से नहीं निकाला, बल्कि वो ढाल बनकर उसके साथ खड़ा हो गया। उसने अपनी पत्नी को उस ब्लैकमेलिंग के नर्क से बाहर निकाला और सीधा सोनेगांव पुलिस स्टेशन (नागपुर) पहुंचकर उस दरिंदे अयाज़ और उसके पूरे सिंडिकेट के खिलाफ FIR दर्ज़ करवाई।

ये कदम देश के हर हिन्दू परिवार, हर हिन्दू पति और हर हिन्दू बाप के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। अपनी बेटियों और पत्नियों को समाज का वो झूठा डर मत दिखाओ की अगर कुछ गलत हो गया तो इज़्ज़त चली जाएगी।

अगर वो किसी जिहादी दरिंदे के चंगुल में फंस भी जाएं, तो उनका हाथ पकड़कर उन्हें बाहर निकालो, ताकि वो डर के मारे सुसाइड करने के बजाय उन गद्दारों को जेल की सलाखों के पीछे भेज सकें।

पुलिस का एक्शन भी इस बार कड़क रहा है। नागपुर की सोनेगांव पुलिस ने बिना किसी सेक्युलर दबाव में आए मुख्य आरोपी अयाज़ ताज मदारे और उसके साथी अमीन शेख को गिरफ्तार कर लिया है।

‘महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अघोरी प्रथा रोकथाम अधिनियम’, रेप और एक्सटॉर्शन की सख्त धाराओं में केस दर्ज़ हुआ है। तीसरे आरोपी ‘हज़रत मौलाना’ को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें मध्य प्रदेश के तामिया इलाके की खाक छान रही हैं।

लेकिन भाई, एक बात बिल्कुल डंके की चोट पर समझ लीजिए। सिर्फ इन तीन दरिंदों का जेल जाना काफी नहीं है। हमारे टैक्स के पैसों से बनी जेलों में इन हैवानों को मुफ्त की बिरयानी क्यों खिलाई जाए?

कुछ सालों बाद ये किसी सेक्युलर वकील के दम पर ज़मानत लेकर बाहर आ जाएंगे और फिर किसी दूसरी हिन्दू बेटी की ज़िंदगी बर्बाद करेंगे।

अयाज़ जैसे दरिंदो को सबक सिखाने के लिए अब हिन्दू समाज की एक ही खौफनाक हुंकार- बुलडोज़र!

ये जिहादी किसी पुलिस, किसी कानून या किसी कोर्ट की तारीखों से नहीं डरते। इन्हें सिर्फ और सिर्फ एक ही भाषा समझ में आती है- ‘बर्बादी का खौफ’।

जब अयाज़ जैसे दरिंदों के पुश्तैनी घरों की दीवारें गिरेंगी, जब ये सड़क पर आकर भीख मांगेंगे, तब जाकर उस पूरे मज़हबी सिंडिकेट के दिलों में वो दहशत पैदा होगी जो आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है।

जब तक इनके मन में ये खौफ नहीं बैठेगा कि किसी हिन्दू बेटी की तरफ आंख उठाकर देखने का मतलब सिर्फ जेल नहीं, बल्कि पूरे के पूरे खानदान का आर्थिक और सामाजिक विनाश है, तब तक ये लव ट्रैप का खूनी खेल रुकने वाला नहीं है।

नागपुर की ये घटना कोई अपवाद नहीं है! दिल्ली में 35 टुकड़ों में कटी श्रद्धा वालकर से लेकर, सूटकेस में बंद होने वाली हमारी बेटियों तक, ये सब एक ही कट्टरपंथी मानसिकता का ‘चेन मर्डर’ है।

ये एक पूरी की पूरी संस्थागत साज़िश है जो देश के हर शहर, हर मोहल्ले और हर कॉलेज में चल रही है।

अयाज़ कोई अजनबी नहीं था, वो उस हिन्दू बेटी का क्लासमेट था! ये लोग बहुत ही प्लानिंग के साथ बचपन से ही दोस्ती का नाटक करते हैं।

ये हमारे साथ उठते-बैठते हैं, हमारी कमज़ोरियां भांपते हैं और फिर मौका मिलते ही एक खौफनाक अजगर की तरह डस लेते हैं। इनका भाईचारा सिर्फ तब तक है जब तक इन्हें तुमसे कोई काम है या जब तक ये तुम्हें अपने जाल में फंसा नहीं लेते।

अपनी बेटियों को, अपनी बहनों को और अपनी पत्नियों को बिल्कुल साफ-साफ बताओ की ये दुनिया कोई स्वर्ग नहीं है। उन्हें बताओ की ‘अब्दुल’ और ‘अयाज़’ की दोस्ती के पीछे क्या खौफनाक मंसूबे छिपे होते हैं।

उन्हें समझाओ की अगर कोई ‘बचपन का दोस्त’ भी तुम्हें किसी होटल या सुनसान जगह पर बुलाए, तो वहां जाने की कोई ज़रूरत नहीं है।

अब इस देश में या तो हम अपनी सनातन पहचान और अपनी बहन-बेटियों के सम्मान के साथ सीना तानकर शांति से जिएंगे, और या फिर इन जिहादियों का वो खौफनाक हश्र करेंगे की ये अपनी आने वाली नस्लों को भी हमारे नाम से डराएंगे।

जय श्री राम!

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