राजनीति में कुर्सी का लालच इंसान को कितना बड़ा गिरगिट बना सकता है, अगर इसका कोई जीता-जागता और चलता-फिरता सुबूत देखना हो, तो अरविंद केजरीवाल को देख लीजिए।
इस आदमी ने दोगलेपन और पाखंड के वो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं जिन्हें तोड़ने में बड़े-बड़े नेताओं की पुश्तें गुज़र जाती हैं।
जो आदमी कल तक राम मंदिर को गैर-जरूरी मानता था, जो सरेआम टीवी पर बैठकर हमारे रामलला का मज़ाक उड़ाता था, वो आज लव-कुश और माता सीता का भव्य मंदिर बनवाने का ठेकेदार बन गया है।
अभी हाल ही की बात है, जून 2026 का आखिरी हफ्ता चल रहा था। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सियासी ज़मीन कैसे दरक रही है, ये बात किसी से छुपी नहीं है।
हिंदू वोटबैंक धड़ाधड़ इनसे दूर भाग रहा है। तो अपनी खिसकती हुई कुर्सी को बचाने के लिए ये बहरूपिया सीधा अमृतसर पहुंच गया।
वहां भगवंत मान के साथ मंच साझा करते हुए इसने ऐसा ऐलान किया जिसे सुनकर किसी भी सच्चे हिंदू को हंसी भी आएगी और गुस्सा भी।
इसने बड़ी बेशर्मी से घोषणा कर दी की पंजाब सरकार अमृतसर में भगवान वाल्मीकि तीरथ स्थान के बिल्कुल बगल में माता सीता और लव-कुश का एक बहुत ही भव्य और विशाल मंदिर बनाएगी।
ज़रा सोचिए! जो पार्टी और जिसका मुखिया कल तक “सेक्युलरिज्म” का चोला ओढ़कर घूमता था, जिसे मंदिर-वंदिर के नाम से ही चिढ़ मचती थी, वो आज रातों-रात कट्टर हिंदू बनने का नाटक कर रहा है।
ये कोई हृदय परिवर्तन नहीं है भाई, ये विशुद्ध रूप से कुर्सी का लालच है। इसे बहुत अच्छे से समझ आ गया है की अब इस देश में अगर राजनीति करनी है, तो हिंदुओं को इग्नोर करके या सनातन धर्म को गालियां देकर दाल नहीं गलने वाली।
इसलिए इसने झट से अपनी वो पुरानी ‘सेक्युलर’ केंचुली उतार फेंकी है और अब एक नया ‘चुनावी हिंदू’ बनकर हमारे और आपके सामने खड़ा हो गया है।
पर ये सनातन समाज अब इतना बेवकूफ नहीं है की चुनाव आते ही रामनामी चादर ओढ़ लेने वाले इन ठगों को पहचान न सके।
नानी की झूठी कहानी और राम मंदिर की जगह अस्पताल का ज्ञान बांटने वाला केजरीवाल का वो पुराना हिंदू-विरोधी पाप
अगर इस सियासी गिरगिट का असली चेहरा देखना है, तो ज़रा इतिहास के पन्ने पलट कर पीछे चलिए।
ये वो दौर था जब राम जन्मभूमि का आंदोलन अपने चरम पर था, जब इस देश के करोड़ों हिंदू अपनी जान की बाजी लगाकर अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनाने के लिए लड़ रहे थे।
तब ये अरविंद केजरीवाल क्या कर रहा था? ये टीवी पर बैठकर और रैलियों में जाकर हमारी आस्था पर सीधे गोलियां चला रहा था।
इसका वो कुख्यात और शर्मनाक बयान भला कौन हिंदू भूल सकता है? इसी केजरीवाल ने एक भरी सभा में निहायत ही घटिया ड्रामा करते हुए कहा था की-
“मेरी नानी ने मुझसे कहा है की बेटा, मेरा राम तो किसी मस्जिद को तोड़कर बनाई गई जगह पर बस ही नहीं सकता।”
मतलब समझ रहे हैं आप? ये आदमी इनडायरेक्ट तरीके से बाबरी मस्जिद के उन पैरोकारों की भाषा बोल रहा था जो हमारे रामलला के अस्तित्व को ही नकार रहे थे।
इसने अपनी उस ‘काल्पनिक नानी’ का सहारा लेकर उन करोड़ों रामभक्तों के मुंह पर तमाचा मारा था, जिन्होंने राम मंदिर के लिए डंडे खाए थे और अपनी छातियों पर गोलियां झेली थीं।
और भाई, इसका ये ज्ञान यहीं नहीं रुका। इसके बाद आम आदमी पार्टी का पूरा का पूरा इकोसिस्टम एक नया झुनझुना लेकर टीवी चैनलों पर बैठ गया- ‘अस्पताल और स्कूल वाली थ्योरी’।
ये लोग छाती पीट-पीट कर कहते थे की “अरे भाई, अयोध्या में उस विवादित ज़मीन पर राम मंदिर बनाने की क्या ज़रूरत है? वहां तो एक बहुत बड़ा वर्ल्ड क्लास अस्पताल या कोई शानदार यूनिवर्सिटी बननी चाहिए। मंदिर बनाने से थोड़े ही देश का विकास होता है!”
ये वही केजरीवाल है जिसने हमारे देवी-देवताओं और हमारे मंदिरों को देश के ‘विकास’ में रोड़ा बताया था।
जब हिंदू समाज अपनी आस्था के सबसे बड़े केंद्र को वापस पाने के लिए कोर्ट-कचहरी के धक्के खा रहा था, तब ये आदमी हमारे जले पर नमक छिड़कते हुए हमें अस्पताल और स्कूल का झूठा ज्ञान बांट रहा था।
इसे उस वक्त न तो हिंदुओं की भावनाओं की परवाह थी और न ही सनातन धर्म के सम्मान की। इसे तो बस किसी भी तरह अपना वो ‘खास’ वोटबैंक पक्का करना था जिसे राम के नाम से ही नफरत है।
पर आज देखिए कुदरत का खेल! आज जब अयोध्या में हमारे रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो चुका है, तो इस आदमी का वो ‘अस्पताल वाला ज्ञान’ कहां हवा हो गया?
आज हम सीधे इसकी आंखों में आंखें डालकर पूछना चाहते हैं की अरे केजरीवाल! अगर मंदिर बनने से देश का विकास रुक जाता है, तो आज तुम पंजाब के अमृतसर में माता सीता और लव-कुश का मंदिर क्यों बनवा रहे हो?
वहां कोई 500 बिस्तरों वाला अस्पताल क्यों नहीं बनवा देते? वहां कोई बड़ी सी यूनिवर्सिटी क्यों नहीं खोल देते? तुम्हारा वो विकास का सारा ज्ञान आज हिंदू वोटबैंक के सामने कैसे फेल हो गया?
राम मंदिर बनने के सालों बाद अब अयोध्या में माथा टेकने का अरविंद केजरीवाल का चुनावी पाखंड
अब ज़रा इस आदमी के दोगलेपन की सबसे नई किश्त देखिए। अभी जून 2026 में पंजाब जाकर लव-कुश मंदिर का झुनझुना थमाने से ठीक एक दिन पहले, इस आदमी ने एक और भयंकर नौटंकी की।
ये अचानक से अपनी पूरी पलटन लेकर सीधा अयोध्या पहुंच गया रामलला के दर्शन करने! जो आदमी कल तक कहता था की रामलला वहां बस ही नहीं सकते, वो आज उसी मंदिर की चौखट पर जाकर माथा टेक रहा है।
कोई इससे पूछे की भाई, इतने साल तुम कहां थे? जब राम मंदिर के लिए इस देश का हिंदू लड़ रहा था, तब तुम उन बाबरी प्रेमियों के साथ खड़े होकर हमारे खिलाफ ज़हर उगल रहे था।
जब इतने सालों के संघर्ष के बाद राम मंदिर का वो ऐतिहासिक और भव्य उद्घाटन हुआ, प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब तुमने वहां जाने की जहमत क्यों नहीं उठाई? तब तो तुम्हे रामलला की याद नहीं आई!
और अब अचानक से, जब चुनाव सिर पर आ गए हैं, जब तुम्हे साफ दिख रहा है की तुम्हारा सारा फर्जी ‘दिल्ली मॉडल’ एक्सपोज़ हो चुका है, तो तुमको रातों-रात अयोध्या जाने की याद आ गई?
सच तो ये है की इसका ये अयोध्या दौरा किसी आस्था या भक्ति का प्रतीक है ही नहीं। ये पूरी तरह से एक खौफनाक और गंदी चुनावी साज़िश है।
ये बस कैमरों के सामने हाथ जोड़कर फोटो खिंचवाना चाहता था ताकि पंजाब और दिल्ली के हिंदुओं को बेवकूफ बना सके की “देखो भाई, मैं भी तो राम का भक्त हूँ।”
ये आदमी सोचता है की हिंदू समाज की याददाश्त बहुत कमज़ोर है। इसे लगता है की ये कल हमें गालियां देगा, हमारी आस्था को कुचलेगा और आज चुनाव के टाइम रामनामी चादर ओढ़कर आएगा, तो हम सब भूलकर इसे वोट दे देंगे। पर ये 2026 है मेरे भाई!
आज का सनातनी समाज जाग चुका है। हमें अच्छी तरह पता है की चुनाव से ठीक पहले जो लोग अपना जनेऊ बाहर निकाल कर घूमते हैं और अचानक से जिन्हें राम याद आ जाते हैं, वे असल में सनातन धर्म के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
ये राम के दर पर इसलिए नहीं गया क्योंकि इसके दिल में राम बसते हैं, ये वहां इसलिए गया क्योंकि इसे पता है की अब बिना राम के नाम के इसकी चुनावी नैया पार नहीं लगने वाली।
ये सिर्फ एक ट्रेलर है इसके पाखंड का। अमृतसर में मंदिर के ऐलान और अयोध्या के दौरे के अलावा, इसने पंजाब में हिंदू वोटों को लूटने के लिए जो-जो नए जाल बिछाए हैं, उनका सच तो और भी ज्यादा भयानक है।
पंजाब में कुर्सी बचाने के लिए वाल्मीकि तीरथ के पास लव-कुश मंदिर का केजरीवाल का नया लॉलीपॉप
अब ज़रा इस लव-कुश और माता सीता के मंदिर वाले असली खेल को समझिए। ये कोई आस्था या भक्ति का मामला है ही नहीं, ये तो खालिस वोटबैंक की राजनीति का एक बहुत ही गंदा और घटिया ब्लूप्रिंट है।
पंजाब के अंदर आज आम आदमी पार्टी की ज़मीन जिस तरह से खिसक रही है, वहां की जनता जिस तरह से इनके झूठे वादों और खोखले दावों से तंग आ चुकी है, उसे देखकर केजरीवाल के पसीने छूटे हुए हैं।
पंजाब का हिंदू वोटर इनसे छिटक चुका है। अब अपनी उस डूबती हुई चुनावी नैया को पार लगाने के लिए इस आदमी ने धर्म का वो कार्ड खेला है, जिसे ये जीवन भर पानी पी-पी कर गरियाता था।
अमृतसर में भगवान वाल्मीकि तीरथ स्थान पूरे देश के वाल्मीकि समाज और दलितों की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र है। केजरीवाल ने बड़ी चालाकी से उसी जगह के ठीक बगल में माता सीता और लव-कुश का मंदिर बनाने का दांव फेंका है।
इसका सीधा सा गणित ये है की एक तीर से दो शिकार किए जाएं- वाल्मीकि समाज (दलित वोट) को भी खुश कर लो और लव-कुश के नाम पर पंजाब के बचे-खुचे सवर्ण और आम हिंदुओं की आंखों में भी धूल झोंक दो।
ये आदमी हमारी आस्था को बस एक वोटिंग मशीन का बटन समझता है।
अरे भाई, जब तुम्हें पंजाब की जनता ने इतना भारी बहुमत दिया था, तब तुम्हें माता सीता की याद क्यों नहीं आई? आज जब चुनाव का वक्त नज़दीक आ रहा है, तो तुम मंदिर का लॉलीपॉप बांटने निकल पड़े हो?
मैं तो आज पंजाब और पूरे देश के सनातनियों की तरफ से अरविंद केजरीवाल से सीधा सवाल पूछता हूँ- अरे केजरीवाल! अगर तुम्हारी वो पुरानी थ्योरी सच्ची थी की “मंदिर बनने से देश का विकास रुक जाता है”, तो फिर आज तुम पंजाब का विकास क्यों रोक रहे हो?
उसी वाल्मीकि तीरथ के पास कोई वर्ल्ड क्लास अस्पताल क्यों नहीं बनवा देते? वहां कोई बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी क्यों नहीं खड़ी कर देते?
तुम्हारा वो विकास का सारा ज्ञान आज हिंदू और दलित वोटबैंक के सामने आकर कैसे फुस्स हो गया? सच तो ये है की तुमने हमेशा हिंदुओं को बेवकूफ समझा है, पर अब तुम्हारा ये पाखंड सरेआम नंगा हो चुका है।
तीर्थ यात्रा से लेकर शिव भजन तक, केजरीवाल के वो सारे नए झूठे वादे जो सिर्फ हिंदू वोट झटकने के लिए हैं
अगर आपको लग रहा है की केजरीवाल का ये पाखंड सिर्फ अमृतसर के लव-कुश मंदिर तक सीमित है, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं।
जून 2026 में पंजाब के अंदर इस आदमी ने हिंदू वोटों को लूटने के लिए जो जाल बिछाया है, उसे देखकर तो गिरगिट भी शरमा जाए की कोई इंसान इतनी जल्दी अपने रंग कैसे बदल सकता है।
ज़रा इस बहरूपिए की नई ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ का ड्रामा देखिए। अचानक से इस योजना के अंदर हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा-वृंदावन, माता नैना देवी, और सालासर-खाटू श्याम जैसे हमारे पवित्र हिंदू तीर्थ स्थानों को जोड़ दिया गया है।
ये क्या साबित करना चाहता है? ये मुफ्त की यात्राओं का लालच देकर सोचता है की हिंदू समाज इसके उन पुराने पापों को भूल जाएगा जब इसने राम मंदिर का मज़ाक उड़ाया था!
जो आदमी कल तक राम को वनवास भेजने वालों के साथ खड़ा था, वो आज रामभक्तों को अयोध्या और मथुरा भेजने का ठेकेदार बन बैठा है। ये हिंदुओं की आस्था के साथ भद्दा मज़ाक नहीं तो और क्या है?
और नौटंकी यहीं खत्म नहीं होती भाई। अभी अमृतसर में इन्होंने ‘एक शाम भगवान शिवजी के नाम’ नाम से एक बहुत बड़ा कार्यक्रम करवाया।
अब इनकी सरकार का प्लान है की पंजाब के पूरे 22 जिलों में ऐसे शिव भजनों के कार्यक्रम सरकारी खर्चे पर करवाए जाएंगे।
साथ ही 1 अगस्त से पूरे पंजाब में ‘हमारे राम’ नाम के एक नाटक का मंचन कराने की घोषणा कर दी गई है। मतलब, जो लोग कल तक टीवी पर बैठकर कहते थे की पूजा-पाठ और मंदिरों से कुछ नहीं होता, वो आज सरकारी खर्चे पर शिव भजन गा रहे हैं और रामलीला करवा रहे हैं।
पटियाला के ऐतिहासिक श्री काली माता मंदिर को भी अचानक से 80 करोड़ रुपये का फंड दे दिया गया है ताकि उसका रिनोवेशन हो सके।
क्या आपको लगता है की केजरीवाल के दिल में रातों-रात काली माता, भगवान शिव या रामलला के लिए कोई भक्ति जाग उठी है? बिल्कुल नहीं!
ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि इसे पता चल गया है की पंजाब में अब बिना हिंदू वोट के इसकी दाल गलने वाली नहीं है।
ज़रा याद कीजिए इसी की पार्टी के उन नेताओं को जो मंच पर खड़े होकर हज़ारों लोगों को कसमें खिलाते थे की “मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को भगवान नहीं मानूंगा।”
जिस पार्टी के अंदर हमारे देवी-देवताओं को इतनी भद्दी गालियां दी जाती हों, उस पार्टी का मुखिया आज अगर शिव भजन गा रहा है और राम का नाटक करवा रहा है, तो समझ लीजिए की ये सियासत का सबसे खौफनाक और घिनौना रूप है। ये सिर्फ और सिर्फ एक ‘चुनावी हिंदू’ का नंगा नाच है।
सनातन समाज अब नहीं आएगा इन चुनावी ठगों के झांसे में, और इस दोगली सियासत का होगा पूर्ण बहिष्कार
अब वक्त आ गया है की हम सनातनी इस कड़वे सच को पूरी तरह से समझ लें। हम हिंदुओं की सबसे बड़ी कमज़ोरी यही रही है की हम बहुत जल्दी पिघल जाते हैं।
कोई भी सियासी ठग चुनाव से चार दिन पहले अपने माथे पर तिलक लगा ले, जनेऊ पहन ले, या किसी मंदिर में जाकर कैमरों के सामने सिर झुका ले, तो हम भूल जाते हैं की इसी आदमी ने कल हमारे धर्म को कितनी गालियां दी थीं।
लेकिन अब ये सब और नहीं चलेगा। अरविंद केजरीवाल जैसे नेता सिर्फ और सिर्फ सत्ता के भूखे भेड़िए हैं। इन्हें ना तो राम से कोई प्यार है, ना माता सीता से और ना ही वाल्मीकि जी से।
इन्हें प्यार है तो बस राम के नाम पर मिलने वाले उन करोड़ों वोटों से जो इन्हें सत्ता की गद्दी तक पहुंचा सकते हैं।
जो आदमी राम मंदिर बनने का विरोध कर सकता है और फिर बेशर्मी से उसी रामलला के दरबार में जाकर वोट मांग सकता है, वो किसी का सगा नहीं हो सकता।
ऐसे लोगों के लिए धर्म बस एक बिज़नेस है और आस्था एक चुनावी टूल। आज सनातन समाज को एकजुट होकर इस पाखंडी और दोगली राजनीति को लात मारने का वक्त आ गया है।
हमें इन ‘मौसमी हिंदुओं’ और ‘चुनावी ठगों’ को इनकी असली औकात दिखानी ही होगी। जो लोग चुनाव देखकर अपनी चादर बदलते हैं, जो लोग वोट खिसकता देखकर अस्पताल से सीधे मंदिर पर आ जाते हैं, वे इस देश और सनातन धर्म के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।
हम रामभक्त हैं, और हमारे लिए राम कोई चुनावी जुमला नहीं, बल्कि हमारे प्राण हैं। हमें उन लोगों का साथ देना है जो सीना ठोककर और दिल से सनातनी हैं, ना की उन बहरूपियों का जो चुनाव की तारीख देखकर अपना जनेऊ और रामनामी चादर बाहर निकालते हैं।
अब वक्त आ गया है की केजरीवाल जैसे चुनावी ठगों का पूरी तरह से राजनीतिक बहिष्कार किया जाए, इन्हें सत्ता से बाहर फेंक दिया जाये।
इसी में सनातन की भलाई है और इसी में राष्ट्र की भलाई है!
जय श्री राम! भारत माता की जय!
