'Waqf' के गुंडाराज को भी पीछे छोड़ गई कांग्रेस, 'प्रियंका गाँधी-वाड्रा' की तिजोरी भरने के लिए 90 वर्षीय मुस्लिम महिला पर कहर, गुंडे भेज कर हथियाई 4 एकड़ जमीन

‘Waqf’ के गुंडाराज को भी पीछे छोड़ गई कांग्रेस, ‘प्रियंका गाँधी-वाड्रा’ की तिजोरी भरने के लिए 90 वर्षीय मुस्लिम महिला पर कहर, गुंडे भेज कर हथियाई 4 एकड़ जमीन

आज इस देश की राजनीति का सबसे गंदा और घिनौना सच हमारे सामने आ चुका है। आप देखते होंगे की ये कांग्रेस पार्टी के नेता दिन-रात एक ही रटा-रटाया डायलॉग मारते हैं की “मुसलमानों पर ज़ुल्म हो रहा है, हम अल्पसंख्यकों के सबसे बड़े मसीहा हैं, हम उनका हक़ बचाएंगे।”

लेकिन मेरे भाई, जब बात करोड़ों की ज़मीन और इस ‘गाँधी-वाड्रा खानदान’ की तिजोरी भरने की आती है, तो ये सारी ‘मोहब्बत की दुकान’ रातों-रात छू-मंतर हो जाती है।

आज जो कांड उत्तराखंड में हुआ है, उसने इस गांधी-वाड्रा परिवार के ‘ज़मीन हड़पो’ मॉडल का ऐसा पर्दाफाश किया है की हर उस मुसलमान को शर्म आनी चाहिए जो इन्हें अपना मसीहा मानकर वोट देता है।

तुम कांग्रेस वाले काहे के हमदर्द हो? वोट लेने के लिए तुम मुसलमानों के पैरों में गिर जाते हो, लेकिन जब तुम्हें उत्तराखंड में एक 4 एकड़ की बेशकीमती ज़मीन नज़र आती है, तो तुम्हें ये नहीं दिखता की उस ज़मीन पर एक 90 साल की बुजुर्ग और बेबस मुस्लिम महिला रह रही है!

उस 90 साल की बुढ़िया को रात के अंधेरे में धमकाने के लिए, उसे उसके ही घर से बाहर फेंकने के लिए ये पूरी की पूरी कांग्रेसी मशीनरी भूखे भेड़ियों की तरह टूट पड़ती है।

कांग्रेस और उसके इस शाही परिवार का काम करने का तरीका बिल्कुल वैसा ही है जैसा इस देश में ‘वक्फ बोर्ड’ (Waqf Board) का है।

वक्फ की तरह कांग्रेस भी यही समझती है की इस देश की सारी बेशकीमती ज़मीनें, सारे फार्म हाउस और सारे रिसॉर्ट इनके बाप-दादाओं के हैं।

किच्छा के 4 एकड़ फार्म हाउस पर कांग्रेस की ‘डकैती’, गाँधी-वाड्रा परिवार की भूख के आगे खून के आंसू रोती 90 साल की बेबस ‘नसरीन’

अब ज़रा इस पूरे ज़मीन घोटाले के उस सच को समझिए। ये मामला अभी बिल्कुल ताज़ा है, जुलाई 2026 का! उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में एक बहुत ही पॉश और प्राइम लोकेशन है- किच्छा (Kichha)।

इसी किच्छा इलाके में एक बहुत ही बेशकीमती 4 एकड़ की ज़मीन है, जिसे ‘खान फार्म एस्टेट’ (Khan Farm Estate) कहा जाता है।

इस ज़मीन की जो असली पट्टेदार (Lease Holder) मालकिन थीं, उनका नाम कुलसुम खान था। कुलसुम खान ने अपनी पूरी ज़िंदगी इसी ज़मीन पर गुज़ारी, लेकिन दिसंबर 2025 में बुढ़ापे और बीमारी के चलते उनका निधन हो गया।

अब ज़ाहिर सी बात है, जब कोई इंसान मरता है तो उसकी पुश्तैनी ज़मीन पर उसके सगे भाई-बहनों या बच्चों का हक़ होता है। कुलसुम खान की एक सगी बहन हैं- नसरीन खान।

नसरीन खान की उम्र 90 साल है! एक 90 साल की बुज़ुर्ग औरत, जिसकी हड्डियां कमज़ोर हो चुकी हैं, जो शायद ठीक से चल-फिर भी नहीं सकती। जिसके जीवन के अब गिने-चुने दिन बचे हैं।

वो अपनी बहन की मौत के बाद उस घर में रह रही है, यही उसका पुश्तैनी ठिकाना है। उस बेचारी बुज़ुर्ग महिला को तो इस उम्र में आराम, सेवा और सहारे की ज़रूरत है।

लेकिन इस जालिम और ज़मीन की भूखी कांग्रेस पार्टी ने उस 90 साल की बुज़ुर्ग के आंसुओं को एक तमाशा बनाकर रख दिया।

उस औरत को आज अपने बुढ़ापे में अपने परवरदिगार को याद करने के बजाय कोर्ट-कचहरी के धक्के खाने पड़ रहे हैं और रात-रात भर खौफ के साये में जागना पड़ रहा है।

उसे डर है की कब कोई कांग्रेसी गुंडा दरवाज़ा तोड़कर अंदर घुसेगा और उसे उसके ही घर से बाहर फेंक देगा। क्या यही तुम्हारी मोहब्बत की दुकान है?

एक 90 साल की मुस्लिम औरत के घर पर कब्ज़ा करने के लिए तुम्हारी लार टपक रही है और तुम पूरे देश में संविधान बचाने का ढोंग रचते हो! शर्म से डूब मरना चाहिए इन कांग्रेस नेताओं और ऐसे खानदान को।

दौलत में अंधी प्रियंका गाँधी की ननद ‘सायरा वाड्रा’ की एंट्री, और 4 एकड़ ज़मीन हड़पने का फर्जी ‘कानूनी ड्रामा’

अब इस कहानी में वो ट्विस्ट आता है जिसने पूरे देश के पैरों तले ज़मीन खिसका दी। कुलसुम खान की मौत के बाद अचानक से इस खान फार्म एस्टेट में एक ‘शाही’ परिवार की एंट्री होती है।

ये एंट्री किसी और की नहीं, बल्कि ‘सायरा वाड्रा’ (Saira Vadra) की होती है। अब आप पूछेंगे की ये सायरा वाड्रा कौन है?

अरे भाई, ये सायरा वाड्रा रॉबर्ट वाड्रा की सगी बहन हैं और तुम्हारी उस ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा देने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा की सगी ननद हैं!

जैसे ही कुलसुम खान की आंखें बंद हुईं, ये सायरा वाड्रा और उनका पति सिकंदर आलम गिद्ध की तरह उस 4 एकड़ की ज़मीन पर झपट पड़े।

इन्होंने अचानक से एक कागज़ निकाला और दावा ठोक दिया की “कुलसुम खान तो मरने से पहले 2024 में एक वसीयत (Will) के ज़रिए ये पूरी की पूरी ज़मीन हमारे नाम कर गई थीं!”

ज़रा इस मक्कारी को देखिए! एक औरत जिसकी सगी 90 साल की बहन ज़िंदा है, जो उसके साथ रह रही है, वो अपनी पुश्तैनी ज़मीन अपनी सगी बहन को ना देकर अचानक से दिल्ली के इस VIP वाड्रा खानदान के नाम क्यों कर जाएगी?

ये कैसी चमत्कारिक वसीयत है जो ठीक मौत के बाद ही बाहर निकल कर आती है?

नसरीन खान कोई बेवकूफ नहीं थीं। उस 90 साल की बुज़ुर्ग ने हार नहीं मानी। उसने डंके की चोट पर इस फर्जीवाड़े का विरोध किया और सीधे कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

मामला सिविल कोर्ट में गया। अदालत ने जब ये पूरा झोलझाल देखा, तो कोर्ट ने साफ आदेश दे दिया की इस ज़मीन पर ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनी रहेगी।

अदालत ने सख्त हुक्म दिया की जब तक इस संदिग्ध वसीयत की सच्चाई साबित नहीं हो जाती और कोर्ट का आखिरी फैसला नहीं आ जाता, तब तक 90 साल की नसरीन खान को इस घर से कोई बेदखल नहीं कर सकता।

अगर कोई आम इंसान होता, तो वो कोर्ट के आदेश के सामने सिर झुका कर फैसले का इंतज़ार करता। लेकिन भाई, ये तो ‘वाड्रा परिवार’ है!

ये वो लोग हैं जो खुद को इस देश के संविधान, पुलिस और अदालतों से ऊपर का राजा मानते हैं। इन्हें लगा की कोर्ट-कचहरी के चक्कर में तो ज़मीन हाथ से निकल जाएगी।

जब इनका वो फर्जी कानूनी कागज़ों वाला ड्रामा और ‘सिंडिकेट’ फेल हो गया, तो इन्होंने वो रास्ता अपनाया जिसमें ये सबसे ज़्यादा माहिर हैं- गुंडागर्दी, खौफ और सत्ता का नंगा नचा!

रात के अंधेरे में कांग्रेस विधायक और 100 गुंडों का तांडव, 90 साल की बुजुर्ग को घर से निकालने की सबसे नीच कांग्रेसी गुंडागर्दी

जब सीधे तरीके से घी नहीं निकला, तो प्रियंका गांधी की ननद और इस पूरे कांग्रेसी इकोसिस्टम ने ज़मीन हड़पने का अपना ‘ऑपरेशन गुंडाराज’ शुरू कर दिया।

जुलाई 2026 के पहले हफ्ते की वो खौफनाक रात (बुधवार की रात), जिसने देवभूमि उत्तराखंड की पवित्रता को कलंकित कर दिया।

रात का अंधेरा था। 90 साल की नसरीन खान अपने घर में अकेली और बेबस थी। तभी अचानक उनके घर के बाहर गाड़ियों का एक बड़ा सा काफिला आकर रुकता है।

उस काफिले में से कौन उतरता है? किच्छा का स्थानीय कांग्रेस विधायक ‘तिलक राज बेहड़’! और वो अकेला नहीं आया था। उसके साथ 100 से ज़्यादा कांग्रेस के गुंडे और पार्टी कैडर के लोग थे।

अरे बेशर्मों! एक 90 साल की बेसहारा औरत को डराने के लिए तुम्हें 100 गुंडे लेकर जाने पड़े? विधायक तिलक राज बेहड़ ने वहां पहुंचकर जो गुंडागर्दी का तांडव मचाया, वो सुनकर आपका खून खौल जाएगा। इन गुंडों ने उस घर को चारों तरफ से घेर लिया।

जब पुलिस वहां पहुंची तो इन कांग्रेसी गुंडों ने इतनी धौंस दिखाई की पुलिस वालों को गेट के बाहर ही रोक दिया।

विधायक और उसके गुंडों ने उस 90 साल की बुज़ुर्ग नसरीन खान को रात के अंधेरे में वो खौफनाक धमकियां दीं की वो बेचारी दहशत से कांप उठी।

उसे डराया गया की अगर उसने रातों-रात ये ज़मीन वाड्रा परिवार के नाम नहीं की, अगर उसने ये घर खाली नहीं किया, तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा।

ये कांग्रेसी माफिया उस औरत पर एक ‘झूठे हलफनामे’ (False Affidavit) पर साइन करने का दबाव बना रहे थे। ये लोग डरा रहे थे की या तो कागज़ पर साइन कर दे, वरना तुझे उठाकर बाहर फेंक देंगे।

हद तो तब हो गई जब इन गुंडों ने वहां ‘आत्मदाह’ का खौफनाक ड्रामा रचना शुरू कर दिया ताकि उस बुज़ुर्ग औरत पर साइकोलॉजिकल (Psychological) दबाव बनाया जा सके।

ज़रा इस पूरे खौफनाक मंज़र को अपने दिमाग में लाइए। एक राज्य जहाँ तुम्हारी सरकार नहीं है, जहाँ तुम सिर्फ एक विधायक हो, वहां तुम कोर्ट के स्टे (Stay Order) को रद्दी की तरह जूतों तले कुचलते हो!

तुम 100 लोग लेकर एक बुज़ुर्ग औरत के घर में आधी रात को घुस जाते हो। ये हिम्मत, ये अहंकार और ये गुंडागर्दी किसी आम विधायक की नहीं हो सकती।

अगर तिलक राज बेहड़ को ऊपर से किसी ‘VIP’ आका का आदेश नहीं होता, अगर उसे दिल्ली में बैठे उस कांग्रेस परिवार का संरक्षण नहीं होता, तो क्या उसकी इतनी औकात थी की वो देवभूमि में ऐसा नंगा नाच करता? बिल्कुल नहीं!

ये पूरी की पूरी गुंडागर्दी उस ‘लैंड ग्रैब सिंडिकेट’ का हिस्सा थी जिसे दिल्ली से ऑपरेट किया जा रहा था। ये कांग्रेस का वो असली और डरावना चेहरा है जो अल्पसंख्यकों की हमदर्दी का बुर्का पहनकर अंदर ही अंदर उनकी ज़मीनें और उनका खून चूस रहा है।

सायरा वाड्रा तो सिर्फ एक मुखौटा, असली मास्टरमाइंड ‘प्रियंका गाँधी’ और ‘रॉबर्ट वाड्रा’ का ये ‘लैंड ग्रैब सिंडिकेट’

अब ज़रा इस पूरे खेल के उस मास्टरमाइंड की तरफ नज़र डालते हैं, जो दिल्ली में बैठकर इस पूरी डकैती का रिमोट कंट्रोल चला रहा है।

जब इस खौफनाक गुंडागर्दी का पर्दाफाश हुआ, तो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके डंके की चोट पर जो खुलासे किए, उसने इस पूरी ‘मोहब्बत की दुकान’ की नींव हिला कर रख दी।

प्रदीप भंडारी ने कैमरे के सामने पूरे देश को बताया की ये जो सायरा वाड्रा है ना, ये तो सिर्फ एक ‘मुखौटा’ है। एक मोहरा है जिसे आगे करके ज़मीन हड़पी जा रही है।

इस पूरे खौफनाक षड्यंत्र के पीछे जो असली दिमाग है, जो असली मास्टरमाइंड है, वो कोई और नहीं बल्कि खुद प्रियंका गांधी वाड्रा और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा हैं!

ज़रा अपना लॉजिक लगाइए! उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहाँ कांग्रेस सत्ता में नहीं है, वहां एक कांग्रेस का विधायक रात के अंधेरे में 100 गुंडों की फौज लेकर किसी के घर पर धावा बोल दे?

पुलिस को गेट पर रोक दे? कोर्ट के स्टे (Stay Order) को फाड़ दे? क्या एक आम कांग्रेसी कार्यकर्ता या किसी मामूली ननद की इतनी औकात हो सकती है? बिल्कुल नहीं!

ये प्रियंका गांधी का वो VVIP रसूख और उनका खौफनाक अहंकार ही है, जिसने उस विधायक को इतनी हिम्मत दी की वो एक 90 साल की मुस्लिम महिला की छाती पर जाकर चढ़ गया।

प्रियंका गांधी दिन-रात यूपी और पूरे देश में घूम-घूम कर नारा लगाती हैं- “लड़की हूं, लड़ सकती हूं।” अरे! तुम्हारी इस खोखली और बिकाऊ नारीवादी नौटंकी का नंगा सच आज पूरा देश देख रहा है।

तुम्हारा वो सारा का सारा ‘मुस्लिम प्रेम’ और ‘अल्पसंख्यक अधिकार’ का झुनझुना सिर्फ और सिर्फ वोट लेने तक सीमित है।

जब तुम्हें अपने परिवार की तिजोरी भरनी होती है, जब 4 एकड़ का प्राइम फार्म हाउस हथियाना होता है, तब तुम उसी मुसलमान को, उसी बेबस औरत को अपनी सत्ता के जूतों से कुचलने में एक सेकंड भी नहीं लगातीं।

बीकानेर से गुरुग्राम तक किसानों का खून चूसने वाला रॉबर्ट वाड्रा, ज़मीनें लूटना ही इस वाड्रा परिवार का पुश्तैनी धंधा

अगर किसी सीधे-सादे इंसान को लग रहा है कि वाड्रा परिवार पर ये ज़मीन हड़पने का आरोप पहली बार लगा है, तो वो इस देश के इतिहास का सबसे बड़ा मूर्ख है।

अरे भाई, ज़मीनें लूटना, किसानों का खून चूसना और रातों-रात अरबों की प्रॉपर्टी हथियाना… ये कोई आज की बात नहीं है। ये तो इस ‘दामाद जी’ का पुश्तैनी पारिवारिक धंधा है!

ज़रा पीछे मुड़कर राजस्थान के उस बीकानेर घोटाले (Bikaner Land Scam) को याद कीजिए। वहां महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के पास गरीब किसानों की ज़मीनें थीं।

वो बेचारे सीधे-सादे किसान थे जिन्हें सरकार ने विस्थापित किया था। वहां अचानक से रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी Skylight Hospitality की एंट्री होती है।

जो ज़मीनें उन गरीब और बेसहारा किसानों की थीं, उन्हें फर्जी कंपनियों और फर्जी चेक के ज़रिए कौड़ियों के भाव खरीद लिया गया।

और बाद में उसी ज़मीन को करोड़ों-अरबों रुपये में बेचकर इस वाड्रा परिवार ने अपनी तिजोरियां भर लीं। उन गरीब किसानों को तो पता भी नहीं चला की ‘गांधी परिवार के दामाद’ ने उन्हें कैसे लूट लिया।

और ये डकैती सिर्फ राजस्थान तक नहीं रुकी। हरियाणा का वो ‘गुरुग्राम सीएलयू (CLU) घोटाला’ याद है ना? जब वहां हुड्डा की कांग्रेसी सरकार थी, तो दामाद जी ने गुड़गांव के शिकोहपुर गांव में 3.5 एकड़ ज़मीन महज़ 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी।

और फिर? सत्ता के खौफनाक जादू से, रातों-रात हुड्डा सरकार ने उस ज़मीन का ‘कमर्शियल लाइसेंस’ (CLU) पास कर दिया। और कुछ ही महीनों बाद, वाड्रा साहब ने 7.5 करोड़ की वही ज़मीन ‘डीएलएफ’ (DLF) जैसी बड़ी कंपनी को 58 करोड़ रुपये में बेच दी!

जब ये परिवार देश के गरीब किसानों की ज़मीनें निगल सकता है, तो फिर उत्तराखंड के किच्छा में एक 90 साल की बेसहारा औरत की 4 एकड़ ज़मीन इनके लिए क्या चीज़ है?

ये गाँधी-वाड्रा परिवार का लैंड ग्रैब सिंडिकेट आज से नहीं, दशकों से इस देश को दीमक की तरह चाट रहा है।

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