इस देश का ये वामपंथी इकोसिस्टम इतना शातिर और सड़ा हुआ है की ये किसी भी लाश पर, किसी भी दर्द पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने पहुंच जाता है।
जब इस देश में सीएए (CAA) आया था, तो इन्होंने संविधान बचाने के नाम पर ‘शाहीन बाग’ का तंबू गाड़ दिया और दिल्ली को दंगों की आग में झोंक दिया।
जब कृषि कानून आए, तो किसानों के नाम पर इन्होंने लाल किले पर उपद्रव मचा डाला। और अब जुलाई 2026 में क्या हो रहा है?
नीट (NEET) परीक्षा में जो धांधली हुई, जिन होनहार छात्रों का दिल टूटा, उस असली और जायज़ दर्द को हाईजैक करने के लिए ये पूरे के पूरे नीच मानसिकता वाले सूअर दिल्ली के जंतर-मंतर पर उतर आए हैं।
शुरुआत में देश के आम आदमी को लगा की शायद ये जो ‘CJP’ (तथाकथित कॉकक्रोच जनता पार्टी) नाम का ग्रुप है, ये सच में छात्रों के हक़ की बात कर रहा है।
लगा की अभिजीत दीपके जैसे लोग शायद शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। लेकिन भाई साहब, कुछ ही दिनों के अंदर जंतर-मंतर के इस प्रोटेस्ट का जो नंगा सच पूरे देश के सामने आया है, उसने हर सच्चे हिंदुस्तानी की आँखें खोल कर रख दी हैं।
अब जंतर-मंतर का ये मंच कोई छात्रों का मंच नहीं रहा! यहाँ अब नीट के कट-ऑफ (Cut-off), काउंसलिंग या ग्रेस मार्क्स की कोई बात नहीं होती।
ये तो पूरी तरह से उन अर्बन नक्सलियों, कम्युनिस्टों और सनातन-विरोधियों का ‘अड्डा’ बन चुका है, जिनका इकलौता मकसद भारत की सरकार को अस्थिर करना और खुलेआम हिंदू धर्म और हमारे आराध्यों को गालियां देना है।
जो लोग मंच पर माइक पकड़कर भाषण दे रहे हैं, उनका किसी मेडिकल परीक्षा या शिक्षा से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
ये वो लोग हैं जिन्हें विदेशी फंडिंग से सिर्फ और सिर्फ भारत में एक गृहयुद्ध और अराजकता फैलाने का ठेका मिला हुआ है।
छात्रों का भविष्य तो इन्होंने बहुत पहले ही वामपंथी बाज़ार में बेच खाया है।
स्टैंड अप कॉमेडी की आड़ में भगवान राम और माँ सीता का सरेआम अपमान, ‘कुणाल कामरा’ जैसे नीचों की स्टेज से गिरी हुई भाषणबाज़ी
“BJP wale Sita ke pati ka naam le leke kaam karti hai”
The moment Macrohard @kunalkamra88 said this, Abhijeet Dipke with 786 other cockroaches started laughing & clapping.
You don’t hate them enough pic.twitter.com/NsEkvKHY1L
— BALA (@erbmjha) July 15, 2026
अगर किसी को लग रहा है की मैं इन ‘छात्र नेताओं’ पर यूं ही भड़क रहा हूं, तो ज़रा जंतर-मंतर के मंच पर 15 जुलाई को हुए उस भाषणबाज़ी को देख लीजिए।
जब इन वामपंथियों का ये तथाकथित प्रोटेस्ट फ्लॉप होने लगा, जब वहां भीड़ नहीं जुटी, तो इन्होंने अपना असली एजेंडा बाहर निकाल लिया।
छात्रों को मोटिवेट करने के नाम पर इन्होंने किसे बुलाया? उस कुणाल कामरा को, जो स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर सिर्फ और सिर्फ इस देश की सरकार, सेना और सनातन धर्म को गालियां देने का धंधा चलाता है।
कुणाल कामरा वहां आता है, माइक पकड़ता है, और नीट (NEET) के छात्रों की बात करने के बजाय सीधे हमारे भगवान श्री राम और माता सीता को अपनी गंदी राजनीति में घसीट लेता है।
वो बेशर्म आदमी मंच से हंसते हुए तंज कसता है- “बीजेपी वाले सीता के पति का नाम ले-लेकर, नीता के पति का काम कर रहे हैं।”
अरे गद्दारों! ये क्या है? क्या शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए तुम्हें हमारे भगवान राम और माता सीता का अपमान करना ज़रूरी था?
क्या तुम्हारी कॉमेडी की दुकान हिंदू देवी-देवताओं को बीच में लाए बिना नहीं चलती? तुम सरकार को गाली दो, प्रशाशन को गाली दो, किसी को कोई दिक्कत नहीं है।
लेकिन इस देश के करोड़ों सनातनियों की आस्था, हमारे आराध्य भगवान राम और माता सीता के पवित्र नाम का मज़ाक उड़ाने का हक तुम्हें किसने दिया?
और सबसे बड़ा सवाल ये है की क्या कुणाल कामरा की इतनी औकात है की वो किसी दूसरे मज़हब के ‘पैगंबर’ या उनके भगवान का नाम लेकर ऐसी घटिया कॉमेडी कर सके?
अगर उसने यही तंज किसी और मज़हब पर कसा होता, तो अब तक ‘सर तन से जुदा’ के नारे लग चुके होते और वो किसी अंधेरे कोने में अपनी जान की भीख मांग रहा होता!
लेकिन क्योंकि उसे पता है की हिंदू सहिष्णु (Tolerant) है, हिंदू बस सोशल मीडिया पर बायकॉट करेगा और भूल जाएगा, इसलिए वो हमारे धर्म को बहुत आसानी से अपनी कॉमेडी का टूल बना लेता है।
ये स्टैंड-अप कॉमेडियन नहीं, ये इस वामपंथी टूलकिट के वो मोहरे हैं जिन्हें हिंदू धर्म को नीचा दिखाने के लिए विदेशों से पैसा मिलता है।
हिन्दू देवी देवताओं का अपमान और सुप्रीम कोर्ट पर भगवा झंडा वाला तंज, कुणाल कामरा के पुराने ‘पापों’ का काला इतिहास
अब ज़रा इस कुणाल कामरा का वो पुराना इतिहास खंगाल कर देखिए, जिससे आपको समझ आ जाएगा की CJP और अभिजीत दीपके ने इसे जंतर-मंतर पर क्यों बुलाया था।
कुणाल कामरा कोई अचानक से भटका हुआ इंसान नहीं है, ये एक आदतन अपराधी (Habitual Offender) है जिसका पूरा का पूरा करियर ही इस देश की संस्थाओं और हिंदू धर्म का मज़ाक उड़ाने पर टिका हुआ है।
याद है आपको साल 2020 का वो मंज़र? जब इसी कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को सरेआम गालियां दी थीं।
इस आदमी की नीचता इस हद तक गिर गई थी की इसने भारत के सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग की तस्वीर को ‘एडिट’ करके उसे भगवा रंग में रंग दिया था और उस पर बीजेपी का झंडा लहराता हुआ दिखा दिया था!
इस हरकत के बाद इस पर कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का केस भी चला, लेकिन हमारे देश के लिबरल वकीलों ने इसे बचा लिया।
और इसका हिंदू-विरोधी चेहरा तो 2022 में भी पूरी तरह से बेनकाब हुआ था। सितंबर 2022 में हरियाणा के गुरुग्राम में इसका एक बहुत बड़ा शो होने वाला था।
लेकिन विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के शेरों ने इसके उस शो को डंके की चोट पर बैन करवा दिया। क्यों? क्योंकि ये अपनी कॉमेडी स्क्रिप्ट में सरेआम हिंदू देवी-देवताओं का, हमारे भगवान शिव और हनुमान जी का मज़ाक उड़ाता था।
जब विश्व हिंदू परिषद ने इसे लात मारकर भगाया, तो इस बेशर्म ने एक खुला खत लिखकर हिंदुओं को ही गालियां देनी शुरू कर दीं। इसने खुद को ‘सच्चा हिंदू’ बताते हुए सावरकर का अपमान किया।
तो भाई, ऐसे इंसान को, जिसका पूरा ट्रैक रिकॉर्ड ही सनातन धर्म को गालियां देने का रहा है, उसे तुम ‘छात्रों के आंदोलन’ में बुला रहे हो?
इससे साफ ज़ाहिर होता है की CJP के मंच पर बैठे लोगों का NEET या शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। ये तो बस उसी पुराने टुकड़े-टुकड़े गैंग की एक नई ब्रांच है, जो छात्रों की भीड़ का इस्तेमाल करके देश में अपना हिंदू-विरोधी एजेंडा चलाना चाहती है।
जर्मनी में बैठे वामपंथी दलाल ‘जर्मन शेफर्ड’ ध्रुव राठी का वीडियो कॉल और विदेशी टूलकिट से चल रहा CJP का ये खौफनाक एजेंडा
अगर आपको अभी भी लग रहा है की ये CJP कोई भारत के आम छात्रों का संगठन है, तो ज़रा इस ‘जर्मन शेफर्ड’ वाले नेक्सस को ध्यान से देखिए।
जब आंदोलन ज़मीन पर फ्लॉप होने लगा, तो 5 जुलाई 2026 को इस CJP के मुखिया अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर के मंच से क्या किया?
उसने सीधे जर्मनी में बैठे उस वामपंथी और लिबरल प्रोपेगेंडाबाज़ ‘ध्रुव राठी’ को लाइव वीडियो कॉल लगा दिया!
जी हां! वही ध्रुव राठी जो जर्मनी के ऐश-ओ-आराम में बैठकर, विदेशी नागरिकता लेकर दिन-रात भारत की चुनी हुई सरकार, भारत के सिस्टम और भारत की न्यायपालिका के खिलाफ ज़हर उगलने वाली वीडियो बनाता है।
मंच से ध्रुव राठी ने इस आंदोलन को अपना ‘पूर्ण समर्थन’ देने का ऐलान कर दिया। अरे भाई, जर्मनी में बैठा एक यूट्यूबर भारत के शिक्षा आंदोलन को क्यों कंट्रोल कर रहा है?
और कहानी सिर्फ कॉल तक नहीं रुकी। इस पूरे नेक्सस का सबसे नंगा सच तो तब सामने आया जब ध्रुव राठी की वीडियो स्क्रिप्ट लिखने वाली उसकी खासमखास ‘विजेता दहिया’ अचानक से इस CJP पार्टी की ‘प्रवक्ता’ बनकर जंतर-मंतर पर बैठ गई!
ज़रा इस क्रोनोलॉजी और इस टूलकिट को समझिए। जर्मनी में स्क्रिप्ट तैयार होती है। वहां से फंडिंग और एजेंडा सेट होता है।
फिर भारत में बैठे इन ‘अभिजीत दीपके’ जैसे मोहरों को आदेश दिया जाता है की तुम छात्रों को भड़काकर जंतर-मंतर पर बैठाओ।
फिर ध्रुव राठी की टीम (विजेता दहिया) आकर उस मंच को हाईजैक कर लेती है। ये कोई छात्रों का प्रदर्शन नहीं है मेरे भाई! ये सीधे-सीधे विदेशी ताकतों, जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों और ध्रुव राठी के उस पूरे सिंडिकेट द्वारा चलाया जा रहा एक ‘डिजिटल आतंकवाद’ है।
इन्हें भारत के गरीब छात्रों से कोई मतलब नहीं है। इन्हें बस इस बात का दर्द है की 2024 के लोकसभा चुनाव में ये विदेशी इकोसिस्टम मोदी सरकार को उखाड़ कर फेंक नहीं पाया।
इनकी सारी कोशिशें फेल हो गईं। इसलिए अब ये 18-20 साल के मासूम छात्रों को मोहरा बनाकर भारत की सड़कों पर खून-खराबा और शाहीन बाग जैसी अराजकता फैलाना चाहते हैं।
स्वरा भास्कर से लेकर दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड उमर खालिद के बाप तक, जंतर मंतर पर उतरा पूरा का पूरा टुकड़े टुकड़े गैंग
अब ज़रा इस नौटंकी के उस चेहरे को देखिए जो ये साबित करता है की ये मंच छात्रों का नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े गद्दारों का डंपिंग ग्राउंड बन चुका है।
जंतर-मंतर पर नीट (NEET) के मुद्दे के नाम पर जो टेंट गाड़े गए हैं, वहां अचानक से कौन लोग प्रकट होने लगे? स्वरा भास्कर, प्रकाश राज, अरुंधति रॉय और कम्युनिस्ट नेता वृंदा करात!
अरे भाई, ज़रा अपना दिमाग लगाइए। इन लोगों का मेडिकल की पढ़ाई, नीट के कट-ऑफ या एजुकेशन सिस्टम से क्या लेना-देना है?
ये वो पक्के सनातन-विरोधी और वामपंथी चेहरे हैं जिन्हें भारत की हर उस चीज़ से नफरत है जो इस देश को मजबूत बनाती है।
स्वरा भास्कर और प्रकाश राज को तो बस एक माइक और एक बहाना चाहिए जहाँ खड़े होकर ये देश की चुनी हुई सरकार को गालियां दे सकें और हिंदू धर्म को नीचा दिखा सकें।
लेकिन भाई साहब, हद तो तब हो गई और मेरा खून तो तब खौल उठा, जब मैंने इस मंच पर एक ऐसे आदमी को भाषण देते हुए देखा जिसका नाम सुनकर ही हर दिल्ली वाले की रूह कांप जाती है।
वो आदमी था- एस.क्यू.आर. इलियास (S.Q.R. Ilyas)। जानते हैं ये कौन है? ये 2020 के दिल्ली हिंदू-विरोधी दंगों के मास्टरमाइंड और देशद्रोह के आरोप में तिहाड़ जेल में सड़ रहे ‘उमर खालिद’ का बाप है!
ज़रा सोचिए इस खौफनाक साज़िश को! जिस उमर खालिद ने दिल्ली की सड़कों पर आग लगवाई, हिंदुओं का कत्लेआम करवाया, ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारे लगाने वालों का साथ दिया, आज उसका बाप जंतर-मंतर पर खड़े होकर हमारे देश के छात्रों को ‘शिक्षा’ और ‘भविष्य’ का ज्ञान दे रहा है?
क्या इस देश का हिंदू इतना बेवकूफ है जो इस क्रोनोलॉजी को नहीं समझेगा?
इनके साथ ही वहां चंद्रशेखर आज़ाद (भीम आर्मी) और लद्दाख से वो तथाकथित पर्यावरण प्रेमी सोनम वांगचुक भी पहुंच गए।
मतलब, जहाँ-जहाँ भी देश में कोई विवाद होता है, ये पूरा का पूरा ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ अपनी विदेशी टूलकिट लेकर वहां एक साथ लैंड कर जाता है।
ये छात्रों का दर्द बांटने नहीं आए हैं, ये उस दर्द के ज़ख्मों पर अपना वामपंथी नमक छिड़कने आए हैं ताकि ये देश कभी शांति से ना रह सके।
शिक्षा के नाम पर बिरयानी और समोसे का लंगर, जंतर-मंतर पर भीड़ जुटाने के लिए जुनैद जैसे मोहरों का फंडिंग खेल
अब ज़रा इस जंतर-मंतर वाले ड्रामे के उस ‘इकोनॉमिक’ और सबसे बिकाऊ चेहरे को देखिए, जो आपको सीधे 2020 के उस ‘शाहीन बाग’ की याद दिला देगा।
जब नीट (NEET) के असली और होनहार छात्रों को ये समझ आ गया की CJP का ये मंच छात्रों का नहीं बल्कि अर्बन नक्सलियों और सनातन-विरोधियों का अड्डा बन चुका है, तो वो छात्र अपने घरों को लौट गए।
अब अभिजीत दीपके और उसके विदेशी आकाओं के सामने सबसे बड़ी मुसीबत ये आ गई की जंतर-मंतर पर खाली पड़े टेंट को कैसे भरा जाए? कैमरा और मीडिया के सामने भीड़ कैसे दिखाई जाए?
और भाई साहब! यहीं से एंट्री होती है वामपंथियों और इस गद्दार इकोसिस्टम की उस पुरानी और टेस्टेड ‘बिरयानी टूलकिट’ की!
इस प्रोटेस्ट को ज़िंदा रखने के लिए अब वहां बाकायदा रोज़ाना लंगर चलाए जा रहे हैं। जुनैद नाम का एक शख्स हर दिन इस जंतर-मंतर के वामपंथी तंबू में कभी समोसे तो कभी बिरयानी के बड़े-बड़े डेग (पतीले) लेकर पहुंचता है।
Record Alert 🔥
This evening, Junaid and gang distributed 2,500+ samosas along with Mohabbat Ka Sharbat at the CJP protest.
Since it’s Sunday, the menu has been extra special. From morning till evening, they’ve served pastries, two special sweets, sandwiches, kachoris, samosas,… pic.twitter.com/gDhpoHMEWP
— Amit Kumar Sindhi (@AMIT_GUJJU) July 12, 2026
क्यों? क्या ये कोई धार्मिक लंगर या समाज सेवा है? बिल्कुल नहीं! ये मुफ्त की बिरयानी और समोसे इसलिए बांटे जा रहे हैं ताकि दिल्ली की सड़कों पर घूमने वाले, झुग्गियों में रहने वाले और मज़दूर वर्ग के उन लोगों को ‘मुफ्त के खाने’ का लालच देकर इस प्रोटेस्ट में लाकर बिठाया जा सके, जिन्हें ये भी नहीं पता की ‘NEET’ का फुल फॉर्म क्या होता है।
अब ज़रा अपना दिमाग लगाइए! जो जुनैद रोज़ हज़ारों लोगों का पेट बिरयानी और समोसे से भर रहा है, उसके पास ये अथाह पैसा आ कहां से रहा है? क्या कोई छात्र नेता अपनी जेब से रोज़ बिरयानी के डेग उठवा सकता है? बिल्कुल नहीं!
ये पैसा उसी विदेशी और जिहादी इकोसिस्टम का है जिसे शाहीन बाग और किसान आंदोलन के वक्त पानी की तरह बहाया गया था।
ये देश को तोड़ने का सपना देखने वाली उन विदेशी एनजीओ (NGOs) की फंडिंग है जो जुनैद और दीपके जैसे मोहरों के ज़रिए जंतर-मंतर तक पहुंचाई जा रही है।
इस बिरयानी और समोसे के लालच में आकर जो अनजान भीड़ जंतर-मंतर पर जुट रही है, ये वामपंथी और अर्बन नक्सल उसी भीड़ की तस्वीर खींचकर दुनिया भर के मीडिया में दिखाते हैं की “देखो, भारत की सरकार के खिलाफ कितने युवा खड़े हैं!”
शिक्षा सुधारने का झूठा नकाब और शाहीन बाग पार्ट टू बनाने की साज़िश, देश तोड़ने के लिए पूरा वामपंथी इकोसिस्टम तैयार
अगर आप ध्यान से देखेंगे, तो आपको समझ आएगा की ये जो जंतर-मंतर पर चल रहा है, ये कोई नया आंदोलन नहीं है।
ये बिल्कुल वही पुरानी रटी-रटाई वामपंथी स्क्रिप्ट है, जिसका ब्लूप्रिंट हमने सीएए (CAA) के दौरान ‘शाहीन बाग’ में और कृषि कानूनों के दौरान दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर देखा था।
इनका पैटर्न एकदम फिक्स है। देश में कोई भी एक मुद्दा ढूंढो- चाहे वो कोई कानून हो या कोई परीक्षा का पेपर लीक। फिर उस असली मुद्दे को हाईजैक कर लो।
वहां टेंट लगाओ, विदेशी फंडिंग से बिरयानी और पिज़्ज़ा के लंगर शुरू करो, बड़े-बड़े लाउडस्पीकर लगाओ और फिर उस मंच से देश की सरकार को ब्लैकमेल करना शुरू कर दो।
इन अर्बन नक्सलियों को नीट (NEET) के उन 24 लाख छात्रों के भविष्य से रत्ती भर भी कोई लेना-देना नहीं है। इनका असली दर्द और असली बौखलाहट कुछ और ही है।
इनका दर्द ये है की 2024 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा लिया, करोड़ों डॉलर की विदेशी फंडिंग झोंक दी, ध्रुव राठी जैसे दलालों से हज़ार वीडियो बनवा दिए, लेकिन फिर भी ये लोग मोदी सरकार को उखाड़ कर फेंक नहीं पाए। देश की सत्ता पर फिर से एक राष्ट्रवादी सरकार बैठ गई।
इसी हार की हताशा में ये वामपंथी अब पागल हो चुके हैं। ये किसी भी कीमत पर इस देश में एक गृहयुद्ध और सड़कों पर खून-खराबा चाहते हैं।
ये चाहते हैं की पुलिस इन छात्रों पर लाठीचार्ज करे, कोई दंगा भड़के, और ये फिर से इंटरनेशनल मीडिया में छाती पीट सकें की भारत में लोकतंत्र खत्म हो गया है।
अरे भाई, सरकार और एनआईए (NIA) को तुरंत इस बात की जांच करनी चाहिए की जंतर-मंतर पर ये जो हज़ारों रुपये के टेंट लगे हैं, जो रोज़ का लाखों का खर्चा हो रहा है, इसका पैसा आ कहां से रहा है?
कौन सी विदेशी एनजीओ (NGO) इस CJP को पर्दे के पीछे से फंड कर रही है? अगर इनके बैंक अकाउंट्स खंगाले गए, तो वही शाहीन बाग वाले विदेशी और जिहादी लिंक बाहर निकल कर आएंगे।
