'हिंदू' बच्चे की स्कूल डायरी में 'इस्लामिक जिहाद' का 'होमवर्क', अब्दुल गैंग अब 'स्कूलों' में चला रहे जबरन 'कलमा' रटा कर बच्चों का धर्म भ्रष्ट करने का डरावना जेहादी एजेंडा

‘हिंदू’ बच्चे की स्कूल डायरी में ‘इस्लामिक जिहाद’ का ‘होमवर्क’, अब्दुल गैंग अब ‘स्कूलों’ में चला रहे जबरन ‘कलमा’ रटा कर बच्चों का धर्म भ्रष्ट करने का डरावना जेहादी एजेंडा

ज़रा सोचिए, आप अपने छोटे से बच्चे को स्कूल भेजते हैं ताकि वो ABCD सीखे, मैथ और साइंस पढ़े। पर कैसा लगेगा आपको जब आपका 7 साल का मासूम बच्चा घर लौटकर स्कूल की डायरी दिखाए, और उसमें होमवर्क के नाम पर ‘कलमा’ और ‘सूरह फातिहा’ रटने का फरमान लिखा हो?

जी हाँ दोस्तों, ये कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है। ये इसी जुलाई 2026 में ओवैसी के गढ़ हैदराबाद में हुआ वो खौफनाक सच है, जिसने सेक्युलर स्कूलों के नाम पर चल रहे इस ‘एजुकेशनल जिहाद’ का पर्दाफाश कर दिया है।

ये ‘एजुकेशनल जिहाद’ वो खामोश और ज़हरीला तरीका है, जिसमें बिना कोई शोर मचाए, 7-8 साल के छोटे-छोटे बच्चों के कच्चे दिमाग में मजहबी ज़हर घोला जा रहा है।

ये लोग ‘कैच देम यंग’ यानी ‘बचपन में ही पकड़ लो’ वाले फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं।

आजकल सेक्युलरिज्म और मॉडर्न एजुकेशन के नाम पर कई ऐसे स्कूल खुल गए हैं, जो बाहर से तो एकदम हाई-फाई कॉन्वेंट या पब्लिक स्कूल लगते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर वहां मदरसों वाला एजेंडा चलाया जा रहा है।

इन स्कूलों के क्लासरूम में ब्लैकबोर्ड पर अब क ख ग घ नहीं, बल्कि किसी और ही मजहब की आयतें थोपी जा रही हैं।

इनका सीधा सा टारगेट ये है की हमारे हिंदू बच्चों का बचपन से ही ऐसा तगड़ा ब्रेनवॉश कर दो की वो बड़े होकर अपने ही सनातन धर्म, अपनी भगवद गीता और हनुमान चालीसा से कट जाएं।

हैदराबाद में जो हुआ है, वो इसी खौफनाक साज़िश का जीता-जागता सबूत है।

24 मुस्लिम बच्चों के बीच अकेला फंसा 7 साल का मासूम हिन्दू बच्चा, जिहादी ‘फरहत सुल्ताना’ का कुरान रटाने वाला वो डरावना ‘होमवर्क’

चलिए आपको सीधा ग्राउंड ज़ीरो यानी हैदराबाद ले चलता हूँ। वहां एक इलाका है मलकपेट, जो चारमीनार ज़ोन के अंदर आता है।

इसी इलाके की सईदाबाद (Sayeedabad) ब्रांच में एक स्कूल है जिसका नाम है- ‘सक्सेस, द स्कूल’ (Success, The School)।

नाम तो ‘सक्सेस’ है, पर अंदर जो खेल चल रहा था, वो किसी भी हिंदू परिवार को बर्बाद करने के लिए काफी है।

जुलाई 2026 के इसी हफ्ते की बात है। इस स्कूल की दूसरी क्लास (Class 2) में एक टीचर पढ़ाती हैं, जो उस क्लास की ‘मदर टीचर’ भी हैं।

इनका नाम फरहत सुल्ताना है (स्कूल के कुछ कागज़ों में इन्हें शेख आयशा परवीन भी कहा गया है)। अब ज़रा इस क्लास का डेमोग्राफिक हिसाब समझिए।

क्लास में टोटल 25 छोटे-छोटे बच्चे पढ़ते हैं। उन 25 में से 24 बच्चे मुस्लिम समुदाय से आते हैं, और सिर्फ एक अकेला 7 साल का मासूम बच्चा हिंदू है।

अब उस कट्टरपंथी मानसिकता वाली टीचर फरहत सुल्ताना ने क्या किया? उसने बिना यह सोचे, बिना यह परवाह किए की क्लास में एक हिंदू बच्चा भी बैठा है, पूरी की पूरी क्लास को मजहबी होमवर्क दे डाला।

उस टीचर ने बाकायदा उस 7 साल के छोटे से हिंदू बच्चे की स्कूल डायरी में अपने हाथ से लिख दिया की कल घर से इस्लामिक ‘कलमा’ और ‘सूरह फातिहा’ (Surah Fatiha) याद करके आना है।

अरे भाई, ज़रा सोचिए उस छोटे से बच्चे के दिमाग पर क्या असर पड़ा होगा! एक 7 साल का बच्चा, जो अपने घर में भगवान राम और कृष्ण की पूजा देखता है, उसे स्कूल में डरा-धमका कर कुरान की आयतें रटने पर मजबूर किया जा रहा है।

एक हिंदू बच्चे पर ये मजहबी आयतें थोपने का ये टॉर्चर कितना भयानक है! ये स्कूल की डायरी में होमवर्क नहीं था, ये उस मासूम के धर्म और उसकी सनातन जड़ों को काटने का सीधा-सीधा फरमान था।

जागरूक परिवार की डायरी में पढ़ गयी नजर और हिंदू संगठनों के खौफनाक तांडव ने निकाल दी स्कूल प्रशासन की हेकड़ी

ये तो शुक्र मनाइए उस मासूम बच्चे के परिवार का, जो आंखें मूंद कर नहीं बैठे थे। जब वो 7 साल का बच्चा छुट्टी के बाद अपने घर पहुंचा, तो उसकी बुआ (सुप्रिया गौड़) ने रोज़ की तरह उसका बैग खोला और स्कूल डायरी चेक करने लगीं।

जैसे ही उनकी नज़र उस दिन के होमवर्क पर पड़ी, उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। डायरी में साफ-साफ अक्षरों में ‘कलमा’ और ‘सूरह फातिहा’ याद करके आने का जेहादी फरमान लिखा हुआ था।

कोई और साधारण ‘सेक्युलर’ हिंदू परिवार होता, तो शायद डर के मारे या “अरे छोड़ो ना, क्या पंगा लेना” सोचकर चुप बैठ जाता।

पर सुप्रिया जी ने वो किया जो हर सच्चे सनातनी को करना चाहिए। उन्होंने तुरंत बच्चे के माता-पिता को ये खौफनाक डायरी दिखाई और पूरा परिवार सीधा स्कूल मैनेजमेंट के सिर पर जा चढ़ा।

जैसे ही ये खबर इलाके में आग की तरह फैली, वहां के लोकल हिंदू संगठनों और हमारे हिंदू शेरों का खून खौल उठा। देखते ही देखते ‘सक्सेस द स्कूल’ के बाहर सैकड़ों की संख्या में हिंदू कार्यकर्ता जमा हो गए।

जब हिंदुओं ने एकजुट होकर अपना खौफनाक तांडव और विरोध प्रदर्शन शुरू किया, तो स्कूल के अंदर बैठे उन जेहादी सोच वाले मैनेजमेंट की हवा टाइट हो गई।

जो प्रशासन पहले अपनी गलती मानने से कतरा रहा था, हिंदुओं की ये दहाड़ सुनकर उनके हाथ-पैर फूल गए। उन्हें समझ आ गया की आज उन्होंने किसी गलत कौम के बच्चे पर हाथ डाल दिया है।

ये कोई पुराना ज़माना नहीं है की तुम हमारे बच्चों का धर्म भ्रष्ट करोगे और हम चुपचाप तमाशा देखेंगे। हिंदू संगठनों की उस ज़बरदस्त बगावत ने स्कूल प्रशासन की सारी हेकड़ी एक झटके में निकाल कर रख दी।

पुलिस के फूले हाथ पांव और नौकरी से लात मारकर निकाली गयी मासूमों के दिमाग में जहर घोलने वाली वो जेहादी टीचर

स्कूल के बाहर का माहौल इतना भयंकर हो गया था की पुलिस प्रशासन को अपनी गाड़ियां दौड़ा कर वहां पहुंचना पड़ा।

जब मामला हद से ज्यादा गरमा गया, तो चारमीनार ज़ोन के डीसीपी (DCP) खरे किरण प्रभाकर को मीडिया के सामने आकर सफाई देनी पड़ी।

डीसीपी साहब को भी मानना पड़ा की एक स्कूल के अंदर किसी बच्चे पर इस तरह धार्मिक आयतें थोपना नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) और सारे कानूनों का सीधा-सीधा उल्लंघन है।

हिंदुओं के इस भारी दबाव और बवाल का ही नतीजा था की ‘सक्सेस ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ को उसी दिन घुटनों पर आना पड़ा।

15 जुलाई 2026 को स्कूल मैनेजमेंट ने एक बाकायदा टर्मिनेशन लेटर निकाला। उस जेहादी सोच वाली टीचर फरहत सुल्ताना (शेख आयशा परवीन) को उसी वक्त लात मारकर नौकरी से निकाल दिया गया।

स्कूल ने लिखित में गारंटी दी की ये टीचर अब कभी भी उनके किसी भी स्कूल या ब्रांच में कदम नहीं रखेगी और उन्होंने परिवार से हाथ जोड़कर माफी भी मांगी।

पर भाई, इस पूरे ड्रामे में हमारे सिस्टम और पुलिस का वो पुराना दोगलापन भी देखने को मिला।

जब स्कूल के बाहर हिंदू संगठन अपने धर्म और एक मासूम बच्चे की रक्षा के लिए आवाज़ उठा रहे थे, तो पुलिस ने ‘शांति व्यवस्था’ का बहाना बनाकर करीब 30 हिंदू कार्यकर्ताओं को ही हिरासत में ले लिया!

मतलब समझ रहे हैं आप? साज़िश वो लोग करें, हमारे बच्चों का ब्रेनवॉश वो लोग करें, और जब हम हिंदू अपने हक के लिए आवाज़ उठाएं, तो पुलिस हमें ही पकड़ कर थाने ले जाए!

ये सेक्युलर सिस्टम का वो कीड़ा है जो सिर्फ और सिर्फ हिंदुओं को काटता है। खैर, परिवार वालों को जब स्कूल की तरफ से लिखित माफी और उस टीचर के निकाले जाने का लेटर मिल गया, तब जाकर मामला थोड़ा शांत हुआ।

कोई गलती नहीं बल्कि ‘अब्दुल गैंग’ की सोची समझी साज़िश ये ‘मानसिक धर्मांतरण’

अब जैसे ही ये मामला खुला, तो सेक्युलर इकोसिस्टम वाले लोग इसे ‘गलती-वलती’ बताकर रफा-दफा करने की कोशिश करने लगे।

कुछ लोग ज्ञान बांटने आ गए की “अरे टीचर से गलती हो गई होगी, उसने ध्यान नहीं दिया होगा की वो बच्चा हिंदू है।”

लेकिन सच तो ये है की ये कोई गलती नहीं है भाई। ये एक बहुत बड़ा और वेल-प्लांड सिंडिकेट है। इसे मानसिक धर्मांतरण (Psychological Conversion) कहते हैं।

जब आप एक छोटे से बच्चे के सबकॉन्शियस माइंड (Subconscious mind) में रोज़-रोज़ किसी दूसरे मजहब की बातें डालते हैं, उसे कलमा पढ़ने को कहते हैं, तो उस बच्चे का दिमाग धीरे-धीरे उसी सांचे में ढलने लगता है।

उस टीचर को बहुत अच्छे से पता था की वो क्या कर रही है। 24 बच्चों की आड़ में उस एक अकेले हिंदू बच्चे को सॉफ्ट टारगेट बनाया गया। ये कोई इकलौती घटना नहीं है।

आज पूरे देश में ऐसे अनगिनत सेक्युलर स्कूल हैं जहाँ छुपकर बैठी ऐसी जेहादी मानसिकता वाली टीचरें हमारे बच्चों को निशाना बना रही हैं।

इनका मकसद एकदम साफ है- भारत की आने वाली पीढ़ी को सनातन विहीन कर दो। अगर बच्चा घर से संस्कार लेकर नहीं निकलेगा, तो स्कूलों में बैठे ये भेड़िए उसे अपना शिकार बना ही लेंगे।

हिंदू माता पिता आज ही खोलें अपनी आंखें, वरना ये शांतिदूत निगल जाएंगे आपकी आने वाली पीढ़ियों को

भाइयों, हैदराबाद की ये घटना कोई छोटी-मोटी न्यूज़ नहीं है। ये हम सब हिंदुओं के लिए खतरे की एक बहुत बड़ी और खौफनाक घंटी है।

अपने बच्चों की ज़िम्मेदारी सिर्फ स्कूलों और ट्यूशन टीचरों के भरोसे मत छोड़िए। रोज़ शाम को जब आपका बच्चा घर आए, तो उसका स्कूल बैग चेक कीजिए।

उसकी डायरी का एक-एक पन्ना छान मारिए। उससे पूछिए की आज टीचर ने क्या पढ़ाया? क्लास में कौन सी बातें हुईं? कहीं कोई मुस्लिम टीचर या कोई मुस्लिम दोस्त उसे अपनी बातों के जाल में फंसा तो नहीं रहा?

अगर आप अपने बच्चों को घर में रामायण और भगवद गीता के संस्कार नहीं देंगे, तो स्कूलों में बैठे ये मजहबी भेड़िए आपके बच्चों को कुरान की आयतें रटा देंगे और आपको भनक तक नहीं लगेगी। हमारा धर्म, हमारी संस्कृति ही हमारी सबसे बड़ी ढाल है।

भारत कोई इस्लामी मुल्क नहीं है और यहाँ के स्कूल कोई मदरसे नहीं हैं जहाँ जेहादी सिलेबस चलाया जाएगा। फरहत सुल्ताना जैसी मानसिकता वाले लोगों को ये साफ-साफ समझ लेना चाहिए की अब हिंदू समाज जाग चुका है।

वो दिन अब गए जब तुम लोग अपना जिहादी एजेंडा चलते थे और किसी को भनक तक नहीं लगती थी, आज हिन्दू समाज डंके की चोट पर तुम्हें ऐसी पटकनी मारेगा की तुम्हारी पुश्तें याद रखेंगी!

जय श्री राम!

Scroll to Top