एक वक्त था जब इस देश के आम आदमी, मिडिल क्लास और युवाओं ने अपनी आंखें बंद करके, अपना सब कुछ दांव पर लगाकर BJP को इस उम्मीद में वोट दिया था की देश में दशकों बाद सच में ‘राम राज्य’ आएगा।
हमने सोचा था की जो सरकार राम का नाम लेकर आई है, वो कम से कम उस आम करदाता और उस युवा के साथ तो गद्दारी नहीं करेगी जिसने झंडे उठाकर और नारे लगाकर इन्हें ज़मीन से उठाकर दिल्ली के तख्त पर बिठाया था।
लेकिन आज क्या हो रहा है? सत्ता की मलाई चाटने के बाद इस सरकार और इनके नेताओं का अहंकार सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। इन नेताओं को अब ज़मीनी हकीकत दिखनी बंद हो गई है।
आज सरकार को कमज़ोर करने के लिए किसी विदेशी दुश्मन या विपक्ष की ज़रूरत नहीं बची है। बीजेपी खुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही है।
चाहे वो रामलला के दरबार में चल रही डकैती हो, NEET-UG परीक्षा दे रहे युवाओं के भविष्य को रद्दी के भाव बेचना हो, या फिर पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर मिडिल क्लास की 10-15 लाख की गाड़ियों का इंजन कबाड़ करना हो, ये सरकार अपने ही गुरूर में अंधी होकर अपनी राजनीतिक कब्र खुद खोद रही है।
और अगर इन्हें लगता है की इनका ये ‘कोर वोटर’ कहीं नहीं जाएगा, तो ये मुगालता बहुत जल्द टूटने वाला है।
अयोध्या में भगवान राम के दरबार में चोरी, सोने के आभूषणों को गलाकर बिस्किट बनाने वाले गद्दार और टपकती छत खोलती सिस्टम की पोल
अगर किसी भी सच्चे रामभक्त से पूछोगे तो वो बताएगा की राम मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, 500 सालों के संघर्ष और हमारे पूर्वजों के बलिदान का प्रतीक है।
इस देश के एक आम रिक्शा चलाने वाले से लेकर एक नौकरीपेशा आदमी ने अपना रामलला के भव्य मंदिर के लिए 10 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक का दान दिया था।
लेकिन मंदिर बनने के बाद क्या हुआ? ‘राम राज्य’ का सपना दिखाने वालों के राज में अयोध्या को दलालों और भ्रष्टाचारियों ने लूट का सबसे बड़ा अड्डा बना दिया।
ज़रा जुलाई 2026 की उस ताज़ा एसआईटी (SIT) रिपोर्ट का वो खौफनाक सच सुन लीजिए जिसने हर हिंदू के सीने पर हथौड़ा मार दिया है।
जांच में सामने आया की मंदिर के दानपात्रों से रोज़ाना 8 लाख रुपये कैश चोरी किया जा रहा था। विदेशी डॉलर्स की बोरियां भरकर लूट हुई।
और सबसे घिनौनी नीचता तो तब सामने आई जब पता चला की जो सोने-चांदी के गहने और आभूषण रामभक्तों ने अपने रामलला को पहनाए थे, उन गहनों को इन गद्दार सेवादारों और गिनती करने वालों ने चुराकर भट्ठियों में गला दिया और उनके ‘सोने के बिस्किट’ बनवा लिए!
क्या यही है तुम्हारा राम राज्य? 40 प्रतिशत कमीशन का वो गंदा खेल, टिन्नू यादव जैसे लोगों की रातों-रात खड़ी हुई करोड़ों की संपत्तियां और 8 लोगों की गिरफ्तारी।
हालात इतने बदतर और शर्मनाक हो गए की राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे बड़े चेहरों को नैतिक ज़िम्मेदारी लेकर इस्तीफा तक देना पड़ गया।
आज एक आम रामभक्त मंदिर में 100 रुपये या सोने का कोई टुकड़ा चढ़ाने से पहले सौ बार सोचता है की उसका पैसा भगवान के पास जाएगा या किसी दलाल की जेब में?
भगवान राम के नाम पर जो ये दलाली खाई गई है, इसका पाप इस सरकार को ऐसा लगेगा की ये सत्ता की सारी हनक भूल जाएंगे।
और ज़रा उस बेशर्मी को देखिए! अयोध्या का वीवीआईपी और सबसे हाई-सिक्योरिटी वाला इलाका, जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां राम पथ और भक्ति पथ से 3800 से ज़्यादा फैंसी बैम्बू लाइटें और 36 गोबो प्रोजेक्टर चोरी हो जाते हैं!
इन लाइटों की कीमत 50 लाख रुपये से ज़्यादा थी। अरे भाई, क्या ये लाइटें कोई माचिस की डिब्बी थीं जो कोई जेब में रखकर ले गया?
बाकायदा ट्रकों में भरकर सरकारी खंभों से लाइटें उतारी गईं और पुलिस सोती रही? ये चोरी नहीं, ये सिस्टम की मिलीभगत से पड़ा हुआ सरेआम डाका है।
लेकिन भ्रष्टाचार का ये कीचड़ सिर्फ सड़कों तक नहीं रुका। पहली ही बारिश में राम मंदिर की छत से पानी टपकने लगा।
जिन नई नवेली सड़कों का उद्घाटन बड़े-बड़े दावों के साथ हुआ था, वो पहली बारिश में ही धंस गईं और पूरे अयोध्या में जलभराव हो गया।
करोड़ों युवाओं के भविष्य की सरेआम नीलामी, पेपर लीक के बाद भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी सलामत रखने का BJP का गुरूर
चलिए, आस्था के साथ तो जो खिलवाड़ हुआ वो हमने देख लिया। अब ज़रा इस देश के उस युवा की बात करते हैं जिसने 2014 और 2019 में रैलियों में पागलों की तरह नारे लगाकर इस सरकार को दिल्ली के तख्त पर बिठाया था।
आज उस युवा के साथ इस बिकाऊ सिस्टम ने क्या किया?
नीट (NEET-UG) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं का जो महाघोटाला हुआ है, उसने इस देश के एजुकेशन सिस्टम को दुनिया भर में एक मज़ाक बनाकर रख दिया है।
एक गरीब और मिडिल क्लास बाप अपने गांव की ज़मीन बेचकर, कर्ज़ा लेकर अपने बेटे-बेटी को कोटा या दिल्ली भेजता है।
वो बच्चा दिन-रात एक 8 बाय 8 के सीलन भरे कमरे में बैठकर दाल-रोटी खाता है और 18-18 घंटे पढ़ाई करता है।
और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बैठे भ्रष्ट बाबू उस बच्चे की सालों की मेहनत को चंद लाख रुपयों में रद्दी के भाव किसी पेपर लीक माफिया को बेच देते हैं!
करोड़ों बच्चों का भविष्य एक झटके में नीलाम कर दिया गया। बच्चे डिप्रेशन में आकर आत्महत्याएं कर रहे हैं, मुंबई के आज़ाद मैदान से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक छात्र सड़कों पर खून के आंसू रो रहे हैं। पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक जैसे लोग अनशन पर बैठ गए हैं।
लेकिन ज़रा इस सरकार का अहंकार देखिए! जब किसी सरकारी दफ्तर में एक मामूली क्लर्क या सिपाही से कोई छोटी सी फाइल गुम हो जाती है, तो उसे तुरंत सस्पेंड कर दिया जाता है।
लेकिन जिस शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की नाक के नीचे देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य जलकर राख हो गया, उस मंत्री से इस्तीफा तक नहीं लिया गया!
प्रधान साहब कैमरे पर आकर बेशर्मी से अपनी ‘गड़बड़ी’ कबूल कर लेते हैं, लेकिन कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ये कैसा VIP गुरूर है भाई?
क्या इस देश का युवा सिर्फ तुम्हारी रैलियों में भीड़ बढ़ाने के लिए पैदा हुआ है? तुम एक मंत्री के अहंकार को बचाने के लिए पूरी की पूरी युवा पीढ़ी को सड़क पर मरने के लिए छोड़ रहे हो।
याद रखना, जिन युवाओं ने तुम्हें आसमान पर बिठाया था, जब उनका सब्र टूटेगा तो वो तुम्हें ज़मीन पर पटकने में एक सेकंड भी नहीं लगाएंगे।
E20 पेट्रोल के नाम पर आम आदमी की जेब पर सरकारी डाका, मिडिल क्लास करदाता को खून के आंसू रुला रही सत्ता की ये मनमानी
अगर आपको लग रहा है की सरकार सिर्फ छात्रों को रुला रही है, तो ज़रा अपने गैराज में खड़ी उस गाड़ी को देख लीजिए जिसे आपने अपनी आधी ज़िंदगी की ईएमआई (EMI) चुकाकर खरीदा है।
सरकार ने एक नया शगूफा छोड़ा- ‘ग्रीन एनर्जी’ और ‘तेल आयात (Crude Oil) का बिल कम करना’। और इसके नाम पर पूरे देश के पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल अनिवार्य कर दिया।
E20 का मतलब है पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल की मिलावट।
सुनने में बहुत अच्छा लगता है की देश का पैसा बचेगा। लेकिन इस ‘सेविंग’ की आड़ में जो आम आदमी की जेब पर सरकारी डाका डाला जा रहा है, उसकी कोई बात नहीं कर रहा।
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और ग्राउंड रिपोर्ट्स चीख-चीख कर कह रही हैं की भारत की सड़कों पर आज भी जो 80 प्रतिशत गाड़ियां दौड़ रही हैं (पुरानी BS4 और शुरुआती BS6), वो E5 या E10 पेट्रोल के लिए डिज़ाइन की गई थीं।
उनका इंजन इस 20 प्रतिशत एथेनॉल को बर्दाश्त ही नहीं कर सकता।
एथेनॉल में पानी सोखने की आदत होती है। ये धीरे-धीरे गाड़ी के रबर के पार्ट्स, फ्यूल लाइन्स और इंजन की प्लास्टिक सील्स को गला कर खत्म कर रहा है।
आज एक आम मिडिल क्लास आदमी अपनी 10-12 लाख की गाड़ी लेकर मैकेनिक के पास जाता है, तो उसे पता चलता है की उसका फ्यूल पंप और इंजेक्टर पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। मैकेनिक सीधा 15,000 से लेकर 35,000 रुपये का बिल थमा देता है!
अरे भाई, तुम अपना कुछ हज़ार करोड़ का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex) बचाने के लिए और एथेनॉल लॉबी से जुड़े बड़े उद्योगपतियों को अमीर बनाने के लिए, आम आदमी की लाखों की गाड़ी का इंजन क्यों तबाह कर रहे हो?
क्या मिडिल क्लास आदमी पेड़ पर पैसे उगाता है? जो आदमी पहले से ही इनकम टैक्स, जीएसटी, टोल टैक्स और रोड टैक्स भर-भरकर कमर तुड़वा चुका है, उसे अब अपनी गाड़ी की बर्बादी का बिल भी खुद ही भरना पड़ेगा?
ये कोई ग्रीन एनर्जी नहीं है, ये सीधे-सीधे दिनदहाड़े जनता का सरेआम चीरहरण है जिसे सरकार बड़े ही लीगल तरीके से पेट्रोल पंपों पर अंजाम दे रही है।
अब ज़रा इस E20 पेट्रोल की उस दूसरी और सबसे खौफनाक डकैती को समझिए, जो सीधे आपकी जेब में सेंध मार रही है।
अगर आपको लग रहा है की आपकी गाड़ी सिर्फ अंदर से खराब हो रही है और आपको पता नहीं चल रहा, तो ज़रा अपनी गाड़ी के मीटर पर नज़र डालिए।
जुलाई 2026 की ताज़ा ग्राउंड रिपोर्ट्स, ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और आम जनता की शिकायतों का पूरा का पूरा कच्चा चिट्ठा आज इंटरनेट पर चीख रहा है।
E20 पेट्रोल डलवाने के बाद पूरे देश की गाड़ियों का माइलेज (Mileage) अचानक से 10 से 15 प्रतिशत तक धड़ाम से नीचे गिर गया है।
जो गाड़ी या बाइक कल तक एक लीटर में 18 या 20 किलोमीटर का माइलेज देती थी, वो अब बमुश्किल 14 या 15 किलोमीटर पर हांफने लगी है।
अरे भाई, ये कोई छोटी बात नहीं है! पेट्रोल आज भी 100 रुपये लीटर के आसपास बिक रहा है। उस 100 रुपये में तुम हमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत सस्ता एथेनॉल (जो गन्ने या मक्के से बनता है) मिलाकर दे रहे हो।
मतलब, सरकार और तेल कंपनियों का खर्चा कम हो रहा है, उनका मुनाफा आसमान छू रहा है, और आम आदमी?
आम आदमी 100 रुपये लीटर का पूरा पैसा देकर कम माइलेज वाली घटिया क्वालिटी का फ्यूल अपनी गाड़ी में डाल रहा है।
इसे डकैती नहीं तो और क्या कहेंगे? तुम अपनी कमाई बढ़ाने के लिए हमारी गाड़ी का इंजन भी कबाड़ कर रहे हो और हमारा माइलेज भी चुरा रहे हो।
और सबसे भयंकर तानाशाही तो ये है की सरकार ने आम आदमी के पास कोई दूसरा विकल्प ही नहीं छोड़ा!
जब तुम्हें पता है की देश की 80 प्रतिशत पुरानी गाड़ियां इस E20 ज़हर को बर्दाश्त नहीं कर सकतीं, तो तुमने पेट्रोल पंपों पर पुराने वाहनों के लिए नॉर्मल पेट्रोल (E0 या E5) का विकल्प क्यों खत्म कर दिया?
आप किसी भी पेट्रोल पंप पर जाइए, वहां आपको सिर्फ और सिर्फ E20 पेट्रोल ही मिलेगा।
मतलब, सरकार ने हमारी कनपटी पर बंदूक रखकर हमें मजबूर कर दिया है की या तो तुम अपनी गाड़ी में ये एथेनॉल वाला ज़हर डालो, या फिर अपनी गाड़ी घर में खड़ी कर दो।
ज़रा सोचिए उस आदमी के बारे में जो अपने बीवी-बच्चों के साथ किसी हाईवे पर जा रहा है और अचानक एथेनॉल की वजह से उसकी गाड़ी का फ्यूल पंप सीज़ हो जाए।
उसे सड़क के बीच में जो ज़लालत झेलनी पड़ेगी, टोइंग वैन का जो हज़ारों का खर्च आएगा और फिर वर्कशॉप में जो 30 हज़ार का बिल बनेगा, क्या सरकार का कोई मंत्री वो बिल भरेगा?
बिल्कुल नहीं! ये सारा का सारा दर्द सिर्फ और सिर्फ उस आम टैक्सपेयर के हिस्से में आएगा जिसे इस सरकार ने पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया है।
AC कमरों में बैठा अंधा सिस्टम और आम मिडिल क्लास को ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ लेने की BJP की ये जानलेवा राजनीतिक भूल
अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि जो पार्टी खुद को देश की सबसे ‘विकासशील’ पार्टी बताती थी, आज वो इतना घमंडी और अंधी कैसे हो गई?
इसका जवाब उन VIP नेताओं की मानसिकता में छुपा है जो दिल्ली के ठंडे एसी कमरों में बैठते हैं और 300 करोड़ के चार्टर्ड प्लेन में सफर करते हैं।
इन बीजेपी नेताओं के दिमाग में एक बहुत ही खतरनाक और जानलेवा अहंकार बैठ गया है।
इन नेताओं को लगता है की “अरे, ये मिडिल क्लास हिंदू वोट कहां जाएगा? उसके पास हमारे अलावा कोई ऑप्शन नहीं है, इसलिए उसे लूटते रहो।”
इसलिए चाहे हम इसकी गाड़ी का इंजन बर्बाद कर दें, चाहे हम इसके बच्चों का पेपर लीक करवा दें, “ये मजबूर होकर वोट तो ‘कमल’ को ही देगा।”
अंग्रेज़ी में इसे कहते हैं- ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ (Taken for Granted)। इन्होंने अपने सबसे वफादार कोर वोटर को अपनी जेब की जागीर समझ लिया है। और यही इनकी सबसे बड़ी राजनीतिक भूल है जो इन्हें ज़मीन पर पटकने वाली है।
इन वीआईपी नेताओं को ज़मीनी हकीकत का रत्ती भर भी अंदाज़ा नहीं है। इन्हें नहीं पता की जब एक आम बाप अपनी बेटी की शादी के लिए बचाए हुए पैसे अपने बेटे की कोचिंग में लगाता है, और फिर खबर आती है की मंत्री जी के विभाग ने पेपर लीक करवा दिया, तो उस बाप के दिल पर क्या गुज़रती है।
इन्हें नहीं पता की जब एक नौजवान अपनी पहली नौकरी से किश्तों पर बाइक निकालता है और वो बाइक एथेनॉल की वजह से बीच सड़क पर बंद पड़ जाती है, तो उस नौजवान की आंखों में कैसा खून उतरता है।
ये सरकार सिर्फ और सिर्फ अपनी पीआर (PR) और इवेंटबाज़ी में मस्त है, जबकि ज़मीन पर इनका कोर वोटर रोज़ खून के आंसू रो रहा है।
अगर वफादार वोटर ने मुंह मोड़ा तो ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा BJP का ये घमंडी किला
लोकतंत्र में सबसे बड़ा भगवान वो वोटर होता है जो बटन दबाकर किसी को राजा बनाता है।
जो झटके इस सरकार को 2024 के लोकसभा चुनावों में लगे थे, अगर इन घमंडी नेताओं को लग रहा है की वो सिर्फ एक इत्तेफाक था, तो ये बहुत बड़े मुगालते में जी रहे हैं। 2024 तो सिर्फ एक ट्रेलर था मेरे भाई।
आज देश का युवा, देश का मिडिल क्लास और वो करोड़ों रामभक्त खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अगर इस सरकार को अपना वजूद बचाना है, अगर इन्हें 2029 में अपनी ज़मानत ज़ब्त होने से रोकनी है, तो इन्हें ज़मीन पर कड़े फैसले लेने ही होंगे।
करोड़ों बच्चों का भविष्य बर्बाद करने वाले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।
उनके इस्तीफे से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं है। जो बच्चे पेपर लीक के डिप्रेशन में फांसी पर झूल गए, उनके मां-बाप को इंसाफ चाहिए।
राम मंदिर में दान की चोरी रोकने के लिए कोई सख्त व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे ये सब दोबारा ना हो। और जिन गद्दारों ने सोने के आभूषणों को गलाकर बिस्किट बनाए हैं, उनकी संपत्तियों पर रातों-रात बुलडोज़र चलना चाहिए।
और आम आदमी की गाड़ियों का कत्ल तुरंत बंद होना चाहिए! पूरे देश के हर एक पेट्रोल पंप पर ‘नॉर्मल पेट्रोल’ (E0 या E5) की सप्लाई की गारंटी दी जाए।
जो अपनी मर्जी से E20 डलवाना चाहे वो डलवाए, लेकिन तुम आम आदमी की कनपटी पर बंदूक रखकर ये E20 एथेनॉल का ज़हर उसे ज़बरदस्ती नहीं बेच सकते।
आज ये सरकार जिस अहंकार के घोड़े पर सवार है, उसे ये नहीं भूलना चाहिए की जिस जनता ने तुम्हें फर्श से उठाकर अर्श पर बिठाया था, वो तुम्हें वापस ज़मीन पर पटकना भी बहुत अच्छी तरह से जानती है।
अगर इस देश के आम आदमी का सब्र टूट गया, अगर उस वफादार वोटर ने एक बार तुम्हारे खिलाफ मुंह मोड़ लिया, तो ये जो तुम्हारा घमंडी किला है ना, ये ताश के पत्तों की तरह ऐसा ढहेगा की तुम्हें राजनीति के नक्शे पर अपना नाम ढूंढने से भी नहीं मिलेगा।
भारत माता की जय!
