कसम से दोस्तों, अगस्त 2026 में कश्मीर से जो तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं ना, उन्हें देखकर किसी भी हिंदुस्तानी का दिल खुश हो जायेगा।
80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न सिर पर है, और श्रीनगर का वो ऐतिहासिक लाल चौक…
हां-हां, वही लाल चौक जो कभी दहशत, पत्थरबाजी और पाकिस्तान परस्तों का सबसे बड़ा अड्डा हुआ करता था, आज वो पूरी तरह से तिरंगे के तीन रंगों में नहाया हुआ है।
जब लाल चौक के घंटाघर पर खड़ी कश्मीरी अवाम के हाथों में लहराता हुआ हमारा तिरंगा दिखता है, तो यकीन मानो, ऐसा लगता है जैसे दशकों तक देश को खून के आंसू रुलाने वाले उन जिहादियों की सरेआम कब्र खुद गई हो।
डल झील से लेकर लाल चौक के घंटाघर तक कश्मीरी बच्चों के हाथों में तिरंगा, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में रंगा कश्मीर
ज़रा सोचो, एक वक्त था जब कश्मीर के अंदर ‘तिरंगा’ शब्द जुबान पर लाना भी किसी गुनाह से कम नहीं माना जाता था।
लाल चौक के उस घंटाघर पर झंडा फहराने की तो छोड़ो, अगर कोई गलती से वहां वन्दे मातरम बोल भी देता, तो ये अलगाववादी और आतंकी ‘खून की नदियां’ बहाने की खुल्लम-खुल्ला धमकियां देने लगते थे।
पाकिस्तान से एक छोटा सा फरमान आता था और पूरे के पूरे कश्मीर में हड़ताल हो जाती थी। दुकानें-वुकानें सब बंद, सड़कों पर सन्नाटा और चौराहों पर खौफ का वो नंगा नाच जो किसी भी आम आदमी की रूह कंपा दे।
लेकिन आज हकीकत क्या है? आज उसी श्रीनगर के पैलेडियम चौक से लेकर रीगल चौक और लाल चौक तक कोई खौफ नहीं, बल्कि देशभक्ति का सैलाब उमड़ रहा है।
आज वहां सिर्फ फौजी नहीं, बल्कि खुद कश्मीर के छोटे-छोटे स्कूली बच्चे, वहां के युवा और आम नागरिक अपने हाथों में तिरंगा थामे सड़कों पर चल रहे हैं।
उनके होठों पर ‘जय हिन्द’ के वो नारे हैं, जो सीधे सीमा पार बैठे आकाओं और हमारे ही देश में बैठे कुछ जयचंदों के कानों के पर्दे फाड़ रहे हैं।
आज ज़रा डल झील का नज़ारा देख लीजिए भाईसाहब! पूरा का पूरा डल लेक तिरंगामय हो चुका है।
और सिर्फ डल झील ही क्यों? सीआरपीएफ (CRPF) की 132वीं बटालियन के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आज कश्मीर के छोटे-छोटे स्कूली बच्चे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत रैलियां निकाल रहे हैं।
उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में SKICC से लेकर बॉटनिकल गार्डन तक जो महारैली निकाली, उसमें हज़ारों कश्मीरियों ने हिस्सा लिया।
कोई ज़बरदस्ती नहीं, कोई डर नहीं! लोग अपने घरों से निकलकर खुद इस तिरंगा यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं।
ये जो नज़ारा है ना, ये कोई रातों-रात हुआ जादू नहीं है। ये उस ‘नए कश्मीर’ की एकदम जीती-जागती तस्वीर है जिसने उन तमाम गद्दारों और विपक्षी दलों के मुँह पे तमाचा मारा है, जो कहते थे की कश्मीर कभी भारत का हिस्सा बन ही नहीं सकता।
राकेट लांचर और AK-47 के साये में फहरता था तिरंगा, लेकिन आज अपने बिलों में छिपने को मजबूर हैं पाकिस्तान परस्त गद्दार
आज जो लोग ठंडी हवा में बैठकर कश्मीर की इस तिरंगा यात्रा के वीडियो देख रहे हैं, उन्हें 90 के दशक का वो काला और खौफनाक इतिहास भी याद कर लेना चाहिए।
इतिहास का वो पन्ना जब 1992 में मुरली मनोहर जोशी और आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जान हथेली पर रखकर उसी लाल चौक पर तिरंगा फहराने की कसम खाई थी।
तब माहौल कैसा था? तब आतंकियों ने खुल्लम-खुल्ला चैलेंज किया था की अगर किसी ने लाल चौक पर झंडा फहराने की जुर्रत की, तो वो ज़िंदा वापस नहीं जाएगा।
उस दिन लाल चौक पर रॉकेट लॉन्चर और AK-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग हो रही थी।
गोलियों की उस बौछार के बीच हमारे नेताओं ने तिरंगा तो फहरा दिया, लेकिन उस वक़्त ये साफ हो गया था की सिस्टम किस कदर आतंकियों के सामने घुटने टेक चुका था।
उसके बाद 2014-15 तक का दौर तो और भी भयानक था। जुमे की नमाज़ खत्म होते ही लाल चौक और आस-पास की सड़कों पर अचानक से सैकड़ों पत्थरबाज़ पैदा हो जाते थे।
हाथों में पत्थर और चेहरे पर नकाब बांधे ये लोग हमारी सीआरपीएफ और पुलिस के जवानों को खून से लथपथ कर देते थे। और सबसे शर्मनाक बात ये थी की इसी भीड़ के बीच पाकिस्तानी झंडे और ISIS के काले झंडे शान से लहराए जाते थे।
यासीन मलिक और सैयद अली शाह गिलानी जैसे खूंखार आतंकी और अलगाववादी नेता पूरे कश्मीर को अपने बाप की जागीर समझते थे। उन्हें लगता था की दिल्ली की सत्ता में बैठे उनके आका उन्हें हमेशा ऐसे ही बचाते रहेंगे।
लेकिन भाई, वक्त का पहिया ऐसा घूमा की आज उन सब की हवा टाइट हो चुकी है! माहौल 180 डिग्री पलट चुका है।
जो खुद को कश्मीर का ठेकेदार समझते थे, जो टीवी पर बैठकर भड़काऊ भाषण देते थे, आज वो या तो दिल्ली की तिहाड़ जेल में चक्की पीस रहे हैं, या फिर ऊपर अपने 72 हूरों वाले ख्वाब पूरे करने पहुँच चुके हैं।
आज के कश्मीर में कोई पत्थर उठाने वाला नहीं बचा है। पत्थरबाजी की जो पूरी की पूरी इंडस्ट्री पूरानी सरकारों के राज में फल-फूल रही थी, उस पर मोदी सरकार के डंडे ने ऐसा ताला जड़ा है की आज कोई सड़क पर निकलने की हिम्मत नहीं करता।
जिन हाथों में कभी दहशतगर्दों ने एके-47 और पत्थर थमाए थे, आज उन्हीं हाथों में तिरंगा लहरा रहा है।
‘तिरंगा उठाने वाला कोई हाथ नहीं बचेगा’ कहने वाली महबूबा मुफ़्ती गैंग के मुंह पर कश्मीरी अवाम का करारा तमाचा
चलिए अब थोड़ा पीछे चलते हैं और उन घमंडी सियासतदानों की बात करते हैं जो खुद को कश्मीर का खुदा समझते थे।
आपको महबूबा मुफ़्ती, फारुख अब्दुल्ला और उनके पीछे दुम हिलाते वामपंथी नेताओं का वो घमंडी बयान तो याद ही होगा!
जब अनुच्छेद 370 को हटाने की सुगबुगाहट हो रही थी, तब इन नेताओं ने खुलेआम हुए कहा था की “अगर कश्मीर से 370 हटाया गया, तो वहां तिरंगा उठाने वाला कोई हाथ नहीं बचेगा!”
ये सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि ये देश की संसद और 140 करोड़ हिंदुस्तानियों को एक खुली धमकी थी।
इनको लगता था की कश्मीर इनकी पुश्तैनी जागीर (बपौती) है। इन्हें लगता था की ये जब चाहेंगे कश्मीर को जला देंगे, जब चाहेंगे बंद करवा देंगे।
लेकिन आज कश्मीर की अवाम ने खुद आगे आकर इन नेताओं के गाल पर ऐसा करारा तमाचा जड़ा है जो इनकी कई पुश्तों को याद रहेगा।
महबूबा मुफ़्ती जी, ज़रा अपनी आंखों से वो चश्मा हटाइए और जाकर लाल चौक पर देखिए! वहां एक-दो नहीं, बल्कि हज़ारों हाथ तिरंगा उठाने के लिए हवा में लहरा रहे हैं।
और मज़े की बात तो ये है की ये वही हाथ हैं जिन्हें आप जैसे नेताओं ने दशकों तक जिहाद की आग में झोंक रखा था।
आज कश्मीर की जनता पूरी तरह से समझ चुकी है की इन अब्दुल्ला और मुफ़्ती परिवारों का असली खेल क्या था।
अवाम को समझ आ गया है की ये नेता सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चों को तो लंदन, अमेरिका और दिल्ली की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटियों में पढ़ाते थे..
उन्हें बड़े-बड़े पैकेज वाली नौकरियां दिलवाते थे, लेकिन जब बात आम कश्मीरी के बच्चे की आती थी, तो उसके हाथों में किताब की जगह पत्थर और बंदूक थमा देते थे।
आम कश्मीरियों के बच्चों को आज़ादी और जिहाद का झुनझुना पकड़ा कर ये ईकोसिस्टम अपनी तिजोरियां भर रहा था।
लेकिन कहते हैं ना की झूठ के पैर नहीं होते। आज अवाम जान चुकी है की उनका असली विकास तिरंगा थामने में है, ना की पाकिस्तानी झंडा लहराने में।
आज जिस शान से कश्मीरी अवाम तिरंगा यात्रा में शामिल हो रही है, उसने इन नेताओं को राजनीतिक रूप से पूरी तरह एक्सपोज़ कर दिया है।
हिन्दुस्तानियों के एक सही वोट ने कैसे तोड़ी आर्टिकल 370 की बेड़ियां, और कश्मीर में हमेशा के लिए लहरा दिया भारत माता का परचम
अब यार सबसे बड़े सवाल पर आते हैं। आखिर ये सब हुआ कैसे? क्या ये आसमान से उतरा कोई चमत्कार था या रातों-रात हुआ कोई जादू? जी नहीं!
ये कोई जादू-टोना नहीं है। ये ताकत है देश के उन करोड़ों सनातनियों और राष्ट्रभक्त हिन्दुस्तानियों के ‘एक सही वोट’ की।
ज़रा सोचिए, अगर आज भी दिल्ली में उसी तुष्टिकरण वाली सरकारों का राज होता, तो क्या लाल चौक पर तिरंगा फहर सकता था? कभी नहीं!
ये सब इसलिए मुमकिन हो पाया क्योंकि देश की पब्लिक ने एकजुट होकर अपना वोट सही जगह डाला।
जब हिंदुस्तानियों ने एक मजबूत और राष्ट्रवादी सरकार (मोदी सरकार) को दिल्ली की गद्दी पर बिठाया, तो उस सरकार ने भी पब्लिक को निराश नहीं किया।
इसी एक वोट की ताकत ने उस मनहूस ‘अनुच्छेद 370’ (Article 370) को जड़ से उखाड़कर मिट्टी में मिला दिया, जो दशकों से कश्मीर पर एक नासूर बनकर बैठा था।
अनुच्छेद 370 कोई मामूली कानून नहीं था भाई, ये वो ज़हरीली बेड़ी थी जिसने कश्मीर को भारत से काट कर रखा हुआ था। इसी 370 की आड़ में अलगाववाद और पत्थरबाज़ी की पूरी की पूरी इंडस्ट्री फल-फूल रही थी।
पाकिस्तान से हवाला के ज़रिए बोरियों में भरकर पैसा आता था और कश्मीर के युवाओं के हाथों में पत्थर थमा दिए जाते थे।
लेकिन मोदी सरकार ने ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की जो नीति अपनाई, उसने इस पूरे जिहादी नेटवर्क की रीढ़ की हड्डी ही तोड़ कर रख दी।
आज जब एनआईए (NIA) की गाड़ियां रात के अंधेरे में रेड मारने निकलती हैं, तो बड़े-बड़े पत्थरबाजों और टेरर फंडर की पैंट गीली हो जाती है।
आज किसी की हिम्मत नहीं है की वो सड़क पर आकर हमारी फौज या पुलिस पर एक कंकड़ भी उछाल दे। सरकार ने साफ संदेश दे दिया है- या तो कानून मानकर रहो, या फिर गोली खाने को तैयार रहो।
और इसी डंडे के खौफ का नतीजा है की जो कल तक पाकिस्तानी झंडे सिलते थे, आज वो खुद बाज़ार से तिरंगा खरीदकर अपनी छतों पर लगा रहे हैं।
सीधी और साफ बात ये है की जो लोग आज भी 90 के दशक वाले कश्मीर का ख्वाब देख रहे हैं, उन्हें अब नींद से जाग जाना चाहिए।
कश्मीर अब पूरी तरह बदल चुका है। और ये लाल चौक पर लहरता हुआ तिरंगा कोई आख़िरी मंज़िल नहीं, बल्कि एक नए हिंदुस्तान की शुरुआत है।
कश्मीर का भूगोल और इतिहास दोनों बदल चुके हैं। अब कश्मीर में कभी कोई ‘बंद’ का फरमान नहीं निकलेगा। अब वहां किसी यासीन मलिक या सैयद अली शाह गिलानी के जहरीले भाषण नहीं गूंजेंगे।
अब अगर वहां कुछ गूंजेगा, तो वो सिर्फ और सिर्फ ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम’ होगा।
कश्मीर हमारा था, हमारा है और अनन्त काल तक हमारा ही रहेगा!
जय हिन्द! जय भारत!
