एक वक्त था जब हमारे देश में लोग सोचते थे की सेना में लड़कियों का क्या काम? ज्यादा से ज्यादा डॉक्टर बन जाएंगी या फिर कोई डेस्क जॉब कर लेंगी।
लेकिन आज का हिंदुस्तान बदल चुका है। अब हमारी बेटियां सिर्फ गणतंत्र दिवस की परेड में कदम-ताल नहीं कर रहीं, बल्कि सीधे फाइटर जेट में बैठकर आसमान से मिसाइल दाग रही है।
क्या आपको पता है की पिछले साल मई के महीने में हमारी सेना ने पाकिस्तान में घुसकर जो भयंकर कोहराम मचाया था, उसके पीछे सिर्फ हमारे मूंछों वाले वीर जवानों का ही हाथ नहीं था?
उस खौफनाक तबाही की स्क्रिप्ट हमारी धाकड़ बेटियों ने भी लिखी थी!
जी हाँ, ‘The Print’ की एक खूफिया रिपोर्ट के मुताबिक ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ में पाकिस्तान में लड़ाकू विमान उड़ा कर वहां आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने वालों में हमारी बेटियां भी शामिल थी!
ऑपरेशन सिंदूर पर खूफिया रिपोर्ट, जब आसमान से काल बनकर उतरीं भारतीय वायुसेना की धाकड़ ‘बेटियां’
अब आते हैं उस महा-ऑपरेशन पर जिसने पाकिस्तान के पूरे डिफेंस सिस्टम का सरेआम जनाज़ा निकाल दिया।
नाम था- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor)। ये पूरे 87 घंटे तक चला एक ऐसा खौफनाक तांडव था, जिसने पाकिस्तानी जनरलों के पसीने छुड़ा दिए थे।
भारतीय वायुसेना (IAF) ने सीधा पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर (PoK) की सरहदों को लांघा और एक-दो नहीं, पूरे 9 खूंखार आतंकी ठिकानों को शमशान में तब्दील कर दिया।
मज़ाक देखिए पाकिस्तान की औकात का! इनके बड़े-बड़े रडार सिस्टम, इनके एयर डिफेंस वाले बस चाय-समोसा ही चबाते रह गए और आसमान से अचानक आग बरसने लगी।
उन्हें भनक तक नहीं लगी की भारत के फाइटर जेट्स कब उनकी खोपड़ी के ऊपर आकर मंडराने लगे।
लेकिन इस पूरे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जो सबसे बड़ा, सबसे ऐतिहासिक और रौंगटे खड़े कर देने वाला सच है, वो हाल ही में सामने आया है।
द प्रिंट (The Print) ने खुलासा किया है की पाकिस्तान पर बमबारी करने वाले इस ‘स्ट्राइक पैकेज’ (Strike Package) में भारतीय वायुसेना की एक महिला ‘फ्लाइट लेफ्टिनेंट’ (Flight Lieutenant) भी शामिल थी!
जी हाँ, बिल्कुल सही सुना आपने। ये कोई ट्रेनिंग मिशन नहीं था। ये असली वॉर-ज़ोन था। दुश्मन का इलाका, जहाँ नीचे से एंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइलें फायर हो सकती थीं।
लेकिन भारत की उस बहादुर बेटी ने परवाह नहीं की। उसने सुखोई (Su-30 MKI) जैसा भारी-भरकम और दुनिया का सबसे खतरनाक फाइटर जेट पाकिस्तान के सीने पर उड़ाया।
सोचिए ज़रा उस मनोवैज्ञानिक हार के बारे में!
पाकिस्तान की फौज और आतंकियों के लिए इससे बड़ी शर्मिंदगी और क्या होगी की जिस देश में वो औरतों को इंसान नहीं समझते, उसी देश की एक लड़की उनके रडार सिस्टम को धता बताते हुए, उनके सिर के ऊपर फाइटर जेट नचा रही थी और नीचे मिसाइलें दागकर उनके आतंकियों की कब्र खोद रही थी!
हाफिज सईद के ‘मुरीदके’ और जैश के ‘बहावलपुर’ को कैसे हमारी शेरनी ने पल भर में बना दिया आतंकियों का शमशान घाट
चलिए अब आपको बताते हैं की हमारी इस शेरनी ने पाकिस्तान में घुसकर आखिर तबाही कहाँ मचाई थी! 9 टारगेट थे, लेकिन इनमें से दो टारगेट ऐसे थे जिनका नाम सुनते ही जिहादियों की रूह कांप जाती है।
पहला टारगेट था- मुरीदके (Muridke)। मुरीदके भारत के सबसे बड़े दुश्मन, 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और दुनिया के मोस्ट वांटेड आतंकी हाफ़िज़ सईद का गढ़ है।
यहीं पर ‘लश्कर-ए-तैयबा’ (Lashkar-e-Taiba) का असली हेडक्वार्टर है। मुरीदके वो जगह है जहाँ ब्रेनवाशिंग की फैक्ट्री चलती है।
छोटे-छोटे बच्चों के दिमाग में ज़हर भरा जाता है और उन्हें भारत के खिलाफ जिहाद करने के लिए आतंकी बनाया जाता है। लश्कर का पूरा ऑर्गेनाइज़ेशनल और वैचारिक इंफ्रास्ट्रक्चर इसी मुरीदके में बसा हुआ है।
और दूसरा सबसे बड़ा टारगेट था- बहावलपुर (Bahawalpur)। ये वो इलाका है जो ‘जैश-ए-मोहम्मद’ का गढ़ माना जाता है। वही जैश जिसने पुलवामा से लेकर संसद भवन तक हमारे देश में खून-खराबा किया।
हाफ़िज़ सईद, जो दाढ़ी खुजाते हुए भारत को मिटाने की कसमें खाता है, जिसने करोड़ों डॉलर लगाकर अपनी ये टेरर फैक्ट्री खड़ी की थी… उसकी वो पूरी की पूरी इमारत, उसका वो पूरा गुरूर कैसे मिट्टी में मिल गया..
आसमान में हजारों फ़ीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए, एक 20-25 साल की भारतीय लड़की ने अपने कॉकपिट में एक बटन दबाया… और नीचे मुरीदके में हाफ़िज़ सईद का वो सारा इंफ्रास्ट्रक्चर एक ही झटके में राख के ढेर में तब्दील हो गया!
जो जिहादी जहन्नुम में हूरों के सपने देखते हैं, उन्हें सीधा जहन्नुम भेजने का टिकट भी भारत की एक नारी ने ही काट कर दिया।
मुरीदके और बहावलपुर के जिन इमारतों में बैठकर ये भारत की बर्बादी के प्लान बनाते थे, आज वो जगह मलबे और कंकालों का शमशान घाट बन चुकी है।
इससे बड़ी बेइज़्ज़ती, इससे बड़ी हार एक आतंकी संगठन के लिए और क्या हो सकती है? जो आतंकी औरतों की कोई इज़्ज़त ही नहीं करते हैं, आज उन्हीं की मौत आसमान से उतरने वाली एक भारतीय नारी के हाथों लिखी जा रही है।
भारी-भरकम सुखोई और राफेल जैसे अचूक फाइटर जेट उड़ा कर दुश्मनों को छलनी कर रही हमारी शेरनियां
अब ज़रा उन हथियारों का भौकाल भी जान लीजिए जिन्हें उड़ाकर भारत की इन बेटियों ने पाकिस्तान के चिथड़े उड़ाए हैं।
बहुत से लोगों को शायद लगता होगा की महिला पायलट हैं, तो कोई छोटा-मोटा ट्रेनिंग वाला जहाज़ उड़ा रही होंगी या फिर पीछे बैठकर कोई सपोर्टिंग रोल कर रही होंगी।
अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अपनी गलतफहमी तुरंत दूर कर लीजिए!
हमारी ये शेरनियां कोई खिलौने नहीं उड़ा रहीं। ये रूस से आए भारी-भरकम, आसमान के बाहुबली ‘Su-30 MKI’ (सुखोई) और फ्रांस के सबसे आधुनिक और खूंखार फाइटर जेट ‘Rafale’ (राफेल) उड़ा रही हैं।
ये वो फाइटर जेट्स हैं जिनकी गर्जना सुनकर ही दुश्मन के पसीने छूट जाते हैं। ये इंडियन एयरफोर्स (IAF) की सबसे पहली और सबसे घातक लाइन (Frontline Combat Aircraft) हैं।
मतलब जब भी कोई जंग होगी या पाकिस्तान पर पहला वार करना होगा, तो सबसे पहले यही फाइटर जेट्स सरहद पार जाएंगे। और आज इन्हीं जेट्स के कॉकपिट में भारत की बेटियां बैठी हैं।
ज़रा सोचिए, एक सुखोई जेट जो आवाज़ की गति से भी तेज़ उड़ता है, जिसमें हथियारों का पूरा का पूरा जखीरा लदा होता है… उसे फुल स्पीड में उड़ाते हुए दुश्मन के रडार से बचना और फिर एकदम सटीक निशाना लगाना!
यह कोई बच्चों का खेल नहीं है। इसके लिए फौलाद का जिगर और बर्फ जैसा ठंडा दिमाग चाहिए, जो हमारी इन शेरनियों ने साबित कर दिया है।
अब बात करते हैं मिसाइलों की। ऑपरेशन सिंदूर में इन फाइटर जेट्स से जो मिसाइलें पाकिस्तान के 9 ठिकानों पर दागी गईं, उनका नाम सुनकर ही जिहादियों का हलक सूख जाता है।
वायुसेना ने इसमें इज़राइल से आई ‘रैम्पेज’ (Rampage) एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल और दुनिया की सबसे खतरनाक ‘ब्रह्मोस’ (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों का इस्तेमाल किया था।
ब्रह्मोस की ताकत तो पूरी दुनिया जानती है! ये मैक-3 (Mach 3) यानी आवाज़ की रफ़्तार से तीन गुना तेज़ी से दुश्मन पर झपटती है।
दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इसे हवा में रोक ही नहीं सकता। जब तक पाकिस्तानियों को रडार पर कुछ दिखा होगा, तब तक तो ब्रह्मोस ने हाफ़िज़ सईद के आतंकियों की हड्डियों का चूरमा बना दिया होगा।
रैम्पेज मिसाइल भी कोई कम नहीं है, ये सीधे बंकरों और मोटी कंक्रीट की दीवारों को चीरकर अंदर घुसती है और फिर फटती है।
सबसे मज़ेदार बात तो ये है की मुरीदके में लश्कर के हेडक्वार्टर पर भारत ने कौन सा हथियार गिराया, इसे वायुसेना ने आज तक ‘सीक्रेट’ (Classified) रखा है।
द प्रिंट की रिपोर्ट बताती है की पाकिस्तानी फौज और उनके इंजीनियर आज भी उस मलबे में सुराग ढूंढ रहे हैं।
वो मलबे के टुकड़े जोड़-जोड़ कर ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं की आखिर भारत की छोरियों ने उन्हें किस मिसाइल से ठोका था!
लेकिन हमारी वायुसेना भी पूरी खिलाड़ी है, उन्हें बस राख और धुआं छोड़कर तड़पने के लिए छोड़ दिया गया है।
फाइटर जेट उड़ाने से लेकर बटन दबाकर मिसाइल दागने तक, अब पुरुष और महिला पायलटों में कोई फर्क नहीं
एक और बहुत बड़ा खुलासा जो इस रिपोर्ट में हुआ है, वो ये है की इस 87 घंटे चले ऑपरेशन सिंदूर में सिर्फ एक महिला पायलट शामिल नहीं थी।
सरहद पार पाकिस्तान से लोहा लेने वाले इस ‘स्ट्राइक पैकेज’ में और भी महिला फाइटर पायलट शामिल थीं।
और ये शेरनियां सिर्फ फाइटर जेट को उड़ा ही नहीं रही थीं, बल्कि कई महिला अफ़सरों ने इसमें ‘WSO’ (Weapon System Operator) का खौफनाक रोल निभाया है।
अब ये WSO क्या होता है, ये भी जान लीजिए। सुखोई जैसे दो-सीटर (Two-seater) फाइटर जेट में एक पायलट आगे बैठता है जो जहाज़ उड़ाता है, और पीछे बैठता है विपन सिस्टम ऑपरेटर (WSO)।
दोस्तों ये पीछे बैठा ऑपरेटर ही असली ‘शूटर’ होता है। दुश्मन के ठिकानों को रडार पर खोजना, उन पर लेज़र से निशाना लॉक करना, और फिर सही वक्त आने पर मिसाइल का वो लाल बटन दबाना… ये सब काम WSO का होता है।
मतलब समझ रहे हैं आप? पाकिस्तान के अंदर घुसकर मुरीदके और बहावलपुर के ठिकानों पर निशाना लगाकर मिसाइल का जो बटन दबाया गया, वो बटन भी भारत की एक बेटी की उंगली ने ही दबाया था!
इसके बाद भी अगर किसी जिहादी को लगता है की औरतें कमज़ोर होती हैं, तो उसे अपना इलाज किसी अच्छे डॉक्टर से करवा लेना चाहिए।
इस ऐतिहासिक ऑपरेशन ने भारतीय वायुसेना के अंदर एक बहुत बड़ा और कड़क मैसेज दे दिया है। अब एयरफोर्स के अंदर कोई ‘मेल’ (Male) या ‘फीमेल’ (Female) नहीं होता।
एक बार जब आप फाइटर स्ट्रीम (Fighter Stream) में आ गए, तो आप सिर्फ और सिर्फ एक “फाइटर पायलट” हैं।
आपकी ट्रेनिंग एक जैसी है, आपके खतरे एक जैसे हैं, और जंग के मैदान में आपका काम भी एक जैसा ही है। अब कोई जेंडर का फर्क नहीं बचा है।
ज़रा इतिहास के पन्नों को पलटिए। साल 2015-16 की बात है, जब भारत सरकार और वायुसेना ने पहली बार महिलाओं को फाइटर स्ट्रीम में शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था।
उस समय भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह पहली 3 महिला फाइटर पायलट बनी थीं।
उस वक़्त हमारे ही देश में कई ऐसे ‘ज्ञानी’ और सोफे पर बैठने वाले डिफेंस एक्सपर्ट थे जो टीवी डिबेट्स में ज्ञान देते थे- “अरे, औरतें कैसे कॉम्बैट (Combat) का स्ट्रेस झेल पाएंगी? क्या वो जंग के मैदान में जा सकेंगी? क्या हम उन्हें ऐसे खतरनाक मिशन पर भेज सकते हैं?”
उन सालों-साल चली फालतू की बहसों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने हमेशा के लिए एक ज़ोरदार तमाचा जड़ दिया है।
इस ऑपरेशन ने साबित कर दिया है की महिला पायलट्स को अब कोई ‘सिंबॉलिक’ (दिखावे का) रोल नहीं दिया जा रहा है।
वो महज़ अख़बारों में छपने या गणतंत्र दिवस की परेड का हिस्सा बनने के लिए नहीं हैं। उन्हें भारत के सबसे मुश्किल, सबसे डिमांडिंग और सबसे खौफनाक फ्रंटलाइन कॉम्बैट मिशन्स पर भेजा जा रहा है।
और वो न सिर्फ जा रही हैं, बल्कि दुश्मन पर कामयाबी का झंडा गाड़ कर वापस भी आ रही हैं!
पाकिस्तान आज तक सदमे में है की आखिर ये तबाही मचाने वाली भारत की वो सीक्रेट महिला पायलट कौन है
अब ज़रा इस पूरी कहानी का वो हिस्सा सुनिए, जो किसी हॉलीवुड या बॉलीवुड की सस्पेंस थ्रिलर फिल्म से भी ज्यादा खतरनाक है।
ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिए हुए एक साल बीत चूका है, लेकिन पाकिस्तान की फौज और ISI आज तक इसी सदमे में जी रही है की आखिर वो कौन सी भारत की बेटी थी, जिसने उनके एयर स्पेस में घुसकर उनकी धज्जियां उड़ा दीं।
हाल ही में जब इस पूरे ऑपरेशन पर ‘डिक्लासिफाइड ऑपरेशन सिंदूर’ (Declassified Operation Sindoor) नाम की एक धाकड़ डॉक्युमेंट्री रिलीज़ हुई, तो उसमें भी एक बहुत बड़ा राज़ बरकरार रखा गया।
इस डॉक्युमेंट्री में उस वीर महिला पायलट को दिखाया तो गया, लेकिन उसका चेहरा पूरी तरह से ब्लर (Blur) कर दिया गया था। उसकी पहचान, उसका नाम, उसका बैच… सब कुछ एक ‘टॉप सीक्रेट’ (Top Secret) रखा गया है।
अब आप सोचेंगे की ऐसा क्यों? भाई ये हमारी सेना का सुरक्षा प्रोटोकॉल है। हमारी वायुसेना अपनी इस शेरनी को पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा के स्लीपर सेल्स से बचाकर रखना चाहती है, ताकि कोई आतंकी संगठन बौखलाहट में उसे अपना टारगेट न बना सके।
लेकिन ज़रा इस छुपी हुई पहचान के साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट के बारे में सोचिए। जब दुश्मन को पता ही न हो की उसे मारने वाला कौन है, तो खौफ दस गुना बढ़ जाता है।
आज पाकिस्तान का हर वो आतंकी, हर वो जिहादी जो भारत के खिलाफ साज़िश रचता है, जब भी आसमान में किसी जेट की गड़गड़ाहट सुनता होगा, तो उसका कलेजा मुंह को आ जाता होगा।
वो आसमान की तरफ देखकर यही सोचता होगा की पता नहीं आज भारत की कौन सी ‘अज्ञात’ बेटी उन पर काल बनकर टूट पड़े।
ये खौफ बहुत ज़रूरी है! हाफ़िज़ सईद और उसके आतंकियों को ये पता ही नहीं है की उनके करोड़ों के इंफ्रास्ट्रक्चर को राख में मिलाने वाली वो लड़की दिखती कैसी है।
वो उनके लिए एक अदृश्य खौफ बन चुकी है, एक ऐसा साया जो कभी भी लौट कर आ सकता है। यही वजह है की आज भारत की इन बेटियों को दुनिया भर की सेनाएं सलाम ठोक रही हैं।
ये अब महज़ पोस्टरों या अख़बारों की हेडलाइन का हिस्सा नहीं हैं। ये रात के घुप अंधेरे में दुश्मन के रडार को चकमा देकर, सीमा पार जाकर बम गिराने वाली हमारी असली और खूंखार ‘फ्रंटलाइन वॉरियर’ बन चुकी हैं।
अब दुश्मन की खैर नहीं, क्योंकि नए भारत की महाकाली घर में घुसकर आतंकियों का कर रही समूल नाश
सीधी सी बात है दोस्त, अब वो पुराने वाला भारत नहीं रहा जो आतंकियों के हमले के बाद रोता था, यूएन (UN) में जाकर शिकायत करता था या पाकिस्तान को सबूतों के ‘डोज़ियर’ सौंपता था।
ये नया हिंदुस्तान है! ये आपको सबूत नहीं देता, ये सीधा आपके घर में ब्रह्मोस मिसाइल भेजता है। और सबसे बड़ी बात, अब आपके घर में घुसकर आपको मारने के लिए हमारे बब्बर शेरों के साथ-साथ हमारी शेरनियां भी मैदान में उतर चुकी हैं।
अगर हम अपने सनातन धर्म और अपनी संस्कृति की बात करें, तो हमारे यहाँ नारी को कभी अबला नहीं माना गया। हमारे यहाँ नारी ‘शक्ति’ का प्रतीक है।
हमारे वेदों और पुराणों में साफ लिखा है की जब-जब धरती पर महिषासुर और चंड-मुंड जैसे राक्षसों (आज के आतंकियों) का आतंक और अत्याचार बढ़ा है, तब-तब भगवान को भी पीछे हटना पड़ा है और साक्षात चंडी और महाकाली को ही अवतार लेकर मैदान में उतरना पड़ा है।
आज का दौर भी कुछ ऐसा ही है। बस फर्क सिर्फ इतना है की आज की महाकाली शेर की सवारी नहीं करती, वो 2500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ने वाले ‘सुखोई’ और ‘राफेल’ की सवारी करती है।
आज की चंडी के हाथ में तलवार या त्रिशूल नहीं है, बल्कि उसके हाथ में वो लाल रंग का बटन है जिसे दबाते ही सीधे ‘रैम्पेज’ और ‘ब्रह्मोस’ मिसाइलें राक्षसों के ठिकानों पर मौत बनकर बरसती हैं।
ये वो नया भारत है, जहाँ की बेटियां अपने हाथों में चूड़ियां भी पहनती हैं और उसी हाथ से फाइटर जेट उड़ाकर दुश्मन के घर को शमशान घाट भी बना देती हैं।
जय हिन्द! भारतीय सेना ज़िंदाबाद!
