आजकल जो देश में चल रहा है ना दोस्तों, उसे देखकर किसी भी सच्चे हिंदुस्तानी जो अपने देश की संस्कृति से प्यार करता है, उसका खून खौल उठेगा।
हमने वो दौर देखा है जब 2014 में पूरे देश ने एक सुर में, एक ऐसी सरकार को गद्दी पर बिठाया था, जिससे हमें उम्मीद थी की अब कम से कम हमारे धर्म और हमारी संस्कृति के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर पाएगा।
लेकिन आज क्या हो रहा है? जिस सिस्टम पर हमें सबसे ज्यादा भरोसा था, आज वही सिस्टम हमारे देवी-देवताओं का सरेआम अपमान होते हुए चुपचाप तमाशा देख रहा है।
एक तरफ हिंदू देवी-देवताओं को सरेआम गंदी-गंदी गालियां बकी जा रही हैं, और दूसरी तरफ गालियां देने वाले पूरी आजादी के साथ बेखौफ खुले घूम रहे हैं।
क्या हमारे देश का कानून सिर्फ SC/ST ऐक्ट लगाकर जनरल और OBC वर्ग का गला घोंटने के लिए ही बचा है?
नवरात्रि में 9 दिन का व्रत रखने वाले मोदी जी के सिस्टम में सरेआम तार-तार हो रही माँ भवानी की प्रतिष्ठा
ज़रा सोचकर देखिए… हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पूरी दुनिया में डंके की चोट पर खुद को माँ शक्ति का, माँ दुर्गा का परम आराधक बताते हैं।
जब नवरात्रि आती है, तो प्रधानमंत्री जी पूरे 9 दिन तक सिर्फ पानी पीकर व्रत रखते हैं। उनकी दुर्गा भक्ति देखकर हर हिंदू प्रेरित होता है।
लेकिन मोदी जी, आप तो व्रत रखकर बैठे हैं, और ठीक आपकी नाक के नीचे, आपकी अपनी दिल्ली पुलिस के सामने आपकी उसी आराध्य माँ भवानी को सरेआम ‘वैश्या’ जैसी भद्दी गालियां दी जा रही हैं! और आपका पूरा का पूरा सिस्टम कुंभकर्णी नींद सो रहा है?
जिस सरकार को इसी जनरल और ओबीसी समाज ने अपना खून-पसीना एक करके सत्ता के शिखर तक पहुंचाया, आज उसी सरकार के राज में हमारी आस्था कौड़ियों के भाव नीलाम हो रही है।
हमें लगता था की चलो राम मंदिर बन गया, अब सब ठीक हो जाएगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत तो ये है की आज किसी भी ऐरे-गैरे नत्थू खैरे की हिम्मत इतनी बढ़ गई है की वो जब चाहे हमारे भगवानों पर कीचड़ उछाल देता है और पुलिस एफआईआर (FIR) तक दर्ज़ करने में सदियों लगा देती है।
खुद को ‘अंबेडकरवादी’ कहने वाली 15 साल की लड़की ‘निशु आजाद’ ने सरेआम दी ‘माँ दुर्गा’ को गंदी गालियां

अब आते हैं इस पूरे विवाद की जड़ पर। ये कोई रातों-रात हुआ बवाल नहीं है, बल्कि एक बहुत ही गहरी और सुनियोजित वामपंथी साज़िश का हिस्सा है।
आपको वो ‘जंतर-मंतर’ प्रोटेस्ट तो याद ही होगा? उसी प्रोटेस्ट के दौरान एक निशु आजाद (Nishu Azad) नाम की लड़की खूब उछल-कूद मचा रही थी।
उम्र महज़ 15 साल, लेकिन खुद को बहुत बड़ी ‘अंबेडकरवादी’ (Ambedkarite) एक्टिविस्ट बताती है।
बवाल तब मचा जब इस निशु आजाद के X (Twitter) अकाउंट (@Nishuazad11) के पुराने और नए पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे।
भाईसाहब, उन ट्वीट्स में जो लिखा था, उसे कोई भी आम इंसान अपने मुंह से बोल तक नहीं सकता। माँ दुर्गा, माँ सरस्वती, भगवान शिव और श्री कृष्ण को लेकर ऐसी नीच और घृणित गालियां लिखी गई थीं की पढ़ने वाले का दिमाग गुस्से से भन्ना जाये।
एक ट्वीट में तो माँ दुर्गा के लिए खुलेआम ‘वैश्या’ जैसे घिनौने शब्द का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा जनरल-ओबीसी जातियों और हमारे वैदिक धर्म को लेकर जो ज़हर उगला गया, वो सीधा-सीधा बहुसंख्यक समाज को दंगे के लिए भड़काने की साज़िश थी।
अब आप कहेंगे की एक 15 साल की बच्ची के दिमाग में इतना भयानक ज़हर कहाँ से आया? इसके पीछे बैठे मास्टरमाइंड्स बहुत शातिर हैं।
इन्होंने जानबूझकर एक ‘दलित’ और ‘नाबालिग’ लड़की को अपना मोहरा बनाया है। उन्हें अच्छे से पता है की अगर कोई बड़ा आदमी ये सब करेगा तो पब्लिक उसे छोड़ने वाली नहीं।
लेकिन जैसे ही 15 साल की एक दलित बच्ची ये गालियां देगी, तो पूरा का पूरा लिबरल इकोसिस्टम ‘विक्टिम कार्ड’ लेकर मैदान में उतर आएगा। वो चिल्लाने लगेंगे की “देखो-देखो, एक छोटी सी नादान दलित बच्ची को बहुसंख्यक समाज कैसे डरा रहा है!”
मतलब तुम्हारा पूरा हक़ है की तुम हमारे भगवानों को सरेआम गालियां बको, लेकिन हम अगर अपना विरोध भी दर्ज़ कराएं तो तुम तुरंत ‘दलित और नाबालिग’ होने की ढाल के पीछे छिप जाओ?
गालियां देने वालों को खुली आजादी और उसी लड़की के खिलाफ विरोध करने वाले ‘स्वतंत्र भारद्वाज’ पर तुरंत ठोक दिया गया SC/ST एक्ट
और अब सुनिए इस पूरे केस का वो सबसे काला और भयानक सच, जो सीधे तौर पर देश की न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर देता है।
एक तरफ निशु आजाद महीनों तक ट्विटर पर हिंदू धर्म को सरेआम गालियां देती रही और दिल्ली पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
पुलिस को इस बात का कोई संज्ञान नहीं लेना था की इससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
और दूसरी तरफ उसी पुराने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में क्या होता है? निशु आजाद के पिता संजय आजाद (संजय कुमार) का एक हिंदू इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर ‘स्वतंत्र भारद्वाज’ से आमना-सामना हो जाता है। वहां दोनों के बीच कुछ तीखी बहस और हाथापाई हो जाती है।
अब देखो हमारे देश के सिस्टम की बिजली कैसे गिरती है! जैसे ही स्वतंत्र भारद्वाज से विवाद का पूरा मामला सामने आता है, दिल्ली पुलिस एकदम से रॉकेट की स्पीड में एक्टिव हो जाती है।
वही पुलिस जो देवी-देवताओं की गालियों पर आँखों में पट्टी डाली हुई थी, वो रातों-रात एक्शन मोड में आती है और स्वतंत्र भारद्वाज को ऐसे अरेस्ट करती है जैसे वो कोई दाऊद इब्राहिम हो!
और बात सिर्फ गिरफ्तारी तक नहीं रुकी भाई। स्वतंत्र भारद्वाज पर बिना किसी ठोस जांच के तुरंत SC/ST Act और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) जैसी भयंकर और गैर-जमानती धाराएं थोप दी जाती हैं।
ये देखकर तो किसी का भी दिमाग सुन्न पड़ जाएगा! मतलब जंतर-मंतर पर खड़े होकर पूरे हिंदू धर्म, माँ दुर्गा और शिव जी को गालियां देने वाली लड़की और उसके पिता को तो पुलिस VIP ट्रीटमेंट देती है, लेकिन जो युवा अपने धर्म की रक्षा के लिए आवाज़ उठाता है, उस पर तुरंत SC/ST एक्ट का फंदा कस दिया जाता है!
यही तो वो सबसे बड़ा सवाल है जो आज देश का बहुसंख्यक जनरल और OBC वर्ग पूछ रहा है- क्या इस देश का कानून, ये एससी-एसटी एक्ट सिर्फ हमें डराने, हमें कुचलने और हमारी आवाज़ को खामोश करने के लिए बनाया गया है?
क्या हमारे वोट से बनी सरकार में हमारे लिए न्याय का मतलब सिर्फ झूठे मुकदमों में जेल के अंदर सड़ना रह गया है?
महीनों तक कुंभकर्णी नींद सोती रही दिल्ली पुलिस और भारी बवाल के बाद वकील अमिता सचदेवा ने ठोकी FIR
एक तरफ स्वतंत्र भारद्वाज को चुटकी बजाते ही जेल में ठूंस दिया गया, लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
ये हमारे देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है भाई की जब किसी हिंदू देवी-देवता का सरेआम अपमान होता है, तो हमें एफआईआर (FIR) दर्ज करवाने के लिए भी हफ्तों तक सोशल मीडिया पर चिल्लाना पड़ता है, ट्रेंड चलाने पड़ते हैं और सड़कों पर न्याय की भीख मांगनी पड़ती है।
अगर यही बात किसी और ‘शांतिप्रिय’ मजहब के बारे में कही गई होती ना, तो अब तक पूरे शहर में आग लगा दी गई होती और पुलिस रातों-रात एक्शन ले चुकी होती!
लेकिन सनातनी समाज भी अब हार मानने वाला नहीं है। जब दिल्ली पुलिस ने खुद से कोई एक्शन नहीं लिया, तब 5 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जानी-मानी वकील अमिता सचदेवा और उनके साथी अनुराग गुप्ता ने मोर्चा संभाला।
वकील अमिता सचदेवा ने बकायदा पहले उस लड़की को वार्निंग दी, उसे वो भद्दे और नीच पोस्ट डिलीट करने का मौका दिया।
लेकिन जब नफरत का जहर दिमाग में इतना गहरा भर चुका हो, तो इंसान को अपनी गलती कहां नजर आती है? निशु आजाद और उसके पिता की अकड़ कम नहीं हुई।
तब जाकर अमिता सचदेवा ने नई दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में इन लोगों को घसीटा। सोशल मीडिया पर करोड़ों हिंदुओं का गुस्सा इतना भयंकर उबल रहा था की आखिरकार दिल्ली पुलिस को झुकना ही पड़ा।
5 सितंबर 2026 को भारी दबाव के बीच दिल्ली पुलिस ने निशु आजाद और उसके पिता संजय आजाद (संजय कुमार) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
ये कोई छोटी-मोटी एफआईआर नहीं है! इसमें नए कानून BNS (भारतीय न्याय संहिता) की ‘धारा 299’ (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और ‘धारा 196’ (धर्म, जाति आदि के आधार पर दो समूहों के बीच दुश्मनी पैदा करना) लगाई गई है।
अब आप पूछेंगे की इसमें पिता का नाम क्यों डाला गया? वो इसलिए क्योंकि निशु नाबालिग है और पुलिस को शक है की एक 15 साल की बच्ची के पास इतना जहर उगलने वाला दिमाग नहीं हो सकता, उसका X (ट्विटर) अकाउंट कोई और नहीं बल्कि खुद उसके पिता या उनके इकोसिस्टम के लोग हैंडल कर रहे हैं।
“जो भगवान को नहीं छोड़ सकती, वो हमें क्या छोड़ेगी!” निशु आज़ाद के खिलाफ फूटा सोसाइटी वालों का गुस्सा
Locals want Nishu Azad and her family to vacate the rented house and leave their area ASAP, claiming that her presence is negatively influencing their children. They simply don’t want their children to grow up like her.
And these locals include Dalits themselves.
Even they… pic.twitter.com/A3lgYYyvzb
— Mr Sinha (@Mrsinha) September 7, 2026
भले ही एक ख़ास ईकोसिस्टम इस 15 साल की लड़की को ‘मासूम’ बताकर बचाने में लगा हो, लेकिन खुद निशु आज़ाद की सोसाइटी वालों (जिसमे जनरल, OBC समाज के लोग शामिल हैं) ने अब इसके खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।
निशु के पड़ोसियों और सोसाइटी की महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों ने दो टूक अल्टीमेटम दे दिया है- “यहाँ हिंदू विरोधियों के लिए कोई जगह नहीं है, तुरंत घर खाली करो!”
सोसाइटी की महिलाओं का साफ कहना है की जो लड़की अपने भगवानों को नहीं छोड़ सकती, प्रधानमंत्री और माँ दुर्गा को इतनी गंदी गालियां दे सकती है, वो हम आम इंसानों का क्या सम्मान करेगी?
सोसाइटी के आदमियों और बुजुर्गों ने भी कड़े शब्दों में ऐलान कर दिया है कि इन लोगों की वजह से पूरी सोसाइटी बहुत असहज और असुरक्षित महसूस कर रही है। लोगों ने सीधा अल्टीमेटम दे दिया है की प्रशासन ऐसे “गंदे लोगों” को तुरंत यहाँ से धक्के मारकर बाहर निकाले ताकि सोसाइटी में ‘स्वच्छता’ और शांति बनी रहे।
पड़ोसियों को सबसे बड़ा डर अपने टीनएजर बच्चों को लेकर है। उनका कहना है की 14 साल की यह ‘डेंजरस’ लड़की पूरी सोसाइटी का माहौल और बच्चों का भविष्य बिगाड़ रही है।
